Pandokhar Sarkar vs Bageshwar Baba: पंडोखर सरकार का चैलेंज मानेंगे धीरेंद्र शास्त्री? 1 करोड़ 41 लाख की खुली चुनौती
बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री के ब्रेन डिटॉक्स के दावे पर पंडोकर सरकार ने बड़े सवाल उठाए हैं और अब पर्ची से भविष्य बताने के दावों को लेकर 1 करोड़ 41 लाख की खुली चुनौती भी दे दी है. क्या यह चुनौती सीधे-सीधे धीरेंद्र शास्त्री के लिए है? क्या पंडोखर सरकार को उनके दावों पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं है और आखिर दोनों के बीच ये टकराव कब खत्म होगा? इन्हीं सवालों पर पंडोकर सरकार से सीधी और बेबाक बातचीत न्यूज नेशन ने की.
प्रश्न: बहुत धन्यवाद आभार पंडोकर सरकार आपका न्यूज नेशन के मंच में आने के लिए.
उत्तर: जय श्री राम. जय श्री पंडोकर सरकार. सभी दर्शकों को न्यूज़ नेशन के माध्यम से मैं यह बताना चाहता हूं कि देखिए यह भारत भूमि ऋषि प्रधान देश है. जहां राम और कृष्ण की यह भूमि है. यह श्रद्धा आस्था की भूमि है. ये किसान किसानों के लिए किसानों के किसान प्रधान देश यह भारत भूमि है. देखिए हमने जो अपना जवाब दिया है कि रिया की प्रतिक्रिया हुई है. इन्होंने दो सप्ताह पूर्व में कहा कि पंडोखर सरकार नाम तो नहीं लिया. हमें कोई एक गुरु मिले. फिर बदल दिए कि गुरु नहीं कोई चेला मिला. हम तो कहा कि हमारे गुरु बहुत पहुंचे हुए हैं. जो आधार नंबर पैन नंबर, उसका पासवर्ड वह सब कुछ बता देते हैं. यहां तक कि दुनिया में सबसे ऊंचे हमारे गुरु जी हैं. ये अनडली इशारा किया और कहा कि ₹70000 लेकर के बताते हैं. तो बोले ऐसे गुरु क्या किसी का खाक संभालेंगे? हम यदि तुम्हारे गुरु पैसे ले ही बताते हैं तो काहे की विद्या यदि पैसा लेना ही है तो भारत अमेरिका में लीगल लॉटरी है जो करोड़ों की होती है उसकी हमारी सेटिंग करा दो गुरुजी से अपने और सेटिंग करा दीजिए तो हम कुछ गुरु जी को भी दे देंगे तो ऐसे बुद्धि वाले व्यक्ति ऐसे तुच्छ बुद्धि वाले व्यक्ति के वक्तव्य को जो बगैर नाम लिए मेरे तरफ डाला तो मैंने भी उनको जवाब खड़ी चुनौती के रूप में कहा कि आप तो देश में घूम रहे हो, विदेशों में घूम रहे हो. भारत में तो घूम ही रहे हो, देश विदेशों में घूम रहे हो. ऐसा नहीं कि और भारत के कोई संत नहीं जाते. लेकिन सभी जाते हैं. लेकिन तुम तो वहां अपना प्रोजेक्ट बताते हो कि हम कैंसर हॉस्पिटल बना रहे हैं. हम कन्या विवाह कर रहे हैं. हम यह काम कर रहे हैं. हम वो काम कर रहे हैं. तो आपको जरूरत ज्यादा पड़नी है. तो आप भी तो हनुमान जी से बात करते हो. आप भी तो सन्यासी बाबा से बात करते हो. आप भी तो अनन्य देवताओं से बात करते हो. तो क्या उनसे लंदन की इंग्लैंड की लॉटरी ले लेते? भाई अमेरिका का तो आपको हुआ नहीं अभी तक और यदि आप इतना ही जानते हैं कि हमारा अमेरिका का वीजा कब होगा तो यह आज डेट क्लियर कर दें कि कब तक अमेरिका का इनका वीजा हो जाएगा कब तक कनाडा का हो जाएगा मेरी बात समझ रहे हम क्या कहना चाहते हैं तो इस प्रकार के फालतू के प्रपंच वक्तव्य नहीं देना चाहिए और मैं खुला ऐसे तथाकथित छदम