Gupt Navratri 2026: माघ गुप्त नवरात्रि का आज तीसरा दिन, इस महाविद्या की करें उपासना, जानें कौन हैं ये देवी
Gupt Navratri 2026: माघ गुप्त नवरात्रि साल की पहली नवरात्रि होती है. इसे गुप्त इसलिए कहा जाता है क्योंकि इनमें तंत्र साधना और महाविद्याओं की पूजा की जाती है. 2026 में इसकी शुरुआत हो चुकी है. आज तीसरा गुप्त नवरात्रि का व्रत रखा जा रहा है. बता दें कि गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं की पूजा होती है. ऐसे में तृतीय दिन पर देवी त्रिपुर सुंदरी की पूजा की जाती है. आइए जानते हैं मां त्रिपुर सुंदरी के बारे में विस्तार से.
गुप्त नवरात्रि में तीसरे दिन का क्या महत्व है?
गुप्त नवरात्रि में तीसरे दिन की पूजा करने से भक्त को मानसिक शांति मिलती है. उन्हें भीतर से मजबूती मिलती है और शक्ति महसूस होतती है. इन्हें भौतिक सुख-सुविधाओं और महिलाओं की सुंदरता के लिए भी पूजा जाता है. इनकी उपासना करने से इंसान के मन को शांति और संतुलन मिलता है.
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कौन हैं मां त्रिपुर सुंदरी?
मां त्रिपुर सुंदरी दस महाविद्याओं में तीसरी महाविद्या होती हैं. देवी त्रिपुर को मां षोडशी, ललिता और राजेश्वरी भी कहते हैं. माना जाता है कि तीनों लोकों में उनकी सुंदरता और दिव्यता सबसे अधिक है. इन्हें सुंदरता. ऐश्वर्य और दया की देवी कहते हैं. इनका पूजन करने से जीवन से परेशानियां कम होती हैं और समृद्धि आती है.
मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि में मां त्रिपुर सुंदरी की गुप्त रूप से पूजा करने से वैवाहिक जीवन सुखी रहता है. साथ ही प्रेम संबंधों में भी सफलता मिलती है. इस दिन इनकी पूजा करने से व्यक्ति के व्यक्तित्व में भी आकर्षण आता है.
शिव की नाभि पर विराजित हैं मां त्रिपुर
तंत्र विद्या में देवी त्रिपुरा को सौंदर्य, शक्ति और सिद्धि की देवी कहते हैं. माना जाता है कि इनकी पूजा करने से जातक को हर काम में सफलता मिलती है और मन में आनंद की पूर्ति होती है. साधु-संत और तांत्रिक भी इनकी पूजा करते हैं. बता दें कि मां त्रिपुर सुंदरी शांत और सौम्य रूप में भगवान शिव की नाभि पर विराजमान रहती हैं. वे भगवान शिव की नाभि के कमल पर बैठी होती हैं. उनके चार हाथ होते हैं, जिनमें उन्होंने पाश, अंकुश, धनुष और बाण धारण किया हुआ है.
मां त्रिपुर सुंदरी के विशेष मंत्र
बीज मंत्र- ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुर सुंदरीयै नमः.
षोडशी मंत्र सिद्ध मंत्र- ह्रीं क ए ई ल ह्रीं ह स क ह ल ह्रीं स क ल ह्रीं.
मनोकामना पूर्ति मंत्र- ऊं ह्रीं श्रीं क्लीं परापरे त्रिपुरे सर्वमीप्सितं साधय स्वाहा.
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. न्यूज नेशन इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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