ईरान इजराइल जंग के बीच भारत के प्रधानमंत्री मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहायन से फोन पर बात की। इस बातचीत की शुरुआत भले ही ईद की शुभकामनाओं से हो लेकिन जल्द ही मुद्दा सुरक्षा और क्षेत्रीय तनाव पर आ गया। पीएम मोदी ने साफ तौर पर यूएई पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की और कहा कि बेगुनाह लोगों की जान जाना और नागरिक ढांचे को नुकसान पहुंचाना किसी भी हालत में स्वीकार नहीं। इस बातचीत के बाद पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक पोस्ट भी किया। जहां उन्होंने लिखा कि मैंने अपने भाई मोहम्मद बिन जायद जो यूएई के राष्ट्रपति हैं उनसे बात की और उन्हें अग्रिम ईद की शुभकामनाएं दी। हमने पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति पर चर्चा की। मैंने यूएई पर हुए सभी हमलों की भारत द्वारा कड़ी निंदा दोहराई। जिनमें निर्दोष लोगों की जान गई और नागरिक ढांचे को नुकसान पहुंचा। हमने स्टेट ऑफ हु्मरस के माध्यम से सुरक्षित और निर्बात नौवाहन सुनिश्चित करने के महत्व पर सहमति जताई। हम क्षेत्र में शांति सुरक्षा और स्थिरता की शीघ्र बहाली के लिए मिलकर काम करते रहेंगे। इस बातचीत का सबसे बड़ा मुद्दा रहा स्टेट ऑफस।
मोदी ने नाह्यान के साथ बातचीत में दोहराया कि भारत यूएई पर हुए सभी हमलों की कड़ी निंदा करता है, जिनमें लोगों की जान गई और आम लोगों की संपत्ति को नुकसान पहुंचा। उन्होंने कहा, ‘‘(हम) इस बात पर सहमत हुए कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना बहुत जरूरी है। हमने यह भी तय किया कि पश्चिम एशिया में जल्द से जल्द शांति, सुरक्षा और स्थिरता बहाल करने के लिए वे मिलकर काम करते रहेंगे।’’ अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले के बाद से यह दूसरी बार है जब मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति से बातचीत की है। ईरान ने अमेरिका और इजराइल के जवाब में कई खाड़ी देशों पर हमले किए हैं। मौजूदा संघर्ष शुरू होने के बाद से प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया के कई देशों के नेताओं से भी बात की है, जिनमें सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत, ओमान, जॉर्डन, इजराइल और ईरान के नेता शामिल हैं।
दोनों नेताओं ने माना कि इस समुद्री रास्ते से जहाजों की सुरक्षित और बिना रुकावट आवाजाही बेहद जरूरी है। क्योंकि यही रास्ता दुनिया की बड़ी तेल सप्लाई का केंद्र है और अगर यहां कोई रुकावट आती है तो उसका असर सीधे ग्लोबल इकॉनमी पर पड़ सकता है। ऐसे में भारत और यूएई दोनों इस बात पर सहमत हैं कि इस क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना प्राथमिकता होनी चाहिए। दरअसल हालात इसलिए भी गंभीर हैं क्योंकि 28 फरवरी के बाद से तनाव तेजी से बढ़ा। अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद ईरान की तरफ से जवाबी कारवाई शुरू की गई। ईरान के हमले में दुबई को भी नुकसान हुआ। पूरे गल्फ क्षेत्र में ड्रोन और मिसाइल हमलों की घटनाएं बढ़ गई। यूएई ने अब तक 1500 से ज्यादा ड्रोन इंटरसेप्ट किए हैं। जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि खतरा कितना बड़ा है। दुबई में धमाकों की आवाजें सुनाई देना और कुछ समय के लिए एयर स्पेस बंद करना इस तनाव की गंभीरता को दिखाता है।