रूपी यह पाखंडवाद को बढ़ावा दे रहे हैं और यह पर्ची के नाम पर पिक और मैजिक का प्रयोग है. हम नजर का धोखा है. लोगों को गुमराह करते हैं. रिक्त स्थान भरते हैं. यही नहीं जितने भारत में जितने भी पर्चा लिखने वाले हैं जो अपने आप को कहते हैं मैं पर्चा लिखता हूं. तो मैं कहता हूं वे सब आध्यात्मिक पुरुष हैं. ईश्वरवादी हैं. यदि आप गुरु मुख से हैं और वास्तविक आपके पास विद्या है हम तो मैं कोई दुश्मन नहीं हूं आपका. मैं कोई श्याम मानव नहीं हूं. हम भी ईश्वरवादी हैं. ब्राह्मण है. पंडोकर धाम पीठाधीश्वर है और हमारी भी एक जिम्मेदारी बनती है कि हम अपनी ब्रह्म विद्या को अपनी पद्धति को सुरक्षित रखें. पंडोखर धाम में 32 वर्षों से यानी कि 35 वर्ष करीबन होने जा रहे हैं. तीन दशक से अधिक समय हो गया है और मैं इस पद्धति को इस गुरु परंपरा को हम किसी के सामने झुकने नहीं देने के लिए संकल्पित हैं. लेकिन भूत वर्तमान की बात पर्चा लिखने की करते हो तो मैं जरूर क्वेश्चन मार्क करता हूं कि आप बताइए कि आप कब अमेरिका से लॉटरी लाने वाले हैं? आप कनाडा से कब लॉटरी लाने वाले हैं? कब इंग्लैंड की आप लॉटरी लेना ले लेने वाले हो? हमें बताएं. यदि आपकी हनुमान जी से बात होती है तो बताइए क्योंकि पर्चा हम भी बनाते हैं. पर्चा आप भी बनाते हो. ठीक है. और जितने भी अर्च पर्चा वाले लोग पंडोकर सरकार पर यह बात रखते हैं कि पंडोकर सरकार किसी से जनन रखते हैं तो पंडोकर सरकार उस जमाने से हैं कि जब ये पर्चा लिखने वाले पैदा भी नहीं हुए थे.
प्रश्न: पंडोकर सरकार जी एक और बात बताइए. हमारे आपने तो अभी तो पर्ची की बात पे मैं बाद में आऊंगा. महाराज जी वह तो यह कह रहे हैं कि साहब मैंने ऐसा ब्रेन डिटॉक्स का फार्मूला तैयार किया है कि आने वाली पीढ़ी का दिमाग आइंस्टीन, एडिसन, अब्राहम लिंकन, सुकरात और प्लेटो से भी बेहतर होगा. ये वो दावा कर रहे हैं.
उत्तर: देखिए ये अच्छी बात है. ये 21वीं सदी है और 21 सदी में ज्ञान विज्ञान की चर्चा होना चाहिए और मंत्र विधा के माध्यम से, यज्ञ के माध्यम से योग के माध्यम से सब संभव है. लेकिन जब होगा तब देखा जाएगा. अभी हाल फिलहाल तो मैं पर्चे की बात कर रहा हूं. हम पाखंडवाद की बात कर रहा हूं. पंडुकर धाम में भी विश्वविद्यालय बनने जा रहा है. हम पंडुकर धाम में भी ये योजना प्रकल्प में जुड़ा हुआ है. चिकित्सा विज्ञान वहां जुड़ा है. योग विज्ञान वहां जुड़ा हुआ है, तो ये सब होते रहते हैं. भारतवर्ष में कि पंडुकर ही धाम में किला नहीं है कि ये जनमानस के लोक कल्याण के काम कर रहे हैं. भारतवर्ष में हजारों श्रेट हैं, शक्तियां हैं, न्यास हैं जो काम कर रहे हैं. तो मैं अच्छे कामों की प्रशंसा करता हूं और शुभकामना देता हूं. साधुवाद देता हूं. लेकिन आपको साधुवाद आशीर्वाद बड़ों से आशीर्वाद की कामना करता हूं.
प्रश्न: आप यह कह रहे हैं कि पर्ची निकालने का हुनर सिर्फ पंडोकर सरकार के पास है. बाकी जितने लोग यह निकालते हैं यह पाखंड करते हैं. ये लोगों को बेवकूफ बनाते हैं. इन्हें यह नहीं आता. इन्हें यह विद्या नहीं आती. आप यह दावा कर रहे हैं.
