MP Congress चीफ Jitu Patwari ने लगाए बिजली कटौती के आरोप तो CM Mohan Yadav ने दिया यह जवाब
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पूरे राज्य में बिजली संकट का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि कई गांवों में लगातार तीन-चार दिनों तक बिजली गुल रही है। पटवारी ने लगातार हो रही बिजली कटौती, भारी-भरकम बिजली बिलों और बिजली आपूर्ति व्यवस्था की ठीक से निगरानी न होने को लेकर राज्य सरकार की आलोचना की है। पटवारी ने कहा कि मध्य प्रदेश में अंधेरा छाया हुआ है। गांवों में लगातार तीन-चार दिनों से बिजली के बल्ब नहीं जल रहे हैं। पूरे राज्य में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को देखने वाला कोई नहीं है।
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उन्होंने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि सिंधिया के आवास का बिजली बिल, गांवों में गरीब परिवारों को भेजे गए बिजली बिलों से भी कम था। पटवारी ने कहा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के महल का बिजली बिल, गरीबों की झोपड़ियों के बिजली बिलों से भी कम था। एक तरफ गरीब परिवारों को हजारों रुपये के बिजली बिल मिल रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ उनके घर अभी भी अंधेरे में डूबे हुए हैं।
कांग्रेस नेता ने राज्य के बिजली मंत्री की गैर-मौजूदगी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि लोग उन्हें ढूंढ रहे हैं और उनसे जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिजली मंत्री पिछले पांच महीनों से लापता हैं और लोग उनकी तस्वीरें लेकर उन्हें ढूंढ रहे हैं। जब मंत्री, विधायक और भाजपा कार्यकर्ता यह अंधेरा देखते हैं, तो उन्हें शर्म आनी चाहिए। मुख्यमंत्री जी, पूरे राज्य में बिजली विभाग में भारी कुप्रबंधन है। बिजली कटौती, लोड शेडिंग और बिजली के तारों की मरम्मत के नाम पर हर जगह अंधेरा छाया हुआ है।
पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से आग्रह किया कि वे स्थिति की समीक्षा करें और तुरंत सुधारात्मक कदम उठाएं। सरकार के इस दावे को चुनौती देते हुए कि राज्य में बिजली की कोई कमी नहीं है, उन्होंने सवाल किया कि अगर पर्याप्त बिजली उपलब्ध है, तो गांवों में बिजली क्यों काटी जा रही है? पटवारी ने कहा कि आपने (मुख्यमंत्री यादव) कहा था कि हमारे पास अतिरिक्त बिजली है। तो फिर गांव अंधेरे में क्यों हैं? राज्य दिल्ली मेट्रो को बिजली बेचता है, लेकिन यहां के गांव अंधेरे में क्यों हैं? यहां बिजली सबसे कम लागत पर पैदा होती है, फिर भी गांवों में बिजली क्यों नहीं है? लोगों को गुमराह करना बंद करें और बिजली आपूर्ति व्यवस्था में सुधार करें। मंत्री कहां हैं? उन्हें सामने लाएं।
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इस बीच, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने माना कि बारिश के पैटर्न में बदलाव और कई इलाकों में धान की रोपाई में देरी के कारण बिजली की मांग बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस स्थिति से निपटने के लिए दूसरे राज्यों से अतिरिक्त बिजली का इंतजाम किया है। मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि यह सच है कि बारिश के पैटर्न में अचानक बदलाव और धान की रोपाई में देरी के कारण कई जगहों पर बिजली की मांग बढ़ गई है। ऐसी स्थिति में, हमें गुजरात की सरदार सरोवर परियोजना से 800 मेगावाट बिजली मिल रही है। हमने पंजाब और उत्तर प्रदेश से भी कुछ अतिरिक्त बिजली ली है ताकि यहां की स्थिति को नियंत्रित किया जा सके। एक-दो दिनों में सब कुछ सामान्य हो जाएगा।
दुष्यंत गौतम की नियुक्ति के खिलाफ Congress का देहरादून में उग्र प्रदर्शन
(फोटो के साथ) देहरादून, 15 अक्टूबर चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी खुलासे की सीबीआई जांच के बीच भाजपा नेता दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने का विरोध तेज करते हुए कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को यहां लोकभवन के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकताओं के साथ पार्टी की उत्तराखंड इकाई के अध्यक्ष गणेश गोदियाल, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, प्रदेश चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह और प्रदेश चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत सहित अनेक वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। इस मौके पर गोदियाल ने कहा, ‘‘जब से दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाया गया है, तब से हम राज्यपाल से मिलकर उन्हें एक ज्ञापन सौंपना चाह रहे हैं।
लेकिन हमें मिलने का समय नहीं दिया गया। हम अपनी बात कहां रखें?’’ हालांकि, पुलिस बल ने कांग्रेस नेताओं को आगे बढ़ने से रोक दिया। इस दौरान कई कांग्रेस नेताओं को हिरासत में भी लिया गया।
