MP कांग्रेस में शामिल हुए भीम आर्मी के पदाधिकारी, ‘घर वापसी’ के लिए मिले 600 से अधिक आवेदन
मध्यप्रदेश में कांग्रेस से जुड़ने और पुराने नेताओं-कार्यकर्ताओं की वापसी को लेकर पार्टी ने संगठनात्मक गतिविधियां तेज कर दी हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और विधायक आरिफ मसूद के नेतृत्व में भीम आर्मी के कई प्रदेश और जिला स्तरीय पदाधिकारियों ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। इस दौरान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक भी मौजूद रहे।
कांग्रेस में शामिल होने वालों में भीम आर्मी के प्रदेश सचिव विलास पटेल, प्रदेश महासचिव सत्येंद्र विमल, विधि प्रभारी डकेश पाटिल, विधानसभा अध्यक्ष नागेश, जिला अध्यक्ष रंजीत दामले, जिला उपाध्यक्ष नीलेश हेरोडे और प्रकाश वानखेड़े सहित अन्य पदाधिकारी शामिल हैं।
जीतू पटवारी ने किया स्वागत
इस मौके पर जीतू पटवारी ने कहा कि कांग्रेस संविधान, सामाजिक न्याय, समानता और लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखने वाले सभी लोगों का स्वागत करती है। उन्होंने पार्टी की विचारधारा से जुड़कर संगठन को मजबूत करने के लिए कांग्रेस में शामिल हुए लोगों का स्वागत किया।
‘घर वापसी’ के लिए 600 से अधिक आवेदन
कांग्रेस अब पार्टी छोड़कर जा चुके नेताओं और कार्यकर्ताओं को दोबारा संगठन से जोड़ने के लिए ‘घर वापसी’ कार्यक्रम की योजना बना रही है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुताबिक, अब तक इस अभियान के तहत 600 से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। इनमें 200 से अधिक आवेदन वर्तमान एवं पूर्व जिला अध्यक्षों, विधायकों, पूर्व विधायकों और पूर्व मंत्रियों के बताए गए हैं।
पार्टी की योजना इस अभियान को जिला कांग्रेस कमेटियों की सहमति और समन्वय से आगे बढ़ाने की है। कांग्रेस का कहना है कि पुराने साथियों की वापसी पर निर्णय लेने से पहले संबंधित जिला इकाइयों से विचार-विमर्श किया जाएगा। उचित समय पर सहमति बनने के बाद ही नेताओं और कार्यकर्ताओं की संगठन में वापसी की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
कांग्रेस इस पहल के जरिए संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और जनहित से जुड़े मुद्दों पर अपनी सक्रियता बढ़ाने की तैयारी में है। पार्टी ने संविधान की रक्षा, सामाजिक न्याय और आम जनता के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल बताया है।
भोपाल में ‘जय जोहार’ बोलने पर आदिवासी छात्रों को गालियां देने का आरोप, थाना प्रभारी निलंबित, उमंग सिंघार ने की FIR की मांग
राजधानी भोपाल में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे आदिवासी छात्रों के साथ पुलिस के व्यवहार का मामला सामने आया है। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान आदिवासी छात्रों द्वारा ‘जय जोहार’ का नारा लगाने पर मिसरोद थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार ने उनके प्रति अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और गालियां दीं। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला तूल पकड़ गया। वीडियो सामने आने के बाद भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार को निलंबित कर दिया है।
जानकारी के अनुसार, भोपाल में आदिवासी छात्र अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान छात्र मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ने लगे। पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक लिया। आरोप है कि इस दौरान छात्रों को जबरन पुलिस वाहन में बैठाया गया। छात्र वाहन में बैठने के दौरान ‘जय जोहार’ के नारे लगा रहे थे।
इसी बीच वाहन के बाहर मौजूद मिसरोद थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार द्वारा छात्रों के प्रति अभद्र भाषा का इस्तेमाल किए जाने का आरोप लगा। घटना का वीडियो किसी ने रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर साझा कर दिया, जिसके बाद पुलिस के व्यवहार पर सवाल उठने लगे।
वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस कमिश्नर की कार्रवाई
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने और मामले को लेकर नाराजगी सामने आने के बाद भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार को निलंबित कर दिया। पुलिस विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अलग-अलग पहलुओं की जांच शुरू कर दी है।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने जताई नाराजगी
इस मामले को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए घटना को गंभीर और निंदनीय बताया। सिंघार ने मांग की कि आदिवासी छात्रों के साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार करने वाले पुलिसकर्मी के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए। उन्होंने इस घटना को आदिवासी समाज के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताते हुए संबंधित अधिकारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई।
आदिवासी संगठनों ने की पुलिस आयुक्त से मुलाकात, सख्त कार्रवाई की मांग
आदिवासी संगठनों ने भी पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचकर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की थी। आदिवासी कल्याण संघ के सदस्यों ने अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर से मिलकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। भोपाल पुलिस अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर शैलेन्द्र सिंह चौहान ने बताया कि सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा था, जिसमें निरीक्षक रतन सिंह परिहार द्वारा आदिवासी छात्रों के संबंध में टिप्पणी की जा रही थी। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए निरीक्षक रतन सिंह परिहार को निलंबित कर दिया है। एफआईआर दर्ज होने और जांच के निष्कर्षों को लेकर आगे की स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
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