उत्तर: भारत भूमि सदैव परीक्षक परीक्षा की भूमि रही है. सदैव यहां पर ज्ञान विज्ञान की परीक्षा होती रही है और सदैव समय-समय पर इसकी समितियां होती थी. इसके असद होते थे. चाहे वो ज्योतिष का विषय हो, चाहे वो हमारे पुराण शास्त्रों की बात हो, चाहे दूरगामी ऋषि महर्षियों की चर्चा हो. यदि आपके पास भगवत कृपा है तो बताने में पूछ अपनी परीक्षा देने में क्या का इतरा? श्याम मानव तो मैं हूं नहीं. हम तो पंडुकड़ धाम में अह 21वीं सदी में युवाओं को ब्रेन को चेंज करने के लिए कि भाई अंधविश्वास के चक्कर में मत पड़ो. हम तो पंडुकर धाम में प्रतिवर्ष दंगल कराते हैं. पंडुकर धाम में कबड्डी कराते हैं. पंडुकर धाम में मेडिकल जादूगरों को बुलाते हैं. जिससे युवा बेटा बेटी ये समझ ले कि चमत्कार नाम की क्या चीज है और चमत्कार किसे कहते हैं. चमत्कार किसे नहीं कहते हैं. तो पंडुकर में भी हम अलग-अलग प्रकार के मंच पर इसके जानकार जो हैं जो इसको कला दिखाते हैं जो कहते हैं हाथ की सफाई है उनको बुला करके उत्सव में युवाओं का ब्रेन को परिवर्तन करते हैं कि जादू चमत्कार के चक्कर में मत पड़े ज्ञान विज्ञान का पढ़ाई करें और साथ में पूजा पाठ करें भगवत ईश्वर का चमत्कार आपके जीवन में हो जाएगा आप इंसान बन जाएंगे इससे बड़ा कोई चमत्कार दूसरा नहीं होता है.
प्रश्न: आप मुझे सीधे बताइए ना कि पंडित धीरेंद्र शास्त्री को पर्ची निकालना आता है या नहीं आता?
उत्तर: मैंने तो देखा नहीं और जिन्होंने बनवाए हैं वो जानते होंगे जो जिनको भविष्यवाणी की होंगी इनको लिख के दिया होगा वो जानते होंगे. हमारे सामने तो आज तक कोई पर्चा नहीं बनाया और जितने भी हमारे जानकारी में बनाए गए उनको पर्चा कैसे बने क्या बने मैं आपके सामने बैठकर के आमने सामने बैठा रहा हूं ना एक दंगल बना लो उसमें एक प्रतियोगिता रख लो आपके चैनल के माध्यम से हो जाए लेकिन उसमें पारदर्शिता के रूप में हो और मैं मीडिया से भी यही कामना करता हूं कि मीडिया सोशल मीडिया हो या इलेक्ट्रिक मीडिया हो या हमारी प्रिंट मीडिया हो यह देश का चौथा स्तंभ है और देश का चौथा स्तंभ सनातन को बचाने के लिए, राष्ट्र को बचाने के लिए, मठ मंदिरों की महिमा और महर्षियों और संतों की जो परंपरा रही है, उसको बचाने में आपकी एक बड़ी भूमिका होगी. मैं आपके चैनल के माध्यम से यह बात करने के लिए तैयार हूं. लेकिन पारदर्शिता के रूप में साफसाफ हो और भारतवर्ष के बुद्ध सामाजिक व्यक्ति जो न्यायाधीश हैं, रिटायरमेंट हो गए हैं, जो अच्छे पढ़े लिखे लोग हैं, डॉक्टर्स हैं, इंजीनियर्स हैं ऐसे लोग उस संसद में बैठे और उसमें हमारे वरिष्ठ संत भी बैठे जिससे कि पता लग जाए कि यह ब्रह्म विद्या होती भी है या नहीं. होती है तो किसके पास होती है और किसके पास नहीं है इसके पीछे क्या ट्रिक है क्या मैजिक है स्पष्ट हो जाएगा.
