जिस तरह से भारत ने अमेरिका के टेरिफ की काट के लिए नए-नए फार्मूले अपनाए हैं, उसे लेकर ट्रंप भी परेशान है। क्योंकि भारत पिछले कई महीनों से अमेरिकी व्यापार का विकल्प तलाशने में जुटा हुआ है जिसका असर भी दिखाई दे रहा है। हाल ही में भारत ने कई ऐसे देशों के साथ डील की है जो काफी फायदेमंद हैं और भारत की अर्थव्यवस्था में चार चांद लगाने वाले हैं। जिन देशों के साथ डील हुई है। उनमें से कई अमेरिका के कट्टर दुश्मन भी हैं। क्योंकि जिस वक्त अमेरिका और यूरोप के रिश्ते तनाव की ओर बढ़े हैं, ठीक उसी वक्त भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट हुआ है जो सबसे ज्यादा भारत को ही फायदा पहुंचाने वाला है।
यह डील देखकर ट्रंप घबराए हुए हैं और वो भारत के साथ रिश्ते सुधारने में जुट गए हैं। इसके लिए हाल ही में ट्रंप की टीमें कई बार दिल्ली का दौरा कर चुकी हैं। अमेरिका की ओर से लगातार ऐसे कई संकेत मिले हैं कि भारत पर लगाया गया टेररिफ़ जल्द ही कम हो सकता है। इसी बीच एक ऐसा बड़ा सिग्नल मिला है जिससे लग रहा है कि भारत अमेरिका के बीच कोई बड़ी डील होने वाली है और इसका संकेत भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के अमेरिकी दौरे से मिला है।
खबर है कि जयशंकर एक बड़ी और अहम बैठक के लिए अमेरिका जा रहे हैं। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर 3 दिन के लिए अमेरिका जाने वाले हैं जो दोनों देशों के बीच संबंधों को और गति देने वाला है। विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने क्रिटिकल मिनरल्स पर मंत्री स्तरीय बैठक बुलाई है।
जिसमें शामिल होने के लिए 2 फरवरी से 4 फरवरी तक एस जयशंकर अमेरिका के दौरे पर होंगे। वे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्कोविय की ओर से बुलाई गई क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्ट्रियल मीटिंग में हिस्सा लेंगे। इस दौरे में एस जयशंकर अमेरिकी सरकार के सीनियर सदस्यों के साथ भी मीटिंग करेंगे। दरअसल क्रिटिकल मिनरल्स वे खनिज पदार्थ हैं जो किसी भी देश की आर्थिक उन्नति और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। इनकी कमी से आधुनिक तकनीकों का उत्पादन रुक सकता है क्योंकि इनके विकल्प खोजना बहुत कठिन या महंगा होता है।
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पाकिस्तान के ग्वादर में न्यू चाइनीस कैंप इलाके में भारी गोलीबारी और धमाकों की खबर सामने आ रही है। यह हमला बीएएलए के ऑपरेशन हेरोफ 2.0 के तहत किया गया है। सूत्रों के मुताबिक हमले में सुरक्षा बलों और कर्मियों को निशाना बनाया। दरअसल बलूचिस्तान के 12 से ज्यादा शहरों में ऑपरेशन हेरोफ के तहत बलूच लड़ाकों ने कब्जा करने का प्रयास किया और चीनी कैंप बड़ा हमला ग्वादर में किया गया।
बलूच बागियों के खिलाफ ऑपरेशन, 15 पाक सैनिक, 92 विद्रोही मारे गए
पाकिस्तानी सेना ने इससे पहले बताया था कि अशांत बलूचिस्तान प्रांत में सुरक्षा बलों के कई अभियानों में कम से कम 15 पाकिस्तानी सैनिक और 92 विद्रोही मारे गए हैं। सेना ने एक बयान में कहा कि ये अभियान शनिवार को जातीय बलूच समूहों के हमलों के बाद शुरू किए गए।
बयान में कहा गया है कि सतर्क सुरक्षा बलों एजेंसियों ने तेजी से कार्रवाई करते हुए विद्रोहियों की शांति भंग करने की कोशिशों को नाकाम कर दिया।
सेना के मुताबिक, विद्रोहियों ने आम नागरिकों को भी निशाना बनाया, जिसमें महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और मजदूरों सहित 15 लोगों की मौत हो गई। शनिवार को पंजगुर और हरनाई जिलों में अलग अलग सुरक्षा अभियानों में बैन संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान से जुड़े 41 लोग मारे गए थे। सेना के अनुसार पिछले दो दिनों में बलूचिस्तान में जारी अभियान के तहत मारे गए विद्रोहियों की कुल संख्या 133 हो गई है।
पाकिस्तान के आरोपों को भारत ने नकारा
भारत ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान में शांति भंग करने में उसकी भूमिका होने के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया और इसे पाकिस्तान की 'आंतरिक विफलताओं' से ध्यान भटकाने की रणनीति करार दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान के दमन, बर्बरता और मानवाधिकार उल्लंघनो के रेकॉर्ड की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा, यह पाकिस्तान की आआंतरिक नाकामियों से ध्यान भटकाने की सामान्य रणनीति के अलावा कुछ नहीं है।
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