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US-Iran Conflict | खाड़ी में फिर भड़की युद्ध की चिंगारी! अमेरिका ने ईरान के 90 ठिकानों पर की बमबारी, ट्रंप बोले- 'युद्धविराम समाप्त'

पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना की ‘सेंट्रल कमांड’ (CENTCOM) ने ईरान के करीब 90 ठिकानों को निशाना बनाने के बाद अपने हवाई हमलों को अस्थायी रूप से रोकने की घोषणा की है। अमेरिका ने इन हमलों के श्वेत-श्याम (ब्लैक एंड व्हाइट) फुटेज भी जारी किए हैं, जिनमें ईरान के हवाई अड्डों के रनवे और मिसाइल लॉन्चर्स को तबाह होते देखा जा सकता है। इस भीषण सैन्य कार्रवाई के बाद कुवैत, बहरीन और कतर जैसे अरब देशों में मिसाइल हमलों की चेतावनी देने वाले सायरन गूंज उठे, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में दहशत का माहौल है। ‘सेंट्रल कमांड’ ने कहा, ‘‘अमेरिकी बल सतर्क है और कमांडर इन चीफ के निर्देश पर अभियान चलाने के लिए तैयार हैं। इससे पहले अमेरिका ने ईरान पर फिर से हवाई हमले किए जिसके बाद कुवैत, बहरीन और कतर में बृहस्पतिवार तड़के मिसाइल हमले की चेतावनी देने वाले सायरन बजे।

खाड़ी के इन तीन अरब देशों में किसी नुकसान की तत्काल कोई खबर नहीं है। कुवैत की सेना ने कहा कि वह ड्रोन और मिसाइलों को उनके लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही रोकने के लिए सक्रिय रूप से कार्रवाई कर रही है। ईरान ने बुधवार को उस पर अमेरिका के पहले दौर के हवाई हमलों के जवाब में भी बहरीन और कुवैत पर हमले किए थे। बाद में अमेरिका ने ईरान पर फिर से हमले किए। दूसरे दौर के हमलों से पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में पोतों पर ईरान के हालिया हमलों से यह संकेत मिलता है कि नाजुक युद्धविराम समाप्त हो गया है।

इससे एक दिन पहले, ओमान के तट के पास कई वाणिज्यिक पोतों को ईरान द्वारा निशाना बनाए जाने के बाद अमेरिकी सेना ने कई सैन्य स्थलों और बंदरगाह केंद्रों पर हमले किए थे। सैन्य अधिकारियों ने बुधवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि ताजा हमलों का मकसद होर्मुज जलडमरूमध्य में ‘‘नौवहन की स्वतंत्रता को खतरे में डालने’’ की ईरान की क्षमता को ‘‘और कमजोर करना’’ है।

दुनिया में खरीदे एवं बेचे जाने वाले तेल और प्राकृतिक गैस का करीब पांचवां हिस्सा युद्ध शुरू होने से पहले इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता था। यह युद्ध 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले किए जाने के साथ शुरू हुआ था। ईरान के सरकारी मीडिया ने बुशहर सहित कई स्थानों पर विस्फोटों की खबर दी। बुशहर में ईरान का परमाणु ऊर्जा संयंत्र परिसर है।

इसे भी पढ़ें: अमेरिका ने ईरान पर हवाई हमले रोके, 90 ठिकानों को बनाया गया था निशाना

इसके अलावा दक्षिणी बंदरगाह शहरों चाबहार, कोनारक, बंदर अब्बास और सिरिक में भी विस्फोटों की खबर दी गई। ट्रंप ने तुर्किये की राजधानी अंकारा में उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) शिखर सम्मेलन से रवाना होने के बाद अपने सोशल मीडिया मंच पर कई वीडियो पोस्ट किए और कहा कि ये वीडियो ईरान में हुए विस्फोटों के हैं। इसके साथ ही उन्होंने ईरान को एक और चेतावनी दी। ट्रंप ने लिखा, ‘‘यह ईरान द्वारा कल पोतों पर की गई बमबारी का जवाब है। अगर ऐसा फिर होता है तो स्थिति और बदतर होगी।’’ ट्रंप ने इससे पहले कहा था कि हालिया जवाबी हमलों का यह दौर किसी “दीर्घकालिक” सैन्य कार्रवाई में नहीं बदलेगा। हालांकि, ट्रंप ने कहा, “जो कुछ भी होगा, वह बहुत तेजी से होगा।”

