Credit Card: क्या भारत में स्टूडेंट्स को क्रेडिट कार्ड मिल सकते? ये हैं शुरू करने के सबसे सुरक्षित तरीके
Credit Card tips: कॉलेज शुरू होते ही कई छात्रों के लिए पैसों को खुद संभालने की जिम्मेदारी भी शुरू हो जाती है। छुट्टी की ट्रिप प्लान करना हो, किसी ऑनलाइन सब्सक्रिप्शन का पेमेंट करना हो या रोजमर्रा के खर्च मैनेज करने हों-ऐसे में कई छात्रों के मन में सवाल आता है कि क्या वे क्रेडिट कार्ड ले सकते हैं।
भारत में छात्रों के लिए सीधे क्रेडिट कार्ड लेना आसान नहीं होता, क्योंकि ज्यादातर बैंकों को नियमित आय का सबूत चाहिए। फिर भी कुछ सुरक्षित और आसान तरीके हैं जिनके जरिए छात्र क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करना शुरू कर सकते हैं और धीरे-धीरे अपनी क्रेडिट हिस्ट्री भी बना सकते हैं।
सबसे आम तरीका है फिक्स्ड डिपॉजिट के बदले क्रेडिट कार्ड लेना। इसमें छात्र या उनके माता-पिता बैंक में एक फिक्स्ड डिपॉजिट खोलते हैं। उसी डिपॉजिट के आधार पर बैंक क्रेडिट कार्ड जारी कर देता है। इस व्यवस्था में क्रेडिट कार्ड की लिमिट आमतौर पर उसी डिपॉजिट के आसपास होती है। उदाहरण के तौर पर अगर बैंक में 40 या 50 हजार रुपये की FD कराई गई है तो कार्ड की लिमिट भी लगभग उतनी ही मिलती है।
बैंक के लिए यह व्यवस्था सुरक्षित होती है क्योंकि उसके पास पहले से ही डिपॉजिट के रूप में सुरक्षा मौजूद रहती है। अगर किसी कारण से कार्ड का बिल नहीं चुकाया जाता तो बैंक उस रकम को एफडी से एडजस्ट कर सकता है। यही वजह है कि बिना नियमित आय वाले छात्रों को भी इस तरह का कार्ड आसानी से मिल जाता। कई छात्रों के लिए क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल की शुरुआत करने का यह सबसे आसान तरीका माना जाता है।
दूसरा लोकप्रिय विकल्प ऐड-ऑन क्रेडिट कार्ड है। इसमें माता-पिता मुख्य कार्डहोल्डर रहते हैं और छात्र को उसी अकाउंट से जुड़ा एक अतिरिक्त कार्ड मिल जाता है। इस कार्ड से किया गया पूरा खर्च मुख्य कार्डहोल्डर यानी माता-पिता के बिल में जुड़ता है। कुछ बैंक ऐसे कार्ड पर अलग से खर्च की सीमा तय करने की सुविधा भी देते हैं। इससे छात्रों को खर्च करने की थोड़ी आजादी मिलती है, जबकि माता-पिता खर्च पर नजर भी रख सकते हैं।
हाल के वर्षों में कुछ फिनटेक कंपनियों ने भी युवाओं और छात्रों को ध्यान में रखकर शुरुआती क्रेडिट कार्ड लॉन्च किए हैं। इन कार्डों में अक्सर छोटा डिपॉजिट या प्रीपेड बैलेंस रखना पड़ता है, जिसके आधार पर क्रेडिट लिमिट तय होती है। हालांकि ऐसे कार्ड लेने से पहले छात्रों को फीस और चार्जेज जरूर जांचने चाहिए। कई बार इन प्लेटफॉर्म्स पर सालाना फीस या सर्विस चार्ज पारंपरिक बैंक कार्डों से ज्यादा हो सकते हैं।
फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का कहना है कि क्रेडिट कार्ड का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे शुरुआती उम्र में ही क्रेडिट स्कोर बनना शुरू हो जाता है। यही स्कोर आगे चलकर एजुकेशन लोन, कार लोन या होम लोन लेते समय बेहद अहम होता है, लेकिन इसका फायदा तभी मिलता है जब कार्ड का इस्तेमाल जिम्मेदारी से किया जाए। समय पर बिल चुकाना और गैर-जरूरी खर्च से बचना बेहद जरूरी है।
ज्यादातर छात्रों के लिए FD-बैक्ड क्रेडिट कार्ड या माता-पिता के साथ ऐड-ऑन कार्ड से शुरुआत करना सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है। इससे वे बिना ज्यादा जोखिम लिए धीरे-धीरे क्रेडिट कार्ड सिस्टम को समझ सकते हैं।
(प्रियंका कुमारी)
Oscars 2026: ऑस्कर के रेड कार्पेट पर छाई भारतीय कारीगरी, हॉलीवुड स्टार्स ने पहनी 'स्वदेश' की खास ज्वेलरी
Indian Brand Jewellery at Oscars: हॉलीवुड के सबसे प्रतिष्ठित मंच अकेडमी अवॉर्ड्स यानि ऑस्कर (Academy Awards) के रेड कार्पेट पर इस बार भारतीय कारीगरी की झलक भी देखने को मिली। मशहूर सिंगर ब्रैंडी कार्लाइल और अभिनेत्री कैथरीन शेफर्ड ने भारतीय ब्रांड 'स्वदेश' की खास ज्वेलरी पहनकर ऑस्कर में शिरकत की। उनकी इस स्टाइल ने न सिर्फ फैशन प्रेमियों का ध्यान खींचा, बल्कि भारतीय हस्तकला की खूबसूरती को भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर पेश किया।
ब्रांडी कार्लाइल का ‘पेटल प्रिज्म’ ब्रोच
ब्रांडी कार्लाइल ने रेड कार्पेट पर ‘पेटल प्रिज्म ब्रोच’ पहना, जिसकी डिजाइन सूरजमुखी के आकार से प्रेरित थी। सोने से बने इस ब्रोच के बीच में ओवल कट पन्ना जड़ा हुआ था, जबकि उसके चारों ओर बारीक हीरों की सजावट की गई थी।
इस ब्रोच की खासियत इसकी ओपन-सेटिंग तकनीक है, जिससे रोशनी हीरों के बीच से गुजरते हुए उनकी चमक को और बढ़ा देती है। इस शानदार ज्वेलरी पीस को बनाने में तेलंगाना के कारीगरों को 100 घंटे से ज्यादा का समय लगा। यहां के सुनारों की कारीगरी पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा का हिस्सा है।
कैथरीन शेफर्ड का शानदार डायमंड नेकलेस
वहीं कैथरीन शेफर्ड ने एक बेहद खूबसूरत डायमंड नेकलेस पहना, जिसकी डिजाइन इतनी लचीली थी कि वह कपड़े की तरह गर्दन पर खूबसूरती से गिरती नजर आई। इस नेकलेस की संरचना पंख के बारीक रेशों से प्रेरित थी, जिससे इसके हर हिस्से में हल्की और लहराती हुई मूवमेंट दिखाई देती है।
इस ज्वेलरी पीस में हाथ से जड़े हीरों की एक लगातार चलती पट्टी बनाई गई है, जिसे शेवरॉन पैटर्न में सजाया गया है। साथ ही इसमें विक्टोरियन युग की हल्की झलक भी देखने को मिलती है, जो इसे एक क्लासिक और रोमांटिक लुक देती है।
भारतीय कला को मिला वैश्विक मंच
स्वदेश की ये खास ज्वेलरी क्रिएशंस भारत की समृद्ध हस्तकला परंपरा को सम्मान देती हैं। इनकी डिजाइन और निर्माण में उन कारीगरों की मेहनत झलकती है, जो कीमती धातुओं और रत्नों को अद्भुत कला में बदलने की विरासत पीढ़ियों से संभाले हुए हैं।
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