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शरीर को लचीला बनाता है सुप्त पादांगुष्ठासन, जानें इसे करने के लाभ

नई दिल्ली, 25 सितंबर (आईएएनएस)। आज की भागदौड़ भरी लाइफस्टाइल में घंटों बैठकर काम करने से शरीर में अकड़न, कमर दर्द और पैरों में खिंचाव आम समस्या बन गई है। ऐसे में सुप्त पादांगुष्ठासन एक ऐसा उपाय है, जो पैरों की मांसपेशियों को स्ट्रेच करने, हैमस्ट्रिंग को मजबूत बनाने और शरीर का संतुलन बेहतर करने में मदद करता है।

सुप्त पादांगुष्ठासन संस्कृत शब्दों का संयोजन है, जिसमें सुप्त का अर्थ लेटना, पाद का अर्थ पैर, अंगुष्ठ का अर्थ है अंगूठा और आसन का अर्थ है मुद्रा। लेटकर हाथ को पैर के अंगूठे से जोड़ने वाला आसन आधुनिक योगासन है, इसलिए किसी भी प्राचीन हठ योग ग्रंथ में इस आसन के अभ्यास के बारे में कोई विस्तृत संदर्भ नहीं है।

योग के कई आसनों में से एक है सुप्त पादांगुष्ठासन, जो दिखने में आसान लगता है लेकिन इसके फायदे बहुत गहरे हैं। केंद्र सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, सुप्त पादांगुष्ठासन महत्वपूर्ण योगासनों में से एक है, जिसके नियमित अभ्यास से शारीरिक लचीलेपन, रीढ़ की सेहत और रक्त प्रवाह को बेहतर बनाने के लिए नियमित रूप से प्रोत्साहित किया जाता है।

इस आसन को करने से कमर और कूल्हे की मांसपेशियों को स्ट्रेच करता है, जिससे नल पर पड़ने वाला दबाव कम होता है और दर्द में राहत मिलती है। यह आसन हैमस्ट्रिंग, पिंडलियों और पीठ के निचले हिस्से को गहराई से स्ट्रेच करता है। वहीं, सुप्त पादांगुष्ठासन करने से पैरों को ऊपर उठाने से पैरों में खून का संचार बेहतर होता है, जिससे सूजन और जकड़न कम होती है।

पैर को ऊपर उठाने से पैरों की नसों पर दबाव कम होता है जिससे वैरिकोज वेन्स की समस्या में राहत मिलती है और पेट के अंगों की मालिश होने से पाचन तंत्र मजबूत होता है।

यह आसन रीढ़ की हड्डी और पीठ के निचले हिस्से (लोअर बैक) की मांसपेशियों के तनाव को दूर कर दर्द को कम करता है।

यदि आपको हैमस्ट्रिंग, पेल्विक मसल्स, घुटने, कंधे या कूल्हे के जोड़ों में कोई गंभीर चोट या दर्द है, तो इसका अभ्यास न करें। साइटिका का गंभीर दर्द होने पर या हाल ही में पीठ/पेट की कोई सर्जरी हुई हो, तो इस आसन को करने से बचना चाहिए।

--आईएएनएस

एनएस/पीएम

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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आईआरडीएआई के प्रस्तावित नए नियमों से देश में बदल जाएगा पूरा इंश्योरेंस इकोसिस्टम, ग्राहकों को होगा फायदा

नई दिल्ली, 25 सितंबर (आईएएनएस)। बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) की ओर से प्रस्तावित नए नियमों से देश के इंश्योरेंस इकोसिस्टम में बड़ा संरचनात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है और इससे इंश्योरेंस इंडस्ट्री में प्रोडक्ट के मुताबिक कमीशन कैप की नई व्यवस्था लागू हो सकती है। यह बयान एक्सपर्ट्स की ओर से दिया गया।

इंश्योरेंस रेगुलेटर ने इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम में बड़े सुधारों का प्रस्ताव दिया है। इसमें एक आसान तीन-स्तरीय ढांचा शामिल है, जिसका उद्देश्य पॉलिसीहोल्डर्स के लिए लागत कम करना, पारदर्शिता बढ़ाना और बड़े पैमाने पर गलत तरीके से पॉलिसी बेचने के खिलाफ सुरक्षा को मजबूत करना है।

जानकारों के मुताबिक, इस कदम से निश्चित रूप से ग्राहकों को फायदा होगा, लेकिन इससे बैंक-एश्योरेंस पार्टनर और एनबीएफसी जैसे डिस्ट्रीब्यूटर्स के मार्जिन पर तुरंत दबाव भी पड़ेगा।

