भारत में 17 साल में सबसे सूखा मानसून:बिहार में 37% कम बारिश, राजस्थान में 21%; अल नीनो का असर; सीजन खत्म होने में 9 दिन बचे
देश में इस साल मानसून की बारिश सामान्य से 15% कम रही है। यह आंकड़ा 17 साल का सबसे कम है। इससे पहले, साल 2009 में बारिश 18.3% कमी दर्ज की गई थी। इस साल बारिश में कमी का मुख्य कारण अलनीनो माना जा रहा है। 1 जून से 21 सितंबर तक 827.2 मिमी बारिश सामान्य मानी जाती है। अभी सिर्फ 703.7 मिमी बारिश हुई है। यानी 123.5 मिमी की कमी है। 30 सितंबर तक पूरे सीजन के लिए सामान्य बारिश 868.6 मिमी होती है। सीजन खत्म होने में 9 दिन बचे हैं। लेकिन, अब इतनी बारिश की संभावना नहीं है कि 15% की कमी पूरी हो सके। क्योंकि, देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्से से मानसून तेजी से जा रहा है। राजस्थान से शुरू हुई मानसून की विदाई 19 सितंबर को पश्चिमी राजस्थान से विदाई शुरू हुई थी। सोमवार को पंजाब, आधे हरियाणा और राजस्थान के कुछ और हिस्सों से मानसून विदा हो गया। अगले 24-48 घंटे में इसके हरियाणा के बाकी हिस्से, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड से भी विदा होने की परिस्थितियां बनी हुई हैं। हालांकि, बंगाल की खाड़ी में एक सिस्टम विकसित हुआ है, जो डीप डिप्रेशन में बदल रहा है। यह 24 से 36 घंटे में ओडिशा व आंध्र प्रदेश के तट से टकरा सकता है। इसकी वजह से देश के पूर्वी, मध्य और दक्षिणी राज्यों में अगले तीन-चार दिन भारी बारिश होने की संभावना है। क्या है अल नीनो और ये क्यों आता है प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में जब समुद्री हवाएं कमजोर पड़ती हैं, तो दक्षिण अमेरिकी तट का पानी असामान्य रूप से गर्म होने लगता है। समुद्र के पानी के गर्म होने को अल नीनो कहते हैं। यह वैश्विक हवाओं और बादलों के पैटर्न को बदलकर दुनियाभर के मौसम को तहस-नहस कर देता है। जलाशयों में पिछले साल से 21% कम पानी अगस्त तक खरीफ की बुवाई 1.7% कम थी। आईसीआरए के अनुसार, रकबा 2% घट सकता है। कम बारिश, ज्यादा तापमान और अल नीनो से मिट्टी की नमी घटी है। इससे उपज घटेगी। विशेषज्ञों का अनुमान है कि चावल उत्पादन 1 करोड़ टन घटकर 14.4 करोड़ टन रह सकता है। यानी पिछले साल की तुलना में 6.5% कम। रबी की बुवाई अक्टूबर से शुरू होगी। शुरुआती सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता कमजोर है। उत्तर व दक्षिण भारत में जल भंडार में गिरावट को आईसीआरए ने रबी के लिए जोखिम बताया। गेहूं, चना जैसी फसलों पर दबाव बढ़ेगा। 178 प्रमुख जलाशयों में 131.17 अरब क्यूबिक मीटर पानी है। पिछले साल से 21% कम। इससे बिजली पर दो असर होंगे। पहला, बिजली आपूर्ति में हाइड्रो का योगदान घटने का जोखिम होगा। दूसरा, बिजली की मांग बढ़ेगी। ---------------------------- ये खबर भी पढ़ें… मानसून लौटने लगा, 45% जिलों में बारिश का कोटा अधूरा:10 साल पहले ऐसा हुआ तो ट्रेन से पानी पहुंचाना पड़ा, अबकी क्या होगा राजस्थान से मानसून की विदाई की शुरुआत हो चुकी है। धीरे-धीरे पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, एमपी, यूपी, बिहार और महाराष्ट्र में कमजोर होते हुए पूरे देश से विदा होगा। पूरी खबर पढ़ें…
फिजिकल हेल्थ- लीकी गट क्या है:क्यों कमजोर होता आंतों का सुरक्षा बैरियर, डॉक्टर से जानें इसके लक्षण, इलाज और जरूरी सावधानियां
हमारी आंतें सिर्फ खाना पचाने का काम नहीं करतीं। ये खाने से जरूरी पोषक तत्वों को शरीर में पहुंचाती हैं और कई हानिकारक बैक्टीरिया व टॉक्सिन्स को ब्लड में जाने से रोकती भी हैं। इसके लिए आंतों की अंदरूनी परत एक फिल्टर की तरह काम करती है। अगर यह प्रोटेक्टिव लेयर कमजोर पड़ जाए, तो कुछ टॉक्सिन्स आंतों के जरिए ब्लड में भी पहुंच सकते हैं। इस कंडीशन को ‘लीकी गट’ कहते हैं। सोशल मीडिया पर आजकल इसकी खूब चर्चा है। गैस, पेट फूलना, कब्ज, दस्त, फूड इंटॉलरेंस और थकान जैसे कई लक्षणों को इससे जोड़ दिया जाता है। लेकिन क्या हर ऐसे लक्षण का मतलब लीकी गट है? इसे समझना जरूरी है। इसलिए आज ‘फिजिकल हेल्थ‘ में लीकी गट की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. सुकृत सिंह सेठी, डायरेक्टर, सीनियर कंसल्टेंट, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी, हेप्टोलॉजी एंड लिवर ट्रांसप्लांटेशन, नारायणा हॉस्पिटल, गुरुग्राम सवाल- लीकी गट क्या होता है? जवाब- इसे आसान भाषा में ऐसे समझिए- उदाहरण से समझें- कल्पना कीजिए कि घर की जालीदार खिड़की में छोटे-छोटे छेद हैं। इस जाली से हवा तो अंदर आ सकती है, लेकिन अगर छेद बड़े हो जाएं तो धूल-मिट्टी भी अंदर आने लगेगी। इसी तरह लीकी गट में आंत के बैरियर यानी प्रोटेक्टिव-लेयर की पकड़ कमजोर हो जाती है। सवाल- शरीर की फंक्शनिंग में हमारी आंतों का क्या काम है? जवाब- इसे पॉइंटर्स में समझिए- आंत के 4 बड़े काम ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या लीकी गट कोई बीमारी है? जवाब- लीकी गट को अपने आप में एक बीमारी मानना सही नहीं है। आसान भाषा में इसे आंत की दीवार की पारगम्यता बढ़ना कहा जा सकता है। यानी आंत की सुरक्षा-परत सामान्य से ज्यादा चीजों को पार जाने दे सकती है। आंत की दीवार पूरी तरह बंद नहीं होती। उसमें बहुत बारीक रास्ते होते हैं, जिनसे जरूरी पोषक तत्व शरीर में पहुंचते हैं। समस्या तब होती है, जब यह बैरियर जरूरत से ज्यादा पारगम्य हो जाए। सवाल- क्या लीकी गट होने पर अन्य बीमारियां हो सकती हैं? जवाब- यह कहना सही नहीं होगा कि लीकी गट होने से सीधे कई दूसरी बीमारियां हो जाती हैं। कई मामलों में यह बीमारी का कारण होने की बजाय बीमारी का परिणाम भी हो सकता है। लीकी गट से जुड़ी सभी संभावित बीमारियां ग्राफिक में देखिए- सवाल- लीकी गट के लक्षण क्या हैं? जवाब- लीकी गट सिंड्रोम के मुख्य लक्षणों में पाचन से जुड़ी समस्याएं, थकान और स्किन डिजीज शामिल हैं। डिटेल नीचे ग्राफिक में देखिए– सवाल- क्या हर व्यक्ति में ऊपर दिए लक्षण दिखने का मतलब लीकी गट होता है? जवाब- नहीं, गैस, पेट फूलना, कब्ज या दस्त जैसे लक्षण बहुत सामान्य हैं। इनके पीछे कई समस्याएं हो सकती हैं, जैसेकि– सवाल- लीकी गट क्यों होता है? जवाब- इसका कोई एक कारण नहीं है। आंत का सुरक्षा