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फिजिकल हेल्थ- सिगरेट छोड़ दीजिए, मेमोरी अच्छी हो जाएगी:45 साल के बाद छोड़ना भी फायदेमंद, स्मोकिंग से होतीं 10 बड़ी बीमारियां

क्या आपकी उम्र 40 पार है और आप अभी भी सिगरेट पीते हैं? आपको पता है कि सिगरेट नुकसान करती है, लेकिन फिर भी लगता है कि छोड़ने के लिए अब बहुत देर हो चुकी। जितना नुकसान होना था, हो चुका है। अगर ऐसा है तो आपके लिए खुशखबरी है। हाल ही में हेल्थ जर्नल 'लैंसेट हेल्दी लॉन्गेविटी' में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, 40 के बाद भी अगर आपने सिगरेट पीना छोड़ दिया तो आपकी याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता उन लोगों के मुकाबले बेहतर होगी, जो 40 के बाद भी सिगरेट पिए जा रहे हैं। इसलिए अभी भी देर नहीं हुई है। इस स्टडी में 40 साल या उससे अधिक उम्र के 9,436 लोगों के डेटा का अध्ययन किया गया। इसमें वे लोग शामिल थे, जिन्होंने स्मोकिंग छोड़ दी थी और वे भी, जो अभी भी स्मोक कर रहे थे। दोनों तरह के लोगों की मेमोरी और बोलने की क्षमता जैसे कई टेस्ट किए गए। स्टडी में पता चला कि स्मोकिंग छोड़ने से सिर्फ लंग्स और हार्ट हेल्थ नहीं सुधरती है, बल्कि ब्रेन हेल्थ में भी सुधार होता है। डिमेंशिया का जोखिम भी कम हो जाता है। इसलिए ‘फिजिकल हेल्थ’ में आज जानेंगे कि स्मोकिंग छोड़ने के बाद ब्रेन हेल्थ कैसे सुधरती है। साथ ही जानेंगे कि- स्मोकिंग से ब्रेन को क्या नुकसान होता है? स्मोकिंग के कारण ब्रेन तक खून सप्लाई करने वाली ब्लड वेसल्स को नुकसान होता है। इससे फ्री रेडिकल्स बढ़ते हैं और ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस बढ़ता है। इसके कारण ब्रेन सेल्स डैमेज होती हैं। इससे धीरे-धीरे कॉग्निटिव डिक्लाइन (ब्रेन के काम करने की क्षमता में कमी) होता रहता है, जो डिमेंशिया की वजह बनता है। स्मोकिंग से किन बीमारियों का जोखिम बढ़ता है? सिगरेट का धुआं फेफड़ों से होकर हार्ट तक पहुंचता है, फिर खून के जरिए पूरे शरीर में फैलता है। इसमें निकोटिन, कार्बन मोनोऑक्साइड और हजारों कार्सिनोजेन्स होते हैं, जो कैंसर का कारण बनते हैं। स्मोकिंग से हार्ट डिजीज, स्ट्रोक, डायबिटीज और कैंसर का खतरा कई गुना हो जाता है। ग्राफिक में देखिए स्मोकिंग से कौन सी बीमारियां होती हैं- डॉ. रोहित शर्मा के मुताबिक, इन बीमारियों से बचाव का एकमात्र तरीका स्मोकिंग छोड़ना ही है। शरीर खुद को हील करने की क्षमता रखता है, लेकिन जो लोग लंबे समय से स्मोकिंग कर रहे हैं, उन्हें ज्यादा वक्त लगता है। धैर्य रखें, रिजल्ट्स धीरे-धीरे दिखेंगे। सिगरेट छोड़ने के लिए कभी देर नहीं होती लैंसेट की इस स्टडी से पता चलता है कि कोई व्यक्ति किसी भी उम्र में स्मोकिंग छोड़े, उसकी ब्रेन हेल्थ में रिकवरी जरूर होती है। जबकि लोग सोचते हैं कि अगर स्मोकिंग करते हुए ज्यादा उम्र बीत गई है तो छोड़ने का कोई मतलब नहीं है। अगर स्मोकर्स को ये पता चले कि किसी भी उम्र में सिगरेट छोड़ने से याददाश्त और सोचने की क्षमता बेहतर हो सकती है, तो ये उनके लिए बड़ी प्रेरणा बन सकती है। इसके बाद शरीर में क्या बदलाव आते हैं? स्मोकिंग छोड़ने के तुरंत बाद शरीर हीलिंग शुरू कर देता है। इसके 2 से 3 हफ्तों बाद ही शरीर में सकारात्मक सुधार दिखने लगते हैं। इसके 1 से 9 महीनों के बीच