प्रश्न: तो आप पंडित धीरेंद्र शास्त्री को खुली चुगती दे रहे हैं कि आइए आप और मैं बैठ के पारदर्शिता के साथ तय कर लेते हैं कि किसको पर्ची निकालना आता है किसके ऊपर भगवत कृपा है कौन पाखंड कर रहा है कौन सच है और कौन झूठ बता रहा है लोगों को बरकरार रहा है आप खुली चुनौती दे रहे हैं बागेश्वर धाम पंडित पंडित धीरेंद्र शास्त्री को
उत्तर: देखिए श्री पंडुकर धाम में प्रतिवर्ष यज्ञ होता है. सन 1997 से पंडुकर धाम महोत्सव मनाया जाता है. शासन प्रशासन इसकी सूचना रहती है. जिला प्रशासन में इसकी सूचना रहती है. प्रदेश सरकार के स्तर पर निमंत्रण जाते हैं. वरिष्ठ कार्यालयों में आमंत्रण जाते हैं. पत्र जाते हैं. पंडुकर धाम में होने वाले 2027 में अस्मय वगो नजारा है. जिसमें रासु यज्ञ साथ में है. श्री राम महा के यज्ञ के साथ और उसमें हमारी हमारी चुनौती है. यह हमारी तरफ से चुनौती है. हमारी पंडुकर धाम पीठ की तरफ से चुनौती है कि अंधविश्वास को बढ़ने नहीं देंगे. अंधविश्वास को पनपने नहीं देंगे. हम आने वाली पीढ़ी को आने वाली नस्ल जो हमारे बच्चे हैं नाती पोता समी जो होंगे उनको अंधकार में नहीं पटक सकते. पूजा पाठ करना अच्छी बात है. लेकिन आडंबर ढोंग और फ्रॉड करना अपराध है और चीटिंग करके लोगों को गुमराह करना एक दिन आस्था टूटेगी तो जनमानस जाएगा कहां? ये 21वीं सदी है. कैसे युवा मठ मंदिर जा रहा है मैं जानता हूं. 21वीं सदी में यदि युवा का परिवर्तन हुआ है धर्म कलम के प्रति तो इसको सुरक्षित रखने की सभी गुरुजनों को सभी छोटे भाइयों को और हमारे बड़े आचार्यों की जिम्मेदारी बनती है कि युवाओं के हृदय में विश्वास की विश्वसता बनी रहे. विश्वास टूटे नहीं. नहीं तो बीच में एक ऐसा भी समय देखा कि साधु संत महात्माओं को कहां बैठते थे? कैसे पूछते थे? किस धारणा से देखते थे? ये अभी समय बीते ज्यादा समय नहीं हुआ. मेरी कोई बड़ी आयु नहीं है. हम भी 40 साल के 42 साल के आसपास के हैं. हमने भी देखा है कि बीच में संतों के प्रति क्या दृष्टि लोगों की हो गई थी. संतों के प्रति क्या भाव थे. ये सभी लोगों ने इसको झेला है. हम तो ईश्वरवादी हैं. सनातनी है. हम सनातन को संस्कृति को मिटने नहीं देंगे. इसके लिए हम अपना सर्वस्व लगा देंगे. पाखंडवाद को बढ़ने नहीं देंगे. चाहे कुछ हो जाए.
