एक तरफ ईरान इजराइल अमेरिका के बीच युद्ध जारी है और दूसरी तरफ भारत ईरान को लेकर अपनी स्थिति साफ कर चुका है। भारत का कहना है कि यह वक्त युद्ध का नहीं है। जरूरत है कि तमाम पक्ष इस पूरे मामले में खुद को रोके। संयम बरते बातचीत की मेज पर आए। भारत ने साफ तौर पर कहा है कि वो सभी पक्षों से शांति की अपील करता है ताकि पूरे इलाके में स्थिरता और शांति आ सके। इसके साथ ही भारत ने यह भी अपील किया है इस मौके पर कि यूएन को अपने काम का तरीका बदलना होगा और भारत ने साफ तौर पर कहा है कि मौजूदा परिदृश्य को देखकर लगता है कि यूएन को तत्काल बदलाव की जरूरत है। हमको और ये भारत का पक्ष रहा है कि संवाद का रास्ता तय किया जाए। राजनैतिक माध्यम का रास्ता तय किया जाए ताकि जल्द से जल्द यह संघर्ष को विराम पे लाया जाए। हम लोगों ने यह भी कहा है कि हम सभी देशों से यह हमारी आह्वान है कि संयम बरतें और संघर्ष को आगे बढ़ने से रोका जाए। जहां तक आपने संयुक्त राष्ट्र की बात की, वहां के सुधार की बात की।
आपको पता है कि पिछले कई एक दशकों में यह हमारा पक्ष रहा है भारत का कि जल्द से जल्द संयुक्त राष्ट्र का सुधार हो और ऐसे मौके पर जब हम सुधार की बात करते हैं तो उसमें एक नया उसके एक नया मायना आ जाता है और साथ ही साथ यह भी पता चलता है कि इसको जितना जल्दी करें उतना जल्दी बेहतर होगा संयुक्त राष्ट्र के लिए और दुनिया के लिए। जिस लिहाज में भारत के विदेश मंत्रालय ने सिर्फ इस युद्ध को रोकने की बात नहीं की है। बल्कि जिस तरह से यूएन में बदलाव की मांग की है उसे सुनकर उसे देखकर आप समझ सकते हैं कि इस वक्त भारत यूएन से क्या चाहता है। यूएन के तौर तरीकों ने हाल के दिनों में यह बताया है कि किस तरीके से यूएन की कोई खास भूमिका इस तरह के युद्ध में अब बची नहीं है।
यूएन लगातार अपनी प्रतिष्ठा के संकट से गुजर रहा है और ऐसे में भारत जैसा देश लगातार यूएन में बदलाव की मांग कर रहा है। वीटो पावर कुछ देशों को देकर शांति से बैठा यूएन अब आने वाले दिनों में इस तरह से ही अगर काम करेगा तो यूएन के लिए कई तरह की मुश्किलों का सामना करना होगा। क्योंकि अमेरिका हो या चीन हो ऐसी शक्तियां लगातार यूएन का माहौल ही उड़ाती रही हैं। अब ऐसे में यूएन को यह सोचना है कि वो आखिर बदलाव खुद में कब लाएगा, कैसे लाएगा क्योंकि जिस तरीके से ईरान, इजराइल और अमेरिका का संघर्ष जारी है और जिस तरह से खाड़ी के देशों को ईरान निशाना बना रहा है, ऐसे में यूएन शांति की भी अपील कर रहा है तो उसके सुनने वाला कोई नहीं है।
मिडिल ईस्ट में जंग का मंजर और भी पेचीदा होता जा रहा है। एक तरफ बेंजामिन नेतन्याहू नवरोज की बधाई देकर शांति का संदेश दे रहे हैं। तो दूसरी ओर ईरान में लगातार मिसाइल हमलों की गूंज सुनाई दे रही है। त्योहार और तबाही के बीच फंसा यह संघर्ष अब पूरी दुनिया की चिंता बन चुका है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के लोगों को नवरोज की शुभकामनाएं दीं, जबकि इजरायल मौजूदा संघर्ष के बीच सैन्य अभियान जारी रखे हुए है।
बेका घाटी और बेरूत में इजरायली हमले
