महाराष्ट्र की नवनियुक्त उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने बुधवार को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से महत्वपूर्ण मुलाकात की। अपने पति और एनसीपी नेता अजित पवार के आकस्मिक निधन के बाद पदभार संभालने वाली सुनेत्रा पवार का यह पहला दिल्ली दौरा है। इस दौरे को न केवल एक शिष्टाचार भेंट बल्कि एनसीपी के भविष्य की रणनीति के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दिल्ली दौरे की मुख्य झलकियाँ
सुनेत्रा पवार के साथ इस दौरे पर उनके दोनों बेटे, पार्थ और जय, तथा एनसीपी के वरिष्ठ नेता व राज्यसभा सांसद प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे भी मौजूद थे।
पीएम मोदी और शाह से मुलाकात: प्रधानमंत्री ने अजित पवार के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया और सुनेत्रा पवार को उनके नए उत्तरदायित्व के लिए केंद्र के पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया।
विलीनीकरण (Merger) पर रुख: चर्चाओं के विपरीत, एनसीपी (अजित पवार गुट) के नेताओं ने स्पष्ट किया कि शरद पवार गुट के साथ विलीनीकरण का मुद्दा वर्तमान एजेंडे में नहीं है। पार्टी के कई विधायक विलीनीकरण के विचार का कड़ा विरोध कर रहे हैं।
सुनेत्रा पवार के दिल्ली दौरे की खास बातें
मर्जर का विरोध जारी: NCP का अजित पवार गुट मर्जर का विरोध जारी रखे हुए है। अजित पवार के साथ जुड़े नेताओं ने किसी भी तरह के कंसोलिडेशन के साथ जाने से मना कर दिया है। दौरे के दौरान NCP और NCP (SP) के मर्जर के बारे में कोई चर्चा नहीं हुई, और यह एजेंडा में भी नहीं था।
सुनेत्रा पवार का राज्यसभा स्टेटस: सुनेत्रा पवार ने अभी तक राज्यसभा से इस्तीफा नहीं दिया है। वह फिलहाल अपने अगले पॉलिटिकल कदम के बारे में “वेट एंड वॉच” अप्रोच अपना रही हैं।
NCP प्रेसिडेंट पर आम सहमति: सुनेत्रा पवार को नेशनल प्रेसिडेंट बनाने पर पार्टी में आम सहमति है।
NCP प्रेसिडेंट चुनने का प्रोसेस: नेशनल प्रेसिडेंट बनाने का प्रोसेस फरवरी के आखिर तक शुरू होने की उम्मीद है। इन कदमों को फॉर्मल बनाने के लिए मुंबई में नेशनल एग्जीक्यूटिव की मीटिंग होगी।
पार्थ पवार के राज्यसभा जाने की उम्मीद: खबर है कि पार्टी पार्थ पवार को राज्यसभा भेजने को लेकर पॉजिटिव है।
बारामती प्लेन क्रैश में अजीत पवार की दुखद मौत
अजीत पवार को लेकर एक छोटा चार्टर्ड एयरक्राफ्ट 28 जनवरी को सुबह करीब 8 बजे मुंबई से उड़ा था। करीब 45 मिनट बाद, बारामती एयरपोर्ट के पास लैंड करने की कोशिश में प्लेन क्रैश हो गया। अजीत पवार के अलावा, प्लेन में चार और लोग सवार थे और इस हादसे में कोई नहीं बचा। हादसे की वजह का पता लगाने के लिए अभी जांच चल रही है।
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पिछले पाँच दशकों से अधिक समय तक देश के नीतिगत और रणनीतिक फैसलों का केंद्र रहे साउथ ब्लॉक से अब प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) नए निर्मित ‘सेवा तीर्थ’ परिसर में स्थानांतरित हो रहा है। शुक्रवार दोपहर यह ऐतिहासिक बदलाव औपचारिक रूप से शुरू होगा, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साउथ ब्लॉक में अपनी अंतिम कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता करेंगे। सूत्रों के अनुसार, यह कैबिनेट बैठक साउथ ब्लॉक में होने वाली आखिरी उच्चस्तरीय बैठक होगी। इसके तुरंत बाद केंद्रीय मंत्री और शीर्ष नौकरशाह साउथ ब्लॉक से सेवा तीर्थ परिसर के लिए रवाना होंगे। सेवा तीर्थ, जो रायसीना हिल स्थित प्रतिष्ठित इमारत से एक किलोमीटर से भी कम दूरी पर बना है, अब देश के प्रशासनिक संचालन का नया केंद्र बनने जा रहा है।