शरीर धीरे-धीरे खुद को रिपेयर करता है। ब्लड सर्कुलेशन सुधरता है, फेफड़े साफ होने लगते हैं, सांस नहीं फूलती है और शख्स अधिक ऊर्जावान महसूस करने लगता है। स्मोकिंग कैसे छोड़ें इसके लिए सबसे पहले कोई मोटिवेशन ढूंढें। आप इसे ऐसे सोच सकते हैं कि परिवार में किसी को पैसिव स्मोकर नहीं बनाना चाहते हैं। पैसिव स्मोकर यानी वह व्यक्ति, जो खुद स्मोकिंग नहीं करता, लेकिन स्मोकर के आसपास रहने के कारण उसके छोड़े गए धुएं को सांस के जरिए अंदर लेता है। खुद की अच्छी सेहत या लंबे जीवन के लिए प्रण ले सकते हैं। सिगरेट छोड़ने के लिए अगर आपको अपना मोटिवेशन नहीं पता है तो नीचे दिए ग्राफिक से चुन सकते हैं- स्मोकिंग छोड़ने के असरदार तरीके स्मोकिंग छोड़ने के कॉमन तरीकों से हटकर हम कुछ ऐसा बता रहे हैं, जो आपकी इस जर्नी को ज्यादा इंटरेस्टिंग बनाएंगे। ग्राफिक में देखिए- चलिए समझते हैं कि ये किताबें सिगरेट छोड़ेने में कैसे मदद करती हैं- 1. द इजी वे टू स्टॉप स्मोकिंग एलेन कार की यह किताब सिगरेट के मेंटल एडिक्शन को खत्म करती है। डर, तनाव कम करने के साथ “सिगरेट के बिना नहीं रह सकते” वाली सोच को खत्म करती है। इससे स्मोकिंग छोड़ना आसान हो जाता है। आपको ज्यादा स्ट्रगल नहीं करना पड़ता है। 2. स्मोक फ्री इन 30 डेज डेनियल एफ. साइडमेन की यह किताब 30 दिन का स्टेप-बाय-स्टेप प्लान देती है। रोज छोटे लक्ष्य तय करने में मदद करती है। इससे निकोटिन क्रेविंग और मूड स्विंग का रिस्क कम होता है और धीरे-धीरे आदत छूटती है। 3. हाऊ टू स्टॉप स्मोकिंग: 30 सॉल्यूशन टू सूट यू मैथ्यू एल्ड्रिक ने इस किताब में बताया है कि हर स्मोकर एक जैसा नहीं होता। इसलिए यह किताब 30 अलग-अलग तरीकों से सिगरेट छोड़ने के ऑप्शन देती है, ताकि व्यक्ति अपनी पर्सनैलिटी, लाइफस्टाइल और ट्रिगर्स के हिसाब से सही तरीका चुन सके। 4. स्टॉप स्मोकिंग विद CBT मैक्स पेंबर्टन की यह किताब CBT यानी कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी पर आधारित है। यह सिखाती है कि स्ट्रेस, गुस्सा या बोरियत में सिगरेट की इच्छा क्यों होती है और उन थॉट पैटर्न्स को कैसे बदला जाए। 5. स्टॉप स्मोकिंग स्टे कूल रिचर्ड क्रेज की यह किताब सिगरेट छोड़ने की प्रक्रिया को आसान बनाती है। रियल-लाइफ अनुभवों के जरिए बताती है कि शुरुआती दिनों की बेचैनी सामान्य है और सही माइंडसेट से इसे बिना दबाव के संभाला जा सकता है। पॉडकास्ट भी करेंगे मदद पॉडकास्ट के लिए आपको अतिरिक्त समय देने की भी जरूरत नहीं है। इन पॉडकास्ट को आप वॉक करते समय, ऑफिस जाते समय या किचन में खाना पकाने के दौरान सुनें। इन्हें लगातार सुनने से क्रेविंग, ट्रिगर्स और मेंटल ब्लॉक्स को पहचानकर ठीक करना आसान होता है। ग्राफिक में देखिए- ये पॉडकास्ट स्मोकिंग छोड़ने में कैसे मददगार हैं, समझिए फ्रीडम फ्रॉम स्मोकिंग: द एलेन कार जर्नी इस पॉडकास्ट में एलेन कार का मेथड और उनकी असली क्विट जर्नी साझा की गई है। असली कहानियों से मोटिवेशन मिलता है, जिससे आदत की जड़ समझने और छोड़ने में मदद मिलती है। एलेन कार एक ब्रिटिश लेखक थे। उन्होंने 'इजी वे टू स्टॉप स्मोकिंग' नाम की मशहूर किताब लिखी, जिसकी मदद से दुनियाभर में लाखों लोगों ने बिना स्ट्रगल किए स्मोकिंग छोड़ी। स्टॉप स्मोकिंग हिप्नोसिस जेसन न्यूलैंड की यह सीरीज हिप्नोसिस और रिलैक्सेशन मेथड से माइंड