दावा- सऊदी अरब ने यमन में मिसाइल अटैक किया:बाब अल-मंदेब के पास लोकल मार्केट पर हमला; यमन सरकार ने ट्रम्प से मदद मांगी
यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। हूतियों ने दावा किया है कि सऊदी अरब ने बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के पास एक गांव के लोकल मार्केट पर मिसाइल अटैक किया। हूतियों के मीडिया ऑफिस ने हमले का CCTV वीडियो भी जारी किया है, जिसमें सोमवार दोपहर करीब 12:14 बजे मार्केट पर मिसाइल गिरती दिखाई दे रही है। उस वक्त मार्केट में काफी लोग मौजूद थे। हालांकि, हमले में कितने लोग मारे गए या घायल हुए, इसकी जानकारी नहीं दी गई है और सऊदी अरब ने भी इस दावे पर कोई बयान नहीं दिया है। इसी बीच, यमन के राष्ट्रपति राशद अल-अलीमी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से फोन पर बात कर हूतियों के खिलाफ मदद मांगी है। हालांकि ट्रम्प ने सैन्य मदद का कोई वादा नहीं किया। सऊदी हमले से जुड़ी तस्वीरें… हूतियों के खिलाफ सऊदी की मदद करेगा ब्रिटेन यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच लड़ाई तेज हो गई है। इस बीच ब्रिटेन ने सऊदी को मदद देने का फैसला किया है। सोमवार को न्यूयॉर्क जाते समय पत्रकारों से बात करते हुए ब्रिटिश पीएम एंडी बर्नहैम ने कहा ब्रिटेन एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग के लिए टैंकर देगा। यानी हवा में उड़ते सऊदी लड़ाकू विमानों में ईंधन भरा जा सकेगा। इधर लड़ाई का असर आम लोगों पर पड़ रहा है। UN के मुताबिक, लड़ाई बढ़ने से अब तक 1.2 लाख से ज्यादा यमन के लोग बेघर हो चुके हैं। पिछले कुछ दिनों में 3,000 से ज्यादा यमनी शरणार्थी लाल सागर पार कर जिबूती पहुंचे हैं। ब्रिटेन वॉयजर टैंकर विमान भेज सकता है ब्रिटेन सऊदी अरब की मदद के लिए एक ब्रिटिश रॉयल एयर फोर्स (RAF) का वॉयजर टैंकर विमान भेज सकता है। यह विमान साइप्रस में मौजूद RAF अक्रोटिरी एयरबेस से काम करेगा। वॉयजर विमान का काम हवा में उड़ रहे लड़ाकू विमानों में ईंधन भरना है। इससे लड़ाकू विमान बिना नीचे उतरे ज्यादा देर तक उड़ सकते हैं। ब्रिटेन की वायुसेना के पास ऐसे 9 वॉयजर विमान हैं। इनमें 8 सैन्य इस्तेमाल के लिए हैं और एक विमान सामान्य यानी सिविलियन रजिस्ट्रेशन वाला है। जरूरत पड़ने पर उसे भी सैन्य काम में लगाया जा सकता है। सऊदी अरब को दी जा रही यह मदद कुछ हफ्तों के लिए होगी। ब्रिटेन इस साल पहले ही सऊदी अरब में स्काई सेबर एयर डिफेंस सिस्टम तैनात कर चुका है। यह सिस्टम दुश्मन के ड्रोन और मिसाइल जैसे हवाई हमलों से बचाव के लिए इस्तेमाल होता है। ब्रिटेन पहले भी हूतियों पर हमला कर चुका है ब्रिटेन पहले भी हूती ठिकानों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर चुका है। जनवरी 2024 में ब्रिटेन ने अमेरिका के साथ मिलकर यमन में हूतियों के सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए थे। यह कार्रवाई लाल सागर में व्यापारिक जहाजों पर हूतियों के लगातार हमलों के बाद की गई थी।