प्रश्न: पंडोकर सरकार साहब आपने ₹1 करोड़ 41 लाख की जो चुनौती रखी है. आप मुझे खुल के बताइए. किसके लिए रखी है आपने यह आपने पंडित धीरेंद्र शास्त्री के लिए रखी है चुनौती
उत्तर: देखिए ये पंडुकर धाम में अश्वमेध यज्ञ होने जा रहा है पूरे विश्व में यही आज ही मान लीजिए न्यूज़ नेशन ही आज हमारा अश्व के रूप में इस चैनल के सैंबल के नीचे हमारा अश्व यानी हमारा घोड़ा चुनौती के रूप में हमारे प्रश्न पांच प्रश्न जो लिखे जाएंगे इसमें चार प्रश्न सही बताना है हुवा ना मैं उत्तर पूछूंगा ना उसका कोई जवाब दूसरा है. हमें तो पॉइंट टू पॉइंट पढ़ के हूबहू सुनाना है. एक क्वेश्चन एक नोट गलत हो जाए कोई दिक्कत नहीं. चार प्रश्न सही निकलते हैं. तो हमने अपने भक्तों से अपने चैरिटी के माध्यम से अपने सदस्यों से हमने अपील की है कि हम ब्रह्म विद्या के लिए सुरक्षित रखने के लिए हमने एक प्रतियोगिता रखी है अश्वमेध यज्ञ के सातव उस उत्सव में इसमें लाखों लोग देखेंगे कि भूत भविष्य वर्तमान की विधा भारत में थी और है और रहेगी. है तो कहां है उनके लिए ₹1 करोड़ 41 लाख नगद चेक देकर हाथों हाथ ड्रा दे के और उनके साथ में गुरु शरण का सदैव साथ रहेगा और हम एक नहीं दो भाई होंगे और देश में हुंकार भरेंगे के अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा. अंधविश्वास को पनपने नहीं देंगे जो जीतेगा उसको एक करोड़ 41 लाख का चेक ड्राफ्ट 11 लाख चांदी के सिंहासन के लिए अलग से और उसके बाद जीवन पर्यंत पंडुकर धाम में वाली आने वाली दान पेटी हुंडी से जो भी राशि आएगी वह उनके समस्त धार्मिक अनुष्ठान प्रकल्पों में लगाया जाएगा. भीख मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी. चंदा मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी. ब्रह्म विद्या की ताकत पर एक हाथ ऊर्जा देकर एक हाथ अर्थ लेकर आशीर्वाद देंगे और लोग आएंगे, जिसको जरूरत होगी वो आएगा. जैसे कि अब बताएं भैया अब कोई कहे कि हम हॉस्पिटल बनवा रहे चंदा दो. कोई कहे हम कन्या विवाह करा चंदा दो. तो क्या भारत में पहले विवाह नहीं होते थे? अरे हमारे गांव में परंपरा रही साहब. हमारे गांव में परंपरा नहीं है. हमारे गांव के पटेल, नंबरदार, नंबरदार, जमींदार, ठिकानेदार, किलेदार, ग्राम प्रधान, ग्राम सरपंच अपने गांव के चिन्हित बेटा बेटियों की शादी करते थे. जो सक्षम नहीं होते थे. एक जमाना था. तो यह भारतवर्ष में कोई अकेला ही नहीं कर रहा. कन्या विवाह. हमारी प्रदेश की सरकारें कर रही हैं. केंद्र सरकार कर रही हैं. हमारे यहां साधु संत कर रहे हैं. पंडोकर धाम में अभीभी हुआ चार पांच महीना पहले पंडुकर धाम में पूर्व में भी कर चुके हैं. अरे जिनकी आवश्यकता है उनकी की जा सकती है. इन धन को बर्बाद करने की आवश्यकता नहीं है. लेकिन हमें अपने राष्ट्र के लिए अपने सनातन के लिए, अपनी संस्कृति के लिए बचाने के लिए पैसा खर्च होता है तो चैरिटी करना चाहिए. भारत में और क्या चैरिटी नहीं है? जगह-जगह हॉस्पिटल खुले हैं. क्या वास्तव में चैरिटी से काम हो रहा है? कितना-कितना पैसा लगता है? कितने कितने ऐसे चैरिटी के हॉस्पिटल है यह कोई नई बात नहीं है. लेकिन चैरिटी का मतलब होता है कि चंदा लिया है, दान लिया है तो कम पैसे में यानी ₹1 का इलाज 25 पैसे में हो जाए तो उसका मतलब है चैरिटी. बड़ा-बड़ा डोनेशन बड़ा-बड़ा फोन करा करके बैठ दिया जाए तो क्या वो चैरिटी का काम है?
प्रश्न: पंडोकर सरकार साहब आपकी और पंडित धीरेंद्र शास्त्री की कार्यशैली कमोबेश एक जैसी है पर्ची निकालने की. अब आप कह रहे हैं कि साहब आप बहुत पहले से यह काम करते आए हैं. आप पर भगवत कृपा है. वह भी कहते हैं साहब मेरे पर हनुमान जी की कृपा है. मैं हनुमान जी से सीधे बात कर लेता हूं.
