लोकसभा में अमित शाह का विपक्ष पर तीखा हमला: 'स्पीकर पर अविश्वास देश की बदनामी', राहुल गांधी के व्यवहार पर उठाए सवाल
नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र 2026 के दौरान आज लोकसभा में भारी हंगामा और तीखी बहस देखने को मिली। गृह मंत्री अमित शाह ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए इसे भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक अत्यंत अफसोसजनक पल करार दिया।
अमित शाह ने स्पष्ट कहा कि स्पीकर पद की गरिमा पर सवाल उठाना न केवल सदन का अपमान है, बल्कि यह पूरी दुनिया में देश की छवि को धूमिल करने की एक नाकाम कोशिश है। उन्होंने विपक्ष को नसीहत दी कि हार की हताशा में संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाना बंद करें।
#WATCH | Attacking Lok Sabha LoP Rahul Gandhi, Union Home Minister Amit Shah says, "...He suddenly had an idea - have a debate on his own press conference. This is not a market. This is the Lok Sabha...From your great grandfather to your grandmother to your father, there were… pic.twitter.com/DmGasKsWFq
— ANI (@ANI) March 11, 2026
राहुल गांधी के रिकॉर्ड पर अमित शाह का प्रहार
गृह मंत्री ने राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी के उन आरोपों का आंकड़ों के साथ खंडन किया जिनमें कहा गया था कि विपक्ष की आवाज दबाई जा रही है।
#WATCH | Union Home Minister Amit Shah says, "LoP has grievances that he is not allowed to speak, that the voice of LoP is stifled. I would like to ask him who will decide who has to speak? Speaker? No, you have to decide this. But when it is a chance to speak, you are seen in… pic.twitter.com/j5R89yhn9q
— ANI (@ANI) March 11, 2026
उन्होंने सदन को अवगत कराया कि 17वीं लोकसभा के दौरान कांग्रेस के पास मात्र 52 सांसद थे, लेकिन इसके बावजूद स्पीकर ने उन्हें 157 घंटे से अधिक बोलने का पर्याप्त समय दिया, जो सत्ता पक्ष के मुकाबले छह गुना अधिक था।
शाह ने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी नियमों के अनुसार बोलना ही नहीं जानते और जब सदन में महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा का मौका आता है, तो वे देश छोड़कर बाहर चले जाते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो लोग 1975 की इमरजेंसी में पूरे विपक्ष को जेल भेजने के जिम्मेदार हैं, वे आज अभिव्यक्ति की आजादी की बात कर रहे हैं।
#WATCH | On Opposition's No-Confidence Motion against Lok Sabha Speaker Om Birla, Union HM Amit Shah says, "...While being in Opposition, BJP-NDA had never brought No-Confidence Motion against Lok Sabha Speaker. We worked as a constructive Opposition. We preserved the dignity of… pic.twitter.com/QddAMwIK9L
— ANI (@ANI) March 11, 2026
स्पीकर पद की संवैधानिक गरिमा और अविश्वास प्रस्ताव की जटिलता
अमित शाह ने स्पीकर पद के महत्व को समझाते हुए कहा कि यह पद किसी एक दल का नहीं बल्कि पूरे सदन का संरक्षक होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 94 सी के तहत स्पीकर को केवल असाधारण और गंभीर परिस्थितियों में ही हटाया जा सकता है और इसके लिए सदन में 'इफेक्टिव मेजॉरिटी' की आवश्यकता होती है।
#WATCH | On Opposition's No-Confidence Motion against Lok Sabha Speaker Om Birla, Union HM Amit Shah says, "Constitution has given the role of a mediator to the Speaker. You cast suspicions on the mediator. In 75 years, both the Houses have made the foundation of our democracy… pic.twitter.com/SZHwhvi5h5
— ANI (@ANI) March 11, 2026
शाह ने कहा कि ओम बिरला ने उच्च नैतिक मानदंडों का पालन करते हुए चर्चा के दौरान स्वयं चेयर पर न बैठने का निर्णय लिया, जिसकी सराहना की जानी चाहिए। उन्होंने विपक्ष के नोटिस की खामियों को उजागर करते हुए बताया कि इसमें साल तक गलत लिखा गया था, जो विपक्ष की गैर-गंभीरता को प्रदर्शित करता है।
#WATCH | On Opposition's No-Confidence Motion against Lok Sabha Speaker Om Birla, Union HM Amit Shah says, "This is not ordinary. After about 4 decades, a No-Confidence Motion against Lok Sabha Speaker has been brought. It is unfortunate for Parliamentary politics and this… pic.twitter.com/dPPPEtgbOf
— ANI (@ANI) March 11, 2026
सदन में पप्पू यादव के साथ अनुराग ठाकुर के बीच तीखी नोकझोंक
पूर्णिया सांसद पप्पू यादव और अनुराग ठाकुर के बीच भी व्यक्तिगत छींटाकशी देखने को मिली, जहाँ पप्पू यादव ने निर्दलीय चुनाव लड़ने की चुनौती तक दे डाली। जगदंबिका पाल द्वारा समय की पाबंदी याद दिलाने पर ओवैसी के साथ हुई 'बुजुर्ग' वाली टिप्पणी ने सदन में कुछ पल के लिए माहौल को हल्का भी किया।
गृह मंत्री ने अपने संबोधन के अंत में स्पष्ट किया कि सदन नियमों और परंपराओं से चलता है, किसी की मर्जी से नहीं। उन्होंने कहा कि वेल में आकर कागज फाड़ना और चेयर का अनादर करना लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है।
अमित शाह ने कहा , यदि कोई सदस्य नियमों के विपरीत आचरण करता है, तो उसे रोकना, टोकना और बाहर निकालना स्पीकर का पवित्र दायित्व है। उन्होंने विपक्ष को चेतावनी दी कि यदि वे नियमों का पालन नहीं करना चाहते, तो उन्हें दूसरों पर आरोप लगाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
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