Delhi H1N1 Cases: सामने आए 1,777 मामले, स्वास्थ्य मंत्री ने बुलाई बैठक; अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड तैयार
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में स्वाइन फ्लू (H1N1) और मौसमी बुखार के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी ने स्वास्थ्य महकमे को सतर्क कर दिया है। 20 अगस्त तक के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में H1N1 के कुल 1,777 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इसके साथ ही इस वर्ष अब तक मौसमी इन्फ्लुएंजा के कुल 2,602 मामलों की पुष्टि हुई है, जिनमें 2,392 इन्फ्लुएंजा-A और 210 इन्फ्लुएंजा-B के मरीज शामिल हैं।
स्वास्थ्य मंत्री ने बुलाई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक
संक्रमण के प्रसार को देखते हुए दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने स्वास्थ्य विभाग, नगर निगमों और प्रमुख सरकारी अस्पतालों के शीर्ष चिकित्सा अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में सभी अस्पतालों में आइसोलेशन बेड, आवश्यक एंटीवायरल दवाओं, टेस्टिंग किट और जीवन रक्षक उपकरणों की उपलब्धता की समीक्षा की गई।
स्वास्थ्य मंत्री ने आश्वस्त किया कि राजधानी में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और सरकारी तंत्र किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।
LNJP अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड और आईसीयू बेड तैयार
मरीजों के त्वरित और सुरक्षित उपचार के लिए दिल्ली के प्रमुख अस्पतालों में विशेष प्रबंध किए गए हैं। लोक नायक जय प्रकाश (LNJP) अस्पताल में विशेष आइसोलेशन वार्ड सक्रिय कर दिया गया है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, इमरजेंसी वार्ड में 7 आरक्षित बेड (2 वेंटिलेटर युक्त) उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अतिरिक्त अस्पताल की सातवीं मंजिल पर 70 बेड का समर्पित वार्ड तैयार रखा गया है, जिसमें 10 आईसीयू (ICU) और 7 एचडीयू (HDU) बेड शामिल हैं।
आईसीएमआर ने दी राहत भरी जानकारी, नया घातक स्ट्रेन नहीं
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के वैज्ञानिकों ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया है कि देश में फिलहाल H1N1 का कोई नया या अत्यधिक घातक म्यूटेंट/स्ट्रेन सामने नहीं आया है। यह सामान्य मौसमी उतार-चढ़ाव और वातावरण में नमी के कारण फैल रहा है। विशेषज्ञों ने आम नागरिकों से पैनिक न होने और बुनियादी स्वास्थ्य सावधानियों का पालन करने की अपील की है।
लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सीय परामर्श की सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि भीड़भाड़ वाले स्थानों में जाने से बचें, नियमित रूप से साबुन से हाथ धोएं और सामान्य सतहों की स्वच्छता बनाए रखें। यदि किसी व्यक्ति को लगातार तेज बुखार, सांस लेने में अत्यधिक कठिनाई, तेज सांस चलना, सीने में भारीपन या दर्द जैसे गंभीर श्वसन संबंधी लक्षण महसूस हों, तो वे घरेलू उपचार के बजाय तत्काल नजदीकी अस्पताल में जाकर जांच और डॉक्टरी सलाह लें।
Caste census: जाति जनगणना के तरीकों पर खड़गे और राहुल गांधी ने उठाए सवाल, पीएम मोदी को पत्र लिखकर की यह मांग
Caste census: कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आगामी जनगणना के दौरान जातिगत विवरण जुटाए जाने के प्रस्तावित तरीके को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे एक पत्र में इन दोनों शीर्ष कांग्रेस नेताओं ने आग्रह किया है कि सरकार इस पूरी प्रक्रिया की समीक्षा करे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि जनगणना से मिलने वाले आंकड़े पूरी तरह सटीक और विश्वसनीय हों।