हम आपको बता दें कि नए परिसर में केवल प्रधानमंत्री कार्यालय ही नहीं, बल्कि कैबिनेट सचिवालय, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) का कार्यालय और ‘इंडिया हाउस’ भी स्थापित किया गया है। इंडिया हाउस को उच्चस्तरीय अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों की मेजबानी के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है, ताकि कूटनीतिक बैठकों और वार्ताओं के लिए आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा सकें। ऐतिहासिक दृष्टि से देखें तो साउथ ब्लॉक का संबंध स्वतंत्र भारत की प्रशासनिक यात्रा से गहराई से जुड़ा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, देश की पहली कैबिनेट बैठक पंडित जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में साउथ ब्लॉक में ही आयोजित की गई थी। यही इमारत दशकों तक रक्षा और विदेश नीति जैसे अहम मंत्रालयों का भी केंद्र रही।
हम आपको बता दें कि कैबिनेट सचिवालय पहले ही राष्ट्रपति भवन से सेवा तीर्थ-2 में स्थानांतरित हो चुका है, जबकि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का कार्यालय सरदार पटेल भवन से सेवा तीर्थ-3 में शिफ्ट होने की प्रक्रिया में है। यह पूरा इलाका अब नए ‘एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव’ के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहाँ सरकार के शीर्ष कार्यालय एकीकृत ढांचे में काम करेंगे।
हम आपको बता दें कि साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक का निर्माण 1931 में ब्रिटिश शासनकाल के दौरान हुआ था। रायसीना हिल पर स्थित ये दोनों इमारतें लंबे समय तक भारत की सत्ता का प्रतीक रही हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय का इतिहास भी दिलचस्प रहा है। 1947 में इसे ‘प्रधानमंत्री सचिवालय’ (पीएमएस) के रूप में एक छोटे प्रशासनिक सहयोगी ढांचे के तौर पर शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य प्रधानमंत्री को बुनियादी प्रशासनिक सहायता प्रदान करना था।
1964 में लाल बहादुर शास्त्री के प्रधानमंत्री बनने के बाद पीएमएस को ‘एलोकेशन ऑफ बिजनेस रूल्स’ के तहत वैधानिक दर्जा मिला, जिससे इसकी संरचना और अधिकारों में बड़ा बदलाव आया। बाद के वर्षों में इंदिरा गांधी के कार्यकाल में इस कार्यालय की शक्ति और प्रभाव में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। 1977 में मोरारजी देसाई के प्रधानमंत्रित्व काल में इसका नाम बदलकर औपचारिक रूप से ‘प्रधानमंत्री कार्यालय’ (पीएमओ) कर दिया गया।
अब पीएमओ के स्थानांतरण के बाद रक्षा और विदेश मंत्रालय भी आने वाले हफ्तों में साउथ ब्लॉक से अन्य दफ्तरों में शिफ्ट होंगे। इस क्रमिक बदलाव का अर्थ है कि देश की सत्ता का पारंपरिक केंद्र पूरी तरह रायसीना हिल से बाहर स्थानांतरित हो जाएगा। उधर, नॉर्थ ब्लॉक को पहले ही पूरी तरह खाली कर दिया गया है। वहाँ स्थित मंत्रालय अब कर्तव्य पथ (पूर्व में राजपथ) के आसपास बने नए भवनों में काम कर रहे हैं। यह व्यापक पुनर्संरचना केंद्र सरकार के प्रशासनिक ढांचे को आधुनिक, सुगठित और तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सेवा तीर्थ जैसे आधुनिक परिसरों में स्थानांतरण से मंत्रालयों के बीच समन्वय बेहतर होगा, सुरक्षा व्यवस्थाएँ मजबूत होंगी और प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी। वहीं, साउथ और नॉर्थ ब्लॉक जैसी ऐतिहासिक इमारतें भविष्य में विरासत स्थलों के रूप में संरक्षित किए जाने की संभावना भी जताई जा रही है। बहरहाल, साउथ ब्लॉक से पीएमओ का जाना केवल एक कार्यालय का स्थानांतरण नहीं, बल्कि भारत की प्रशासनिक संरचना के एक नए युग की शुरुआत का संकेत है।
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