अमेरिका में बड़ा विमान हादसा, टेकऑफ होते ही रनवे पर गिरा प्राइवेट जेट, आठ लोग थे सवार
अमेरिका के मेन (Maine) राज्य में रविवार शाम एक बड़ा विमान हादसा सामने आया है. यहां पर प्राइवेट जेट उड़ान भरते ही आग की लपटों से घिर गया. यह क्रैश हो गया. यह हादसा बैंगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर स्थानीय समयानुसार शाम को करीब 7:45 बजे हुआ था. अमेरिकी विमानन नियामक फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने घटना की पुष्टि की है. ऐसा बताया जा रहा है कि विमान में आठ लोग सवार थे.
FAA के मुताबिक, यह विमान ट्विन-इंजन टर्बो-फैन जेट बॉम्बार्डियर चैलेंजर 600 था. हादसे के तुरंत बाद विमान में भीषण आग लग गई. मामले से जुड़े एक सरकारी अधिकारी ने जानकारी दी कि क्रैश के बाद घटनास्थल पर काफी तेज आग फैली. अभी तक यात्रियों और क्रू मेंबर्स के हालात को लेकर किसी तरह का कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.
बड़ा खुलासा! अमेरिकी अध्ययन में सामने आए दिल्ली की हवा में 19 जहरीले तत्व, बढ़ा कैंसर का खतरा
Delhi Air Pollution: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की हवा को लेकर एक नई और गंभीर चेतावनी सामने आई है. अमेरिका में किए गए एक अध्ययन के अनुसार, यहां की हवा में सिर्फ धूल या धुआं ही नहीं, बल्कि कई ऐसे तत्व पाए गए हैं जो लंबे समय तक सांस के जरिए शरीर में जाकर बड़ी बीमारियों की वजह बन सकते हैं. चलिए जानते हैं इन तत्वों से सेहत पर पड़ने वाले असर की पूरी जानकारी.
कैसे हुआ अध्ययन?
यह रिसर्च अमेरिका की नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन से जुड़ी टीम ने की. इसके तहत जनवरी 2017 से जनवरी 2022 तक अलग-अलग समय पर दिल्ली की हवा के नमूने लिए गए. आमतौर पर प्रदूषण को पीएम 10 और पीएम 2.5 के स्तर से मापा जाता है. लेकिन इस बार वैज्ञानिकों ने पीएम 2.5 कणों के अंदर मौजूद रासायनिक तत्वों की पहचान पर ध्यान दिया.
सेहत के लिए कितना खतरनाक है ये तत्व?
अध्ययन में पाया गया कि दिल्ली की हवा में कुल 19 हानिकारक तत्व मौजूद हैं. ये सभी सांस के साथ शरीर में प्रवेश कर सकते हैं और समय के साथ स्वास्थ्य पर बुरा असर डालते हैं. इनमें कई चीजें शामिल हैं जैसे- एल्यूमिनियम, आयरन, टाइटेनियम, कॉपर, जिंक, क्रोमियम, निकल, आर्सेनिक, मोलिब्डेनम, क्लोरीन, फॉस्फोरस, सल्फर, पोटैशियम, लेड, सोडियम, मैग्नीशियम, ब्रोमीन, कैल्शियम और मैंगनीज आदि.
बढ़ सकता है कैंसर का खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, इनमें से कई तत्व से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है. कुछ तत्व फेफड़ों, दिल और इम्यून सिस्टम को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं. रिसर्च में यह भी सामने आया कि अलग-अलग मौसम में इन तत्वों की मात्रा घटती-बढ़ती रहती है. हालांकि, सालभर के औसत आंकड़ों को देखें तो सल्फर, क्लोरीन, पोटैशियम, कैल्शियम और आयरन सबसे लंबे समय तक हवा में बने रहते हैं. इसके अलावा लेड, आर्सेनिक, क्रोमियम, निकल, तांबा, जिंक और मैंगनीज जैसे विषैले तत्व भी लगातार मौजूद पाए गए.
कहां से आते हैं ये प्रदूषण?
अध्ययन के मुताबिक इन तत्वों के मुख्य स्रोतों को पांच बड़े हिस्सों में बांटा जा सकता है जैसे- मिट्टी और सड़क की उड़ती धूल, बायोमास और जीवाश्म ईंधन का जलना, वाहनों से निकलने वाला धुआं, औद्योगिक गतिविधियां अन्य मिश्रित स्रोत, जहां से टाइटेनियम, क्रोमियम और मोलिब्डेनम जैसे तत्व निकलते हैं.
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल प्रदूषण के स्तर को मापना ही काफी नहीं है. इसके पीछे छिपे तत्वों पर भी नियंत्रण जरूरी है. अगर इन स्रोतों पर समय रहते रोक लगाई जाए, तो लोगों को होने वाले स्वास्थ्य नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
यह भी पढ़ें:आपके भी सफेद कपड़ों पर लग जाते हैं चाय-कॉफी के दाग? ये आसान ट्रिक्स देंगी नई जैसी चमक
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation























