पालक पनीर पर विवाद, कोर्ट तक पहुंच गया मामला; 1.6 करोड़ रुपये में हुई सुलह
अमेरिका की यूनिवर्टी में पीएचडी करने वाले दो भारतीय स्टूडेंट्स को पालक पनीर की वजह से पढ़ाई बीच में छोड़कर भारत लौटना पड़ा। पालक पनीर गर्म करने के दौरान विवाद हो गया और मामला कोर्ट तक पहुंच गया
GNDU की खेल मंत्रालय से शिकायत, MAKA ट्रॉफी के नियमों में बदलाव को पंजाब ने बताया भेदभावपूर्ण
देश की सबसे प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी खेल ट्रॉफी Maulana Abul Kalam Azad Trophy को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है. पिछले करीब 65 वर्षों से यह ट्रॉफी पूरे साल के प्रदर्शन, अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट और AIU चैंपियनशिप में उपलब्धियों के आधार पर दी जाती रही है. लेकिन सत्र 2023-24 से इसकी गणना प्रणाली में अहम बदलाव किया गया है. अब इसमें Khelo India University Games को कहीं अधिक वेटेज दिया जा रहा है.
KIUG का बढ़ा वेटेज और बदलती रैंकिंग
नए नियमों के तहत KIUG में बेहतर प्रदर्शन करने वाली यूनिवर्सिटीज़ को पदक तालिका में सीधा फायदा मिल रहा है. खेल विशेषज्ञों का मानना है कि इससे साल भर की निरंतरता की बजाय एक ही टूर्नामेंट पर अत्यधिक निर्भरता बढ़ गई है. इसका असर यह हुआ है कि कुछ यूनिवर्सिटीज़, जो पारंपरिक रूप से MAKA ट्रॉफी की दौड़ में पीछे रहती थीं, अब अचानक शीर्ष स्थानों पर पहुंच गई हैं.
नए खेलों का समावेश और मेडल की बाढ़
सत्र 2024-25 में KIUG में कैनोइंग और कयाकिंग जैसे नए खेलों को शामिल किया गया. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जहां इन खेलों के लगभग 10 ओलंपिक इवेंट्स होते हैं, वहीं KIUG में इनकी संख्या बढ़ाकर करीब 30 कर दी गई. इन खेलों के लिए अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, वाटर बॉडी और महंगे उपकरणों की जरूरत होती है, जो हर यूनिवर्सिटी के पास उपलब्ध नहीं हैं. मेडल इवेंट्स की संख्या बढ़ने से कुल पदकों में भी भारी इजाफा हुआ है, जिससे रैंकिंग के समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं.
निजी यूनिवर्सिटीज़ को बढ़त
नए नियमों के बाद एक निजी यूनिवर्सिटी के मेडल टैली में असाधारण उछाल देखा गया है. जहां पहले इसके मेडल 3 तक सीमित थे, वहीं बाद के सत्रों में यह संख्या 32 और फिर 42 तक पहुंच गई. दूसरी ओर, पंजाब की सरकारी और पारंपरिक यूनिवर्सिटीज़, जो दशकों तक यूनिवर्सिटी खेलों में दबदबा बनाए हुए थीं, अब संसाधनों की कमी और बदले हुए वेटेज सिस्टम के कारण पिछड़ती नजर आ रही हैं.
पारदर्शिता को लेकर सवाल
Guru Nanak Dev University सहित कुछ अन्य यूनिवर्सिटीज़ ने नियमों में बदलाव और खिलाड़ियों की एंट्री प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि नियमों में किसी भी तरह का संशोधन खेल सत्र शुरू होने से पहले ही स्पष्ट कर दिया जाना चाहिए. इसके साथ ही एंट्री लिस्ट, पात्रता और समय सीमा का सख्ती से पालन होना जरूरी है, ताकि किसी भी तरह के पक्षपात या भ्रम की गुंजाइश न रहे.
समान अवसर की मांग
खेल विशेषज्ञों और यूनिवर्सिटी अधिकारियों का मानना है कि MAKA ट्रॉफी जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में संसाधनों की ताकत नहीं, बल्कि खिलाड़ियों की प्रतिभा और निरंतर प्रदर्शन को प्राथमिकता मिलनी चाहिए. अब निगाहें संबंधित खेल संघों और नीति निर्माताओं पर टिकी हैं कि वे इन चिंताओं पर क्या फैसला लेते हैं और यूनिवर्सिटी खेलों में संतुलन कैसे बहाल किया जाता है.
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