उत्तर: देखो यह मैं नहीं कह रहा हूं कि कौन करता है कि नहीं करता है. लेकिन इसके लिए हमने पंडुकर धाम में एक खुला निमंत्रण खुला चुनौती पेश कर दी है आपके चैनल के माध्यम से. 2027 में आइए आवाहन करता हूं. भाव से प्रेम से भाईचारी से पधारिए. आपका मैं स्वागत अभिनंदन करता हूं आपके चैनल के माध्यम से उनको मान-सम्मान प्रतिष्ठा के तहत रुकने ठहरने खाने पीने की व्यवस्था फल फूल शॉल श्रीफल देकर के यथा उचित जो सम्मान होगा वो महापुरुषों को दिया जाएगा. उनसे आशीर्वाद भी लिया जाएगा और उनसे कामना भी करते हैं कि सनातन धर्म संस्कृति को बचाने के लिए अब पूरे दुनिया में सभी सनातनी बंधुओं को समस्त राम राज्य यानी बनाना है तो एक कानून एक युक्ता पढ़ाई यानी शिक्षा और एक व्यवस्था हो तो यह भारत पुनः विश्व गुरु होगा रामराज्य की स्थापना होगी जातिपात छुआछूत खत्म हो और समस्त अपने जो वर्ण व्यवस्था है वह विधिवत रूप से आगे बढ़े भाईचारे की तरह ऐसी हम कामना करते हैं.
प्रश्न: एक सामान्य सवाल उठता है और एक सामान्य जनमानस के मन में यह प्रश्न उठता है कि साहब मुद्दा सिर्फ पर्ची का है या कहानी कुछ और है. आपने कहा कि साहब आप तब से पर्ची निकाल लें जब यह व्यक्ति पैदा भी नहीं हुए थे. कहीं ऐसा तो नहीं कि धीरेंद्र शास्त्री की कम उम्र में जिस तरह से लोकप्रिय हुए जिस तरह से उद्योगपति राजनेता बड़ी-बड़ी हस्तियां उनके दरबार तक पहुंची उनका मिलनाजुलना बड़ा उनकी चकाचौद और यही कारण है कि आपके बीच कड़वाहट हो गई मतलब आपके मन में यह भाव आया कि मेरे से मैं मेरे से मैंने इतने पहले शुरू किया ये कल से मेरे बाद में पैदा हुआ और मेरे से आगे बढ़ गया. इसकी चकाचौध मेरे से ज्यादा हो गई.
उत्तर: ऐसा नहीं है. मैं यह कहना चाहता हूं दरबारों में और भीड़ भड़क्के में और भीड़ वाले मंचों के मजमों में लोग पहुंचते रहते हैं. सब अलग-अलग तरीके के लोग होते हैं. कोई किसी को भीड़ चाहिए तो किसी को चेहरा चमकाने के लिए उस भीड़ में जाकर के बाय-ब लूटने की आदत होती है. जरूरी नहीं है कि जो मंच पे जा रहे हैं तो वे चमत्कार देख के जा रहे हैं. जरूरी नहीं कि उनका भविष्य बताया गया हो. बहुत सारे लोग अतिथि के तौर पर भी जाते हैं. इसका मतलब यह नहीं है कि वो उनके अनुयाई हैं या उनके शिष्य हैं. मेरा मेरी बात समझिए. वो विदेशों में जाते हैं और लोग भी संत जाते हैं. कितना करके आ रहे हैं, क्या करके आ रहे हैं, कैसा करके आ रहे हैं. उनके परिणाम स्वरूप अभी अब ये 21वीं सदी है साहब. हम हमारी कोई उन्होंने जमीन जमीन संपत्ति इत्यादि का अतिक्रण नहीं किया है. उन्होंने कोई कब्जा नहीं कर रखा है और ऐसी कोई चीज नहीं है कि जो मैंने उनकी कर रखी हो. बात है अंधविश्वास की बात है पाखंडवाद की. बात है कि मंच की गरिमा रखने की. आप आचार्य हैं तो कौन सा गुरु कहता है कि मंच पे बैठ के ठटरी मारो. कौन सा गुरु कहता है कि ये माताएं बहन बेटियों को खाली प्लॉट बोलो. इसके सिर में सिंदूर नहीं है. यह कौन सा कौन सा व्यास गद्दी की मर्यादा गरमा है? क्या यह मर्यादा गरमा है? हम जानते हैं कितना विनोद होता है, कितना कितना लोगों को हंसाना चाहिए, कितना शहद देना चाहिए तब लोग मीठी कड़वी दवा ग्रहण कर पाते हैं. अभी