Caste census: जाति जनगणना के तरीकों पर खड़गे और राहुल गांधी ने उठाए सवाल, पीएम मोदी को पत्र लिखकर की यह मांग
Caste census: कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आगामी जनगणना के दौरान जातिगत विवरण जुटाए जाने के प्रस्तावित तरीके को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे एक पत्र में इन दोनों शीर्ष कांग्रेस नेताओं ने आग्रह किया है कि सरकार इस पूरी प्रक्रिया की समीक्षा करे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि जनगणना से मिलने वाले आंकड़े पूरी तरह सटीक और विश्वसनीय हों।
नेताओं का कहना है कि विभिन्न समुदायों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का आकलन करने और प्रभावी सामाजिक न्याय से जुड़ी नीतियां तैयार करने के लिए प्रामाणिक जातिगत आंकड़े होना बेहद अनिवार्य है।
'ओपन-ENDED' सवालों से आंकड़ों में गड़बड़ी की आशंका
प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में कांग्रेस नेताओं ने सरकार द्वारा जाति की जानकारी दर्ज करने के लिए 'ओपन-एंडेड' (खुले छोर वाले) सवाल चुनने के फैसले पर तीखी आपत्ति जताई। उन्होंने पत्र में लिखा, "आपकी सरकार ने जनगणना में जाति की जानकारी दर्ज करने के लिए ओपन-एंडेड प्रश्नों का तरीका चुना है, जो कि भ्रामक है।"
भारत में सामाजिक न्याय की नीतियां सही आंकड़ों के बिना पूरी नहीं हो सकतीं।
— Congress (@INCIndia) August 25, 2026
अलग-अलग जातियों की संख्या और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सही आकलन तभी संभव है, जब जातियों की गिनती सही तरीके से हो।
लेकिन सरकार ने जनगणना में जाति की जानकारी दर्ज करने के लिए open-ended प्रश्न का तरीका… pic.twitter.com/ySP3REE7yQ
खड़गे और राहुल गांधी ने दलील दी कि इस तरह के खुले प्रारूप से भारी विसंगतियां पैदा हो सकती हैं, क्योंकि देश के अलग-अलग हिस्सों में एक ही जाति को अलग-अलग नामों, उपजातियों या अलग वर्तनी (spellings) से जाना जाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एक ही समुदाय के लोग अलग-अलग नाम दर्ज करवाते हैं, तो डेटा में उन्हें अलग-अलग समूहों के रूप में गिना जा सकता है।
पत्र में आशंका जताते हुए कहा गया, "इससे देश में लाखों जातियां बन जाएंगी, जिससे जाति जनगणना से मिलने वाला पूरा डेटा ही बेकार हो जाएगा।" कांग्रेस नेताओं का मानना है कि ऐसी अशुद्धियों से समुदायों की आबादी का गलत अनुमान लग सकता है, जिसका सीधा असर शिक्षा, रोजगार, कल्याणकारी योजनाओं और विकास योजनाओं जैसे सामाजिक न्याय के उपायों पर पड़ेगा। इसके अलावा, उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि प्रस्तावित प्रश्नावली में 'पिछड़े वर्ग' (backward class) शब्द का जिक्र नहीं है, जिससे वर्गीकरण की प्रक्रिया और जटिल हो सकती है।
कांग्रेस नेताओं ने सुझाए वैकल्पिक उपाय
सरकार के सामने एक बेहतर विकल्प रखते हुए खड़गे और राहुल गांधी ने सुझाव दिया कि जनगणना में खुली छूट देने के बजाय एक निश्चित (Fixed) जाति सूची का उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि उत्तरदाताओं को अपनी जाति चुनने के लिए एक ड्रॉप-डाउन विकल्प दिया जा सकता है, जिससे नामों और वर्तनी में आने वाली भिन्नताओं को कम किया जा सके।
नेताओं के मुताबिक, इस तरह की मानकीकृत सूची को मौजूदा सरकारी रिकॉर्ड और आधिकारिक स्रोतों की मदद से तैयार किया जा सकता है। इसमें सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की सूची के साथ-साथ भारतीय नृविज्ञान सर्वेक्षण (Anthropological Survey of India) के पास उपलब्ध डेटा को शामिल किया जा सकता है।
इस सिलसिले में उन्होंने तेलंगाना और बिहार में हुए जाति सर्वेक्षणों का हवाला दिया, जहां निश्चित जाति सूचियों का उपयोग किया गया था। प्रधानमंत्री को सौंपे गए पत्र के साथ तेलंगाना जाति सर्वेक्षण-2024 और बिहार जाति सर्वेक्षण-2022 की सूचियों की प्रतियां भी संलग्न की गई हैं।
कांग्रेस नेताओं का दृढ़ मत है कि एक मानकीकृत दृष्टिकोण अपनाने से जनगणना के आंकड़ों में जातियों के बिखराव को रोका जा सकेगा और नीति निर्माण के लिए सही आंकड़ों का उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा। आने वाली जनगणना से ठीक पहले विपक्ष के इस हस्तक्षेप का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतिम आंकड़े देश के विभिन्न समुदायों की वास्तविक जनसांख्यिकीय तस्वीर को सही ढंग से पेश कर सकें।
