DC vs RCB WPL 2026: शतक से चूकीं स्मृति मंधाना, रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने दिल्ली कैपिटल्स को 8 विकेट से हराया
DC vs RCB WPL 2026: रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने दिल्ली कैपिटल्स को विकेट से हरा दिया है. पहले बल्लेबाजी करते हुए दिल्ली कैपिटल्स ने 166 रन बनाए थे. जवाब में आरसीबी की टीम ने 2 विकेट गंवाकर 10 गेंद शेष रहते लक्ष्य को हासिल कर लिया. रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की कप्तान स्मृति मंधाना शतक से चूक गईं और 96 रन बनाकर आउट हुईं. वहीं जॉर्जिया वोल अर्धशतक लगाईं.
RCB को स्मृति मंधाना और जॉर्जिया वोल ने दिलाई शानदार शुरुआत
दिल्ली कैपिटल्स के दिए 167 रनों का लक्ष्य का पीछा करने उतरी रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए ग्रेस हैरिस और स्मृति मंधाना ओपनिंग करने आईं, लेकिन ग्रेस हैरिस सिर्फ 1 रन बनाकर आउट हो गईं. उन्हें मारिजैन कप्प ने चलता किया. इसके बाद स्मृति मंधाना और जॉर्जिया वोल ने मोर्चा संभाला और दोनों ने दिल्ली कैपिटल्स के गेंदबाजों की जमकर धुनाई की.
स्मृति मंधाना शतक से चूकीं, जॉर्जिया वोल ने लगाया अर्धशतक
स्मृति मंधाना और जॉर्जिया वोल दूसरे विकेट के लिए 132 रनों की साझेदारी कर रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की जीत सुनिश्चित की. स्मृति मंधाना के पास शतक लगाने का शानदार मौका था, लेकिन नंदनी शर्मा उन्हें आउट कर पवेलियन भेजा. स्मृति मंधाना ने 61 गेंदों पर 96 रनों की पारी खेलीं. इस दौरान उन्होंने 13 चौके और 3 छक्के लगाए. वहीं जॉर्जिया वोल RCB को जीत दिलाकर नाबाद लौटीं. वो 52 गेंद पर 54 रन बनाईं.
???? partnership for the 2nd wicket!
— Women's Premier League (WPL) (@wplt20) January 17, 2026
Smriti Mandhana and Georgia Voll in total control of the chase ????
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ऐसी रही दिल्ली कैपिटल्स की बल्लेबाजी
टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी दिल्ली कैपिटल्स की शुरुआत बेहद ही खराब रही थी, लेकिन ओपनर शैफाली वर्मा ने अर्धशतक लगाया और लुसी हैमिल्टन ने एक तूफानी पारी खेलीं. जिसके दम पर दिल्ली कैपिटल्स की टीम 150 रनों के आंकड़े को पार कर सकी. शैफाली वर्मा ने 41 गेंदों पर 62 रनों की पारी खेलीं. इस दौरान उनके बल्ले से 5 चौका और 4 छक्का निकला.
वहीं लुसी हैमिल्टन 19 गेंदों पर 36 रनों की तूफानी पारी खेलीं. इस दौरान उन्होंने 3 चौका और 3 छक्का लगाया. वहीं एन श्री चरणी 11 गेंद पर 11 रन बनाकर नाबाद रहीं. आरसीबी के लिए लॉरेन बेल और सयाली सतघरे ने 3-3 विकेट चटकाए. वहीं प्रेमा रावत ने 2 विकेट लिए. जबकि नादिन डी क्लर्क को एक सफलता मिली.
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अमेरिकी विदेश नीति से नए साम्राज्यवादी दौर के पुनरुत्थान की आशंका: रिपोर्ट
केप टाउन, 17 जनवरी (आईएएनएस)। भारत द्वारा 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता संभालने के साथ ही यह समूह एक बार फिर खास महत्व हासिल करता दिख रहा है। ऐसे समय में जब बहुपक्षीय कूटनीति गंभीर दबाव में है, एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका की हालिया विदेश नीति वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) के लिए गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ने विदेश नीति के मोर्चे पर कई आक्रामक और चौंकाने वाले कदम उठाए हैं, जिनसे अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
दक्षिण अफ्रीका के प्रमुख मीडिया आउटलेट इंडिपेंडेंट ऑनलाइन (आईओएल) की रिपोर्ट में कहा गया, “3 जनवरी को अमेरिकी विशेष बलों ने कराकस में एक साहसिक अभियान चलाकर वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को कथित नार्को-आतंकवाद के आरोपों में गिरफ्तार किया। इसके बाद वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार पर लंबे समय तक अमेरिकी निगरानी की घोषणा की गई।”
रिपोर्ट में आगे कहा गया, “इससे कुछ दिन पहले, 25 दिसंबर 2025 को क्रिसमस के दिन, अमेरिका ने नाइजीरिया के उत्तर-पश्चिमी सोकोटो राज्य में कथित आईएसआईएस ठिकानों पर हमले किए। इन हमलों को नाइजीरियाई ईसाइयों को आतंकवाद से बचाने के नाम पर सही ठहराया गया।”
इसके अलावा, अमेरिका द्वारा ग्रीनलैंड को हासिल करने की फिर से धमकियां दिए जाने का भी जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रीय सुरक्षा, दुर्लभ खनिजों और आर्कटिक मार्गों का हवाला देते हुए ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी दावे डेनमार्क जैसे नाटो सहयोगी देश के साथ तनाव बढ़ा रहे हैं। व्हाइट हाउस ने सैन्य विकल्पों को भी पूरी तरह खारिज नहीं किया है। ऐसे में वैश्विक दक्षिण के कई देश ऐसे मंचों की तलाश में हैं, जो अंतरराष्ट्रीय मानदंडों और बहुपक्षीय व्यवस्था की रक्षा कर सकें।
दक्षिण अफ्रीका के थिंक टैंक द सेंटर फॉर अल्टरनेटिव पॉलिटिकल एंड इकोनॉमिक थॉट के अध्यक्ष फापानो फाशा ने भारतीय स्तंभकार टी.के. अरुण के सबस्टैक लेख ‘2026: इनटू द वर्ल्ड अकॉर्डिंग टू ट्रंप’ और द कोर में प्रकाशित विश्लेषण ‘ट्रंप्स इम्पीरियल टर्न लीव्स इंडिया विद नो ईज़ी चॉइसेज़’ का हवाला दिया।
फाशा ने अरुण के हवाले से कहा, “ट्रंप की विदेश नीति 19वीं सदी के साम्राज्यवाद के जानबूझकर पुनरुत्थान जैसी है। यह नीति सीधे तौर पर द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनी नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था को कमजोर करती है, जो संधियों, संप्रभुता और बहुपक्षवाद पर आधारित थी।”
उन्होंने कहा, “वेनेजुएला में हस्तक्षेप, जिसे ट्रंप ने कानून-व्यवस्था की कार्रवाई के रूप में पेश किया, अंततः उस देश के तेल निर्यात पर अमेरिकी नियंत्रण में बदल गया। यह नए साम्राज्यवादी तर्क का स्पष्ट उदाहरण है।”
रिपोर्ट में कहा गया है कि अरुण ने अमेरिका की आलोचना को और व्यापक बनाते हुए जबरदस्ती वाले आर्थिक कदमों की ओर भी इशारा किया है। इनमें रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की धमकी शामिल है, जिससे देशों को या तो अमेरिकी लाइन में आना पड़े या सजा झेलनी पड़े।
--आईएएनएस
डीएससी
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