Cheti Chand 2026: कौन हैं भगवान झूलेलाल? जानें सिंधी समाज में जल देवता की कहानी
Cheti Chand 2026: धरती पर जब भी अधर्म और अत्याचार बढ़ जाता है तो ईश्वर किसी न किसी रूप में प्रकट होते हैं. सिंधी समाज में भगवान झूलेलाल को भी उस शक्ति का स्वरूप माना जाता है. 'आयो लाल झूलेलाल', इन जयकारों के साथ मनाया जाने वाला चेटी चंड का पर्व, जल देवता वरुण के अवतार के रूप झूलेलाल का जन्मोत्सव होता है. ये देवता मछली पर सवार होकर धरती पर प्रकट हुए थे. उनकी उत्पत्ति की कहानी बहुत रोचक है. आइए जानते हैं.
19 मार्च को मनाया जाएगा झूलेलाल का जन्मोत्सव
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान झूलेलाल ने अत्याचारी शास्क के चंगुल से सिंधी संस्कृति को बचाया था. इस साल 19 मार्च को इस खास मौके पर भगवान झूलेलाल के अवतरण का पर्व मनाया जा रहा है. उनकी कथा आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणादायक है.
भक्तों की पुकार से प्रकट हुए थे झूलेलाल
इनके जन्म की कथा 10वीं सदी के सिंध, जो अब पाकिस्तान है, से जुड़ी हुई है. भगवान झूलेलाल को उडेरोलाल के नाम से भी जाना जाता है. वे आस्था और अटूट विश्वास की मिसाल है. पौराणिक कथा के अनुसार, सिंध के ठट्टा नगर में मृखशाह नाम का एक क्रूर राजा शासन करता था. उसने सिंध के हिंदुओं पर धर्म परिवर्तन करने का दबाव डाला था और उन्हें प्रताड़ित करता था. जब अत्याचार सहनशक्ति से बाहर हो गया था तो सिंधी समाज ने अपनी रक्षा के लिए सिंधु नदी के तट पर शरण ले ली थी.
चलीहा साहिब परंपरा क्या है?
कथा के मुताबिक, सिंधी समाज के लोगों ने लगातार 40 दिनों तक कठिन तपस्या की थी. उन्होंने अन्न-जल त्याग कर दिया था और जल देवता को पुकारा था. इस परंपरा को आज भी लोग चलीहा साहब कहते हैं. माना जाता है कि भक्तों की सच्ची पुकार को सुन कर भगवान वरुण देव प्रसन्न हो गए. इसके बाद एक आकाशवाणी हुए जिसमें उन्होंने बोला की मैं नस्नपुर के एक घर में बालक के रूप में जन्म लूंगा और तुम्हारी रक्षा करुंगा.
ऐसे हुआ था उडेरोलाल का जन्म
चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि यानी चेटी चंड के दिन नस्नपुर में रतनराय के घर में तेजस्वी बालक के रूप में जन्म लिया था, जिनका नाम उडेरोलाल रखा गया था. कहा जाता है कि पालना अपने आप झूलने के कारण उन्हें झूलेलाल भी पुकारा जाने लगा. माना जाता है कि वह एक दिव्य योद्धा के रूप में विशाल मछली यानी पल्ले मछली पर सवार होकर प्रकट हुए थे, उनके हाथ में शस्त्र और धर्म ध्वजा थी.
धर्म की रक्षा और मृखशाह का अंत
जब मृखशाह ने भगवान झूलेलाल को पकड़ने का प्रयास कर रहा था तो उन्होंने जल और अग्नि का ऐसा तांडव दिखाया कि राजा का महल पानी में डूबने लगा था. इसके बाद क्रूर मृखशाह को अपनी गलतियों का अहसास हुआ और उसने भगवान के चरणों में माफी मांगते हुए शरण ली. इसके बाद भगवान झूलेलाल ने कहा कि ईश्वर एक है और सभी धर्मों का सम्मान होना चाहिए.
बहराणा साहिब क्यों खास है?
बहराणा साहिब- सिंधी समुदाय द्वारा निभाई जाने वाली इस परंपरा में भगवान झूलेलाल को कांसे की थाली में आटे के दीये, फूल, नारियल और इलायची-मिश्री सजाकर अखंड जोत जलाई जाती है. इसे नदी में या किसी जल के स्त्रोत में बहा दिया जाता है.
पल्लव- भगवान के चरणों में सुख-समृद्धि के लिए सामूहिक रूप से प्रार्थना की जाती है.
छेज- सिंधी लोक नृत्य जो ढोल की थाप पर किया जाता है. इसे विजय का प्रतीक कहते हैं.
FAQs
किसके अवतार है भगवान झूलेलाल?
भगवान झूलेलाल को वरुण देव यानी जल देवता का अवतार कहते हैं. उन्हें उडेरोलाल के नाम से भी जाना जाता है.
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