अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल पर बनने जा रहे बोर्ड ऑफ पीस को लेकर नई कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। पाकिस्तान ने ऐलान किया है कि उसके प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अगले सप्ताह वाशिंगटन में होने वाली इस मंच की पहली बैठक में शामिल होंगे। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि विदेश मंत्री इशाक दर भी उनके साथ रहेंगे। दूसरी ओर भारत ने वही निमंत्रण मिलने की बात स्वीकार करते हुए साफ किया है कि वह अभी प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है और सोच समझकर ही कोई कदम उठाएगा।
हम आपको बता दें कि यह मंच शुरुआत में गाजा के अस्थायी शासन और पुनर्निर्माण की देखरेख के लिए सोचा गया था, पर बाद में ट्रंप ने इसे वैश्विक संघर्षों से निपटने वाला व्यापक मंच बताना शुरू कर दिया। यही बदलाव कई देशों और विशेषज्ञों की चिंता का कारण है। उन्हें डर है कि ऐसा कोई ढांचा संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को कमजोर कर सकता है। अभी तक कोई भी प्रमुख जी-7 देश औपचारिक रूप से इससे नहीं जुड़ा है, लेकिन पाकिस्तान उन शुरुआती देशों में रहा जिसने जल्दबाजी में हामी भर दी।
पाकिस्तान का दावा है कि वह यह कदम भले मन से उठा रहा है और वह आठ इस्लामी अरब देशों की सामूहिक आवाज का हिस्सा है। वह फिलिस्तीन के लिए 1967 से पहले की सीमा के आधार पर अलग राज्य और अल कुद्स को राजधानी बनाने की बात दोहरा रहा है। सुनने में यह नैतिक रुख लगता है, लेकिन सवाल यह है कि क्या इस मंच से सच में ऐसा कोई समाधान निकलेगा या यह केवल बड़ी शक्तियों की छवि चमकाने का जरिया बनेगा।
इधर नई दिल्ली का रुख कहीं अधिक परिपक्व और संतुलित दिखता है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने दो टूक कहा है कि भारत पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और संवाद के हर प्रयास का समर्थन करता है, पर किसी भी पहल में शामिल होने से पहले उसके ढांचे, लक्ष्य और प्रभाव का ठंडे दिमाग से आकलन जरूरी है। यही जिम्मेदार शक्ति की पहचान है। हर मंच पर पहुंच जाना कूटनीति नहीं, कई बार संयम ही असली कूटनीति होता है।
पाकिस्तान की आतुरता का एक कारण उसकी वैश्विक छवि भी है। वह लंबे समय से खुद को शांति समर्थक देश दिखाने की कोशिश करता रहा है, जबकि जमीन पर उसका इतिहास उलटा रहा है। ऐसे में उसे हर वह मंच लुभाता है जहां वह अपने लिए जगह और तस्वीर दोनों हासिल कर सके। दावोस में फोटो अवसर मिल चुका है, अब वाशिंगटन में उपस्थिति से वह अपने लिए नई वैधता गढ़ना चाहता है। यह अलग बात है कि विश्व की बड़ी ताकतें अभी दूरी बनाए हुए हैं।
इस पूरे घटनाक्रम की एक और परत भी है। ट्रंप बार बार यह दावा दोहराते रहे हैं कि पिछले वर्ष भारत और पाकिस्तान के बीच टकराव को उन्होंने रुकवाया। भारत इस दावे को साफ नकार चुका है और कह चुका है कि अपने सुरक्षा हितों पर वह किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार नहीं करता। ऐसे में बोर्ड ऑफ पीस जैसा मंच कहीं न कहीं कथानक की लड़ाई का भी मैदान बन सकता है। कौन शांति दूत दिखेगा और किसकी कहानी चलेगी, यह भी दांव पर है। साथ ही भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते को देखते हुए पाकिस्तान को डर है कि कहीं नई दिल्ली और वाशिंगटन के सुधरते रिश्ते उसके लिए मुश्किल न बन जाएं, इसलिए भी शहबाज शरीफ भागे भागे अमेरिका जा रहे हैं।
