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Explained: क्या आरक्षण गरीबी हटाने का फार्मूला है या बराबरी लाने का तरीका, क्या हैं सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख फैसले

एससी एसटी आरक्षण में आर्थिक आधार बनाने और क्रीमी लेयर की मांग तेज हो गई है. इसी तरह की एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई भी कर रहा है. आइए जानते हैं कि एससी-एसटी आरक्षण का आधार क्या है और संविधान में इसके लिए व्यवस्था क्या है.

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ISRO का रॉकेट फेल, फिर भी स्पेनिश कैप्सूल से सिग्नल:स्पेस से सिग्नल भेजा; कंपनी बोली- किस रास्ते से पहुंचा, पता लगा रहे

ISRO का PSLV-C62 मिशन सोमवार को फेल हो गया। उड़ान भरने के 8 मिनट बाद PSLV रॉकेट तय रास्ते से भटक गया। इसी रॉकेट से एक कैप्सूल भेजने वाली स्पेन की कंपनी ने मंगलवार को कहा है कि उसे अपने कैप्सूल से सिग्नल मिला है। स्पेन की स्टार्टअप कंपनी ऑर्बिटल पैराडाइम ने मंगलवार को सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि तकनीकी गड़बड़ी से पहले ही उनका KID (केस्ट्रेल इनिशियल डेमोंस्ट्रेटर) कैप्सूल रॉकेट से अलग हो चुका था। इसी वजह से उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचा। ऑर्बिटल पैराडाइम ने यह भी बताया कि अब यह पता लगाया जा रहा है कि कैप्सूल किस रास्ते से अंतरिक्ष में पहुंचा। उसके ट्रैजेक्ट्री से जुड़े पूरे तकनीकी आंकड़े और विश्लेषण बाद में एक विस्तृत रिपोर्ट के रूप में जारी किए जाएंगे। वायुमंडल में दोबारा एंट्री नहीं कर पाया कैप्सूल मिशन फेल होने के बावजूद कैप्सूल का सक्रिय हो जाना स्पेनिश कंपनी के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। यह एक टेस्ट और डेमोंस्ट्रेशन मिशन है, जिसका मकसद भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए तकनीक को परखना था। कंपनी के मुताबिक, KID कैप्सूल का मकसद अंतरिक्ष में कुछ समय तक सक्रिय रहकर सिग्नल और तकनीकी डेटा भेजना था। इसके बाद योजना यह थी कि कैप्सूल धरती के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश करे, इस दौरान बनने वाली तेज गर्मी (हीट) को झेले और अंत में समुद्र में गिरकर (स्प्लैशडाउन) अपना मिशन पूरा करे। हालांकि फिलहाल कैप्सूल अंतरिक्ष में ही सक्रिय है। ISRO ने मिशन के फेल होने की क्या वजह बताई ISRO के मुताबिक PSLV-C62 मिशन थर्ड स्टेज के आखिर में गड़बड़ हुआ। टेलीमेट्री डेटा में पता चला कि रॉकेट के रोल रेट (घूमने की गति/कंट्रोल) में डिस्टर्बेंस आ गई, यानी रॉकेट अनियंत्रित होकर घूमने लगा और अपना तय फ्लाइट पाथ छोड़कर भटक गया। ISRO चीफ वी. नारायणन ने कहा कि तीसरे स्टेज के अंत तक प्रदर्शन सामान्य था, उसके बाद रोल रेट में गड़बड़ी और फ्लाइट पाथ में डेविएशन दिखा। फिलहाल ISRO डेटा एनालिसिस कर रहा है। 