पटना नीट छात्रा की मौत का मामला: प्रशांत किशोर ने नए सिरे से निष्पक्ष जांच करने की मांग की, पुलिस ने गठित की SIT
पटना में नीट (NEET) की तैयारी कर रही एक छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले ने अब राजनीतिक और सामाजिक मोड़ ले लिया है। जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए प्रशासन से नए सिरे से और निष्पक्ष जांच की मांग की है। बढ़ते जन आक्रोश को देखते हुए बिहार पुलिस ने मामले की तह तक जाने के लिए विशेष जांच टीम (SIT) का गठन कर दिया है।
जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने पटना में नीट की छात्रा की मौत के मामले में शुक्रवार को कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मामले की स्थिति बदल गयी है और पुलिस को नए सिरे से निष्पक्ष जांच करनी चाहिए। इस बीच, शाम को पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ने इस मामले में जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन का आदेश दिया।
किशोर ने जहानाबाद जिले में छात्रा के शोक संतप्त परिवार से मुलाकात करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा, ‘‘पोस्टमार्टम रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से लिखा है कि यौन उत्पीड़न की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में मामले की गहन और स्वतंत्र जांच जरूरी है।’’ जहानाबाद की रहने वाली छात्रा पटना के एक छात्रावास में रहकर राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) की तैयारी कर रही थी। उसकी हाल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी।
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पुलिस ने पहले इसे आत्महत्या का मामला बताया था लेकिन परिजनों ने दुष्कर्म और हत्या की आशंका जताई थी। वह कई दिनों तक कोमा में रही थी और 11 जनवरी को एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी। किशोर ने कहा कि उनकी पार्टी पीड़ित परिवार के साथ है और बच्ची को न्याय मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मामले की स्थिति बदल गई है और अब पुलिस को नए सिरे से निष्पक्ष जांच करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि छात्रा के परिजन पुलिस की प्रारंभिक कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं और उनका आरोप है कि छात्रा के साथ दुष्कर्म हुआ है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद इस आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया है कि वर्तमान जांच अधिकारी उन पर मामला वापस लेने का दबाव बना रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि छात्रा की आयु 17 वर्ष चार महीने होने की जानकारी देने के बावजूद पुलिस रिकॉर्ड में उसकी उम्र 18 वर्ष दर्ज की गई है।
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किशोर ने कहा, ‘यदि प्रारंभिक जांच में पुलिस प्रशासन से कोई चूक हुई है तो उसे सुधारा जाना चाहिए। हम शनिवार को मृतका के परिवार के साथ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मिलकर निष्पक्ष और गहन जांच की मांग करेंगे, ताकि हर हाल में बच्ची को न्याय मिल सके।’ उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि न्याय नहीं मिला तो जन सुराज संविधान के दायरे में रहकर सभी आवश्यक और लोकतांत्रिक कदम उठाएगी। छात्रा की मौत के बाद छात्रों और परिजनों ने विरोध प्रदर्शन किया।
पुलिस ने बृहस्पतिवार को उस इमारत के मालिक को गिरफ्तार कर लिया जिसमें छात्रावास संचालित हो रहा था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद बृहस्पतिवार को पटना के कुछ हिस्सों में विरोध प्रदर्शन किया गया। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ने शाम को विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन का आदेश दिया और कहा कि इसकी अध्यक्षता पटना के नगर पुलिस अधीक्षक करेंगे। उन्होंने मध्य क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) को भी मामले की दैनिक निगरानी करने का निर्देश दिया।
पुलिस ने एक बयान में कहा गया, “आईजी मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन करेंगे। नगर पुलिस अधीक्षक एसआईटी के प्रमुख होंगे, जिसमें महिला उप पुलिस अधीक्षक और निरीक्षक शामिल होंगे। आईजी रोजाना जांच की निगरानी करेंगे।” इससे पहले दिन में पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय शर्मा ने कहा कि जांच का दायरा बढ़ाया गया है। उन्होंने कहा, “पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मृतका की पहले की मेडिकल रिपोर्टों में कुछ विरोधाभास हैं। सभी दस्तावेज विशेषज्ञ राय के लिए पटना एम्स भेजे गए हैं। जांच नवीनतम पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर की जा रही है। मामले से जुड़े सभी लोगों को बहुत जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।
