मंदिर की घंटी क्यों है विशेष? क्या इसकी ध्वनि में छिपा है कोई गहरा वैज्ञानिक रहस्य?
Scientific reason behind temple bells: जब हम किसी मंदिर में प्रवेश करते हैं, तो सबसे पहले घंटी बजाना हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। बहुत से लोग इसे केवल एक परंपरा मानते हैं, लेकिन भारतीय वास्तुकला और प्राचीन विज्ञान में इसके पीछे अत्यंत गहरा अर्थ छिपा है। मंदिर की घंटी केवल पीतल या अन्य धातु का एक टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह एक 'साउंड थेरेपी' (ध्वनि चिकित्सा) का यंत्र है।
क्या कहता है घंटी का विज्ञान?
मंदिर की घंटी बनाने की प्रक्रिया सामान्य बर्तनों या अन्य वस्तुओं से बिल्कुल भिन्न होती है। इसे बनाने में तांबा, जस्ता, सीसा, तांबा, निकल, क्रोमियम और मैंगनीज जैसी धातुओं का एक निश्चित और वैज्ञानिक अनुपात उपयोग किया जाता है। इन धातुओं का मिश्रण ही घंटी को वह विशिष्ट ध्वनि और गूंज प्रदान करता है, जो लंबे समय तक वातावरण में बनी रहती है।
जब यह घंटी बजाई जाती है, तो उत्पन्न होने वाली ध्वनि की आवृत्ति (Frequency) हमारे मस्तिष्क के बाएं और दाएं हिस्से को एक साथ सक्रिय (Synchronize) कर देती है। विज्ञान के अनुसार, यह गूंज हमारे शरीर के सात हीलिंग सेंटर्स (जिन्हें हम चक्र कहते हैं) को स्पर्श करती है। इस ध्वनि के प्रभाव से मन में चल रहे अनावश्यक विचार क्षण भर में लुप्त हो जाते हैं और हम पूरी तरह एकाग्र (Focused) हो जाते हैं।
पूजा के दौरान घंटी का महत्त्व
मंदिर में घंटी बजाने का उद्देश्य केवल भगवान का ध्यान आकर्षित करना नहीं है, बल्कि खुद को उस आध्यात्मिक वातावरण के लिए तैयार करना है। जब हम घंटी बजाते हैं, तो शरीर का पूरा तंत्र सचेत हो जाता है। यह ध्वनि हमारे चित्त को बाहरी दुनिया की भागदौड़ से हटाकर पूर्णतः ईश्वर की भक्ति में केंद्रित करने में मदद करती है।
प्राचीन समय से ही इसे नकारात्मक ऊर्जा को हटाने का माध्यम माना गया है। ध्वनि का कंपन (Vibration) आसपास के वातावरण में मौजूद सूक्ष्म कीटाणुओं और नकारात्मक तरंगों को नष्ट करने में भी सक्षम माना जाता है। इसीलिए मंदिर का वातावरण हमें प्रवेश करते ही एक अजीब सी शांति और मानसिक स्थिरता प्रदान करता है।
निष्कर्ष
अतः अगली बार जब आप मंदिर में प्रवेश करें, तो घंटी को केवल एक रस्म के तौर पर न बजाएं। उसे पूरे सम्मान के साथ बजाएं और उस गूंज को अपने भीतर महसूस करें। यह घंटी आपको बाहरी संसार से हटाकर एक ऐसी अवस्था में ले जाती है, जहाँ से आप ईश्वर के और अधिक करीब हो पाते हैं।
डिसक्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी वैज्ञानिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। घंटी के धातु संयोजन और ध्वनि प्रभाव के दावे प्राचीन भारतीय ग्रंथों एवं साउंड थेरेपी के सिद्धांतों के संदर्भ में हैं। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या के लिए चिकित्सा विशेषज्ञ का परामर्श अवश्य लें।
Akshay Kumar on Retirement: फिल्मों से जल्द रिटायर होने वाले हैं अक्षय कुमार? 36 के करियर के बाद कही चौंकाने वाली बात
Akshay Kumar on Retirement: बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार लगातार फ्लॉप फिल्मों का शिकार हो रहे हैं। पिछले कुछ सालों में अक्षय की ऐसी कम ही फिल्में आई होगीं जिन्होंने बॉक्स ऑफिस पर बेहतरीन प्रदर्शन किया हो। ऐसे में कुछ अटकलें शुरू हो गई कि अब अक्षय कुमार का बॉलीवुड करियर कमजोर हो गया है जिसके चलते वह रिटायर हो सकते हैं। हालांकि अब एक्टर ने खुद इन रूमर्स पर अपनी चुप्पी तोड़ी है।
