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इसके लिए जारी आदेश में कहा गया है कि यह दर 24 फरवरी से लागू होगी। ट्रंप ने 21 फरवरी को सोशल मीडिया पर बताया कि 10 प्रतिशत को बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है, हालांकि इसके लिए अबतक कोई औपचारिक आदेश जारी नहीं हुआ है।
Javed Akhtar: जावेद अख्तर ने तालिबान के नए कानून को बताया अमानवीय; मौलवियों से की ये अपील...
Javed Akhtar Condemns Taliban law: बॉलीवुड के मशहूर लेखक जावेद अख्तर ने तालिबान के नए कानून की कड़ी आलोचना की है, जिसमें घरेलू हिंसा को धर्म के नाम पर जायज बताया गया है। उन्होंने भारत के मौलवियों और मुफ्तियों से इस कानून की बिना शर्त निंदा करने की अपील की है।
क्या कहता है नया कानून
तालिबान ने अपने सुप्रीम लीडर हिबतुल्लाह अखुंदजादा के साइन के साथ 90 पेज का नया पीनल कोड लागू किया। इसके तहत पति अपनी पत्नी को मार सकता है, लेकिन शर्त यह है कि उसकी हड्डी न टूटे और शरीर पर कोई खुला घाव न दिखे। अगर गंभीर चोट या लाठी से हमला साबित होता है, तभी सजा दी जाएगी।
महिलाओं को शिकायत करने का अधिकार तो दिया गया है, लेकिन उन्हें कोर्ट में सबूत पेश करना होगा। खुले घाव दिखाना जरूरी बताया गया है। अगर आरोप साबित हो जाए तो पति को किथित तौर पर 15 दिन की सजा हो सकती है।
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महिलाओं की आजादी पर असर
कानून के मुताबिक, अगर कोई महिला बिना पति की अनुमति अपने मायके जाती है, तो उसे तीन महीने तक जेल हो सकती है। इसके अलावा, महिला को छिपाने वाले रिश्तेदार भी अपराधी माने जा सकते हैं। इस कानून से महिलाओं की आजादी और कानूनी सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ेगा।
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जावेद अख्तर का बयान
Talibans have legalised wife beating but with out any bone fracture. If a wife goes to her parent place with out the husband’s permission , she will be jailed for three months . I beseech the Mufties and mullas
— Javed Akhtar (@Javedakhtarjadu) February 21, 2026
Of India to condemn it unconditionally because it all is being done…
जावेद अख्तर ने 21 फरवरी को X पर लिखा, “तालिबानों ने पत्नी पीटना लीगल कर दिया है लेकिन हड्डी न टूटने तक। अगर पत्नी पति की अनुमति के बिना मायके जाए तो तीन महीने जेल। मैं भारत के मौलवियों से अपील करता हूं कि इसकी बिना शर्त आलोचना करें, क्योंकि यह सब धर्म के नाम पर किया जा रहा है।”
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही आलोचना
विश्लेषकों का कहना है कि तालिबान का यह कदम महिलाओं के कानूनी अधिकारों को कमजोर करता है और घरेलू हिंसा जैसी कुप्रथाओं को मान्यता देता है। संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार समूहों ने इसे महिलाओं के खिलाफ गंभीर कदम बताया है।
तालिबान की इस दंड संहिता से अफगानिस्तान में महिलाओं की सुरक्षा और स्वतंत्रता पर भारी खतरा मंडरा रहा है।
जावेद अख्तर ने तालिबान के नए कानून की कड़ी निंदा की, महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा को अमानवीय बताया और भारत के मौलवियों से बिना शर्त अपील की।
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