News Source- PIT
'भारत केवल भूगोल नहीं, एक चरित्र है', मोहन भागवत का बड़ा बयान, हिंदुओं से एकजुटता और स्वदेशी अपनाने की अपील
छत्रपति संभाजीनगर के गंगापुर में आयोजित 'हिंदू सम्मेलन' और 'युवा सम्मेलन' को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने भारत के भविष्य और हिंदुओं की वैश्विक जिम्मेदारी पर एक महत्वपूर्ण दृष्टिकोण साझा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की पहचान केवल एक जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि एक विशिष्ट 'चरित्र' है, जिसकी धुरी हिंदू समाज है। भागवत ने कहा कि हिंदू समाज पारंपरिक रूप से समावेशी और सभी को स्वीकार करने वाला रहा है जो रीति-रिवाजों, पहनावे, खान-पान, भाषा, जाति और उपजाति में विविधता को अपनाता है और इन मतभेदों को संघर्ष का कारण नहीं बनने देता।
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उन्होंने यह बातें मध्य महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले के गंगापुर में आयोजित ‘हिंदू सम्मेलन’ में कहीं। भागवत ने कहा, ‘‘अगर भारत में कुछ अच्छा या बुरा होता है, तो हिंदुओं से पूछा जाएगा। भारत केवल एक भौगोलिक क्षेत्र का नाम नहीं, बल्कि देश का चरित्र है।’’ आरएसएस प्रमुख ने कहा, ‘‘जो लोग एकीकरण और सद्भावपूर्ण सह-अस्तित्व में विश्वास रखते हैं, वे हिंदू समाज और देश के सच्चे चरित्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह परंपरा सदियों से आक्रमणों और विनाश के बावजूद संरक्षित रही है। ऐसे लोग हिंदू कहलाते हैं और उनकी भूमि भारत कहलाती है।’’ उन्होंने कहा कि यदि लोग अच्छे, दृढ़ और ईमानदार बनने का प्रयास करें, तो देश भी वैश्विक मंच पर इन गुणों को प्रदर्शित करेगा।
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उन्होंने कहा कि विश्व भारत से कुछ अपेक्षा रखता है और पर्याप्त शक्ति एवं प्रभाव होने पर देश सार्थक योगदान देने में सक्षम होगा। भागवत ने कहा कि शक्ति में केवल सशस्त्र बल ही नहीं, बल्कि बुद्धि, सिद्धांत और नैतिक मूल्य भी शामिल होते हैं। भागवत ने आत्मनिर्भरता और स्थानीय उत्पादों के उपयोग पर जोर देते हुए कहा, ‘‘हमें स्थानीय वस्तुएं खरीदनी चाहिए। जो चीज यहां नहीं बन सकती, उसे अन्य देशों से खरीदा जा सकता है। भारतीय नीति निर्माता अंतरराष्ट्रीय व्यापार कर रहे हैं, लेकिन किसी के दबाव में नहीं। हमने आत्मनिर्भरता का मार्ग चुना है और हमें इसी मार्ग पर चलना चाहिए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमें विदेशों में रोजगार सृजन की चिंता नहीं करनी चाहिए, यह उन्हें करना है। जब वैश्वीकरण की बात करते हैं, तो वे वैश्विक बाजार की अपेक्षा रखते हैं, हम वैश्विक परिवार की अपेक्षा रखते हैं।’’
भागवत ने हिंदुओं में एकता का आह्वान किया और कहा कि यह केवल आरएसएस का उद्देश्य नहीं, बल्कि समुदाय के सभी सदस्यों का लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘हमें जाति, संप्रदाय, या व्यवसाय की परवाह किए बिना हिंदू मित्र बनाने चाहिए। इससे समानता स्थापित होगी। संघ पहल करेगा, लेकिन समुदाय को इसका नेतृत्व करना होगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘भगवान राम ने भी रावण से बातचीत के जरिए युद्ध टालने की कोशिश की थी, लेकिन बाद में हथियार उठाए। हमें भी अन्याय के खिलाफ कदम-दर-कदम लड़ना चाहिए।’’
आरएसएस के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित युवा सम्मेलन में भागवत ने युवाओं से अपील की कि वे ज्ञान और कौशल प्राप्त करने के लिए विदेश जाएं, लेकिन इसे भारत के विकास में उपयोग करें। उन्होंने कहा, ‘‘युवाओं का योगदान देश की प्रगति और भविष्य निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण है।’’
भागवत ने कहा, ‘‘संघ न तो किसी का विरोध करता है और न ही किसी से प्रतिस्पर्धा में है। इसका उद्देश्य केवल एक मजबूत और सामंजस्यपूर्ण समाज का निर्माण करना है।’’ उन्होंने युवाओं से इस सामूहिक प्रयास में सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की।’ इस युवा सम्मेलन का आयोजन एमआईटी कॉलेज में किया गया, जहां आरएसएस प्रमुख ने प्रतिभागियों से बातचीत की और उनके प्रश्नों के उत्तर दिए।
News Source- PIT News
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