West Bengal Elections 2026: ममता बनर्जी की ‘सियासी सर्जिकल स्ट्राइक’, 74 विधायकों के काट दिए नाम
West Bengal Elections 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) की पहली उम्मीदवार सूची ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बड़ा और चौंकाने वाला फैसला लेते हुए 74 मौजूदा विधायकों के टिकट काट दिए. इस कदम को पार्टी के भीतर अब तक की सबसे बड़ी ‘सियासी सर्जिकल स्ट्राइक’ माना जा रहा है.
74 विधायकों के टिकट कटने से बड़ा संदेश
इस सूची ने साफ कर दिया कि TMC अब किसी भी तरह की एंटी-इंकंबेंसी या खराब छवि का जोखिम नहीं लेना चाहती. जिन नेताओं पर जनता से दूरी, गुटबाजी या विवादों के आरोप थे, उन्हें सीधे बाहर का रास्ता दिखा दिया गया.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम चुनाव से पहले पार्टी की छवि सुधारने और जनता के बीच विश्वास मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है.
दागी नेताओं पर सख्त कार्रवाई
पिछले कुछ वर्षों में पश्चिम बंगाल की राजनीति में भ्रष्टाचार के आरोपों ने TMC को घेरा था. खासकर शिक्षक भर्ती घोटाले जैसे मामलों ने पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाया. इसी को ध्यान में रखते हुए ममता ने पार्थ चटर्जी, माणिक भट्टाचार्य और जीवनकृष्ण साहा जैसे बड़े नामों से दूरी बना ली. इन नेताओं का टिकट काटकर यह साफ संदेश दिया गया कि अब ‘दागी छवि’ वाले नेताओं के लिए पार्टी में जगह नहीं है.
स्टार पावर से ज्यादा क्लीन इमेज पर फोकस
TMC हमेशा से टॉलीवुड सितारों को टिकट देने के लिए जानी जाती रही है, लेकिन इस बार रणनीति पूरी तरह बदली नजर आई. कांचन मल्लिक और चिरंजीत चक्रवर्ती जैसे चर्चित चेहरों को भी टिकट नहीं मिला. यह संकेत है कि पार्टी अब सिर्फ लोकप्रियता नहीं, बल्कि साफ छवि और ग्राउंड कनेक्ट को प्राथमिकता दे रही है.
पुराने क्षत्रपों का कद घटा
टिकट कटने वालों में कई ऐसे नेता शामिल हैं जो लंबे समय से अपने-अपने क्षेत्रों में मजबूत पकड़ रखते थे. तपन दासगुप्ता, ज्योत्सना मंडी, तजमूल हुसैन और परेश पाल जैसे नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाकर पार्टी ने यह संकेत दिया है कि अब ‘स्थानीय दबदबे’ से ज्यादा ‘जनता का भरोसा’ अहम है.
यह कदम टीएमसी के भीतर एक बड़े जेनरेशन शिफ्ट की ओर भी इशारा करता है, जहां नए चेहरों को मौका दिया जा रहा है.
रणनीतिक बदलाव: 15 सीटों पर फेरबदल
टीएमसी ने केवल टिकट काटने तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि 15 विधायकों की सीटें भी बदल दीं. यह रणनीति एंटी-इंकंबेंसी को कम करने और स्थानीय समीकरणों को साधने के लिए अपनाई गई है. साथ ही, 135 विधायकों को उनकी पुरानी सीटों से ही चुनाव लड़ने का मौका दिया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पार्टी ने प्रदर्शन के आधार पर ही फैसले लिए हैं.
‘करो या घर बैठो’ का संदेश
पूरी सूची का सबसे बड़ा संदेश यही है या तो जनता के बीच काम करो और साफ छवि बनाए रखो, या फिर राजनीति से बाहर हो जाओ. ममता बनर्जी ने इस फैसले के जरिए यह दिखा दिया है कि वे चुनाव जीतने के लिए बड़े से बड़े फैसले लेने से पीछे नहीं हटतीं.
कुल मिलाकर, TMC की यह रणनीति आगामी चुनाव में पार्टी की स्थिति को मजबूत करने की कोशिश है, लेकिन यह भी तय है कि इससे पार्टी के अंदर असंतोष और बगावत का खतरा भी बढ़ सकता है.
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सीमा पार कर अर्मेनिया-अजरबैजान पहुंचे 600 से ज्यादा भारतीय नागरिक: एमईए
नई दिल्ली, 17 मार्च (आईएएनएस)। भारत सरकार का पूरा ध्यान अपने जहाजों को सुरक्षित होर्मुज स्ट्रेट से निकालने और भारतीयों की दूतावास के जरिए हर संभव मदद पहुंचाने पर है। एमईए ने मंगलवार को प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि संकटग्रस्त मध्य पूर्व इलाकों में फंसे भारतीयों को निकालने की हरसंभव कोशिश की जा रही है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि स्थिति पर 24/7 निगरानी की जा रही है।
शिपिंग, पेट्रोलियम, सूचना एवम् प्रसारण मंत्रालय और एमईए की इस संयुक्त प्रेस ब्रीफ में सरकार के प्रयासों का विवरण दिया गया।
इस दौरान, शिपिंग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि भारत सरकार ईरान समेत दूसरे देशों के साथ लगातार संपर्क में है और हमारा मकसद भारतीय जहाजों का सुरक्षित आवागमन है।
वहीं, एमईए प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि सोमवार को ही छात्रों समेत 650 भारतीय नागरिकों ने ईरान बॉर्डर क्रॉस किया; वे आर्मेनिया और अजरबैजान पहुंचे। 284 जायरीनों ने भी आर्मेनिया की सीमा पार कर ली है, और उनमें से 130 स्वदेश लौट रहे हैं। इस पूरे क्षेत्र में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा, भलाई और संरक्षा सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि मंत्रालय का विशेष कंट्रोल रूम लगातार काम कर रहा है, जो भारतीय नागरिकों और उनके परिवारों की मदद के लिए उपलब्ध है। साथ ही राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ भी लगातार संपर्क में रहकर समन्वय किया जा रहा है।
वहीं, भारत सरकार के विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव (खाड़ी क्षेत्र) असीम आर. महाजन ने बताया कि ओमान के सोहर शहर में हुए एक हमले में मारे गए दो भारतीयों के शव मंगलवार को जयपुर में उनके परिवारों को सौंप दिए गए। सरकार ने मृतकों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है।
मंत्रालय के अनुसार, घायलों की हालत पर नजर रखी जा रही है और किसी भी भारतीय के गंभीर रूप से घायल होने की खबर नहीं है। अब तक मिडिल ईस्ट से करीब 44 हजार लोग भारत वापस आ चुके हैं।
--आईएएनएस
केआर/
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