आंखों की ये खतरनाक बीमारी छीन सकती है आपकी रोशनी! अभी जानें इसके शुरुआती लक्षण
आंखें हर किसी के लिए जरूरी होती हैं, लेकिन सही देखभाल की कमी के कारण आंखों में एक गंभीर बीमारी का खतरा बना रहता है, जो हमेशा के लिए रोशनी छीन सकता है. आइए जानते हैं कौन सी बीमारी के कारण आंखें देखना बंद कर देती हैं?
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Lathmar Holi 2026 Date: बरसाना और वृंदावन में कब खेली जाएगी लट्ठमार होली? जानिए सही तारीख और महत्व
Lathmar Holi 2026 Date: होली प्रेम, उल्लास और भक्ति का पर्व है. ब्रज क्षेत्र में यह त्योहार साधारण नहीं बल्कि एक भव्य उत्सव होता है. यहां 40 दिनों तक होली मनाई जाती है. बसंत पंचमी से ही ब्रज के मंदिरों में होली की शुरुआत हो जाती है. भगवान का श्रृंगार गुलाल और अबीर से किया जाता है। हर दिन फाग गीत गूंजते हैं. इसी वजह से कहा जाता है “जग होरी, ब्रज होरा”.
लट्ठमार होली की शुरुआत कब होती है
फाल्गुन मास की अष्टमी तिथि से होलाष्टक शुरू होते हैं. इसी के साथ ब्रज की प्रसिद्ध लट्ठमार होली का आगाज भी हो जाता है. बरसाना, नंदगांव, मथुरा और वृंदावन में अलग-अलग रूपों में होली खेली जाती है. चलिए हम आपको बताते हैं ब्रज की लट्ठमार होली किस तारीख से शुरु होगी. ब्रज के किस स्थान पर खेली जाएगी.
कब खेली जाएगी ब्रज में लट्ठमार होली?
लड्डू होली
फाल्गुन शुक्ल अष्टमी को बरसाना के राधारानी मंदिर में लड्डू होली खेली जाती है. इस दिन नंदगांव के हुरियारों को बरसाना आने का निमंत्रण दिया जाता है. मंदिर में विशेष फाग गाए जाते हैं. श्रद्धालुओं को लड्डू प्रसाद मिलता है.
बरसाना लट्ठमार होली
फाल्गुन शुक्ल नवमी को बरसाना की रंगीली गलियों में विश्व प्रसिद्ध लट्ठमार होली होती है. यहां राधा रानी की सखियां, कृष्ण सखाओं पर प्रेम से लट्ठ बरसाती हैं.
इस होली का दृश्य अत्यंत अलौकिक माना जाता है.
नंदगांव लट्ठमार होली
फाल्गुन शुक्ल दशमी को नंदगांव में लट्ठमार होली खेली जाती है. इस दिन बरसाना के हुरियारे नंदगांव पहुंचते हैं. नंद भवन परिसर में यह होली होती है.
श्रीकृष्ण जन्मस्थान होली
रंगभरी एकादशी पर श्रीकृष्ण जन्मस्थान में विशेष होली होती है. रासलीला और फूलों की होली इसका मुख्य आकर्षण रहती है.
छड़ी मार होली
द्वादशी तिथि को रमणरेती में छड़ी मार होली खेली जाती है. यहां बाल स्वरूप में विराजमान भगवान के कारण छोटी छड़ियों से होली होती है. पालकी शोभायात्रा भी निकाली जाती है.
बांके बिहारी मंदिर होली
श्री बांकेबिहारी मंदिर में टेशू के फूलों से बनी प्राकृतिक रंगों की होली खेली जाती है. गोस्वामी समाज चांदी-सोने की पिचकारी से रंग बरसाता है. फूलों की होली भी होती है.
बलदेव हुरंगा
चैत्र मास द्वितीया को बलदेव में दाऊजी हुरंगा खेला जाता है. यहां कपड़ा फाड़ होली होती है. इसी के साथ ब्रज के 40 दिन के होली महोत्सव का समापन होता है.
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