Jharkhand Government: रांची में आवारा कुत्तों के लिए बनेगा ‘डॉग फीडिंग जोन’, निगम की नई पहल
Jharkhand Government: झारखंड की राजधानी रांची में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को देखते हुए नगर निगम ने एक नई पहल शुरू की है. शहर में करीब तीन लाख आवारा कुत्तों के बेहतर प्रबंधन के लिए ‘डॉग फीडिंग जोन’ बनाए जाएंगे. इसके लिए निगम के इंजीनियरिंग विभाग की ओर से टेंडर भी जारी कर दिया गया है. इस योजना के तहत शहर के अलग-अलग वार्डों और संवेदनशील इलाकों में विशेष स्थान तय किए जाएंगे, जहां कुत्ता प्रेमी लोग आकर आवारा कुत्तों को खाना खिला सकेंगे या उनके लिए भोजन रख सकेंगे. इससे कुत्तों को इधर-उधर भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी और वे एक जगह पर ही भोजन प्राप्त कर सकेंगे.
इस पहल का उद्देश्य
नगर निगम की मुख्य स्वास्थ्य पदाधिकारी डॉ. किरण ने बताया कि झारखंड में इस तरह की पहल पहली बार की जा रही है. इसका मुख्य उद्देश्य शहर में साफ-सफाई बनाए रखना और कुत्तों को व्यवस्थित तरीके से भोजन उपलब्ध कराना है. अभी कुत्तों को अलग-अलग जगहों पर खाना मिलने से गंदगी फैलती है और लोगों को परेशानी होती है.
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उन्होंने यह भी बताया कि कई बार कुत्तों के झुंड के कारण सड़क हादसे और काटने की घटनाएं सामने आती हैं. ऐसे में यदि कुत्तों को एक निर्धारित स्थान पर भोजन मिलेगा, तो उनकी आवाजाही सीमित होगी और इन समस्याओं में कमी आ सकती है.
परियोजना की अनुमानित लागत
इस योजना के तहत भविष्य में कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण अभियान को भी जोड़ा जाएगा, जिससे उनकी संख्या और व्यवहार दोनों को नियंत्रित किया जा सके. इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 20.53 लाख रुपये रखी गई है. टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी. 23 मार्च 2026 तक आवेदन लिए जाएंगे और 24 मार्च को टेंडर खोला जाएगा. चयनित एजेंसी को काम पूरा करने के लिए 90 दिनों का समय दिया जाएगा.
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Delhi News: द्वारका में भू-जल-वायु हाफ मैराथन का आयोजन, फिटनेस और पर्यावरण संरक्षण को जोड़ने की एक खास पहल
Delhi News: द्वारका में 12 अप्रैल 2026 को 'भू-जल-वायु हाफ मैराथन' का तीसरा संस्करण आयोजित होने जा रहा है. यह सिर्फ एक दौड़ नहीं है, बल्कि फिटनेस और पर्यावरण संरक्षण को जोड़ने की एक खास पहल है. इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य लोगों को 'रीसायकल-रिपेयर-रीयूज (RRR)' के महत्व के बारे में जागरूक करना है.
मैराथन के जरिए देना चाहते हैं ये संदेश
इस मैराथन के जरिए आयोजक यह संदेश देना चाहते हैं कि हम अपने रोजमर्रा के जीवन में छोटे-छोटे बदलाव करके पर्यावरण की रक्षा कर सकते हैं. खासतौर पर बेकार पड़ी साइकिलों को फिर से उपयोग में लाना इस अभियान का मुख्य हिस्सा है. इन साइकिलों को ठीक करके जरूरतमंद लोगों, खासकर छात्रों और श्रमिकों को दिया जाएगा, ताकि उन्हें सस्ता और टिकाऊ परिवहन मिल सके.
1500 से अधिक लोग होंगे शामिल
पिछले साल इस मैराथन में 1,200 से ज्यादा लोगों ने भाग लिया था. इस बार उम्मीद है कि 1,500 से ज्यादा लोग इसमें शामिल होंगे. इससे यह साफ है कि लोगों में पर्यावरण और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता तेजी से बढ़ रही है.
जरूरतमंद लोगों को मिलेगी मदद
भू-जल-वायु संस्था के सह-संस्थापक डॉ. सुरेंद्र यादव ने बताया कि उनका मिशन भूमि, जल और वायु, तीन महत्वपूर्ण चीजों की रक्षा करना है. उनका मानना है कि शहरों में छोटी दूरी तय करने के लिए भी कई लोगों के पास साधन नहीं होते. ऐसे में पुरानी साइकिलों को ठीक करके उन्हें देना एक बहुत ही अच्छा और व्यावहारिक समाधान है. इससे न सिर्फ कचरा कम होगा, बल्कि जरूरतमंद लोगों को मदद भी मिलेगी.
सह-संस्थापक ने भी पहल को सराहा
सह-संस्थापक योगेश अग्रवाल ने भी इस पहल को सामूहिक प्रयास बताया. उन्होंने कहा कि हर पंजीकरण के साथ एक बेकार चीज को किसी के लिए उपयोगी बनाया जा सकता है. यह अभियान पारदर्शिता और लोगों की भागीदारी पर आधारित है. उन्होंने सभी निवासियों और कंपनियों से इस पहल में शामिल होने की अपील की है, ताकि द्वारका को एक आदर्श और टिकाऊ समुदाय बनाया जा सके.
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अलग-अलग श्रेणियों में हो रहा मैराथन
इस मैराथन में हर उम्र और फिटनेस स्तर के लोगों के लिए अलग-अलग श्रेणियां रखी गई हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसमें भाग ले सकें. इसमें 21.1 किलोमीटर की हाफ मैराथन (टाइम्ड), 10 किलोमीटर और 5 किलोमीटर की दौड़ (टाइम्ड), और 2.5 किलोमीटर की वॉकाथॉन शामिल हैं. इस आयोजन में भाग लेने के लिए लोग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म जैसे BookMyShow, Townscript, IndiaRunning, BigLocal और All Events पर पंजीकरण कर सकते हैं.
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फिटनेस, समाज सेवा का एक बेहतरीन संगम
कुल मिलाकर, यह हाफ मैराथन फिटनेस, समाज सेवा और पर्यावरण संरक्षण का एक बेहतरीन संगम है. यह लोगों को न सिर्फ स्वस्थ रहने के लिए प्रेरित करती है, बल्कि उन्हें समाज और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने का भी मौका देती है. अगर आप भी बदलाव का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो इस मैराथन में शामिल होकर एक कदम बेहतर भविष्य की ओर बढ़ा सकते हैं.
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