को रीप्रोग्राम करती है, क्रेविंग को कम करती है और तनाव से निपटने में मदद करती है। जेसन न्यूलैंड एक ब्रिटिश हिप्नोथेरपिस्ट हैं, जो खास तौर पर स्टॉप स्मोकिंग हिप्नोसिस के लिए जाने जाते हैं। क्विट स्मोकिंग टुडे पॉडकास्ट वैज्ञानिक टिप्स, कॉग्निटिव कोचिंग और हिप्नोसिस मेथड के साथ यह पॉडकास्ट कदम-दर-कदम गाइड करता है कि कैसे तकलीफ के बिना स्मोकिंग छोड़ना संभव है। क्विट स्मोकिंग नाऊ पॉडकास्ट विद डॉ. डेनियल सेडमेन डॉ. साइडमेन के एक्सपर्ट सेशन छोटे, असरदार हैं। ये अलग-अलग टॉपिक पर फोकस करते हैं, ताकि आप अपनी पुरानी सोच और आदत को बदल सकें। यू कैन क्विट स्मोकिंग इंस्पायरिंग इंटरव्यू और रियल लाइफ कहानियों के जरिये यह पॉडकास्ट आपके मनोबल को मजबूत बनाता है। साथ ही यह विश्वास दिलाता है कि सिगरेट छोड़ना संभव है। ……………… ये खबर भी पढ़िए फिजिकल हेल्थ- रोज एक ही समय पर सोएं–जागें: अनियमित नींद से बढ़ता है 172 बीमारियों का रिस्क, नींद पर अब तक की सबसे बड़ी स्टडी साइंस जर्नल 'हेल्थ डेटा साइंस' में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, रोज अलग-अलग समय पर सोना शरीर के लिए उतना ही नुकसानदायक है, जितना कम नींद लेना। आगे पढ़िए…

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जरूरत की खबर- क्या फ्रोजन मटर खाना अच्छा है?:न्यूट्रिशनिस्ट से जानें यूज करने का सही तरीका, खरीदते हुए बरतें ये 6 सावधानियां

फ्रोजन मटर साल के बारहों महीने आसानी से मिलती है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे न छीलने का झंझट होता है और न ही साफ करने की जरूरत। इससे समय और मेहनत दोनों की बचत होती है। अपनी इसी 'रेडी-टू-यूज' खासियत के कारण फ्रोजन मटर आज डेली कुकिंग का एक जरूरी हिस्सा बन चुकी है। हालांकि इसे लेकर अक्सर लोगों के मन में कई तरह के सवाल आते हैं कि क्या यह फ्रेश मटर जितनी ही फायदेमंद है? क्या फ्रीज करने की प्रक्रिया में इसके पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं? कहीं ये भी प्रोसेस्ड फूड की कैटेगरी में तो नहीं आती है? चलिए, आज ‘जरूरत की खबर’ में हम फ्रोजन मटर के बारे में विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- फ्रोजन मटर इस्तेमाल करने का सही तरीका क्या है? बाजार से खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? एक्सपर्ट: डॉ. अनु अग्रवाल, न्यूट्रिशनिस्ट और ‘वनडाइटटुडे’ की फाउंडर सवाल- फ्रोजन मटर कैसे तैयार की जाती है? जवाब- इसे ताजी हरी मटर से ही तैयार किया जाता है। सबसे पहले मटर को छीलकर अच्छी तरह साफ किया जाता है। फिर इसे धोकर उबलते पानी में डाला जाता है, जिसे ब्लांचिंग कहते हैं। इससे मटर का स्वाद और पोषक तत्व दोनों सुरक्षित रहते हैं। ठंडा होने पर मटर को फ्रीज कर दिया जाता है। यह प्रक्रिया मटर को लंबे समय तक ताजा और सुरक्षित बनाए रखती है। सवाल- मटर को फ्रीज क्यों किया जाता है? इसके क्या फायदे हैं? जवाब- इससे उसकी ताजगी, स्वाद और पोषक तत्व लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं। फ्रीज करने से मटर खराब नहीं होती है। उसे महीनों तक इस्तेमाल किया जा सकता है। साथ ही कुकिंग आसान और तेज होती है। सवाल- क्या फ्रोजन मटर में प्रिजर्वेटिव्स मिलाए जाते हैं? जवाब- नहीं, अच्छी क्वालिटी की फ्रोजन मटर में आमतौर पर कोई