ईरान का परमाणु कार्यक्रम टला जरूर, खतरा बरकरार : आईएईए प्रमुख
वॉशिंगटन, 22 मार्च (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था के अनुसार, ईरान के परमाणु बुनियादी ढांचे को भारी सैन्य नुकसान पहुंचने के बावजूद, मुख्य खतरे अब भी बने हुए हैं। इनमें समृद्ध यूरेनियम का भंडार और देश की अपने कार्यक्रम को फिर से शुरू करने की क्षमता शामिल है।
अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने रविवार को सीबीएस न्यूज के कार्यक्रम फेस द नेशन विद मार्गरेट ब्रेनन में दिए गए साक्षात्कार में कहा कि चल रहे संघर्ष ने कार्यक्रम को काफी हद तक पीछे धकेल दिया है, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि इसके महत्वपूर्ण हिस्से बने रहेंगे।
ग्रॉसी ने कहा, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि इससे कार्यक्रम काफी हद तक पीछे चला गया है।
उन्होंने कहा, संघर्ष खत्म होने के बाद भी हमें कई बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।
उन्होंने ईरान के 60 प्रतिशत तक समृद्ध यूरेनियम के भंडार को एक बड़ी चिंता बताया। उन्होंने कहा, वह भंडार काफी हद तक वहीं रहेगा, जहां वह अभी है, यानी मलबे के नीचे।
उन्होंने कहा कि कुछ बुनियादी ढांचा और उपकरण अभी भी काम करने की स्थिति में हो सकते हैं। यह हम तभी पता लगा पाएंगे, जब हमारे निरीक्षक वापस जाएंगे।
आईएईए प्रमुख ने जोर दिया कि तकनीकी क्षमता को सैन्य कार्रवाई के जरिए खत्म नहीं किया जा सकता। जो आपने सीख लिया है, उसे भुलाया नहीं जा सकता और ईरान के पास अपने कार्यक्रम को फिर से शुरू करने के लिए औद्योगिक और वैज्ञानिक आधार मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि सेंट्रीफ्यूज तकनीक, जो यूरेनियम संवर्धन के लिए जरूरी है, फिर से बनाई जा सकती है। उनके अनुसार, ईरान के पास अब सबसे उन्नत, तेज और कुशल मशीनें हैं और वे उन्हें बनाना जानते हैं।
ग्रॉसी ने यह भी कहा कि एजेंसी के पास अभी भी कई अनसुलझे सवाल हैं। कई सवाल अनुत्तरित हैं, कई चिंताजनक तथ्य हैं। उन्होंने निरीक्षण और पारदर्शिता की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि अगर आपके पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है, तो हमें दिखाइए।
उन्होंने आगे कहा कि आगे बढ़ने के लिए कूटनीति बेहद जरूरी होगी। हमें फिर से बातचीत की मेज पर लौटना होगा।
ग्रॉसी ने यह भी पुष्टि की कि युद्ध से पहले कूटनीतिक संपर्क हुए थे, लेकिन कोई समझौता नहीं हो पाया। चर्चा हुई थी, लेकिन कोई समझौता नहीं हुआ।
मिलिट्री एक्शन के जरिए 60 प्रतिशत समृद्ध यूरेनियम को हटाने के प्रपोजल पर ग्रॉसी ने ऑपरेशनल चुनौतियों की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि 60 प्रतिशत बहुत ज्यादा कंटैमिनेटेड यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड है, जिसे संभालना बहुत कठिन है।
--आईएएनएस
एवाई/एबीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
अमेरिका में डीएचएस शटडाउन से हवाई यात्रा प्रभावित, स्टाफ की कमी और बढ़ने की आशंका: परिवहन सचिव
वॉशिंगटन, 22 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका में हवाई यात्रा को बढ़ती हुई बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (डीएचएस) के आंशिक शटडाउन ने हवाई अड्डों की सुरक्षा संचालन को प्रभावित किया है। परिवहन सचिव सीन डफी ने चेतावनी दी है कि देरी और स्टाफ की कमी आने वाले दिनों में और खराब हो सकती है।
एबीसी न्यूज के दिस वीक विद जॉर्ज स्टेफानोपोलोस कार्यक्रम में दिए गए एक इंटरव्यू में डफी ने कहा कि स्थिति और बिगड़ सकती है।
उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि यह और भी खराब होने वाला है।
उन्होंने ट्रांसपोर्टेशन सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन (टीएसए) के कर्मचारियों पर बढ़ते वित्तीय दबाव और बढ़ती अनुपस्थिति की ओर इशारा किया।
शटडाउन शुरू होने के बाद से कुछ दिनों में दस प्रतिशत से अधिक टीएसए अधिकारी ड्यूटी पर रिपोर्ट नहीं कर रहे हैं, जबकि लगभग 400 अधिकारियों ने नौकरी छोड़ दी है। ये आंकड़े इंटरव्यू के दौरान बताए गए।
डफी ने कहा कि स्टाफ की कमी पूरे देश के हवाई अड्डों के संचालन को बाधित कर रही है। कुछ हवाई अड्डों पर हमारे पास 30 से 40 प्रतिशत तक एजेंटों की कमी है और ऐसी स्थिति हवाई अड्डों को पूरी तरह ठप कर सकती है।
इसका असर खास तौर पर व्यस्त यात्रा समय में देखा जा रहा है, जहां प्रमुख हवाई अड्डों पर सुरक्षा जांच के लिए लंबी कतारें रिपोर्ट की जा रही हैं।
डफी ने कहा कि यह स्प्रिंग ब्रेक है। परिवार छुट्टियों पर जाने की कोशिश कर रहे हैं, और उन्हें दो-दो, तीन-तीन घंटे तक कतारों में खड़ा रहना पड़ रहा है।”
टीएसए के कर्मचारी, जो आमतौर पर सालाना लगभग 50 हजार डॉलर कमाते हैं, वर्तमान में बिना वेतन के काम कर रहे हैं, जिससे उन पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। डफी ने माना कि कई कर्मचारी बुनियादी खर्च पूरे करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि उन्हें खाना खाने और किराया देने के लिए दूसरी नौकरियां करनी पड़ेंगी और इसी कारण कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने की संख्या बढ़ रही है।
दबाव कम करने के लिए प्रशासन हवाई अड्डों पर चेकपॉइंट्स में मदद के लिए इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एन्फोर्समेंट (आईसीई) कर्मियों को तैनात करने पर विचार कर रहा है।
डफी ने कहा, “यदि हम टीएसए की मदद के लिए अन्य संसाधन और साधन ला सकते हैं, ताकि कतारें कम हों, तो मुझे लगता है यह एक अच्छा विचार है।”
उन्होंने कहा कि आईसीई कर्मियों के पास संबंधित ऑपरेशनल अनुभव है। वे दक्षिणी सीमा पर उसी तरह की सुरक्षा मशीनों का संचालन करते हैं।
इस कदम का उद्देश्य यात्रियों की आवाजाही को सुचारू बनाए रखना और स्टाफ की कमी के बीच देरी को कम करना है।
डफी ने यह भी कहा कि प्रशासन टीएसए अधिकारियों से बिना वेतन के भी ड्यूटी पर आने का आग्रह कर रहा है। उन्होंने कहा, “मैं उनसे आने का अनुरोध कर रहा हूं, और बताया कि फंडिंग बहाल होने पर कर्मचारियों को बकाया वेतन मिल जाएगा।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
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