प्रदर्शन से पहले, गोदियाल तथा अन्य वरिष्ठ नेताओं ने इस मुद्दे पर प्रेसवार्ता को भी संबोधित किया जिसमें उन्होंने गौतम की राज्यपाल पद पर नियुक्ति के निर्णय को वापस लिए जाने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी भी दी। गोदियाल ने कहा कि पांच साल पहले हुए अंकिता हत्याकांड के कथित वीआईपी का अब तक खुलासा नहीं हो पाया है जबकि मरने से पहले उसने कथित तौर पर कहा था कि वनंत्रा रिजॉर्ट में एक वीआईपी को विशेष सेवा देने के लिए उस पर दवाब डाला जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के ही एक पूर्व विधायक द्वारा वीआईपी की पहचान गौतम के रूप में की गयी, ‘ लेकिन अफसोस है कि केंद्र सरकार ने ऐसे आरोपी व्यक्ति को जांच और पूछताछ से बचाने के लिए एक नयी तकनीक कानूनी छूट का प्रयोग किया और उसे राज्यपाल बना दिया।’’ गोदियाल ने कहा कि केंद्र सरकार के इस कदम से स्पष्ट होता है कि वीआईपी प्रकरण में कोई गंभीर और गहरी गुत्थी जरूर है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ‘‘उस व्यक्ति को सिक्किम का राज्यपाल बनाकर केंद्र ने उत्तराखंड की जनता के चेहरे पर तमाचा जड़ने की कोशिश की है, उसके स्वाभिमान को नेस्तनाबूद किया है।’’ गोदियाल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर भी मामले में चुप्पी साधने का आरोप लगाया और कहा कि इससे पता चलता है कि उन्होंने भी अपने नेताओं को बचाने का काम किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने राज्य की महिलाओं में महाकाली की शक्ति निहित बताते हुए उनका आहवान किया कि वे अंकिता को न्याय दिलाने के लिए घरों से बाहर आएं और देश की सरकार को झुकाएं। उन्होंने गौरा देवी और तीलू रौतेली जैसी महिलाओं का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘ अंकिता के हत्यारे को राज्यपाल का पद नहीं जेल की सलाखें मिलनी चाहिए।’’ रावत ने कहा कि अंकिता भंडारी प्रकरण से जुड़ा पूरा घटनाक्रम हमारी संस्कृति, अस्मिता और गौरव पर चोट है।
उन्होंने कहा, ‘‘अंकिता ने हमारे गौरव की रक्षा के लिए अपने प्राणों का उत्सर्ग किया और अब यह उत्तराखंड के लोगों का दायित्व है कि हम उसके त्याग को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाएं।’’ कांग्रेस नेता ने कहा कि अगर वीआईपी मामले की सीबीआई जांच चल रही है और अभी तक यह नहीं कहा गया है कि इसमें कोई वीआईपी नहीं था तो ऐसे में संदिग्ध माने गए व्यक्ति को राजभवन में भेजना षडयंत्र भी है। उन्होंने कहा कि यह केवल अंकिता के मां-बाप की नहीं बल्कि सभी माता-पिताओं और भाइयों की लड़ाई है। रावत ने नयी दिल्ली में इंडिया गेट पर धरने पर बैठे अंकिता के माता-पिता के आंसू पोंछने और उनकी आवाज को राष्ट्रीय आवाज बनाने के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका वाद्रा को धन्यवाद भी दिया।
उन्होंने अंकिता के माता-पिता को हिरासत में लिए जाने की भी घोर भर्त्सना भी की और कहा कि इस मामले में देश हमारी ओर देख रहा है कि उत्तराखंड के लोग इस लड़ाई को कैसे लड़ते हैं। ऋषिकेश के पास वनंत्रा रिजॉर्ट में बतौर रिसेप्शनिस्ट काम करने वाली 19 वर्षीय अंकिता की 18 सितंबर 2022 को रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य ने अपने दो कर्मचारियों -सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता के साथ मिलकर हत्या कर दी थी। घटना के चार दिन बाद चीला नहर से अंकिता का शव बरामद हुआ था।
तीनों को इस मामले में अदालत से उम्रकैद की सजा सुनाई गयी है। हालांकि, पिछले साल दिसंबर में पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर और खुद को उनकी पत्नी बताने वाली अभिनेत्री उर्मिला सनावर के बीच बातचीत के ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद अंकिता हत्याकांड में कथित वीआईपी के शामिल होने के मामले में फिर उबाल आ गया। इसे लेकर कांग्रेस समेत तमाम राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों द्वारा सीबीआई जांच की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन किया गया जिसमें अंकिता के माता-पिता भी शामिल हुए।
इसके बाद इस साल जनवरी में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंकिता के माता-पिता से मुलाकात कर सीबीआई जांच की सिफारिश की। हालांकि, इसी बीच गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने के बाद इस मामले ने फिर तूल पकड़ लिया। इसके विरोध में अंकिता के माता-पिता ने बुधवार को दिल्ली में इंडिया गेट पर धरना भी दिया।
उनकी मांग है कि जब तक मामले में सीबीआई जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक सिक्किम के राज्यपाल के रूप में गौतम की नियुक्ति पर रोक लगाई जाए।
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