Dhurandhar The Revenge Advance Booking: 'धुरंधर 2' का धमाल, ताबड़तोड़ कर डाली इतनी कमाई
रणवीर सिंह की फिल्म 'धुरंधर : द रिवेंज' की एडवांस बुकिंग शनिवार को शुरू हो चुकी है। इस स्पाय एक्शन ड्रामा फिल्म का क्रेज ऐसा है कि बॉक्स ऑफिस पर इसके ताबड़तोड़ टिकट बिक रहे हैं। पेड प्रीव्यूज के बाद इसके पहले दिन के कलेक्शन के आंकड़े भी शानदार हैं।
Sanju Samson: 'मैं बैचेन हो गया था...5-6 दिन बंद रहा, संजू सैमसन ने कैसे की वापसी? सुनाई पूरी कहानी
Sanju Samson: भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 के दौरान अपने करियर के सबसे मुश्किल दौर का खुलासा किया है। सैमसन ने बताया कि जब उन्हें टीम इंडिया की प्लेइंग इलेवन से बाहर किया गया तो वह पूरी तरह टूट गए थे। यहां तक कि वह 5-6 दिन तक खुद को संभालने की कोशिश करते रहे। हालांकि इसके बाद उन्होंने जबरदस्त वापसी की और शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को टी20 वर्ल्ड कप 2026 का खिताब जिताने में अहम भूमिका निभाई।
संजू सैमसन ने बताया कि न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज के बाद ही उन्हें अंदाजा हो गया था कि प्लेइंग इलेवन में उनकी जगह पक्की नहीं है। उनकी आशंका तब सच साबित हुई जब मुंबई में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वॉर्म-अप मैच में उनकी जगह ईशान किशन को मौका दिया गया।
सैमसन ने इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में कहा,'मैं ऐसा इंसान हूं जो दूसरों के लिए ज्यादा अच्छा कर पाता हूं, लेकिन जब अपने लोगों से ही टीम में जगह के लिए मुकाबला करना पड़ता है तो मैं सहज महसूस नहीं करता। न्यूजीलैंड सीरीज में भी मेरे साथ ऐसा ही हुआ।'
टीम से बाहर होने पर पूरी तरह टूट गए थे संजू
31 वर्षीय सैमसन ने बताया कि टीम से बाहर होना उनके लिए बेहद भावनात्मक पल था। उन्होंने कहा,'मैं बहुत ज्यादा बेचैन हो गया था क्योंकि मेरा सपना वर्ल्ड कप जीतना था और मैं प्लेइंग इलेवन में ही नहीं था। मेरे मन में बार-बार यही चल रहा था कि टीम कुछ नए कॉम्बिनेशन आजमा रही है, तो क्या मैं टीम में हूं भी या नहीं?'
सैमसन ने आगे कहा, 'मैं पूरी तरह टूट गया था। मेरा सपना वर्ल्ड कप जीतने का था और मैं टीम में ही नहीं था। मैं 5-6 दिनों के लिए पूरी तरह गायब हो गया था। उसी दौरान मैंने खुद को फिर से संभालना शुरू किया और तैयारी करने लगा, क्योंकि क्रिकेट में कभी नहीं पता कि कब मौका मिल जाए।'
एक मौका और बदल गई पूरी कहानी
सैमसन की किस्मत का दरवाजा सुपर-8 में जिम्बाब्वे के खिलाफ चेन्नई में खुला। उस मैच में वह बड़ी पारी नहीं खेल पाए, लेकिन टीम में वापसी ने उनका आत्मविश्वास लौटा दिया। इसके बाद उन्होंने टूर्नामेंट में धमाकेदार प्रदर्शन किया। वेस्टइंडीज के खिलाफ 97 रन ठोके, सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ शानदार 89 रन बनाए और फाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ भी अहम 89 रन की पारी खेली। इन पारियों ने भारत की खिताबी जीत की नींव रख दी।
टीम मैनेजमेंट के भरोसे ने बदल दी सोच
सैमसन ने कहा कि जैसे ही उन्हें लगा कि टीम मैनेजमेंट को उन पर भरोसा है, उनकी सोच पूरी तरह बदल गई। उन्होंने कहा कि जब वर्ल्ड कप शुरू हुआ तो मुझे एहसास हुआ कि टीम आपको चाहती है। जिम्बाब्वे मैच से हमें लगातार चार मैच जीतने थे और टीम को मेरी जरूरत थी। वहीं से मेरा आत्मविश्वास वापस आया और मैं पूरी तरह फायर हो गया।
संजू सैमसन की यह कहानी बताती है कि क्रिकेट में एक मौका ही खिलाड़ी की पूरी कहानी बदल सकता है। टीम से बाहर होने के बाद टूट चुके सैमसन ने खुद को संभाला, मौका मिला और उसी मौके को उन्होंने इतिहास में बदल दिया।
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