ट्रंप ने ईरान को छोड़ अब मदद करने वाले देशों को ही दे डाली चेतावनी, जानें क्यों भड़के?
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर भड़क गए हैं. अपनी ये भड़ास उन्होंने ईरान पर नहीं बल्कि मदद करने वाले देशों पर निकाली है. जी हां दरअसल ट्रंप ने NATO के भविष्य को लेकर बड़ा बयान दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिया है कि अगर गठबंधन के सदस्य देश रणनीतिक समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा में अमेरिका का साथ नहीं देते हैं, तो इसका असर NATO के भविष्य पर पड़ सकता है.
ब्रिटेन के प्रतिष्ठित अखबार फाइनेंशियल टाइम्स को दिए एक टेलीफोन इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से लाभ उठाने वाले देशों को इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी साझा करनी चाहिए.
‘फायदा लेने वालों को जिम्मेदारी भी निभानी होगी’
डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिन देशों की ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार इस समुद्री मार्ग पर निर्भर है, उन्हें इसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में आगे आना चाहिए. उनकी ये बात चेतावनी के रूप में देखी जा रही है.
ट्रंप ने कहा, 'यह पूरी तरह उचित है कि जो देश इस जलमार्ग से लाभ उठाते हैं, वे यह सुनिश्चित करने में मदद करें कि वहां कोई खतरा पैदा न हो.'
ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सहयोगी देशों की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिलती है, तो यह NATO के भविष्य के लिए अच्छा संकेत नहीं होगा.
यूक्रेन की मदद का दिया उदाहरण
ट्रंप ने अपने बयान में यूक्रेन का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि रूस के साथ संघर्ष के दौरान अमेरिका ने यूक्रेन की काफी मदद की थी, जबकि उस समय अमेरिका पर ऐसा करने का कोई सीधा दबाव नहीं था. उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि अमेरिका के सहयोगी देश भी जरूरत के समय उसका साथ दें. ट्रंप के अनुसार, अमेरिका लंबे समय से अपने सहयोगियों के लिए खड़ा रहा है, लेकिन कई बार उसे उतना समर्थन नहीं मिलता.
किस तरह की मदद चाहते हैं ट्रंप
जब ट्रंप से पूछा गया कि उन्हें सहयोगी देशों से किस प्रकार की मदद चाहिए, तो उन्होंने संकेत दिया कि इस क्षेत्र में सैन्य सहयोग की आवश्यकता हो सकती है.
उन्होंने विशेष रूप से समुद्री सुरक्षा के लिए माइनस्वीपर जहाजों की तैनाती का जिक्र किया. ये जहाज समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को खोजकर निष्क्रिय करने का काम करते हैं, जिससे समुद्री मार्ग सुरक्षित रहता है.
एयरफोर्स वन में भी दोहराया संदेश
राष्ट्रपति ट्रंप ने एयरफोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान भी यही बात दोहराई. उन्होंने कहा कि अमेरिका हमेशा NATO सहयोगियों के लिए तैयार रहता है और अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन-सा देश इस छोटे से प्रयास में अमेरिका का साथ नहीं देता.
उन्होंने यह भी कहा कि सहयोगी देश ईरान से उत्पन्न संभावित खतरों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. उनका इशारा खाड़ी क्षेत्र में ड्रोन और समुद्री बारूदी सुरंगों जैसी गतिविधियों की ओर था.
ब्रिटेन को लेकर भी जताई नाराजगी
ट्रंप ने इस मुद्दे पर ब्रिटेन के रुख को लेकर भी असंतोष जताया. उन्होंने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केर स्टार्मर के साथ हुई बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका ने समर्थन की उम्मीद की थी, लेकिन ब्रिटेन की ओर से तुरंत प्रतिक्रिया नहीं मिली.
ट्रंप ने कहा कि ब्रिटेन को अमेरिका का सबसे पुराना और मजबूत सहयोगी माना जाता है, इसलिए उनसे ज्यादा सक्रिय समर्थन की उम्मीद थी.
बढ़ सकता है वैश्विक तनाव
विशेषज्ञों का मानना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा को लेकर अमेरिका और उसके सहयोगियों के बीच बढ़ती चर्चा आने वाले समय में वैश्विक राजनीति को प्रभावित कर सकती है. यह समुद्री मार्ग दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और यहां किसी भी प्रकार का तनाव वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर बड़ा असर डाल सकता है.
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