डेलॉइट इंडिया के पार्टनर देबाशीष बनर्जी ने कहा, आखिरकार, इस प्रस्ताव का मकसद डिजिटल तरीकों को अपनाना, पॉलिसी को लंबे समय तक बनाए रखना और एक ऐसा मार्केट बनाना है जो टिकाऊ हो और ग्राहकों को प्राथमिकता दे। जैसा कि कहा जाता है, जरूरत ही आविष्कार की जननी है, और ये बदलाव कंपनियों को नए तरीके सोचने और अपनाने के लिए मजबूर करेंगे।

बीमा वितरण के अर्थशास्त्र को फिर से तय करने पर आईआरडीएआई के कंसल्टेशन पेपर में नए वाहनों के मोटर इंश्योरेंस के लिए कमीशन या भुगतान की सीमा तय करने का प्रस्ताव है। इसके तहत थर्ड-पार्टी प्रीमियम के लिए यह भुगतान शून्य और खुद के नुकसान व उससे जुड़े कवर के लिए 5 प्रतिशत रखने का सुझाव दिया गया है।

इससे टेक्नोलॉजी, जागरूकता और उससे जुड़े खर्च भी कमीशन की सीमा के दायरे में आ जाएंगे, और मौजूदा मोटर इंश्योरेंस सर्विस प्रोवाइडर (एमआईएसपी) सिस्टम की जगह एक व्यापक इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन एंटिटी (आईडीई) सिस्टम ले लेगा।

शार्दुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी की पार्टनर शैलजा लाल ने कहा, इन बदलावों का ऑटोमोबाइल डीलरों, ओईएम से जुड़े ब्रोकर्स, इंश्योरेंस कंपनियों और मोटर इंश्योरेंस बेचने वाले अन्य लोगों पर बहुत ज्यादा असर पड़ेगा। नई गाड़ियों की पॉलिसी से होने वाली शुरुआती कमाई कम होने और डीलर से जुड़े समझौतों के कड़े होने से, डिस्ट्रीब्यूशन मार्जिन और कम हो सकता है।

इन प्रस्तावों का मकसद इंश्योरेंस की बिक्री को डीलर के साथ अन्य रिश्तों से अलग करना है। डीलरों को सिर्फ इसलिए कैशलेस रिपेयर से इनकार करने की इजाजत नहीं होगी क्योंकि ग्राहक ने इंश्योरेंस कहीं और से खरीदा है।

साथ ही, आईआरडीएआई ग्राहकों को बीमा सुगम जैसे वैकल्पिक डिजिटल चैनलों तक ज्यादा पहुंच देने का प्रस्ताव दे रहा है, और डीलरों के लिए जरूरी होगा कि वे गाड़ी बेचते समय ग्राहकों को इस विकल्प के बारे में साफ तौर पर बताएं।

लाल ने कहा, इन सुधारों से डीलर-आधारित पारंपरिक मॉडल बदल सकता है, जिसमें इंश्योरेंस की बिक्री, गाड़ी की फाइनेंसिंग और बिक्री के बाद की सर्विसिंग आपस में गहराई से जुड़ी होती हैं। आय का दबाव डिस्ट्रीब्यूटर्स को रिन्यूअल, सर्विसिंग, टेक्नोलॉजी और अन्य मंजूर किए हुए वैल्यू-एडेड सेवाओं पर ज्यादा ध्यान देने के लिए प्रेरित कर सकता है।

हालांकि, जानकारों का कहना है कि इसका अंतिम असर इस बात पर निर्भर करेगा कि आईआरडीएआई आखिरकार कौन से नियम अपनाता है और उनके साथ कैसा ट्रांजिशन फ्रेमवर्क लागू करता है।

कंसल्टेशन पेपर में सभी तरह के जनरल इंश्योरेंस कमीशन पर सीमा लगाने का प्रस्ताव है।इसमें हेल्थ इंश्योरेंस के लिए पहली बार के कमीशन को 15 प्रतिशत से 20 प्रतिशत के बीच तय करने और रिन्यूअल व पोर्टिंग पेआउट को सिर्फ 5 प्रतिशत से 10 प्रतिशत तक सीमित करने की बात कही गई है।

ड्राफ्ट पेपर में डिस्ट्रीब्यूशन संस्थाओं के लिए पहले साल के कमीशन को अवधि के आधार पर 5 प्रतिशत से 20 प्रतिशत के बीच सीमित किया गया है। यह पहले मिलने वाले उन ज्यादा प्रभावी पेआउट से कम है, जो प्रमोशनल खर्च और रिवॉर्ड्स को मिलाकर 60 प्रतिशत तक पहुंच जाते थे।

--आईएएनएस

एबीएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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  Sports

CWI का बड़ा फैसला, खिलाड़ियों के Contract में 25% कटौती और Super50 टूर्नामेंट पर लगाई रोक