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिकी सेना “इस काम को पूरी तरह खत्म कर सकती है।” ट्रंप ने बिजली संयंत्रों और विलवणीकरण संयंत्रों समेत ईरान के असैन्य ढांचों पर हमले करने और तेल उत्पादन केंद्र खार्ग द्वीप पर कब्जा करने की अपनी पुरानी धमकियां भी दोहराईं। ट्रंप ने तुर्किये की राजधानी अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन से इतर कहा कि ये हमले होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक पोतों पर ईरान के हमलों के जवाब में की जा रही लगातार प्रतिशोधात्मक कार्रवाई का हिस्सा हैं। उन्होंने ईरान के बारे में कहा, “वे बहुत बुरा व्यवहार कर रहे हैं।”

इसे भी पढ़ें: Cashier Murder Case | चंडीगढ़ पुलिस का बड़ा खुलासा: पाकिस्तान से जुड़े मादक पदार्थ-आतंकवाद नेटवर्क का भंडाफोड़ किया, तीन लोग गिरफ्तार

ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान ने पोतों पर ड्रोन और मिसाइल से हमले किए। मंगलवार को तीन टैंकर को निशाना बनाए जाने के बाद अमेरिका ने ईरान पर हमले किए और ईरानी बलों ने फारस की खाड़ी में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला कर जवाबी कार्रवाई की। ईरान ने कहा है कि अंतरिम युद्धविराम समझौता उसे होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले यातायात का प्रबंधन करने का अधिकार देता है।

युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए जारी बातचीत में अहम वार्ताकार और ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कड़ा रुख अपनाते हुए लिखा, ‘‘धौंस और वसूली का दौर खत्म हो चुका है। इससे कुछ हासिल नहीं होता। हम झुकते नहीं।’’ ट्रंप ने यह कहकर चिंता और बढ़ा दी कि युद्ध रोकने का अंतरिम समझौता ‘‘समाप्त’’ हो गया है।

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वह बातचीत जारी रहने देंगे। हमलों के कारण युद्धविराम पर बार-बार खतरा मंडराता रहा है तथा इस बीच ट्रंप की टिप्पणियों से अनिश्चितता और बढ़ गई है। उनके बयान के बाद तेल की कीमतों में तेज उछाल आया। यदि युद्ध फिर शुरू होता है तो यह पश्चिम एशिया पर व्यापक पैमाने पर असर डाल सकता है और होर्मुज जलडमरूमध्य से ऊर्जा आपूर्ति फिर बाधित हो सकती है।

ट्रंप ने युद्धविराम की स्थिति के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘‘मेरे हिसाब से यह समाप्त हो चुका है।’’ उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधि बातचीत जारी रख सकते हैं लेकिन उन्होंने उसके नतीजे को लेकर संदेह जताया। उन्होंने कहा, ‘‘वे बात कर सकते हैं, लेकिन मुझे लगता है कि वे अपना समय बर्बाद कर रहे हैं।’’ ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने ‘एक्स’ पर जवाब देते हुए कहा कि ट्रंप की टिप्पणियां ‘‘ताकत का संकेत नहीं, बल्कि ईरान को लेकर अमेरिकी नीति की विफलता की स्वीकारोक्ति’’ हैं।

ट्रंप युद्ध के दौरान पहले भी खार्ग द्वीप पर कब्जा करने की धमकी दे चुके हैं। पिछले महीने उन्होंने यह भी सवाल उठाया था कि क्या अमेरिका ‘‘इसके लिए तैयार है।’’ ईरान का करीब 90 प्रतिशत तेल निर्यात इसी द्वीप से होता है। बातचीत जारी रहने के बावजूद जलडमरूमध्य में पोतों पर नए हमले ईरान के नेतृत्व में मतभेद का संकेत दे सकते हैं। कट्टरपंथी इस जलमार्ग पर स्थायी नियंत्रण चाहते हैं। यह जलमार्ग वैश्विक स्तर पर ईंधन आपूर्ति के लिए अहम है और ईरान के लिए पश्चिमी देशों से टकराव में दबाव बनाने वाला जरिया बन गया है।

