ईरान के सुप्रीम लीडर आया सैयद अली खामिनी कहीं छुपे नहीं है बल्कि वह कुछ दिनों के बाद खुलकर सामने आए हैं और ना सिर्फ सामने आए बल्कि उनकी हालिया सार्वजनिक उपस्थिति ने उन तमाम अटकलों और अफवाहों का करारा जवाब दिया है जिसमें उनके छिपे होने या फिर बंकर में जाने की खबरें फैलाई जा रही थी। दरअसल खामनेई ने कोम में जमकरान मस्जिद का दौरा किया। यह स्थल शिया समुदाय के लिए आध्यात्मिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है। वहां उनकी उपस्थिति ने उनके समर्थकों में विश्वास जगाया है। उन्होंने तेहरान में इमाम खुमेनी के स्मारक का दौरा किया। यह दौरा दहा-ए फज्र यानी इस्लामी क्रांति की 47वीं वर्षगांठ की शुरुआत के अवसर पर किया गया। उनकी तस्वीरों के साथ सार्वजनिक रूप से सामने आने का उद्देश्य यह दिखाना है कि वे देश की कमान पूरी मजबूती के साथ अभी भी संभाल रहे हैं। इसके बाद उन्होंने गरजते हुए अमेरिका को खुली चेतावनी दे डाली। उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा ईरान पर कोई भी सैन्य हमला मिडिल ईस्ट में क्षेत्रीय युद्ध को जन्म देगा जिससे पूरे इलाके में बड़े पैमाने पर संघर्ष फैल सकता है।
ईरानी नेता का यह बयान तब सामने आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इस्लामी गणराज्य पर सैन्य हमले की धमकी दी है। माना जा रहा है कि 86 वर्षीय आयातुल्लाह अली खामिनी की ये टिप्पणियां अब तक की उनके सबसे प्रत्यक्ष धमकी है। ईरानी सरकारी टेलीविज़न ने कामी के हवाले से बताया कि अमेरिकियों को यह पता होना चाहिए कि अगर वे युद्ध शुरू करते हैं तो इस बार यह एक क्षेत्रीय युद्ध होगा। हमें उकसाया नहीं जाना चाहिए और ना ही हम किसी देश पर हमला करना चाहते हैं। लेकिन ईरानी राष्ट्र किसी भी ऐसे व्यक्ति को करारा जवाब देगा जो उस पर हमला करेगा या फिर उसे परेशान करेगा।
ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर कालिबाफ ने कहा कि इस्लामी गणराज्य ईरान अब यूरोपीय संघ की सभी सेनाओं को आतंकवादी संगठन मानता है। उनका यह कड़ा बयान यूरोपीय संघ द्वारा ईरान के अर्धसैनिक बल रिवोल्यूशनरी गार्ड को आतंकवादी संगठन घोषित किए जाने के फैसले के बाद आया है। यूरोपीय संघ ने यह कदम ईरान में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान कथित रूप से की गई खूनी कार्रवाई के मद्देनजर उठाया था। कालिबाफ की इस घोषणा को मुख्य रूप से प्रतीकात्मक माना जा रहा है। 2019 में पारित एक कानून के तहत ईरान ने अमेरिका द्वारा रिवोल्यूशनरी गार्ड को आतंकवादी संगठन घोषित किए जाने के जवाब में अन्य देशों की सेनाओं को भी इसी कैटिगरी में रखा था।
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जिस तरह से भारत ने अमेरिका के टेरिफ की काट के लिए नए-नए फार्मूले अपनाए हैं, उसे लेकर ट्रंप भी परेशान है। क्योंकि भारत पिछले कई महीनों से अमेरिकी व्यापार का विकल्प तलाशने में जुटा हुआ है जिसका असर भी दिखाई दे रहा है। हाल ही में भारत ने कई ऐसे देशों के साथ डील की है जो काफी फायदेमंद हैं और भारत की अर्थव्यवस्था में चार चांद लगाने वाले हैं। जिन देशों के साथ डील हुई है। उनमें से कई अमेरिका के कट्टर दुश्मन भी हैं। क्योंकि जिस वक्त अमेरिका और यूरोप के रिश्ते तनाव की ओर बढ़े हैं, ठीक उसी वक्त भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट हुआ है जो सबसे ज्यादा भारत को ही फायदा पहुंचाने वाला है।
यह डील देखकर ट्रंप घबराए हुए हैं और वो भारत के साथ रिश्ते सुधारने में जुट गए हैं। इसके लिए हाल ही में ट्रंप की टीमें कई बार दिल्ली का दौरा कर चुकी हैं। अमेरिका की ओर से लगातार ऐसे कई संकेत मिले हैं कि भारत पर लगाया गया टेररिफ़ जल्द ही कम हो सकता है। इसी बीच एक ऐसा बड़ा सिग्नल मिला है जिससे लग रहा है कि भारत अमेरिका के बीच कोई बड़ी डील होने वाली है और इसका संकेत भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के अमेरिकी दौरे से मिला है।
खबर है कि जयशंकर एक बड़ी और अहम बैठक के लिए अमेरिका जा रहे हैं। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर 3 दिन के लिए अमेरिका जाने वाले हैं जो दोनों देशों के बीच संबंधों को और गति देने वाला है। विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने क्रिटिकल मिनरल्स पर मंत्री स्तरीय बैठक बुलाई है।
जिसमें शामिल होने के लिए 2 फरवरी से 4 फरवरी तक एस जयशंकर अमेरिका के दौरे पर होंगे। वे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्कोविय की ओर से बुलाई गई क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्ट्रियल मीटिंग में हिस्सा लेंगे। इस दौरे में एस जयशंकर अमेरिकी सरकार के सीनियर सदस्यों के साथ भी मीटिंग करेंगे। दरअसल क्रिटिकल मिनरल्स वे खनिज पदार्थ हैं जो किसी भी देश की आर्थिक उन्नति और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। इनकी कमी से आधुनिक तकनीकों का उत्पादन रुक सकता है क्योंकि इनके विकल्प खोजना बहुत कठिन या महंगा होता है।
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