नेताओं का कहना है कि विभिन्न समुदायों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का आकलन करने और प्रभावी सामाजिक न्याय से जुड़ी नीतियां तैयार करने के लिए प्रामाणिक जातिगत आंकड़े होना बेहद अनिवार्य है।
'ओपन-ENDED' सवालों से आंकड़ों में गड़बड़ी की आशंका
प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में कांग्रेस नेताओं ने सरकार द्वारा जाति की जानकारी दर्ज करने के लिए 'ओपन-एंडेड' (खुले छोर वाले) सवाल चुनने के फैसले पर तीखी आपत्ति जताई। उन्होंने पत्र में लिखा, "आपकी सरकार ने जनगणना में जाति की जानकारी दर्ज करने के लिए ओपन-एंडेड प्रश्नों का तरीका चुना है, जो कि भ्रामक है।"
भारत में सामाजिक न्याय की नीतियां सही आंकड़ों के बिना पूरी नहीं हो सकतीं।
— Congress (@INCIndia) August 25, 2026
अलग-अलग जातियों की संख्या और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सही आकलन तभी संभव है, जब जातियों की गिनती सही तरीके से हो।
लेकिन सरकार ने जनगणना में जाति की जानकारी दर्ज करने के लिए open-ended प्रश्न का तरीका… pic.twitter.com/ySP3REE7yQ
खड़गे और राहुल गांधी ने दलील दी कि इस तरह के खुले प्रारूप से भारी विसंगतियां पैदा हो सकती हैं, क्योंकि देश के अलग-अलग हिस्सों में एक ही जाति को अलग-अलग नामों, उपजातियों या अलग वर्तनी (spellings) से जाना जाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एक ही समुदाय के लोग अलग-अलग नाम दर्ज करवाते हैं, तो डेटा में उन्हें अलग-अलग समूहों के रूप में गिना जा सकता है।
पत्र में आशंका जताते हुए कहा गया, "इससे देश में लाखों जातियां बन जाएंगी, जिससे जाति जनगणना से मिलने वाला पूरा डेटा ही बेकार हो जाएगा।" कांग्रेस नेताओं का मानना है कि ऐसी अशुद्धियों से समुदायों की आबादी का गलत अनुमान लग सकता है, जिसका सीधा असर शिक्षा, रोजगार, कल्याणकारी योजनाओं और विकास योजनाओं जैसे सामाजिक न्याय के उपायों पर पड़ेगा। इसके अलावा, उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि प्रस्तावित प्रश्नावली में 'पिछड़े वर्ग' (backward class) शब्द का जिक्र नहीं है, जिससे वर्गीकरण की प्रक्रिया और जटिल हो सकती है।
कांग्रेस नेताओं ने सुझाए वैकल्पिक उपाय
सरकार के सामने एक बेहतर विकल्प रखते हुए खड़गे और राहुल गांधी ने सुझाव दिया कि जनगणना में खुली छूट देने के बजाय एक निश्चित (Fixed) जाति सूची का उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि उत्तरदाताओं को अपनी जाति चुनने के लिए एक ड्रॉप-डाउन विकल्प दिया जा सकता है, जिससे नामों और वर्तनी में आने वाली भिन्नताओं को कम किया जा सके।
नेताओं के मुताबिक, इस तरह की मानकीकृत सूची को मौजूदा सरकारी रिकॉर्ड और आधिकारिक स्रोतों की मदद से तैयार किया जा सकता है। इसमें सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की सूची के साथ-साथ भारतीय नृविज्ञान सर्वेक्षण (Anthropological Survey of India) के पास उपलब्ध डेटा को शामिल किया जा सकता है।
इस सिलसिले में उन्होंने तेलंगाना और बिहार में हुए जाति सर्वेक्षणों का हवाला दिया, जहां निश्चित जाति सूचियों का उपयोग किया गया था। प्रधानमंत्री को सौंपे गए पत्र के साथ तेलंगाना जाति सर्वेक्षण-2024 और बिहार जाति सर्वेक्षण-2022 की सूचियों की प्रतियां भी संलग्न की गई हैं।
कांग्रेस नेताओं का दृढ़ मत है कि एक मानकीकृत दृष्टिकोण अपनाने से जनगणना के आंकड़ों में जातियों के बिखराव को रोका जा सकेगा और नीति निर्माण के लिए सही आंकड़ों का उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा। आने वाली जनगणना से ठीक पहले विपक्ष के इस हस्तक्षेप का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतिम आंकड़े देश के विभिन्न समुदायों की वास्तविक जनसांख्यिकीय तस्वीर को सही ढंग से पेश कर सकें।
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