अपनी आगामी फिल्म 'वेलकम टू द जंगल' के ट्रेलर लॉन्च इवेंट के दौरान अभिनेता ने साफ कर दिया कि फिलहाल उनका काम छोड़ने का कोई इरादा नहीं है। अक्षय ने मजाकिया अंदाज में कहा कि रिटायरमेंट का ख्याल उन्हें जरूर आता है, लेकिन वह कुछ ही सेकंड में गायब भी हो जाता है।
'सुबह 4 बजे रिटायरमेंट का ख्याल आता है'
इवेंट के दौरान अक्षय कुमार ने अपनी दिनचर्या और काम के प्रति समर्पण के बारे में बात करते हुए कहा कि अक्सर सुबह जल्दी उठते समय उनके मन में रिटायर होने का विचार आता है।
उन्होंने हंसते हुए कहा कि जैसे ही उन्हें याद आता है कि शूटिंग के सेट पर सैकड़ों लोग उनका इंतजार कर रहे हैं, वह विचार तुरंत खत्म हो जाता है। अभिनेता ने बताया कि पिछले 36 सालों से उनका यही रूटीन चल रहा है और शायद आगे भी ऐसा ही चलता रहेगा।
'घर बैठा तो इलेक्ट्रिशियन या डॉग वॉकर बन जाऊंगा'
रिटायरमेंट के सवाल पर अक्षय कुमार ने मजाकिया अंदाज में कहा कि अगर वह घर पर बैठ गए तो उन्हें कोई न कोई नया काम ढूंढना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि शायद वह इलेक्ट्रिशियन बन जाएं, लोगों के कुत्तों को घुमाने लगें या फिर घर के बगीचे की देखभाल करने लगें। अभिनेता का मानना है कि इन सबकी बजाय फिल्मों में काम करते रहना कहीं बेहतर है।
परिवार के साथ ज्यादा समय बिताने की कोशिश भी की
अक्षय कुमार ने यह भी खुलासा किया कि उन्होंने पहले परिवार के साथ ज्यादा समय बिताने के लिए काम से ब्रेक लेने की कोशिश की थी। हालांकि यह प्रयोग ज्यादा दिन नहीं चल सका।
अभिनेता ने बताया कि कुछ समय बाद उनके परिवार वालों ने ही उनसे पूछना शुरू कर दिया कि वह दोबारा काम पर कब लौटेंगे। यही वजह है कि अब उन्हें लगता है कि सक्रिय रहना और काम करते रहना ही उनके लिए सबसे अच्छा विकल्प है।
'रिटायरमेंट का मतलब आखिरी सांस तक नहीं होना चाहिए'
रिटायरमेंट को लेकर अपनी सोच साझा करते हुए अक्षय कुमार ने कहा कि वह इस शब्द को अलग नजरिए से देखते हैं।
उनका मानना है कि इंसान को जीवनभर सक्रिय रहना चाहिए और काम करते रहना चाहिए। अभिनेता ने कहा कि जब तक व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से सक्षम है, तब तक उसे अपने पसंदीदा काम से जुड़ा रहना चाहिए।
30 साल से ज्यादा का शानदार करियर
अक्षय कुमार ने 1991 में फिल्म 'सौगंध' से बतौर लीड अभिनेता बॉलीवुड में कदम रखा था। इसके बाद उन्होंने एक्शन, कॉमेडी, रोमांस और सामाजिक विषयों पर आधारित फिल्मों के जरिए इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाई।
अपने तीन दशक से ज्यादा लंबे करियर में वह 150 से अधिक फिल्मों का हिस्सा रह चुके हैं। 'खिलाड़ी', 'हेरा फेरी', 'वेलकम', 'भूल भुलैया', 'राउडी राठौर', 'एयरलिफ्ट' और 'केसरी' जैसी फिल्मों ने उन्हें बॉलीवुड के सबसे सफल सितारों में शामिल कर दिया।
वर्क फ्रंट की बात करें तो अक्षय कुमार के पास आने वाले समय में कई बड़े प्रोजेक्ट्स हैं। हालिया वर्षों में वह 'स्काई फोर्स', 'हाउसफुल 5', 'जॉली एलएलबी 3' और 'भूत बंगला' जैसी फिल्मों में नजर आए हैं। वहीं 'वेलकम टू द जंगल' को लेकर भी दर्शकों में जबरदस्त उत्साह बना हुआ है।


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