उमर अब्दुल्ला और पायल अब्दुल्ला का तलाक, मीडिएशन के बाद सुप्रीम कोर्ट ने दी मंजूरी
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी अलग रह रही पत्नी पायल अब्दुल्ला के बीच लंबे समय से चल रहे वैवाहिक विवाद का अंत हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार 31 जुलाई को दोनों के आपसी समझौते के आधार पर तलाक की मंजूरी दे दी।
सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि दोनों पक्षों के बीच वैवाहिक विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान हो चुका है और उनसे जुड़े अन्य लंबित मामलों को भी वापस लेने पर सहमति बन गई है। इसके बाद अदालत ने आपसी सहमति के आधार पर विवाह समाप्त करने की अनुमति दे दी।
सुप्रीम कोर्ट ने लगाई उमर अब्दुल्ला और पायल अब्दुल्ला के तलाक पर मुहर
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ के सामने उमर अब्दुल्ला की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने बताया कि दोनों पक्षों ने मीडिएशन के जरिए सभी विवाद सुलझा लिए हैं। उन्होंने कहा “दोनों ने आजादी को अपना लिया है। सब कुछ तय हो गया है। लॉर्डशिप्स तलाक मंजूर कर सकते हैं। अन्य सभी मामले वापस ले लिए जाएंगे।” पीठ ने जवाब दिया, “यह अच्छा है। हम इन्हीं शर्तों पर मामले का निपटारा करेंगे।”
दोनों ने संयुक्त रूप से संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत आवेदन दायर कर आपसी सहमति से विवाह विच्छेद की मांग की थी। यह आवेदन 22 जुलाई को दाखिल किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 की विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए तलाक की डिक्री देने का फैसला किया और अपील का निपटारा कर दिया।
लंबे समय से चल रहा था विवाद
उमर अब्दुल्ला और पायल सेठ की शादी 1 सितंबर 1994 को हुई थी। उन दोनों की मुलाकात दिल्ली के ओबेरॉय होटल में काम करने के दौरान हुई थी। उनके दो बेटे हैं जिनके नाम जहीर और जमीर है। ये जोड़ा 2009 से अलग रह रहे थे और सितंबर 2011 में सार्वजनिक रूप से अलगाव की घोषणा हुई थी। उमर अब्दुल्ला ने 2016 में फैमिली कोर्ट में क्रूरता के आधार पर तलाक की याचिका दायर की थी, जो खारिज हो गई। दिल्ली हाईकोर्ट ने भी दिसंबर 2023 में इस फैसले को बरकरार रखा। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। अगस्त 2024 में कोर्ट ने मीडिएशन का निर्देश दिया था
भोजशाला मामला: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद धार में शांतिपूर्वक अदा हुई नमाज, भारी पुलिस बल रहा तैनात
सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद धार में ऐतिहासिक भोजशाला से सटे सर्वे क्रमांक 612 पर मुस्लिम समाज ने शांतिपूर्वक नमाज अदा कर प्रशासन को राहत दिलाई। गुरुवार को आए सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद जिला प्रशासन ने मुस्लिम समाज के लिए नमाज अदा करने की व्यवस्था सुनिश्चित की थी। दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक का समय नमाज के लिए निर्धारित किया गया था, जहां करीब ढाई बजे 150 से अधिक की संख्या में मुस्लिम पक्ष के लोग नमाज के लिए पहुंचे। इस दौरान आसमान से तेज बारिश भी बरस रही थी, लेकिन अकीदतमंदों ने बारिश के बीच ही आस्था का परिचय देते हुए नमाज अदा की।
नमाज से पूर्व जिला प्रशासन और मुस्लिम पक्ष के प्रतिनिधियों के बीच एक बैठक भी आयोजित की गई थी, जिसमें व्यवस्थाओं और शांति बनाए रखने पर गहन चर्चा हुई। सुरक्षा की दृष्टि से भोजशाला के आसपास सघन बैरिकेडिंग की गई थी ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके। साथ ही एहतियात के तौर पर भोजशाला और उसके आसपास बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। शांतिपूर्ण नमाज के संपन्न होने के बाद जिला प्रशासन ने राहत की सांस ली है, क्योंकि यह एक संवेदनशील मामला है और यहां अक्सर तनाव की स्थिति बनती रही है। प्रशासन के लिए यह एक बड़ी चुनौती थी, जिसे शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने में सफलता मिली।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पूरी तरह किया पालन: अब्दुल समद
कमाल मौलाना वेलफेयर सोसायटी के अब्दुल समद ने इस अवसर पर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि हमने अपनी मांगें माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष रखी थीं, जिसे न्यायालय ने पूरी संजीदगी से सुना। न्यायालय ने हमें यह आदेश दिया कि आप सटी हुई लगी जगह पर, जो जामा मस्जिद है, आपकी जो कमाल मौला मस्जिद है, उससे लगी हुई जगह पर नमाज अदा करिए। उन्होंने सर्वे नंबर 611, 612 और 596 दिए थे, जिनमें नमाज अदा करवाने और व्यवस्था करने के निर्देश थे। अब्दुल समद ने आगे कहा कि कहीं न कहीं व्यवस्थाओं में आज प्रशासन की फिर मुस्लिम समाज ने एक बहुत बड़ी उपलब्धि है मुस्लिम समाज की और सहयोग भी है। प्रशासन को फिर से सहयोग देते हुए उन्होंने किसी का दिल दुखाए बिना अपना जो मेन खसरा जो कोर्ट ने 611 नंबर दिया था, उसको छोड़ते हुए सर्वे क्रमांक 612 पर नमाज अदा की। उनका कहना था कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि किसी का दिल ना दुखे और किसी की आस्था को ठेस ना पहुंचे। मुस्लिम समाज ने आपसी सौहार्द और शांति बनाए रखने का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है, जो समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश देता है।
800 से 900 पुलिसकर्मियों और एसटीएफ ने संभाला सुरक्षा मोर्चा
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विजय डावर ने सुरक्षा व्यवस्थाओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कल शाम से ही लगातार मुस्लिम समुदाय के साथ चर्चा और वार्तालाप का दौर जारी था। प्रशासन और पुलिस विभाग द्वारा लिए गए निर्णय के अनुरूप ही आज शांतिपूर्वक नमाज पूरी करवाई गई। नमाज संपन्न कराने के लिए लगभग आठ सौ से नौ सौ का पुलिस बल उपलब्ध कराया गया था, जिसमें एसटीएफ का बल भी मौजूद था। इसके अतिरिक्त, शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से लगातार निगरानी रखी जा रही थी और सर्वेलेंस टीमें भी सक्रिय थीं। पुलिस ने हर स्थिति से निपटने के लिए व्यापक तैयारियां की थीं, ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।
धार एसडीएम राजकुमार हलधर ने प्रशासन की तैयारियों की सराहना करते हुए कहा कि प्रशासन द्वारा इसमें बहुत अच्छी तैयारी की गई थी। उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि लगभग डेढ़ सौ मुस्लिम भाइयों ने बड़ा शांतिपूर्वक तरीके से नमाज अदा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह नमाज सर्वे क्रमांक 612 पर अदा की गई। इस पूरे घटनाक्रम ने धार में धार्मिक सौहार्द और प्रशासन व समुदाय के बीच समन्वय की एक नई मिसाल पेश की है, जो भविष्य के लिए भी सकारात्मक संकेत देती है।
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