वहीं, व्यावहारिक रुख रखने वाले नेता अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हटाने और बेहद जरूरी आर्थिक राहत के लिए स्थायी शांति समझौता चाहते हैं। अंतिम समझौते पर बातचीत ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के कई दिनों तक चलने वाले अंतिम संस्कार के बाद शुरू होनी थी। खामेनेई 28 फरवरी को युद्ध की शुरुआत में मारे गए थे। उन्हें बृहस्पतिवार को सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।

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सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन में फिर एकजुट हुई स्थानीय अखाड़ा परिषद, प्रशासन के साथ मिलकर होगी तैयारी

उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारी जोर शोर से की जा रही है। इसी बीच 7 महीने पहले भंग हुई उज्जैन स्थानीय अखाड़ा परिषद का पुनर्गठन एक बार फिर कर दिया गया है। निरंजनी अखाड़े में आयोजित की गई एक बैठक के दौरान अखाड़ा परिषद फिर से बनाई गई।

इस बैठक में शैव, वैष्णव, नाथ, उदासीन और अन्य संप्रदायों के संत महंत एक ही मंच पर उपस्थित दिखाई दिए। सभी ने साथ मिलकर परिषद को फिर से सक्रिय करने का निर्णय लिया। यह फैसला भी लिया गया कि सिंहस्थ महाकुंभ की तैयारी और प्रशासन से जुड़े हुए विषयों पर संयुक्त रूप से काम किया जाएगा।

सिंहस्थ 2028 के लिए एकजुट अखाड़ा परिषद

इस बैठक में आखिर भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ रविंद्र पुरी महाराज, निर्मोही अखाड़े के श्रीमहंत मदन मोहन दास महाराज सहित सभी अखाड़ों के संत मौजूद रहे। इस दौरान उज्जैन और नासिक कुंभ से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई और एक साथ आगे बढ़ने का संकल्प लिया गया।

प्रशासन को देंगे सुझाव

स्थानीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत डॉ रामेश्वर दास महाराज ने बैठक के दौरान कहा की परिषद पुनर्जीवित हो गई है और पूर्व के सभी पदाधिकारी पहले की तरह अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे। शैव, वैष्णव, नाथ, उदासीन सभी संप्रदाय मिलकर प्रशासन से बातचीत करेंगे और सिंहस्थ 2028 के लिए संयुक्त रूप से आवश्यक सुझाव देंगे। परिषद को दोबारा सक्रिय करने का उद्देश्य संत समाज की एकता को बनाए रखना और सिंहस्थ तैयारी में समन्वय स्थापित करना है। संतों ने कहा कि हमारा उद्देश्य 2028 का सिंहस्थ दिव्य, भव्य और सुरक्षित बनाना है। सभी अखाड़े साथ मिलकर काम करेंगे और शासन प्रशासन को आवश्यक सहयोग देंगे।

 

7 महीने पहले हुआ था मनमुटाव

बता दें 30 नवंबर 2025 को दत्त अखाड़ा में एक आपात बैठक का आयोजन करते हुए स्थानीय अखाड़ा परिषद के पदाधिकारीयों ने इस्तीफा देकर परिषद को भंग कर दिया था। इसके बाद शैव और वैष्णव संप्रदायों में मतभेद हो गए थे। वैष्णव अखाड़ों ने अलग से रामादल अखाड़ा परिषद के गठन की घोषणा की थी और प्रशासन से अलग से चर्चा करने की बात कही थी। हालांकि पिछले कुछ समय से दोनों पक्षों के बीच बातचीत चल रही थी। अब आपसी सहमति से सभी संत एक साथ बैठे और परिषद को पुनर्जीवित करने पर सहमति बनी।

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इंग्लैंड ने राउंड ऑफ 16 में मेजबान मेक्सिको को हराया था और क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई थी, जहां उसका सामना नॉर्वे से होगा. मगर जॉर्डन हेंडरसन इस मैच में हिस्सा नहीं ले पाएंगे, बल्कि टूर्नामेंट के आगे आने वाले मुकाबलों में भी उनका खेलना मुश्किल है. Thu, 09 Jul 2026 09:21:49 +0530

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