देखिए आप बार-बार आपके चैनल के माध्यम से एक व्यक्ति का नाम लिया जा रहा है. मैं एक व्यक्ति के लिए नहीं कह रहा हूं. जितने भी भारत में पाखंडवाद करते हैं धर्म हमारे सनातन संस्कृति वेद विद्या पुराण शास्त्रों पर जो भी टिका टिप्पणी करते हैं तो हम तो इसके आचार्य नहीं है हमारे इसके लिए जगतगुरु को बोलना चाहिए महामंडलेश्वर को बोलना चाहिए शंकराचार्य भगवान को बोलना चाहिए कि भाई रामायण गीता पुराण पर आपत्ति कर रहे हैं तो वो उनकी जिम्मेदारी बनती है हमारा जो विषय है परा विज्ञान जहां मंत्र देवता लोक देवता पितर देवता साधना योग के माध्यम से जो हमारी विधा है मैं उस विधा का के लिए उस विधा पर कोई कहता है कि यह विधा नहीं होती है तो मैं क्वेश्चन मार्क सीधा खड़ा किया है तो हम एक का नाम ले रहे हैं हम तो कह रहे हैं पूरे भारतवर्ष में जितने भी ये तथागत पर्चा लिखने वाले हैं आए स्वागत है मैं आपको सास सम्मान आसन दे के आपका यथास्थित योग्य पूजन करा करके जो ऋषि परंपरा है जो हमारे यहां विद्वान की प्रतिष्ठा होती है मैं भलीभांत जानता हूं क्योंकि मैं नास्तिक नहीं हूं. मैं कम्युनिस्ट नहीं हूं. मैं ईश्वरवादी हूं और सनातनी हूं और प्योर सनातनी हूं. इसमें कोई संदेह नहीं. डीएनए चेक करा लें और जिसमें डाउट है वो अपना करा के यहां आए. नहीं पूछ लिया जाएगा कि आपके अंदर डीएनए काहे का? नहीं.
प्रश्न: लेकिन आप मुझे बताइए ना कि अगर आपको लग रहा है और आपको इस बात के आपके पास साक्ष्य है कि वो पाखंडवाद को बढ़ावा दे रहे हैं तो आप पब्लिकली उनके खिलाफ बोलने के बजाय एक मुकदमा दर्ज करा दीजिए. भाई हमारे यहां तो पाखंडवाद को बढ़ावा देने के खिलाफ कानून है इस देश में.
उत्तर: ऐसा है साहब. देखिए मेरा फर्ज बनता है कि देश का स्तंभ चौथा मीडिया है. हम एफआईआर क्यों कराएं? यदि ऐसा ही था तो आपने आकर के पंडुकर धाम का दर्शन किया. पंडुकर धाम के निरीक्षण किया. आपने आज इंटरव्यू लिया तो पहला आपकी जिम्मेदारी बनती है कि जहां भी पाखंडवाद है, जहां लोगों के साथ चीटिंग की जा रही है, जहां लोगों के साथ बेवकूफ बनाया जा रहा है, जहां लोगों को देश में आक्रमकता फैलाई जा रही है. जहां भाई-भाई को एक साथ नहीं रहने दिया जा रहा है. बाहर जाके लोग गले मिलते हैं और भारत में आ के कहते हैं यहां यहां के मुस्लिम, यहां के फार, यहां के चाकरी, यह सब देशद्रोही हैं. और बाहर जाकर गले लगते हैं. डर लगता है क्या कुछ मार देंगे कि आपका वीजा छुड़ा लेंगे पासपोर्ट जब्त कर लेंगे वहां जाकर के उनके गले लगते हैं और यहां आकर के अब तानाशाही दिखाते हैं ये कौन सी बात है मैं कहना चाहता हूं पंडुकर सरकार किसी को ऊपर किसी प्रकार से ईर्ष्या नहीं रखते मैं किसी के नाम का मोहताज नहीं हूं जिनका आप नाम ले रहे हैं ये बच्चे हैं अभी बहुत छोटा लड़का है मैं कहता हूं ये सब पाखंड छोड़ो आगे बढ़ो और आपके अच्छा आपका आभामंडल हो गया. आपकी जन लोकप्रियता बढ़ गई है. भगवान खूब और आपको बढ़ाएं. लेकिन पाखंड की बात खत्म करिए और नहीं तो एक पर्चा आपके देश के चौथे स्तंभ के माध्यम से न्यूज नेशन के माध्यम से कह रहा हूं कि आप दिखाने में समर्थ हैं. तो आइए मैं आपको पर्चा मैं बनाता हूं. पहले आप आपकी पूरी