भारत की वनडे विश्व कप टीम में मोहम्मद शमी की वापसी! इस दिग्गज ने अपने स्क्वाड में किया शामिल
वनडे विश्व कप 2027 के लिए भारतीय टीम को लेकर अभी से चर्चा शुरू हो गई. कई पूर्व क्रिकेटर आईसीसी के इस इस आगामी टूर्नामेंट के लिए अपना-अपना स्क्वाड चुन रहे हैं. ऐसा ही एक स्क्वाड दिनेश कार्तिक ने बनाया है, जिसमें उन्होंने तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी को शामिल किया. इसके अलावा उन्होंने भुवनेश्वर कुमार को भी स्क्वाड में रखा है.
Civil Aviation: अगले 10 साल में 31,800 पायलटों की जरूरत, AAI ने शुरू किया बड़ा मिशन! 7 एयरपोर्ट्स पर खुलेंगे 11 नए फ्लाइंग स्कूल
भारत में तेजी से बढ़ते एविएशन सेक्टर और पायलटों की बढ़ती जरूरत को देखते हुए एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने बड़ा कदम उठाया है। 7 एयरपोर्ट्स पर 11 नए फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (FTO) स्थापित करने की टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इस पहल से देश में पायलट ट्रेनिंग की क्षमता बढ़ेगी, विदेशों पर निर्भरता घटेगी और क्षेत्रीय एयरपोर्ट्स का बेहतर उपयोग हो सकेगा।
7 एयरपोर्ट्स पर 11 नए फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन की टेंडर प्रक्रिया पूरी
एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने देश में पायलट प्रशिक्षण के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 7 एयरपोर्ट्स पर 11 नए फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (FTO) स्थापित करने की टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली है। AAI ने फरवरी 2026 में ई-टेंडर जारी किया था। इसके तहत तकनीकी बोलियां 30 अप्रैल 2026 को खोली गईं, जबकि वित्तीय बोलियां 22 मई 2026 को खोली गईं। प्राधिकरण के मुताबिक सभी साइट्स के लिए निविदा प्रक्रिया सफल रही है।
यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब देश में तेजी से बढ़ रहे एविएशन सेक्टर को बड़ी संख्या में प्रशिक्षित पायलटों की आवश्यकता है। नए FTO शुरू होने से भारत में ही उच्च गुणवत्ता वाली फ्लाइंग ट्रेनिंग उपलब्ध होगी और छात्रों को विदेशों का रुख कम करना पड़ेगा।
अगले 10 वर्षों में 31 हजार से ज्यादा पायलटों की होगी जरूरत
नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार आने वाले 10 वर्षों में देश को करीब 30,000 से 31,800 अतिरिक्त पायलटों की आवश्यकता होगी। इसकी बड़ी वजह घरेलू विमानन क्षेत्र का तेजी से विस्तार है। अगले पांच वर्षों में भारतीय एयरलाइंस अपने बेड़े में लगभग 500 नए विमान शामिल करेंगी। इसके साथ ही देशभर में 50 नए एयरपोर्ट भी विकसित किए जाने की योजना है।
हालांकि अप्रैल 2026 तक भारत में केवल 41 DGCA-स्वीकृत फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन थे, जो 63 फ्लाइंग बेस से संचालन कर रहे थे। AAI का मानना है कि यदि प्रशिक्षण क्षमता में समय रहते बढ़ोतरी नहीं की गई, तो भविष्य में पायलटों की मांग और उपलब्धता के बीच बड़ा अंतर पैदा हो सकता है। इसी चुनौती को देखते हुए नए FTO स्थापित करने का निर्णय लिया गया है।
नए फ्लाइंग स्कूलों से बढ़ेगी ट्रेनिंग क्षमता, कम होगा खर्च
AAI के मुताबिक नए फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन शुरू होने के बाद शुरुआती चरण में 60 से 70 नए ट्रेनिंग विमान शामिल होंगे। सभी संस्थान पूरी क्षमता से संचालित होने पर यह संख्या 110 से 120 विमानों तक पहुंच जाएगी। इसके अलावा आधुनिक फ्लाइट सिमुलेटर भी स्थापित किए जाएंगे, जिससे प्रशिक्षण की गुणवत्ता बेहतर होगी।
शुरुआती दौर में इन संस्थानों के जरिए हर वर्ष 400 से 500 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। पूरी क्षमता विकसित होने के बाद यह संख्या बढ़कर करीब 1500 प्रशिक्षुओं प्रति वर्ष तक पहुंच सकती है, जिनमें 700 से 750 कैडेट पायलट शामिल होंगे।
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