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चीनी विदेश मंत्री ने तुर्कमेनिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री से मुलाकात की

बीजिंग, 18 मार्च (आईएएनएस)। चीन की राजधानी पेइचिंग में सीपीसी केंद्रीय समिति के पोलित ब्यूरो के सदस्य और विदेश मंत्री वांग यी ने तुर्कमेनिस्तान के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री राशिद मेरेदोव से मुलाकात की। राशिद मेरेदोव, तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रीय नेता और पीपुल्स काउंसिल के अध्यक्ष गुरबांगुली बर्दिमुहामेदोव के साथ चीन की यात्रा पर आए हैं।

वांग यी ने कहा कि गुरबांगुली बर्दिमुहामेदोव चीनी जनता के पुराने मित्र हैं और दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच मजबूत आपसी विश्वास तथा गहरी मित्रता मौजूद है। उन्होंने कहा कि यह संबंध दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्थिर और निरंतर विकास के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करता है।

वांग यी के अनुसार, यह दौरा इस वर्ष चीन-तुर्कमेनिस्तान संबंधों में एक अहम पड़ाव साबित होगा। उम्मीद जताई जा रही है कि दोनों देशों के नेता द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करने तथा वैश्विक चुनौतियों का संयुक्त रूप से समाधान करने के लिए व्यापक रणनीतिक संवाद करेंगे और कई महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति बनाएंगे।

वहीं, राशिद मेरेदोव ने चीन में राष्ट्रीय जन प्रतिनिधि सभा (एनपीसी) और चीनी जन राजनीतिक सलाहकार सम्मेलन (सीपीपीसीसी) के सफल आयोजन पर चीन को बधाई दी। उन्होंने गुरबांगुली बर्दिमुहामेदोव की चीन यात्रा के दौरान किए गए गर्मजोशीपूर्ण स्वागत के लिए भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि तुर्कमेनिस्तान, चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग द्वारा प्रस्तावित चार वैश्विक पहलों का समर्थन करता है और तीसरे चीन-मध्य एशिया शिखर सम्मेलन की संयुक्त तैयारी के लिए चीन के साथ मिलकर काम करने को तैयार है। साथ ही, उन्होंने क्षेत्रीय शांति, स्थिरता, विकास और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

--आईएएनएस

एबीएम/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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भारतीय रेलवे ने पिछले 11 वर्षों में आकर्षित किया 942 मिलियन डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश

नई दिल्ली, 18 मार्च (आईएएनएस)। सरकार ने बुधवार को बताया कि भारतीय रेलवे ने पिछले 11 वर्षों में 942 मिलियन डॉलर (करीब 7,800 करोड़ रुपए) का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आकर्षित किया है।

रेल मंत्रालय के अनुसार, भारतीय रेलवे को 2014-15 से दिसंबर 2025 के बीच कुल 942 मिलियन डॉलर का एफडीआई मिला, जो इस सेक्टर में विदेशी निवेशकों की लगातार बढ़ती रुचि को दर्शाता है।

लोकसभा में एक सवाल के जवाब में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर में ऑटोमेटिक रूट के तहत 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति है।

उन्होंने कहा कि इस नीति के चलते विदेशी निवेश को हाई-स्पीड ट्रेन, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशन, सिग्नलिंग सिस्टम और यात्री व माल ढुलाई टर्मिनलों जैसे कई अहम क्षेत्रों में बढ़ावा मिला है।

मंत्री ने कहा कि सरकार ने रेलवे नेटवर्क को मजबूत करने के लिए अपने खर्च में भी काफी बढ़ोतरी की है। रेलवे के लिए ग्रॉस बजटरी सपोर्ट (जीबीएस) 2013-14 में 29,055 करोड़ रुपए से बढ़कर 2026-27 में 2.78 लाख करोड़ रुपए हो गया है।

इस बढ़े हुए निवेश का उद्देश्य रेलवे नेटवर्क का विस्तार करना, सुरक्षा बढ़ाना, नई तकनीक अपनाना और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देना है।

उन्होंने कहा कि मजबूत घरेलू फंडिंग के कारण भारतीय रेलवे को इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिकीकरण में ज्यादा निवेश करने का मौका मिला है, जिससे यह वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बन रहा है।

रेल मंत्रालय अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी बढ़ावा दे रहा है। भारत ने स्विट्जरलैंड, जर्मनी, रूस और स्पेन जैसे देशों के साथ समझौते किए हैं। इन समझौतों के तहत हाई-स्पीड रेल, मल्टीमोडल ट्रांसपोर्ट, आईटी सॉल्यूशंस और रेलवे मेंटेनेंस जैसे क्षेत्रों में सहयोग किया जा रहा है।