अभियान में ब्रिटिश RAF टाइफून लड़ाकू विमानों को वॉयजर टैंकर विमानों से हवा में ईंधन दिया गया था। इसके बाद अप्रैल 2025 में भी ब्रिटेन और अमेरिका ने यमन में हूतियों के खिलाफ संयुक्त सैन्य अभियान चलाया। इसमें ब्रिटिश RAF टाइफून लड़ाकू विमानों ने हूतियों के ड्रोन बनाने वाली एक जगह को निशाना बनाया था। इस अभियान में भी टाइफून विमानों को वॉयजर टैंकर से हवा में ईंधन दिया गया था। हूतियों ने तेजी से अहम द्वीपों पर कब्जा किया यमन के हूतियों ने इस महीने लाल सागर के तट की ओर तेजी से बढ़ते हुए बाब-अल-मंदब स्ट्रेट के पास के इलाकों पर कब्जा किया है। यह स्ट्रेट लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है। इसलिए इस इलाके में लड़ाई का असर समुद्री रास्तों पर भी पड़ सकता है। हूतियों की इस बढ़त के बाद सऊदी अरब ने तटीय इलाकों में सैकड़ों हवाई हमले किए हैं। दूसरी तरफ हूतियों ने सऊदी अरब के शहरों और बुनियादी ढांचे पर सैकड़ों ड्रोन और मिसाइल हमलों का दावा किया है। सऊदी पर हूतियों के हमले क्यों बढ़े? यह लड़ाई यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब समर्थित यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के बीच है। हूतियों ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद और ऊर्जा से जुड़ी सुविधाओं को निशाना बनाकर ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल हमले करने का दावा किया है। इसके जवाब में सऊदी अरब ने यमन के अंदर हूती ठिकानों पर हमले किए हैं। ब्रिटिश सरकार के मुताबिक, जुलाई से हूतियों ने सऊदी अरब के कई शहरों, एयरपोर्ट, सैन्य ठिकानों और ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया है। इनमें अबहा, जिजान, नजरान, ताइफ, जेद्दा और यानबू शामिल हैं। लाल सागर में सऊदी जहाजों को भी निशाना बनाया गया है। जिबूती युद्ध में शामिल नहीं होना चाहता यमन के ठीक सामने स्थित जिबूती ने साफ किया है कि वह हूतियों और सऊदी समर्थित यमनी सरकार के बीच युद्ध में शामिल नहीं होना चाहता। हालांकि, जिबूती अफ्रीका के सबसे ज्यादा सैन्य मौजूदगी वाले देशों में से एक है। 2003 से अमेरिका यहां कैंप लेमोनियर नाम का बड़ा सैन्य बेस चला रहा है। यहां चीन का भी बड़ा सैन्य बेस है। 2014 से चल रही है यमन में जंग यमन में 2014 से गृहयुद्ध चल रहा है। एक तरफ हूती लड़ाके हैं और दूसरी तरफ यमन की सरकार के समर्थन में लड़ने वाली सेनाएं हैं। सऊदी अरब भी यमन की सरकार का समर्थन करता है। 2022 में UN की कोशिश से दोनों पक्षों के बीच सीजफायर हुआ था। लेकिन पिछले कुछ महीनों में यह सीजफायर टूट गया। इसके बाद फिर मिसाइल, ड्रोन और हवाई हमले होने लगे। यमन के पास बाब अल-मंदेब स्ट्रेट है। यहां से लाल सागर के रास्ते कई जहाज गुजरते हैं। इसलिए यहां लड़ाई बढ़ने का असर दूसरे देशों के कारोबार और जहाजों की आवाजाही पर भी पड़ सकता है। --------------------- ये खबर भी पढ़ें… रिपोर्ट- ट्रम्प सरकार ने हूती विद्रोहियों से सीक्रेट डील की: अमेरिकी जहाजों पर हमला नहीं करेंगे हूती लड़ाके, बदले में सऊदी की मदद नहीं करेगा अमेरिका अमेरिका ने यमन के हूती विद्रोहियों के साथ सीक्रेट डील की है। एक्सिओस की रिपोर्ट के मुताबिक इस पडील के तहत हूतियों ने अमेरिका को भरोसा दिया है कि वे लाल सागर में अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय जहाजों को निशाना नहीं बनाएंगे। पूरी खबर पढ़ें…