512km की ऊंचाई पर ऑर्बिट में स्थापित होने थे सैटेलाइट मिशन के 8वें मिनट में गड़बड़ी हुई PSLV-C62 / EOS-N1 मिशन कुल 1 घंटा 48 मिनट 5 सेकेंड का था, लेकिन 8वें मिनट में गड़बड़ी आ गई। इस वजह से: 16 सैटेलाइट लेकर जा रहा था रॉकेट इस मिशन पर जिन 16 सैटेलाइट्स को लॉन्च किया गया था, उनमें 8 भारतीय और 8 विदेशी सैटेलाइट हैं। इसमें फ्रांस, नेपाल, ब्राजील और यूके के सैटेलाइट शामिल हैं… 1. अन्वेषा सैटेलाइट: मिशन का सबसे अहम हिस्सा था- हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग तकनीक वाली EOS-N1 सैटेलाइट, जिसे अन्वेषा भी कहा जाता है। यह स्पेस से जमीन की बारीक तस्वीरें लेने वाला सैटेलाइट था। इसका इस्तेमाल सेना और डिफेंस के इस्तेमाल के लिए होना था। 2. आयुलसैट: आयुलसैट बेंगलुरु की स्पेस टेक्नोलॉजी स्टार्टअप OrbitAID का बनाया सैटेलाइट था। इस सैटेलाइट का मकसद अंतरिक्ष में ईंधन भरने की तकनीक पर काम करना था। इस तकनीक के जरिए भविष्य में हम स्पेसशिप्स की लाइफ बढ़ा सकते हैं। 3. MOI-1: MOI-1 हैदराबाद की दो स्टार्टअप कंपनियों ‘TakeMe2Space’ और ‘EON Space Labs’ ने मिलकर बनाया था। यह AI इंटीग्रेटेड सैटेलाइट था। इसके पास स्पेस में ही डेटा को प्रोसेस करने की क्षमता है। इससे ग्राउंड स्टेशन पर निर्भरता कम हो सकती थी। MOI-1 में MIRA नाम की एक स्वदेशी स्पेस टेलीस्कोप भी थी। 4. IMJS: भारत–मॉरीशस का संयुक्त सैटेलाइट IMJS का उद्देश्य अंतरिक्ष में खोज और सीमा की निगरानी करना था। 5. KID: केस्ट्रेल इनिशियल डेमॉन्स्ट्रेटर (KID) स्पेन की कंपनी ‘Orbital Paradigm’ का बनाया एक 25 किलो का री-एंट्री कैप्सूल है। इस का मुख्य उद्देश्य यह जांचना है कि जीरो ग्रैविटी में किए गए एक्सपेरिमेंट के सैम्पल्स को धरती पर वापस कम खर्च में कैसे लाया जाए। 6. ऑर्बिटल टेंपल: ऑर्बिटल टेंपल 250 ग्राम का पॉकेटक्यूब सैटेलाइट था। इसे अमेरिका की मोरहेड स्टेट यूनिवर्सिटी और केंटकी स्पेस ने मिलकर विकसित किया था। इसके अलावा CGUSAT-1, भारतीय कंपनी ‘Dhruva Space’ का LACHIT और Thybolt-3, नेपाल का Munal सैटेलाइट, SR-2 SAT जैसे अन्य सैटेलाइट भी थे, जो UAE और अमेरिका में बने थे। दुनिया के सबसे भरोसेमंद रॉकेट में शामिल है PSLV PSLV को इसरो का सबसे भरोसेमंद रॉकेट माना जाता है। इसने अब तक 63 उड़ानें पूरी की हैं, जिनमें चंद्रयान-1, मंगलयान (MOM), आदित्य-L1 और एस्ट्रोसैट जैसे बड़े मिशन शामिल हैं। साल 2017 में PSLV ने एक ही मिशन में 104 सैटेलाइट्स लॉन्च करके वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था। --------------------------------------- इसरो का PSLV-C62 रॉकेट रास्ते से भटका, मिशन फेल:तीसरी स्टेज में गड़बड़ी आई; अन्वेषा सहित 16 सैटेलाइट लेकर गया था इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (ISRO) का साल 2026 का पहला मिशन 'PSLV-C62' फेल हो गया है। रॉकेट 12 जनवरी को सुबह 10.18 बजे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित अंतरिक्ष केंद्र से 16 सैटेलाइट लेकर उड़ा था। ISRO चीफ डॉ. वी नारायणन ने कहा कि रॉकेट लॉन्चिंग के तीसरे चरण में गड़बड़ी आ गई, जिसके कारण वह रास्ता भटक गया। पूरी खबर यहां पढ़ें...