प्रिजर्वेटिव नहीं मिलाया जाता है। फ्रीजिंग की प्रक्रिया ही मटर को सुरक्षित रखने का आसान तरीका है। फिर भी खरीदते समय पैकेट पर इंग्रीडिएंट लिस्ट एक बार जरूर देखें। सवाल- क्या फ्रोजन मटर और फ्रेश मटर के पोषक तत्व एकसमान होते हैं? जवाब- डॉ. अनु अग्रवाल बताती हैं कि दोनों के पोषक तत्व लगभग एकसमान होते हैं। दिसंबर, 2014 में ‘जर्नल ऑफ एग्रीकल्चर एंड फूड केमिस्ट्री’ में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, फ्रोजन सब्जियों में ताजी सब्जियों के समान ही विटामिन-मिनरल्स होते हैं। नीचे दिए ग्राफिक से 100 ग्राम फ्रेश मटर और फ्रोजन मटर की न्यूट्रिशनल वैल्यू समझिए- सवाल- क्या फ्रोजन मटर सेहत के लिए सुरक्षित है? जवाब- हां, फ्रोजन मटर सेहत के लिए सुरक्षित है। सही तरीके से स्टोर और इस्तेमाल की गई फ्रोजन मटर में पोषक तत्व बने रहते हैं। यह फ्रेश मटर की तरह ही पौष्टिक और फायदेमंद होती है। नीचे दिए ग्राफिक से मटर के हेल्थ बेनिफिट्स समझिए- सवाल- फ्रोजन और फ्रेश मटर में से कौन सी ज्यादा हेल्दी है? जवाब- स्वाद के मामले में फ्रेश मटर थोड़ी बेहतर लगती है। इसकी मिठास ज्यादा नेचुरल होती है। लेकिन अगर बात पोषण की करें तो फ्रोजन मटर किसी भी तरह से कम नहीं है। सवाल- क्या फ्रोजन मटर खाने के कोई नुकसान भी हैं? जवाब- फ्रोजन मटर आमतौर पर सुरक्षित होती है। लेकिन कुछ लोगों को इसके हल्के नुकसान हो सकते हैं। जैसेकि- सवाल- फ्रोजन मटर यूज करने का सही तरीका क्या है? जवाब- फ्रोजन मटर को सही तरीके से इस्तेमाल करने पर उसका स्वाद और पोषण दोनों बने रहते हैं। नीचे दिए ग्राफिक से इसका सही तरीका समझिए- सवाल- फ्रोजन मटर खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? जवाब- अच्छी फ्रोजन मटर खरीदने के लिए कुछ बेसिक बातों का ध्यान रखना जरूरी है। इसे नीचे ग्राफिक से समझिए- सवाल- क्या फ्रोजन मटर बच्चों और बुजुर्गों के लिए सुरक्षित है? जवाब- हां, फ्रोजन मटर बच्चों और बुजुर्गों के लिए सुरक्षित है। बशर्ते यह अच्छी क्वालिटी की हो और इसे सही तरीके से पकाया गया हो। सवाल- किन लोगों को फ्रोजन मटर नहीं खाना चाहिए? जवाब- कुछ लोगों को फ्रोजन मटर खाने से समस्या हो सकती है। इसलिए उन्हें इससे बचना चाहिए। जैसेकि- ……………………. जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- शकरकंद में रोडामाइन-बी की मिलावट: FSSAI ने बताया शुद्धता की जांच कैसे करें, चमकदार नहीं, मिट्‌टी वाला ही खरीदें मिलावटखोर बाजार में मिलने वाली गुलाबी या गहरे बैंगनी रंग की शकरकंद को ज्यादा ताजा, चमकदार और आकर्षक दिखाने के लिए केमिकल रंगों का इस्तेमाल करते हैं। ये सिंथेटिक कलर शरीर के लिए बहुत नुकसानदायक हैं। पूरी खबर पढ़िए…

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यजुवेंद्र चहल ने माहवेश के लिए ये क्या लिख दिया, सोशल मीडिया पर हुई पोस्ट वायरल, पहले भी कर चुके है कई कांड

chahal no money no honey post viral: इन दिनों कॉमेंट्री के मैदान पर हाथ आजमा रहे युजवेंद्र चहल का नो मनी नो हनी वाला पोस्ट भले ही कुछ शब्दों और इमोजी तक सीमित हो, लेकिन इसके मायने सोशल मीडिया ने बहुत बड़े निकाल लिए हैं. यह तंज था या सिर्फ मस्तीइसका जवाब तो चहल ही दे सकते हैं, Mon, 2 Feb 2026 20:36:23 +0530

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