मतदान में बाधा डालने के आरोपों के बीच मेहरपुर में बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी समर्थकों के बीच झड़प होने पर 23 लोग घायल हो गए। मुजीब नगर पुलिस स्टेशन के प्रमुख जाहिदुल इस्लाम ने बीडीन्यूज़24 को बताया कि बीएनपी और जमात के बीच झड़प की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में किया। जमात के तीन समर्थकों को मौके पर ही गिरफ्तार कर पुलिस स्टेशन ले जाया गया। फिलहाल स्थिति शांत है और मतदान बिना किसी बाधा के चल रहा है।
शीर्ष नेताओं ने मतदान किया
बांग्लादेश की दो प्रमुख प्रतिस्पर्धी पार्टियों के शीर्ष नेताओं के साथ-साथ अंतरिम प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने भी गुरुवार को देश के 13वें संसदीय चुनाव के लिए मतदान शुरू होने पर अपने मत डाले। देश भर के 300 संसदीय क्षेत्रों में से 299 में मतदान सुबह 7:30 बजे (स्थानीय समयानुसार) शुरू हुआ और यह शाम 4:30 बजे तक जारी रहेगा।
ढाका में हुए महत्वपूर्ण संसदीय चुनाव में हिंदुओं ने अपना वोट डाला
ढाका-6 निर्वाचन क्षेत्र के हिंदू आज के महत्वपूर्ण राष्ट्रीय चुनाव में अपने लोकतांत्रिक अधिकारों और मताधिकार का प्रयोग करने के लिए आगे आए। नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के तहत मतदान हो रहा है, जिसने विश्वसनीय और पारदर्शी चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्धता जताई है। इसी प्रयास के तहत, यूरोपीय संघ और राष्ट्रमंडल (जिसका बांग्लादेश सदस्य है) के प्रतिनिधिमंडलों सहित लगभग 500 अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक और विदेशी पत्रकार उपस्थित रहेंगे।
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जैसे-जैसे साल 2026 आगे बढ़ रहा है, दुनिया भर के मुसलमानों के लिए साल का सबसे मुकद्दस वक्त करीब आ गया है। ओमान ने आधिकारिक तौर पर यह कन्फर्म कर दिया है कि इस साल रमजान का महीना 19 फरवरी से शुरू होने जा रहा है। इसका मतलब है कि अब बस कुछ ही दिनों में मस्जिदों से तरावीह की गूँज सुनाई देगी और घरों में सहरी-इफ्तारी की रौनक बढ़ जाएगी।
जैसा कि हम जानते हैं, इस्लामिक कैलेंडर पूरी तरह चाँद (lunar-based) पर निर्भर करता है। यही वजह है कि हर साल रमजान की तारीखें बदलती रहती हैं। इस बार चाँद की चाल को देखते हुए ओमान ने 19 फरवरी की तारीख पर मुहर लगा दी है। यह सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत है जिसका इंतजार हर मोमिन को रहता है।
अक्सर लोग समझते हैं कि रमजान का मतलब सिर्फ सुबह से शाम तक भूखा-प्यासा रहना है, लेकिन बात इससे कहीं गहरी है। यह महीना खुद को बेहतर बनाने, अपनी कमियों पर गौर करने और खुदा से रिश्ता मजबूत करने का है।
ओमान के मुस्लिम समुदायों में इस दौरान नमाज़ और कुरान की तिलावत बढ़ जाती है। और इतना ही नहीं बल्कि यह महीना सिखाता है कि हम अपने आस-पास के जरूरतमंदों का ख्याल रखें। जकात और सदका (दान) के जरिए लोग एक-दूसरे की मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाते हैं। इफ्तार के समय जब पूरा परिवार और दोस्त एक साथ बैठते हैं, तो वह भाईचारे का मंजर देखने लायक होता है।
मस्जिदों में 'तरावीह' की विशेष नमाजों के लिए तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। ओमान की सड़कों और बाजारों में एक अलग ही सुकून और खुशबू महसूस की जा सकती है। लोग मानसिक और शारीरिक रूप से इस पाक महीने के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं। निचोड़ यह है कि 19 फरवरी से शुरू हो रहा यह महीना ओमान और पूरी दुनिया के मुसलमानों के लिए अपनी आस्था को और गहरा करने का एक सुनहरा मौका है। यह वक्त है रुकने का, सोचने का और एक नेक इंसान बनने की दिशा में कदम बढ़ाने का।
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