'भारत केवल भूगोल नहीं, एक चरित्र है', मोहन भागवत का बड़ा बयान, हिंदुओं से एकजुटता और स्वदेशी अपनाने की अपील
छत्रपति संभाजीनगर के गंगापुर में आयोजित 'हिंदू सम्मेलन' और 'युवा सम्मेलन' को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने भारत के भविष्य और हिंदुओं की वैश्विक जिम्मेदारी पर एक महत्वपूर्ण दृष्टिकोण साझा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की पहचान केवल एक जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि एक विशिष्ट 'चरित्र' है, जिसकी धुरी हिंदू समाज है। भागवत ने कहा कि हिंदू समाज पारंपरिक रूप से समावेशी और सभी को स्वीकार करने वाला रहा है जो रीति-रिवाजों, पहनावे, खान-पान, भाषा, जाति और उपजाति में विविधता को अपनाता है और इन मतभेदों को संघर्ष का कारण नहीं बनने देता।
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उन्होंने यह बातें मध्य महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले के गंगापुर में आयोजित ‘हिंदू सम्मेलन’ में कहीं। भागवत ने कहा, ‘‘अगर भारत में कुछ अच्छा या बुरा होता है, तो हिंदुओं से पूछा जाएगा। भारत केवल एक भौगोलिक क्षेत्र का नाम नहीं, बल्कि देश का चरित्र है।’’ आरएसएस प्रमुख ने कहा, ‘‘जो लोग एकीकरण और सद्भावपूर्ण सह-अस्तित्व में विश्वास रखते हैं, वे हिंदू समाज और देश के सच्चे चरित्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह परंपरा सदियों से आक्रमणों और विनाश के बावजूद संरक्षित रही है। ऐसे लोग हिंदू कहलाते हैं और उनकी भूमि भारत कहलाती है।’’ उन्होंने कहा कि यदि लोग अच्छे, दृढ़ और ईमानदार बनने का प्रयास करें, तो देश भी वैश्विक मंच पर इन गुणों को प्रदर्शित करेगा।
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उन्होंने कहा कि विश्व भारत से कुछ अपेक्षा रखता है और पर्याप्त शक्ति एवं प्रभाव होने पर देश सार्थक योगदान देने में सक्षम होगा। भागवत ने कहा कि शक्ति में केवल सशस्त्र बल ही नहीं, बल्कि बुद्धि, सिद्धांत और नैतिक मूल्य भी शामिल होते हैं। भागवत ने आत्मनिर्भरता और स्थानीय उत्पादों के उपयोग पर जोर देते हुए कहा, ‘‘हमें स्थानीय वस्तुएं खरीदनी चाहिए। जो चीज यहां नहीं बन सकती, उसे अन्य देशों से खरीदा जा सकता है। भारतीय नीति निर्माता अंतरराष्ट्रीय व्यापार कर रहे हैं, लेकिन किसी के दबाव में नहीं। हमने आत्मनिर्भरता का मार्ग चुना है और हमें इसी मार्ग पर चलना चाहिए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमें विदेशों में रोजगार सृजन की चिंता नहीं करनी चाहिए, यह उन्हें करना है। जब वैश्वीकरण की बात करते हैं, तो वे वैश्विक बाजार की अपेक्षा रखते हैं, हम वैश्विक परिवार की अपेक्षा रखते हैं।’’
भागवत ने हिंदुओं में एकता का आह्वान किया और कहा कि यह केवल आरएसएस का उद्देश्य नहीं, बल्कि समुदाय के सभी सदस्यों का लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘हमें जाति, संप्रदाय, या व्यवसाय की परवाह किए बिना हिंदू मित्र बनाने चाहिए। इससे समानता स्थापित होगी। संघ पहल करेगा, लेकिन समुदाय को इसका नेतृत्व करना होगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘भगवान राम ने भी रावण से बातचीत के जरिए युद्ध टालने की कोशिश की थी, लेकिन बाद में हथियार उठाए। हमें भी अन्याय के खिलाफ कदम-दर-कदम लड़ना चाहिए।’’
आरएसएस के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित युवा सम्मेलन में भागवत ने युवाओं से अपील की कि वे ज्ञान और कौशल प्राप्त करने के लिए विदेश जाएं, लेकिन इसे भारत के विकास में उपयोग करें। उन्होंने कहा, ‘‘युवाओं का योगदान देश की प्रगति और भविष्य निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण है।’’
भागवत ने कहा, ‘‘संघ न तो किसी का विरोध करता है और न ही किसी से प्रतिस्पर्धा में है। इसका उद्देश्य केवल एक मजबूत और सामंजस्यपूर्ण समाज का निर्माण करना है।’’ उन्होंने युवाओं से इस सामूहिक प्रयास में सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की।’ इस युवा सम्मेलन का आयोजन एमआईटी कॉलेज में किया गया, जहां आरएसएस प्रमुख ने प्रतिभागियों से बातचीत की और उनके प्रश्नों के उत्तर दिए।
News Source- PIT News
Greenland पर कब्जे के लिए Donald Trump की नई चाल! समर्थन न करने वाले देशों पर 'टैरिफ' लगाने की धमकी, NATO सहयोगियों में दरार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड अधिग्रहण की महत्वाकांक्षा ने एक बार फिर वैश्विक कूटनीति में हलचल पैदा कर दी है। शुक्रवार को व्हाइट हाउस में एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने स्पष्ट संकेत दिए कि जो देश ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण का समर्थन नहीं करेंगे, उन्हें भारी आयात शुल्क (Tariff) का सामना करना पड़ सकता है।
राष्ट्रीय सुरक्षा और 'टैरिफ' की धमकी
ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अपरिहार्य बताया। उन्होंने यूरोपीय सहयोगियों को दी गई अपनी पिछली धमकियों का हवाला देते हुए कहा कि जिस तरह उन्होंने दवाओं पर शुल्क लगाने की बात कही थी, वैसा ही रुख वह ग्रीनलैंड के मामले में भी अपना सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि "अगर कोई देश ग्रीनलैंड के मामले में सहयोग नहीं करता है, तो मैं उस पर शुल्क लगा सकता हूँ। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए हमें ग्रीनलैंड की आवश्यकता है।"
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ट्रंप ने कहा, ‘‘अगर कोई देश ग्रीनलैंड के मामले में सहयोग नहीं करता है, तो मैं उस पर शुल्क लगा सकता हूं, क्योंकि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए हमें ग्रीनलैंड की आवश्यकता है। इसलिए मैं ऐसा कर सकता हूं।’’ कोपेनहेगन में सीनेटर और प्रतिनिधि सभा के सदस्यों के एक समूह ने शुक्रवार को डेनमार्क के प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन के साथ ही डेनिश और ग्रीनलैंड के सांसदों सहित नेताओं से मुलाकात की।
प्रतिनिधिमंडल के नेता और डेलावेयर के डेमोक्रेट सीनेटर क्रिस कून्स ने समूह के मेजबानों को ‘‘225 वर्षों तक एक अच्छा और भरोसेमंद सहयोगी तथा भागीदार’’ होने के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि ‘‘हमने इस संबंध को भविष्य में कैसे आगे बढ़ाया जाए, इस बारे में एक मजबूत और सार्थक संवाद किया।
ग्रीनलैंड का सामरिक महत्व
ग्रीनलैंड एक रणनीतिक स्थान पर स्थित है जो आर्कटिक क्षेत्र में व्यापारिक मार्गों और प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
नाटो और भविष्य की चुनौतियां
ग्रीनलैंड नाटो (NATO) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। ट्रंप के इस बयान से अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों के बीच दरार बढ़ने की आशंका है। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापारिक शुल्क को ग्रीनलैंड जैसे क्षेत्रीय मुद्दे से जोड़ना अंतरराष्ट्रीय संधियों और कूटनीतिक मर्यादाओं को चुनौती दे सकता है।
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