देखा जाये तो भारत का सतर्क रुख सराहना के योग्य है। विश्व राजनीति में हर चमकती पहल सोना नहीं होती। किसी भी नए मंच में शामिल होना केवल सद्भाव का मामला नहीं, बल्कि संप्रभुता, रणनीतिक स्वतंत्रता और दीर्घकालिक हितों से जुड़ा फैसला होता है। यदि कोई ढांचा संयुक्त राष्ट्र जैसी स्वीकृत संस्था को किनारे कर समानांतर व्यवस्था खड़ी करता है, तो उसके दूरगामी असर होंगे। भारत का ठहरकर देखना बताता है कि वह भावनाओं से नहीं, हितों से संचालित शक्ति है।
पाकिस्तान के लिए यह मंच मानो बेचैनी का इलाज है। उसे हर उस दरवाजे पर दस्तक देनी है जहां से उसे मान्यता, मदद या महत्व मिल सके। लेकिन केवल मंचों पर मौजूदगी से विश्वसनीयता नहीं बनती; वह नीतियों और आचरण से बनती है।
बहरहाल, शांति के नाम पर बनने वाले हर मंच की असली परीक्षा उसके इरादों और परिणामों से होगी। भारत ने समझदारी से गेंद अपने पाले में रखी है; पाकिस्तान ने जल्दबाजी में शॉट खेल दिया है। समय बताएगा किसकी चाल दूर तक जाती है।
Rajpal Yadav: बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव ने अपने 9 करोड़ रुपये के चेक बाउंस और कर्ज मामले में अब तक 2.5 करोड़ रुपये चुका दिए हैं। यह जानकारी अभिनेता के वकील भास्कर उपाध्याय ने दी है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को राजपाल यादव को कम से कम सोमवार तक जेल में रहने का आदेश दिया और उनके अंतरिम जमानत याचिका की सुनवाई को तब तक के लिए स्थगित कर दिया।
वकील भास्कर उपाध्याय ने ANI को बताया कि उन्होंने गुरुवार को सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध इसलिए किया क्योंकि दायर की गई जमानत याचिका प्रतिवादी पक्ष के जवाब पर आधारित है। उन्होंने कहा कि वह जेल में अपने मुवक्किल से मिलकर आगे की कार्रवाई और भुगतान के निर्देश लेंगे।
#WATCH | Delhi: On hearing of Actor Rajpal Yadav’s Case, Counsel, Actor Rajpal Yadav, Bhaskar Upadhyay says, "... Opposite party did not reply to our bail plea. We requested the Court to meet Rajpal Yadav in jail and sought instructions from him. The court was adamant about his… pic.twitter.com/1NkNmxwDZp
मामले में मूल कर्ज की राशि 5 करोड़ रुपये थी, जिसमें ब्याज, जुर्माना और अन्य शुल्क जोड़कर कुल देय राशि लगभग 9 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। वकील ने बताया कि अब तक 2.5 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है और बाकी राशि के भुगतान के लिए अदालत सोमवार को फैसला करेगी।
फिल्म निर्देशन के लिए राजपाल यादव ने लिया था कर्ज
राजपाल यादव पर यह मामला 2012 में बनी उनकी निर्देशक भूमिका वाली फिल्म आता-पता लापता के असफल होने के बाद उभरा, जिसके कारण उनके बकाया कर्ज में वृद्धि हुई। इससे पहले 2 फरवरी को अदालत ने आदेश दिया था कि अभिनेता को सात अलग-अलग मामलों में प्रत्येक में 1.35 करोड़ रुपये का भुगतान करना आवश्यक है और जो राशि पहले से रजिस्ट्रार जनरल के पास जमा की गई थी, उसे शिकायतकर्ता के पक्ष में जारी किया जाए।
राजपाल यादव के मैनेजर ने यह भी बताया कि बॉलीवुड के कई बड़े सितारे, जैसे सलमान खान, अजय देवगन, मीका सिंह, गुरु रंधावा और सोनू सूद ने अभिनेता को वित्तीय मदद दी है।
तिहाड़ जेल में किया सरेंडर
अभिनेता ने 5 फरवरी को दिल्ली की तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण किया था, जब दिल्ली हाईकोर्ट ने उनके अंतिम समय के अनुरोध को खारिज कर दिया था। अब अदालत के अगले आदेश का इंतजार है, जो इस लंबित विवाद और बकाया राशि के भुगतान को लेकर निर्णय करेगा।
नई दिल्ली: भारत ने अपनी हवाई सीमाओं को अभेद्य बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने सशस्त्र बलों की क्षमता को बढ़ाने के लिए कुल 3.60 लाख करोड़ रुपये के सैन्य उपकरणों की खरीद को मंजूरी दी है। इस फैसले … Fri, 13 Feb 2026 18:11:23 GMT