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  Sports

संकटमोचक KL Rahul का New Zealand के खिलाफ शतक, तोड़ा Azharuddin का बड़ा Record

राजकोट के निरंजन शाह स्टेडियम में खचाखच भरे स्टेडियम में न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे वनडे में रोहित शर्मा और विराट कोहली के शानदार प्रदर्शन की उम्मीद थी। हालांकि, केएल राहुल ने बल्ले से सारी सुर्खियां बटोर लीं। विकेटकीपर-बल्लेबाज राहुल ने मेजबान टीम के लिए तब मोर्चा संभाला जब दोनों दिग्गज बल्लेबाज अपनी अच्छी शुरुआत को बड़े स्कोर में तब्दील नहीं कर पाए। दरअसल, राहुल ने वनडे में अपना आठवां शतक तब बनाया जब शुभमन गिल के अलावा लगभग कोई भी भारतीय बल्लेबाज 30 रन का आंकड़ा पार नहीं कर सका।
 

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इस शतक के साथ ही राहुल ने पूर्व भारतीय कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन के 50 ओवर के फॉर्मेट में शतकों के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया। अजहरुद्दीन अपने 334 वनडे मैचों के करियर में सिर्फ सात शतक ही बना पाए थे। वहीं राहुल ने अपने करियर के सिर्फ 93वें वनडे में ही यह कारनामा कर दिखाया और टीम के मुश्किल समय में टीम को संभाला। वह इस मैदान पर वनडे में शतक बनाने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी भी बन गए। उन्होंने शिखर धवन का रिकॉर्ड तोड़ दिया, जो इससे पहले 90 रन पर आउट हुए थे।

राहुल की शानदार पारी की बदौलत भारत ने 50 ओवरों में सात विकेट के नुकसान पर 284 रन बनाए। राहुल ने मात्र 92 गेंदों पर 112 रन बनाकर नाबाद पारी खेली। पारी के 22वें ओवर में बल्लेबाजी करने आए राहुल ने क्रीज पर रहते हुए 11 चौके और एक छक्का लगाया। बीच के ओवरों में पिच के थोड़ा टर्न लेने से केएल राहुल के लिए क्रीज पर शुरुआत आसान नहीं रही। विराट कोहली भी बल्लेबाजी करने आए और जल्द ही 23 रन बनाकर आउट हो गए। हालांकि, राहुल ने हार नहीं मानी और अपनी पारी को शानदार ढंग से आगे बढ़ाया। उन्होंने रवींद्र जडेजा के साथ पांचवें विकेट के लिए 73 रनों की साझेदारी करके पारी को संभाला और फिर डेथ ओवरों में न्यूजीलैंड के गेंदबाजों पर जमकर हमला बोला।
 

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टीम इंडिया के संकटमोचक केएल राहुल ने यह सुनिश्चित किया कि भारत एक सम्मानजनक स्कोर खड़ा कर सके, जो एक समय न्यूजीलैंड की गेंदबाजी को देखते हुए बेहद मुश्किल लग रहा था। सीरीज जीतने के लिए अब भारत को 285 रनों के लक्ष्य का बचाव करने के लिए अच्छी गेंदबाजी करनी होगी। इस मैदान पर पहली पारी का औसत स्कोर 322 है, इसलिए फिलहाल न्यूजीलैंड की टीम बेहतर स्थिति में होगी, लेकिन उन्हें भी लक्ष्य का पीछा करते हुए केएल राहुल जैसी पारी खेलने वाले किसी खिलाड़ी की जरूरत होगी।
Wed, 14 Jan 2026 17:26:54 +0530

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