पिछले एक दशक में भारत ने रेलवे सेक्टर में मजबूत मैन्युफैक्चरिंग बेस भी तैयार किया है। अब देश में लोकोमोटिव, कोच, वैगन और ट्रैक्शन मोटर, ट्रांसफॉर्मर तथा मेट्रो सिस्टम सहित विभिन्न प्रकार के उपकरण बनाए जा रहे हैं।

इन उत्पादों का संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश और श्रीलंका सहित कई विकसित और विकासशील देशों में निर्यात भी किया जा रहा है।

सरकार के अनुसार, भारत का कुल रेलवे निर्यात 2016-17 से जनवरी 2026 तक 3.35 अरब डॉलर (करीब 26,000 करोड़ रुपए) रहा है।

निर्यात में यह बढ़ोतरी भारत के रेलवे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की मजबूती और वैश्विक स्तर पर उसकी बढ़ती पहचान को दर्शाता है।

--आईएएनएस

डीबीपी

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  Sports

IPL खिताब की रेस पर चोट का ग्रहण, KKR, SRH और RCB के Pace Attack पर बड़ा सवालिया निशान

आईपीएल शुरू होने से ठीक पहले तेज गेंदबाजों की चोट किसी भी टीम के लिए सबसे बड़ी चिंता बन जाती है, और इस बार भी कुछ ऐसा ही माहौल नजर आ रहा है। मौजूदा जानकारी के अनुसार कोलकाता नाइट राइडर्स, सनराइजर्स हैदराबाद और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु अपने प्रमुख तेज गेंदबाजों की फिटनेस को लेकर परेशान चल रही हैं।

बता दें कि कोलकाता की टीम इस मामले में सबसे ज्यादा प्रभावित दिख रही है। टीम के युवा तेज गेंदबाज हर्षित राणा घुटने की सर्जरी के कारण लंबे समय तक बाहर रह सकते हैं। गौरतलब है कि टीम प्रबंधन फिलहाल उनके विकल्प की घोषणा नहीं कर रहा, क्योंकि उम्मीद है कि वह टूर्नामेंट के अहम चरण तक फिट हो सकते हैं। वहीं मथीशा पथिराना भी चोट से जूझ रहे हैं, हालांकि रिपोर्ट्स में उनके समय पर फिट होने की संभावना जताई जा रही है।

मौजूद जानकारी के अनुसार कोलकाता ने मुस्तफिजुर रहमान को भी टीम से खो दिया है, जिसके बाद उनकी जगह ब्लेसिंग मुजरबानी को शामिल किया गया है। अब टीम को वैभव अरोड़ा और आकाश दीप जैसे घरेलू गेंदबाजों पर ज्यादा भरोसा करना पड़ेगा, जो टीम की गेंदबाजी की जिम्मेदारी संभालेंगे।

दूसरी तरफ सनराइजर्स हैदराबाद की चिंता उनके कप्तान पैट कमिंस की फिटनेस को लेकर है। बता दें कि कमिंस पीठ की चोट से उबर रहे हैं और अभी तक उनकी उपलब्धता को लेकर स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आई है। ऐसी स्थिति में चर्चा है कि टीम की कप्तानी ईशान किशन को सौंपी जा सकती है, जिन्होंने हाल के अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन किया था।

गौरतलब है कि हैदराबाद की गेंदबाजी इकाई में कमिंस जैसा अनुभव और प्रभाव किसी अन्य गेंदबाज के पास नहीं है। शिवम मावी, जयदेव उनादकट और एहसान मलिंगा जैसे खिलाड़ी मौजूद हैं, लेकिन उनकी भूमिका सहायक गेंदबाज की ज्यादा मानी जा रही है।

वहीं रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की स्थिति भी कुछ अलग नहीं है। टीम के प्रमुख तेज गेंदबाज जोश हेजलवुड अभी हैमस्ट्रिंग और एड़ी की चोट से पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं। मौजूद जानकारी के अनुसार वह काफी समय से मैदान से दूर हैं और शुरुआती मुकाबलों में उनकी उपलब्धता पर सवाल बना हुआ है।

बता दें कि पिछले सीजन में हेजलवुड ने अपनी सटीक गेंदबाजी से टीम की सफलता में अहम भूमिका निभाई थी। ऐसे में उनकी गैरमौजूदगी टीम के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती है। फिलहाल उनकी जगह जैकब डफी को मौका मिल सकता है, हालांकि भारतीय परिस्थितियों में उनका प्रभाव सीमित रहने की आशंका जताई जा रही है। टीम को भुवनेश्वर कुमार और यश दयाल से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी।

कुल मिलाकर देखा जाए तो इस बार आईपीएल में तेज गेंदबाजों की फिटनेस कई टीमों के प्रदर्शन को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकती है। फिलहाल टूर्नामेंट जैसे-जैसे आगे बढ़ेगा, इन खिलाड़ियों की वापसी और फॉर्म ही टीमों की दिशा तय करेगी।
Wed, 18 Mar 2026 21:41:00 +0530

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