अमेरिका की कल से ईरानी एयरलाइंस बंद कराने की धमकी:कहा- जो कंपनियां इनकी मदद करेंगी, उनके खिलाफ एक्शन लेंगे
अमेरिका ने ईरान की सभी एयरलाइंस को बंद कराने की धमकी दी है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि 23 सितंबर से ईरानी विमानों को ईंधन, लैंडिंग की सुविधा या टिकट देने वाली विदेशी कंपनियों पर भी कार्रवाई की जाएगी। ऐसी कंपनियों को अमेरिकी डॉलर सिस्टम से बाहर किया जा सकता है। यानी अमेरिका सिर्फ ईरानी एयरलाइंस पर दबाव नहीं डाल रहा, बल्कि उन विदेशी कंपनियों को भी निशाना बना रहा है जो इन एयरलाइंस को चलाने में मदद करती हैं। डॉलर सिस्टम से बाहर करने का क्या मतलब? अमेरिका जिस डॉलर सिस्टम की बात कर रहा है, उसका मतलब अमेरिकी बैंकिंग व्यवस्था से है। किसी कंपनी पर अमेरिकी प्रतिबंध लगने के बाद उसके लिए अमेरिकी बैंकों के जरिए डॉलर में लेन-देन करना मुश्किल हो सकता है। यानी अगर कोई विदेशी कंपनी ईरानी एयरलाइन को ईंधन या दूसरी सुविधाएं देती है, तो उसे अमेरिकी वित्तीय व्यवस्था तक अपनी पहुंच खोने का खतरा रहेगा। विदेश जाने वाली उड़ानों पर पड़ सकता है असर अमेरिकी कार्रवाई का असर ईरान की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर पड़ सकता है। एविएशन डेटा कंपनी सिरियम के मुताबिक, सितंबर में ईरान से हर हफ्ते करीब 70 हजार इंटरनेशनल सीटें उपलब्ध हैं। अगस्त में यह संख्या करीब 55,700 सीटें प्रति हफ्ते थी। अगस्त में महान एयर और सेफेहरान एयरलाइंस ईरान से इंटरनेशनल सीटों की क्षमता के मामले में सबसे बड़े स्थानीय ऑपरेटरों में थीं। महान एयर के पास हर हफ्ते करीब 15,600 और सेफेहरान एयरलाइंस के पास करीब 10,500 सीटें थीं। 8 सितंबर को 27 ईरानी एयरलाइंस पर प्रतिबंध लगाया था अमेरिका पहले भी ईरान की एयरलाइंस के खिलाफ कार्रवाई कर चुका है। अमेरिकी ट्रेजरी ने 8 सितंबर को 27 ईरानी एयरलाइंस समेत कुल 36 कंपनियों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाया था। अमेरिका का आरोप है कि ईरान अपनी एयरलाइंस और उनसे जुड़े नेटवर्क का इस्तेमाल हथियार, लोगों और दूसरे प्रतिबंधित सामान को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए करता है। न्यूयॉर्क पहुंचे ईरान के विदेश मंत्री अमेरिका की यह नई चेतावनी ऐसे समय आई है, जब ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में हिस्सा लेने न्यूयॉर्क पहुंचे हैं। ईरानी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, अराघची UN की बैठकों में ईरान का पक्ष रखेंगे और दूसरे देशों के अधिकारियों व विदेश मंत्रियों से मुलाकात करेंगे। ---------------- ये खबर भी पढ़ें… UN में आज ट्रम्प का भाषण, जनरल डिबेट शुरू होगी: 2025 में टेलीप्रॉम्प्टर खराब होने पर भड़के थे संयुक्त राष्ट्र यानी UN की जनरल डिबेट आज से शुरू हो रही है। यह 28 सितंबर तक चलेगी। पूरी खबर यहां पढ़ें…
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