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R Ashwin on Star culture: भारतीय क्रिकेट में बढ़ते 'सुपरस्टार कल्चर' पर अब खुलकर सवाल उठने लगे हैं। पूर्व भारतीय स्पिनर आर अश्विन ने इस ट्रेंड को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर दिखने वाली कई राय असल में 'फैन आर्मी' की नहीं, बल्कि अंदर से ही प्लांट की गई हो सकती।
कोलकाता में हुए रेवस्पोर्ट्ज कॉन्क्लेव में अश्विन ने इसे एक तरह की बीमारी बताया। उनका कहना है कि कई बार जो बातें सोशल मीडिया पर वायरल होती हैं, वही पहले ऑफलाइन बातचीत में सुनने को मिलती। बाद में वही विचार किसी और नाम से ऑनलाइन नजर आते हैं,जिससे शक होता है कि कहीं यह सब सुनियोजित तो नहीं।
क्या खिलाड़ी ही लीक करते बातें? अश्विन ने साफ किया कि वह यह नहीं कह रहे कि खिलाड़ी खुद ये सब कराते हैं, लेकिन एक स्ट्रक्चर्ड इकोसिस्टम जरूर काम कर रहा । उनके मुताबिक, आज हर खिलाड़ी एक ब्रांड है और अपनी वैल्यू बढ़ाने के लिए बाहरी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करता है। इसमें उन्हें कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन जब यह कोशिश किसी दूसरे खिलाड़ी को नीचा दिखाने के लिए होती है, तब यह गलत है।
अश्विन ने सुपर स्टार कल्चर पर उठाए सवाल इस मुद्दे पर अश्विन अकेले नहीं हैं। इससे पहले सुनील गावस्कर और टीम इंडिया के मौजूदा हेड कोच गौतम गंभीर भी सुपरस्टार कल्चर की आलोचना कर चुके हैं।
गिल के उदाहरण से समझाया अश्विन का मानना है कि इन नैरेटिव्स का असर इतना बढ़ गया है कि अब क्रिकेट पीछे छूटता जा रहा और चर्चा सिर्फ खिलाड़ियों के इर्द-गिर्द घूम रही है। उन्होंने कहा, 'हमने खिलाड़ियों को सुपरहीरो बना दिया। अब बात खेल की कम और व्यक्तियों की ज्यादा होती है।'
उन्होंने अपना एक अनुभव भी साझा किया। अश्विन ने बताया कि उन्होंने शुभमन गिल के आउट होने के तकनीकी कारणों पर एक ट्विटर थ्रेड लिखा था। उनका मकसद सिर्फ यह समझाना था कि क्या और क्यों हुआ, लेकिन लोगों ने इसे गलत तरीके से लिया।
अश्विन के मुताबिक, यूजर्स ने सवाल उठाया कि उन्होंने सिर्फ गिल पर ही बात क्यों की, बाकी खिलाड़ियों पर क्यों नहीं। इस पर उन्हें हैरानी हुई कि लोग उनकी बात का असली मकसद समझ ही नहीं पाए।
उन्होंने कहा, 'मेरे लिए हमेशा क्या और क्यों अहम होता है, कौन नहीं? लेकिन अब चर्चा का फोकस बदल गया है। खेल की जगह व्यक्ति आ गया है।'
अश्विन का यह बयान ऐसे समय आया है जब सोशल मीडिया पर खिलाड़ियों को लेकर बहस और ट्रोलिंग आम हो गई है। उनका मानना है कि अगर यही ट्रेंड जारी रहा, तो क्रिकेट का असली मजा और उसकी गहराई कहीं पीछे छूट जाएगी।