भले ही बाद में हालात नियंत्रित कर लिए गए हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बीच भारत का रुख भी साफ नजर आ रहा है। सिर्फ स्थिति पर नजर नहीं रख रहा बल्कि अपने रणनीतिक साझेदारों के साथ लगातार संवाद में है। इस बातचीत से यह भी साफ हो गया कि भारत और यूएई के रिश्ते सिर्फ आर्थिक या औपचारिक नहीं बल्कि सुरक्षा और स्थिरता जैसे मुद्दों पर भी मजबूत है।
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एक तरफ ईरान इजराइल अमेरिका के बीच युद्ध जारी है और दूसरी तरफ भारत ईरान को लेकर अपनी स्थिति साफ कर चुका है। भारत का कहना है कि यह वक्त युद्ध का नहीं है। जरूरत है कि तमाम पक्ष इस पूरे मामले में खुद को रोके। संयम बरते बातचीत की मेज पर आए। भारत ने साफ तौर पर कहा है कि वो सभी पक्षों से शांति की अपील करता है ताकि पूरे इलाके में स्थिरता और शांति आ सके। इसके साथ ही भारत ने यह भी अपील किया है इस मौके पर कि यूएन को अपने काम का तरीका बदलना होगा और भारत ने साफ तौर पर कहा है कि मौजूदा परिदृश्य को देखकर लगता है कि यूएन को तत्काल बदलाव की जरूरत है। हमको और ये भारत का पक्ष रहा है कि संवाद का रास्ता तय किया जाए। राजनैतिक माध्यम का रास्ता तय किया जाए ताकि जल्द से जल्द यह संघर्ष को विराम पे लाया जाए। हम लोगों ने यह भी कहा है कि हम सभी देशों से यह हमारी आह्वान है कि संयम बरतें और संघर्ष को आगे बढ़ने से रोका जाए। जहां तक आपने संयुक्त राष्ट्र की बात की, वहां के सुधार की बात की।
आपको पता है कि पिछले कई एक दशकों में यह हमारा पक्ष रहा है भारत का कि जल्द से जल्द संयुक्त राष्ट्र का सुधार हो और ऐसे मौके पर जब हम सुधार की बात करते हैं तो उसमें एक नया उसके एक नया मायना आ जाता है और साथ ही साथ यह भी पता चलता है कि इसको जितना जल्दी करें उतना जल्दी बेहतर होगा संयुक्त राष्ट्र के लिए और दुनिया के लिए। जिस लिहाज में भारत के विदेश मंत्रालय ने सिर्फ इस युद्ध को रोकने की बात नहीं की है। बल्कि जिस तरह से यूएन में बदलाव की मांग की है उसे सुनकर उसे देखकर आप समझ सकते हैं कि इस वक्त भारत यूएन से क्या चाहता है। यूएन के तौर तरीकों ने हाल के दिनों में यह बताया है कि किस तरीके से यूएन की कोई खास भूमिका इस तरह के युद्ध में अब बची नहीं है।
यूएन लगातार अपनी प्रतिष्ठा के संकट से गुजर रहा है और ऐसे में भारत जैसा देश लगातार यूएन में बदलाव की मांग कर रहा है। वीटो पावर कुछ देशों को देकर शांति से बैठा यूएन अब आने वाले दिनों में इस तरह से ही अगर काम करेगा तो यूएन के लिए कई तरह की मुश्किलों का सामना करना होगा। क्योंकि अमेरिका हो या चीन हो ऐसी शक्तियां लगातार यूएन का माहौल ही उड़ाती रही हैं। अब ऐसे में यूएन को यह सोचना है कि वो आखिर बदलाव खुद में कब लाएगा, कैसे लाएगा क्योंकि जिस तरीके से ईरान, इजराइल और अमेरिका का संघर्ष जारी है और जिस तरह से खाड़ी के देशों को ईरान निशाना बना रहा है, ऐसे में यूएन शांति की भी अपील कर रहा है तो उसके सुनने वाला कोई नहीं है।
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