घर के अंदर अचानक जमीन फाड़कर निकला पानी का तेज फव्वारा, क्या है वायरल वीडियो का सच?
सोशल मीडिया पर कब क्या देखने को मिल जाए कुछ पता नहीं होता है. कई बार ऐसे वीडियो देखने को मिल जाते हैं, जो अपने आप में हैरान करने वाले होते हैं. कुछ वीडियो ऐसे होते हैं, जिन्हें देखने के बाद भी अपने ही आंखों पर यकीन नहीं होता है. दरअसल, एक ऐसा ही वीडियो सोशल मीडिया पर छाया है, जिसमें देखा जा सकता है कि धरती फाटकर तेजी से पानी निकलने लगती है. इस वीडियो को देखने के बाद हर किसी ने हैरानी जताई है. हर कोई सवाल कर रहा है कि आखिर ये कैसे हुआ?
बता दें कि ये घटना छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर से सामने आई है, जहां एक रिहायशी घर के भीतर अचानक जमीन फट गई और तेज दबाव के साथ पानी बाहर निकलने लगा. इस पूरी घटना का सीसीटीवी फुटेज अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि पानी की धार इतनी तेज थी कि पास में खड़ा व्यक्ति मुश्किल से खुद को बचा पाया.
सीसीटीवी में कैद हुआ खौफनाक मंजर
वीडियो के मुताबिक, घटना 29 जनवरी की सुबह करीब 8 बजकर 45 मिनट की है. एक व्यक्ति जैसे ही सीढ़ियों से नीचे उतर रहा होता है, उसी दौरान गेट के बाहर से पानी निकलता हुआ दिखाई देता है. कुछ ही सेकेंड में घर के भीतर जमीन फट जाती है और पानी ऊपर की ओर फव्वारे की तरह निकलने लगता है. अचानक हुए इस घटनाक्रम से इलाके में अफरा-तफरी मच गई.
बगल के प्लॉट में चल रही थी बोरिंग
प्राथमिक जानकारी के अनुसार, जिस समय यह घटना हुई उस वक्त पास के एक नए प्लॉट में बोरिंग और ड्रिलिंग का काम चल रहा था. माना जा रहा है कि ड्रिलिंग के दौरान भूमिगत जलधाराओं में अत्यधिक दबाव बन गया, जिसके कारण कमजोर सतह से पानी ने बाहर निकलने का रास्ता बना लिया.
छत्तीसगढ़ | बिलासपुर में एक प्लॉट में हैवी मशीन से बोरिंग करने का काम हो रहा था। हाईप्रेशर बनने से पड़ोसी के मकान का बोरिंग पाइप फट गया। एकदम जमीन फट गई और पानी की धार फूट पड़ी। pic.twitter.com/ClVFNwoGh2
— Sachin Gupta (@SachinGuptaUP) January 31, 2026
भू-एक्सपर्ट्स की क्या है राय
भू-विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी क्षेत्र में पहले से बोरिंग मौजूद हो और उसके नजदीक नई ड्रिलिंग की जाए, तो भूमिगत जलस्तर और जलधाराओं में असामान्य दबाव उत्पन्न हो सकता है. यदि जमीन की सिलिंग या संरचना कमजोर हो, तो पानी अचानक सतह को तोड़कर बाहर आ सकता है. इस मामले में भी यही स्थिति सामने आई है.
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
घटना के बाद स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है. लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि अवैध और बिना अनुमति की जा रही ड्रिलिंग और बोरिंग पर सख्ती से रोक लगाई जाए. उनका कहना है कि ऐसी लापरवाही भविष्य में बड़े हादसे का कारण बन सकती है. फिलहाल प्रशासन की ओर से मामले की जांच की बात कही जा रही है.
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Budget 2026: बजट में बायोगैस वाली सीएनजी के लिए बड़ा ऐलान, जानें इससे आम आदमी को कैसे मिलेगी राहत
Budget 2026: केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को देश का बजट पेश किया. संसद में पेश किए गए बजट में उन्होंने कई बड़ी घोषणाएं की, जो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से आम आदमियों को फायदा पहुंचाएगा. सरकार ने बजट के मंच से तय किया कि बायोगैस वाली सीएनजी पर टैक्स का बोझ नहीं पड़ेगा. सरकार के इस फैसले से आम आदमी पर गाड़ी चलाते वक्त बोझ नहीं पड़ेगा. उनकी जेब हल्की ही ढिली होगी. बजट की ये घोषणा सीधे आम आदमियों को लाभ पहुंचाएंगी.
बायोगैस वाली सीएनजी सस्ती होगी
वित्त मंत्री ने घोषणा की है कि अब बायोगैस मिक्स सीएनजी पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क यानी सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी का कैल्कुलेशन करते वक्त बायोगैस के पूरे प्राइज को बाहर रखा जाएगा. इसका फायदा ये होगा कि बायोगैस बनाने वाली सीएनजी सस्ती हो जाएगी और टैक्स का बोझ कम हो जाएगा. इससे पहले बायोगैस के प्राइस को भी शामिल किया जाता था.
बाजार में तेजी से आ रहे ऐसे वाहन
खेतों के कचरे, फसल के वेस्टेज और कूड़े आदि से बायोगैस को तैयार किया जाता है. इस बायोगैस को रेगुलर सीएनजी में मिलाकर कम कार्बन वाला फ्यूल तैयार किया जाता है. ये फ्यूल धीरे-धीरे ऑटोमोबाइल सेक्टर में अपनी जगह बना रहा है. ऐसे कई वाहन निर्माता कंपनियां है, जो ऐसे फ्यूल्स पर चलने वाले वाहनों को तेजी से बाजार में उतार रही हैं. सरकार का कहना है कि इससे पर्यावरण को नुकसान कम होगा और क्लीन एनर्जी को इससे बढ़ावा मिलेगा.
पहले क्या नियम था?
साल 2023 में सरकार ने बायोगैस को लेकर आंशिक राहत दी थी. उस वक्त सिर्फ बायोगैस पर दिए गए जीएसटी को एक्साइज ड्यूटी घटाया जाता था. हालांकि, बायोगैस की पूरी कीमत पर छूट नहीं मिलती थी, जिस वजह से टैक्स का दोहरा असर बना रहता था. रेगुलर सीएनजी पर लगभग 14 प्रतिशत सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी लगती है यानी प्रति किलो सीएनजी पर करीब 14 से 15 रुपये टैक्स के रूप में जुड़ जाते हैं. पुराने नियमों के अनुसार, बायोगैस वाली सीएनजी के बायोगैस वाले हिस्से पर लगभग नौ प्रतिशत तक का बोझ बना रहता था.
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