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Acharya Balkrishna Tips: क्या गंजापन दूर कर देगा ततैया का छत्ता? आचार्य बालकृष्ण से जानें वायरल नुस्खे के पीछे की सच्चाई

Acharya Balkrishna Tips: आजकल बाल झड़ने और गंजेपन की समस्या बहुत आम हो गई है. बच्चे हों या बड़े, हर उम्र के लोग इससे परेशान हैं. इंटरनेट और सोशल मीडिया पर रोज नए-नए हेयर केयर नुस्खे वायरल होते रहते हैं. कई लोग बिना सही जानकारी के इन्हें अपनाने लगते हैं. इन दिनों एक घरेलू उपाय खूब चर्चा में है, जिसे ततैया का छत्ता कहा जा रहा है. हाल ही में आचार्य बालकृष्ण ने सोशल मीडिया पर इस वायरल नुस्खे की सच्चाई बताई है. चलिए विस्तार से जानते हैं इसके बारे में. 

वायरल दावे क्या कहते हैं? 

सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि ततैया का छत्ता बालों में लगाने से हेयर फॉल रुक जाता है. कुछ लोग यह भी कहते हैं कि इससे नए बाल उगने लगते हैं. लेकिन सवाल यह है कि क्या यह उपाय सच में सुरक्षित और असरदार है?

आचार्य बालकृष्ण ने क्या बताया

आयुर्वेद विशेषज्ञ आचार्य बालकृष्ण के अनुसार, गंजापन एक जटिल समस्या है. कुछ पारंपरिक उपायों में ततैया के छत्ते का इस्तेमाल बताया गया है, लेकिन इसका सही तरीका जानना बहुत जरूरी है. गलत तरीके से इस्तेमाल करने पर यह नुकसान भी पहुंचा सकता है.

 

ततैया का छत्ता क्यों हो सकता है जोखिम भरा

ततैया का छत्ता सीधे स्कैल्प पर लगाना सुरक्षित नहीं माना जाता. कुछ लोगों की त्वचा संवेदनशील होती है. ऐसे में इससे खुजली, जलन, लालपन या संक्रमण भी हो सकता है. इसलिए इसे हमेशा किसी तेल के साथ पकाकर ही इस्तेमाल करना चाहिए.

घरेलू नुस्खे में इस्तेमाल होने वाली सामग्री

आचार्य बालकृष्ण के अनुसार, ततैया का छत्ता बनाने के लिए सबसे पहले नारियल तेल का इस्तेमाल करें. इसके बाद  गुड़हल के फूल या पत्ते का इस्तेमाल करें. 

बनाने और लगाने की विधि

1 से 2 ग्राम ततैया का छत्ता लें इसे 100 ग्राम नारियल तेल में मिलाएं. इसमें 20 से 25 ग्राम गुड़हल के पत्ते डालें. मिश्रण को धीमी आंच पर अच्छी तरह पकाएं ठंडा होने पर तेल को बालों की जड़ों में लगाएं.  यह नुस्खा पारंपरिक अनुभवों पर आधारित है. इस उपाय को अपनाने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें. अगर खुजली या जलन हो तो तुरंत उपयोग बंद कर दें. किसी भी गंभीर समस्या में विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है.

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रेचक से चतुर्थ तक, चार प्रकार के होते हैं प्राणायाम, शारीरिक-मानसिक संतुलन में कारगर

नई दिल्ली, 22 फरवरी (आईएएनएस)। योग और प्राणायाम आज के तनावपूर्ण जीवन में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने लोगों को प्राणायाम अपनाने की सलाह दी है। मंत्रालय का कहना है कि नियमित प्राणायाम अभ्यास से सांसों पर नियंत्रण आता है और जीवन में संतुलन स्थापित होता है। मंत्रालय ने प्राणायाम के चारों प्रकार के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

पातंजल योग सूत्र में प्राणायाम को चार मुख्य प्रकारों में बांटा गया है। ये प्रकार सांस की गति और प्रवाह के आधार पर समझे जाते हैं। इनका अभ्यास करने से शरीर स्वस्थ रहता है, मन शांत होता है और एकाग्रता बढ़ती है।

आयुष मंत्रालय के अनुसार, इन चारों प्रकार के प्राणायाम को धीरे-धीरे, सही विधि से और योग विशेषज्ञ की सलाह से सीखना चाहिए। रोजाना 10-15 मिनट का अभ्यास भी काफी फायदेमंद होता है। प्राणायाम न केवल शारीरिक स्वास्थ्य सुधारता है, बल्कि चिंता, तनाव और अनिद्रा जैसी समस्याओं से भी छुटकारा दिलाता है।

बाह्यवृत्ति या रेचक :- यह प्राणायाम का पहला प्रकार है, जिसमें सांस को बाहर निकाला जाता है। इसे रेचक कहा जाता है। इस अभ्यास में फेफड़ों से हवा को पूरी तरह बाहर निकालने पर जोर दिया जाता है। रेचक करने से शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते हैं, फेफड़े साफ होते हैं और तनाव कम होता है।

आभ्यंतरवृत्ति या पूरक :- यह दूसरा प्रकार है, जिसमें सांस को अंदर खींचा जाता है। इसे पूरक कहते हैं। इस अभ्यास में गहरी और नियंत्रित सांस अंदर ली जाती है। इससे ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है, शरीर में ऊर्जा का संचार होता है और मन एकाग्र रहता है।

स्तम्भवृत्ति या कुंभक:- यह प्राणायाम का तीसरा और बेहद महत्वपूर्ण प्रकार है। कुंभक में सांस को रोककर रखा जाता है। इसे दो भागों में बांटा जाता है – अंतःकुंभक (सांस अंदर रोकना) और बाह्यकुंभक (सांस बाहर रोकना)। कुंभक अभ्यास से प्राण शक्ति शरीर में संचित होती है, मन शांत होता है और ध्यान की गहराई बढ़ती है। शुरुआत में इसे धीरे-धीरे और विशेषज्ञ की देखरेख में करना चाहिए।

बाह्याभ्यन्तरविषयाक्षेपि या चतुर्थ :- यह चौथा प्रकार है, जिसे चतुर्थ प्राणायाम भी कहा जाता है। यह बाहरी और भीतरी दोनों सांसों के विषयों से परे होता है। इस अवस्था में सांस का प्रवाह स्वाभाविक रूप से रुक जाता है और प्राणायाम की उच्च अवस्था प्राप्त होती है। यह प्रकार बहुत उन्नत है और लंबे अभ्यास के बाद ही संभव होता है। इसमें सांस पर पूर्ण नियंत्रण आ जाता है और योगी को गहन आध्यात्मिक अनुभव होता है।

--आईएएनएस

एमटी/एएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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