Health Tips: गले में खराश हो या दांत दर्द, 90 साल की दादी ने बताए रसोई में छिपे 5 पुराने घरेलू नुस्खे, दिलाते हैं तुरंत राहत
Dadi Nani ke Gharelu Nuskhe: आज छोटी सी परेशानी में दवा लेने की आदत बढ़ी है, लेकिन दादी-नानी के दौर में घर की रसोई ही कई घरेलू नुस्खों का सहारा हुआ करती थी. 90 वर्षीय कन्या देवी बताती हैं कि शहद से लेकर अदरक, लहसुन, तुलसी और तिल तक का इस्तेमाल पारंपरिक तौर पर किया जाता था. गले की खराश और सूखेपन में शहद को सीधे या गुनगुने पानी में मिलाकर लिया जाता था. अदरक की चाय और शहद-अदरक का मिश्रण भी पुराने घरेलू नुस्खों में शामिल रहा है. दांत दर्द में लहसुन के इस्तेमाल की परंपरा रही है, हालांकि दांत दर्द के पीछे संक्रमण या कैविटी जैसी वजह हो सकती है. तुलसी की चाय को थकान और बेचैनी के दौरान आराम देने वाले गर्म पेय के रूप में लिया जाता था. वहीं तिल को पौष्टिक मानकर लड्डू, चटनी और भोजन में शामिल किया जाता रहा है.
Opinion: क्यों आज विपक्षी दलों को जरूरत है एक हरकिशन सिंह सुरजीत सिंह की?
भारतीय गठबंधन की राजनीति में हरकिशन सिंह सुरजीत जैसे नेताओं ने अलग-अलग दलों और नेताओं के बीच संवाद कायम रखने में अहम भूमिका निभाई थी. 1996 के संयुक्त मोर्चे और 2004 के यूपीए के गठन में भी उनकी भूमिका का उल्लेख किया गया है. 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले विपक्ष के सामने चुनौती सिर्फ सीटों का तालमेल नहीं, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रीय दलों के बीच भरोसा और सहमति कायम करने की है. इसके लिए विपक्ष को उनके जैसे ही एक ऐसे राजनीतिक सूत्रधार की जरूरत है, जो क्षेत्रीय दलों की आकांक्षाओं को समझते हुए व्यापक विपक्षी समन्वय बना सके.
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