बैरियर कई चीजों से प्रभावित हो सकता है। सभी कारण नीचे ग्राफिक में देखिए। सवाल- नींद की कमी हमारी आंतों की सेहत को कैसे प्रभावित करती है? जवाब- इसे पॉइंटर्स में समझिए- सवाल- प्रोलॉन्ग्ड स्ट्रेस से आंतों का सुरक्षा बैरियर कैसे कमजोर होता है? जवाब- इसे पॉइंटर्स में समझिए- सवाल- क्या ज्यादा अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड और शराब आंतों के सुरक्षा बैरियर को कमजोर करते हैं? जवाब- हां, इसका शरीर पर ये प्रभाव पड़ता है- ये सारी चीजें आंतों के सुरक्षा बैरियर को कमजोर करती हैं। ठीक यही असर शराब पीने पर भी होता है। शराब की मामूली मात्रा भी बॉडी के लिए सेफ नहीं है। सवाल- लीकी गट की जांच कैसे होती है? जवाब- लीकी गट की जांच के लिए कोई एक कॉमन टेस्ट नहीं है। इसके लिए कई तरह के अलग-अलग टेस्ट किए जाते हैं, जैसेकि- 1. लैक्टुलोज-मैनिटोल टेस्ट: इसमें पेशेंट को दो प्रकार की शुगर (लैक्टुलोज और मैनिटोल) का घोल पिलाया जाता है। इसके बाद यूरिन के जरिए यह मापा जाता है कि शरीर ने उन्हें कितनी मात्रा में अवशोषित किया है। 2. जोनुलिन टेस्ट: इस टेस्ट में स्टूल या ब्लड सैंपल में 'जोनुलिन' नामक प्रोटीन का लेवल टेस्ट किया जाता है। 3. ब्लड टेस्ट: इसमें बैक्टीरिया या भोजन के प्रति एंटीबॉडी लेवल की जांच की जाती है। 4. स्टूल एनालिसिस: आंतों के माइक्रोबायोम, सूजन के मार्कर्स और बैक्टीरिया के असंतुलन का पता लगाने के लिए स्टूल की जांच की जाती है। सवाल- लीकी गट का इलाज क्या है? जवाब- इसका कोई एक तय इलाज या एक खास दवा नहीं है। लीकी गट में डॉक्टर लाइफस्टाइल में बदलाव की सलाह देते हैं, जैसेकि- सवाल- लीकी गट होने पर लाइफस्टाइल में क्या बुनियादी बदलाव करने चाहिए? जवाब- इसके लिए डाइट में वो चीजें शामिल करने की जरूरत है, जो हमारी आंतों को स्वस्थ रखती हैं। जैसेकि खाने में पर्याप्त सब्जियां, फल, दालें और साबुत अनाज हो। इसके अलावा लाइफस्टाइल में कई और बदलाव करने चाहिए। इसे ग्राफिक में देखिए- सवाल- खान-पान की किन आदतों पर ध्यान देना चाहिए? जवाब- लीकी गट होने पर खाने में फाइबर की ज्यादा मात्रा और वेरायटी सबसे जरूरी है। फाइबर आंत के अच्छे बैक्टीरिया के लिए भोजन का काम करता है। नीचे ग्राफिक में डिटेल देखिए- कुल मिलाकर, लीकी गट आंतों से जुड़ी एक समस्या है, जिसमें आंतों की अंदरूनी परत कमजोर हो जाती है। अगर इसके लक्षण लगातार बने रहें तो सही जांच और इलाज के लिए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। ********************* ग्राफिक्स- विपुल शर्मा ……………………. ये खबर भी पढ़ें… फिजिकल हेल्थ- देश में बढ़ रहे स्क्रब टाइफस के मामले:कैसे फैलता है ये संक्रमण, डॉक्टर से जानें इसके लक्षण, बचाव और सावधानियां हाल के दिनों में देश के अलग-अलग राज्यों से ‘स्क्रब टाइफस’ के कई मामले दर्ज किए गए हैं। स्क्रब टाइफस एक बैक्टीरियल इन्फेक्शन है, जो संक्रमित चिगर के काटने से होता है। चिगर घास-झाड़ियों वाले इलाकों में पाया जाने वाला एक छोटा कीड़ा होता है। पूरी खबर पढ़ें…
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