इजरायली सेना ने लेबनान में नए हमले किए, जिसमें पूर्वी बेका घाटी के सहमार कस्बे को आज सुबह दूसरी बार निशाना बनाया गया। यह हमला बेका घाटी में ही स्थित याहमर कस्बे पर हुए दो हमलों के बाद हुआ। रात भर में मध्य बेरूत और दक्षिणी लेबनान में भी कई हमले हुए। लेबनानी अधिकारियों ने बताया कि बेरूत में कम से कम छह लोग और दक्षिण में 11 अन्य लोग मारे गए।
निवासियों को ज़हरानी नदी के उत्तर में जाने को कहा गया
इज़राइल ने दक्षिणी लेबनान के गांवों के लिए नए जबरन विस्थापन आदेश जारी किए हैं, जिसमें निवासियों को तुरंत गांव छोड़कर ज़हरानी नदी के उत्तर में जाने को कहा गया है। इज़राइली सेना ने कहा कि वह खिरबेट सेल्म, बेत याहून, सराफंद और दीर कानून एन नहर सहित क्षेत्रों में हमले करने की योजना बना रही है। नवीनतम आदेश निकासी क्षेत्र को पहले से भी उत्तर की ओर ले जाता है, जो लिटानी नदी से भी आगे तक फैला हुआ है। नॉर्वेजियन शरणार्थी परिषद के अनुसार, इज़राइल के निकासी आदेश अब लेबनान के लगभग 14% क्षेत्र को कवर करते हैं, जो चल रहे संघर्ष में विस्थापन के व्यापक पैमाने को दर्शाता है।
नेतन्याहू ने शेयर किया नया वीडियो
अगर उनकी मौत की अफवाहों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया था, तो बेंजामिन नेतन्याहू अब खुद यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि इंटरनेट इस सच्चाई को ज़ोर-शोर से सुने। इज़राइल के प्रधानमंत्री ने मंगलवार को एक और वीडियो पोस्ट किया, जिसमें वे इज़राइल में अमेरिका के राजदूत माइक के साथ नजर आए। इस वीडियो के जरिए उन्होंने उन वायरल साज़िशी दावों को खारिज किया, जिनमें कहा जा रहा था कि ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के बीच उनकी मौत हो गई है। मुस्कुराते हुए नेतन्याहू ने कहा कि मैं ज़िंदा हूँ और फिर सोशल मीडिया पर चल रहे एक अजीब दावे पर तंज कसते हुए बोले, “हम हर हाथ में पाँच उंगलियों से ही हाथ मिलाते हैं। यह टिप्पणी उन वायरल पोस्ट्स पर सीधा जवाब थी, जिनमें पहले के एक वीडियो को एआई से बनाया गया बताया गया था और कुछ लोगों ने उसमें “छठी उंगली” होने का दावा किया था।
अमेरिकी खुफिया अधिकारी ईरान युद्ध और सुरक्षा खतरों पर गवाही देंगे
अमेरिका के शीर्ष खुफिया अधिकारी कई महत्वपूर्ण सुनवाईयों में कांग्रेस के समक्ष गवाही देने वाले हैं, जहां उनसे ईरान युद्ध और अमेरिका के भीतर सुरक्षा खतरों से संबंधित कड़े सवाल पूछे जाने की उम्मीद है। ये सुनवाईयां ईरान में हुए अमेरिकी हमले की जांच के बीच हो रही हैं, जिसमें कथित तौर पर एक प्राथमिक विद्यालय को निशाना बनाया गया था और 165 से अधिक लोग मारे गए थे। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि हमले में पुरानी खुफिया जानकारी का इस्तेमाल किया गया हो सकता है। मिशिगन और वर्जीनिया में हाल ही में हुई घटनाओं के बाद, सांसदों द्वारा एजेंसियों से घरेलू हमलों को रोकने की उनकी क्षमता पर भी सवाल उठाए जाने की संभावना है।