Ram Rahim: राम रहीम को फिर मिली 21 दिन की फरलो, 2017 से अब तक 17वीं बार जेल से बाहर आया डेरा प्रमुख
Gurmeet Ram Rahim: अपनी दो महिला शिष्यों के साथ दुष्कर्म के मामले में 20 साल की सजा काट रहे डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को एक बार फिर जेल से बाहर आने का मौका मिल गया है। उन्हें 21 दिन की फरलो (Furlough) दी गई है। साल 2017 में दोषी ठहराए जाने के बाद से उनकी यह कुल 17वीं अस्थायी रिहाई है।
मंगलवार सुबह वह हरियाणा के रोहतक स्थित हाई-सिक्योरिटी सुनारिया जेल से बाहर आए और अपनी इस फरलो की अवधि के दौरान वह सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा मुख्यालय में ही निवास करेंगे।
यह ताजा रिहाई मई महीने में मिली 30 दिन की पैरोल पूरी होने के बाद जेल लौटने के दो महीने से भी कम समय के भीतर हुई है। इस साल यह उनकी तीसरी अस्थायी रिहाई है। इससे पहले उन्हें जनवरी में 40 दिन की पैरोल और मई में 30 दिन की पैरोल मिल चुकी थी।
दुष्कर्म मामले में 20 साल की सजा
पंचकूला की एक विशेष सीबीआई अदालत ने अगस्त 2017 में राम रहीम को दो महिला अनुयायियों से दुष्कर्म का दोषी करार देते हुए 20 साल के कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद से उन्हें रोहतक की सुनारिया जेल में बंद रखा गया था। उनके दोषी ठहराए जाने के बाद पंचकूला और सिरसा में उनके समर्थकों ने भारी हिंसा की थी, और उस दौरान हुए संघर्षों में 40 से अधिक लोगों की जान चली गई थी।
#WATCH | Sirsa, Haryana: Rape convict Dera Sacha Sauda chief Gurmeet Ram Rahim Singh arrived at the Dera headquarters in Sirsa from Sunaria Jail after being granted 21-day parole pic.twitter.com/Q7WKr98dvG
— ANI (@ANI) August 25, 2026
डेरा प्रमुख को अलग-अलग हत्या के मामलों में भी सजा सुनाई गई थी, हालांकि बाद में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने उन्हें साल 2002 में डेरा के पूर्व प्रबंधक रंजीत सिंह की हत्या और पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड मामले में बरी कर दिया था।
2017 से अब तक मिल चुकी हैं 17 बार पैरोल-फरलो
राम रहीम की यह ताजा फरलो उन अस्थायी रिहाइयों की लंबी सूची में शामिल है, जो उन्हें तब से मिल रही हैं जब वे इसके पात्र हुए थे। उनकी इन रिहाइयों (पैरोल और फरलो) की अवधि कुछ घंटों से लेकर 50 दिनों तक की रही है। उनकी पहली अस्थायी रिहाई अक्टूबर 2020 में हुई थी, जिसके बाद मई 2021 में उन्हें फिर राहत मिली। इसके बाद साल 2022, 2023, 2024 और 2025 में भी उन्हें लगातार पैरोल और फरलो मिलती रही।
अकेले 2025 की बात करें तो उन्हें जनवरी में 30 दिन की पैरोल, अप्रैल में 21 दिन की फरलो और अगस्त में 40 दिन की पैरोल दी गई थी। वहीं, साल 2026 में जनवरी के महीने में उन्हें 40 दिन की पैरोल मिली थी, जिसके बाद मई में 30 दिन की पैरोल दी गई। अब यह 21 दिन की फरलो उनकी सजा के बाद से 17वीं अस्थायी रिहाई है।
बार-बार मिलने वाली रिहाई पर उठते रहे हैं सवाल
राम रहीम को बार-बार मिलने वाली पैरोल और फरलो पर अक्सर राजनीतिक विवाद खड़ा होता रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि इनमें से कई रिहाइयां उन राज्यों में चुनावों के आसपास होती हैं जहां डेरा का अच्छा खासा प्रभाव माना जाता है। उदाहरण के लिए, जनवरी 2025 में मिली 30 दिन की पैरोल दिल्ली विधानसभा चुनावों से ठीक पहले आई थी, जबकि अक्टूबर 2024 की 20 दिन की पैरोल हरियाणा विधानसभा चुनावों के ठीक पहले दी गई थी।
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) सहित कई सिख संगठनों ने डेरा प्रमुख को बार-बार दी जाने वाली अस्थायी रिहाइयों की तीखी आलोचना की है। हरियाणा, पंजाब और राजस्थान समेत कई राज्यों में डेरा का मजबूत जनाधार है और हरियाणा के कई जिलों में उनके समर्थकों की संख्या काफी अधिक है।
हरियाणा जेल नियमों के तहत क्या हैं प्रावधान?
हरियाणा के जेल नियमों के अनुसार, पैरोल और फरलो अस्थायी रिहाई के दो अलग-अलग रूप हैं, जिनकी पात्रता और शर्तें अलग-अलग होती हैं। आमतौर पर फरलो को सजा की अवधि का हिस्सा माना जाता है, जबकि पैरोल के दौरान जेल से बाहर बिताए गए समय को कुल सजा में आगे जोड़ दिया जाता है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Haribhoomi