टीम का आपके दर्शकों का मैं पहले पर्चा बनाऊंगा. उसके बाद आप कैमरे पर बनवाइए. और दूसरी बात क्या ट्रिक है, क्या मैजिक है, क्या तरीका है? मैं आपको बता रहा हूं आप समर्थन दिखा सकते हो तो दिखाएं. यदि कोई प्लान है तो मैं कुछ कह नहीं सकता तो फिर भगवान की कृपा है कि आप अपना काम करिए. मैं अपना काम करूंगा. देश का चौथे स्तंभ के साथ कदम में कदम मिलाकर चलूंगा. आप सोशल मीडिया इलेक्टिव मीडिया आप एक नारद हैं. आप एक नारद परंपरा से जुड़े हैं. आप पक्षपात नहीं कर सकते. इतना मुझे भरोसा है. लेकिन न्याय जरूर करेंगे और सत्य जरूर दिखाएंगे. यदि आप समर्थ हैं और आपको डायरेक्शन दिया गया है तो निश्चित है कि आप आइए मैं बताता हूं कि इसमें क्या ट्रिक है? कैसे पर्चा बना रहे हैं और आप दिखा सकते हो तो दिखाइए और चार लोग मेरे साथ बैठ लें. एक चार विद्वानों की टीम लेके आए. मैं जिस पर्चा लिखने वाले की कहूंगा कहोगे आप. मैं उसी की पर्दाफाश उसकी ट्रिक सामने उजागर कर दूंगा. और जिसके पास हमारी हो वो कर दे. वो भी आप साथ लेके आए. तो आप कह रहे हैं पंडोकर सरकार यह कह रहे हैं कि पंडोकर सरकार अपनी पर्ची से निकालकर कुछ भी बता सकते हैं. आप भविष्य बता सकते हैं.
अजीत अगरकर की कुर्सी पर बड़ा फैसला! BCCI ने दिया पदाधिकारियों को अधिकार, अब तय होगा चीफ सिलेक्टर का भविष्य
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की 95वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर (Ajit Agarkar) के भविष्य को लेकर अहम फैसला हुआ है. बोर्ड की सदस्य इकाइयों ने चयन समितियों से जुड़े मामलों पर निर्णय लेने के लिए BCCI के पदाधिकारियों को अधिकृत कर दिया है. अब अगरकर को पद पर बनाए रखना है या उनकी जगह नया चेयरमैन नियुक्त करना है, इसका फैसला बोर्ड के पदाधिकारी करेंगे.
अगरकर के कार्यकाल पर टिकी नजर
अजीत अगरकर फिलहाल भारतीय पुरुष सीनियर चयन समिति के अध्यक्ष हैं. उनका मौजूदा कार्यकाल अक्टूबर 2026 की शुरुआत में खत्म होने वाला है. इसी वजह से AGM से पहले उनके भविष्य को लेकर चर्चा तेज हो गई थी. हालांकि, बैठक में अगरकर का कार्यकाल बढ़ाने या नए चीफ सिलेक्टर की नियुक्ति को लेकर कोई अंतिम घोषणा नहीं हुई. क्रिकबज की रिपोर्ट के मुताबिक, अगरकर के पद पर बने रहने की संभावना को लेकर चर्चा जारी है. अब अंतिम फैसला BCCI के पदाधिकारी करेंगे. अगरकर को जुलाई 2023 में पुरुष सीनियर चयन समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था.
रोहित शर्मा विवाद के बाद उठे थे सवाल
अगरकर के कार्यकाल को लेकर सवाल उस समय भी उठे थे, जब इंग्लैंड में वनडे सीरीज के दौरान रोहित शर्मा के संन्यास की अफवाहें सामने आई थीं. रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि अगरकर ने रोहित को उनके आखिरी वनडे मैच के बारे में जानकारी दी थी और भविष्य की टीम योजना में उनके शामिल नहीं होने की बात कही थी. हालांकि, बाद में BCCI ने इन खबरों को खारिज कर दिया था. बोर्ड सचिव देवजीत सैकिया ने इसे अफवाह बताया था और कहा था कि रोहित शर्मा कहीं नहीं जा रहे हैं. इसके बाद रोहित के भविष्य को लेकर स्थिति साफ हुई.
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