BCB ICC Controversy: बांग्लादेश क्रिकेट में इन दिनों बड़ा उथल-पुथल चल रहा है। अब खेल मंत्री अमीनुल हक ने साफ कर दिया कि बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के भविष्य पर कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले वो आईसीसी से बातचीत करेंगे। मामला सिर्फ बोर्ड के कामकाज तक सीमित नहीं है,बल्कि पिछले साल हुए बीसीबी चुनावों में गड़बड़ी, हेरफेर और सत्ता के दुरुपयोग के आरोप भी इसमें शामिल हैं।
11 मार्च को खेल मंत्रालय ने इन आरोपों की जांच के लिए 5 सदस्यीय कमेटी बनाई थी। इस कदम पर बीसीबी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और इसे सरकार का सीधा दखल बताया।
आईसीसी से बात करेगा बीसीबी खेल मंत्री अमीनुल हक का कहना है कि जैसे ही जांच समिति अपनी रिपोर्ट देगी, वह ICC से बात करेंगे और उसके बाद ही आगे का फैसला लिया जाएगा। उन्होंने कहा, 'पिछली सरकार के समय बीसीबी चुनाव में सीधे दखल की बात सब जानते हैं। हमें क्लब और जिलों से शिकायतें मिली थीं, इसलिए जांच जरूरी है।'
जांच समिति की रिपोर्ट के बाद होगा फैसला जांच समिति को 15 वर्किंग डे के भीतर रिपोर्ट सौंपनी है। इस दौरान कमेटी बीसीबी के चुनाव आयुक्त, मौजूदा अध्यक्ष, बोर्ड डायरेक्टर्स और CEO से बातचीत करेगी। साथ ही उन जिला प्रशासन अधिकारियों से भी पूछताछ होगी, जिन्होंने चुनाव से पहले काउंसलर के नाम बदले थे।
दरअसल, आरोप है कि कुछ जिला अधिकारियों ने पहले एक नाम भेजा और बाद में पत्र मिलने के बाद दूसरा नाम भेज दिया। इसे चुनाव में इंजीनियरिंग का हिस्सा बताया जा रहा है।
इस पूरे विवाद में तमीम इकबाल का नाम भी सामने आया था। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे और आखिरी समय में अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली थी। तमीम का आरोप था कि नामांकन की तारीख दो बार बढ़ाई गई,जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए।
वहीं, बीसीबी अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम पर भी चुनाव से पहले ही दखल देने के आरोप लगे थे। हालांकि उन्होंने इन आरोपों को खारिज किया था।इधर, एक और बड़ा मुद्दा है कि बांग्लादेश का इस साल टी20 वर्ल्ड कप में हिस्सा न लेना। भारत और श्रीलंका में खेले गए इस टूर्नामेंट से बांग्लादेश ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए दूरी बना ली थी। तीन हफ्ते की बातचीत के बाद ICC ने उसकी जगह स्कॉटलैंड को शामिल किया था।
अब इस फैसले की भी जांच होगी। खेल मंत्री ने कहा कि ईद के बाद एक अलग कमेटी बनाई जाएगी, जो यह पता लगाएगी कि आखिर बांग्लादेश वर्ल्ड कप में क्यों नहीं गया और स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी कहां कमजोर पड़ी।
उन्होंने साफ कहा,'हमें समझना होगा कि हम वर्ल्ड कप में क्यों नहीं गए। भविष्य में ऐसी गलती दोबारा न हो, इसके लिए हमारी खेल कूटनीति को मजबूत करना जरूरी है।'
कुल मिलाकर, बांग्लादेश क्रिकेट इस समय दोहरी चुनौती से जूझ रहा है- एक ओर बोर्ड की विश्वसनीयता, दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छवि। अब सबकी नजर आईसीसी के रुख और जांच रिपोर्ट पर टिकी है।