वेस्टइंडीज क्रिकेट इस समय आर्थिक और खेल से जुड़ी कई चुनौतियों से गुजर रहा है। इन्हीं परेशानियों से निपटने के लिए क्रिकेट वेस्टइंडीज ने कई बड़े फैसले लिए हैं। बोर्ड ने अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों की सालाना अनुबंध फीस में 25% कटौती करने का फैसला किया है। इसके साथ ही इस साल पुरुषों की सुपर50 और महिलाओं की टी20 ब्लेज घरेलू प्रतियोगिताओं को भी रोक दिया गया है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को आगे भी 12 महीने का अनुबंध मिलता रहेगा, लेकिन उनकी तय फीस पहले के मुकाबले 25% कम होगी। वहीं घरेलू खिलाड़ियों के अनुबंध को 7 महीने तक सीमित किया जाएगा। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वेस्टइंडीज के कई खिलाड़ी राष्ट्रीय अनुबंध की जगह अलग-अलग देशों की घरेलू और फ्रेंचाइजी क्रिकेट प्रतियोगिताओं को प्राथमिकता दे रहे हैं। फीस में कटौती से यह चुनौती और बढ़ सकती है।

क्रिकेट वेस्टइंडीज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस डियरिंग ने कहा कि खिलाड़ियों और वेस्टइंडीज प्लेयर्स एसोसिएशन ने मौजूदा परिस्थितियों को समझते हुए सहयोग किया है। उन्होंने माना कि फीस में कटौती आदर्श स्थिति नहीं है, लेकिन आर्थिक स्थिरता के लिए इसे जरूरी कदम माना गया है।

बोर्ड ने पुरुषों की सुपर50 और महिलाओं की टी20 ब्लेज प्रतियोगिताओं को भी इस साल आयोजित नहीं करने का फैसला किया है। इसके पीछे घरेलू प्रतियोगिताओं के आयोजन पर आने वाला भारी खर्च बताया गया है। बता दें कि सुपर50 वेस्टइंडीज की पुरुष एकदिवसीय टीम तक पहुंचने वाले खिलाड़ियों के लिए अहम मंच रहा है। ऐसे में इसका रुकना विकास और चयन प्रक्रिया पर भी असर डाल सकता है।

गौरतलब है कि वेस्टइंडीज को फरवरी-मार्च 2027 में एकदिवसीय विश्व कप क्वालीफायर खेलना है। टीम 2023 के एकदिवसीय विश्व कप में जगह नहीं बना सकी थी। अब क्रिकेट वेस्टइंडीज का कहना है कि उसका ध्यान पुरुष टीम को इस क्वालीफायर के लिए तैयार करने पर रहेगा। नवंबर में इंग्लैंड ए टीम के खिलाफ सीमित ओवरों की कुछ मुकाबलों की श्रृंखला के बाद एकदिवसीय टीम का विशेष शिविर लगाया जाएगा।

क्रिस डियरिंग के मुताबिक, घरेलू क्रिकेट व्यवस्था पर यात्रा, होटल, मैच और आयोजन से जुड़ा खर्च लगातार बढ़ता गया है। उन्होंने कहा कि पिछले 15 वर्षों में केवल घरेलू विमान सेवाओं पर 80 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक खर्च किए गए हैं। बोर्ड का कहना है कि मौजूदा आर्थिक दबाव में इस तरह का खर्च उठाना मुश्किल हो गया है।

इस बदलाव का असर 2027 पैन अमेरिकी खेलों और 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक की तैयारी पर भी पड़ सकता है। 2025-26 सुपर50 और टी20 ब्लेज में शीर्ष 4 स्थान हासिल करने वाली टीमों को पैन अमेरिकी खेलों के लिए पहले ही तय किया जा चुका है। वहीं ओलंपिक के लिए अलग आमंत्रण प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी, जिनका खर्च संबंधित देशों के क्रिकेट बोर्ड और अन्य संस्थाएं उठाएंगी।

महिलाओं की अगले साल की सुपर50 की जगह सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों वाली विकास प्रतियोगिता होगी। हालांकि वेस्टइंडीज चैंपियनशिप अपने 2025-26 प्रारूप में जारी रहेगी। क्रिस डियरिंग ने मौजूदा स्थिति की तुलना 2016 टी20 विश्व कप फाइनल में कार्लोस ब्रेथवेट के लगातार 4 छक्कों से करते हुए कहा कि अब वेस्टइंडीज क्रिकेट को भी साहस के साथ बड़े फैसले लेने होंगे और नई शुरुआत करनी होगी।

Fri, 25 Sep 2026 22:00:00 +0530

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