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जमीन बेचकर बेटे को बनाया Cricketer, Bihar के Vaibhav Suryavanshi की Team India तक की संघर्ष गाथा

बिहार के समस्तीपुर जिले के रहने वाले संजीव सूर्यवंशी की कहानी एक ऐसे पिता की है, जिन्होंने अपने बेटे वैभव सूर्यवंशी के क्रिकेटर बनने के सपने को साकार करने के लिए हर वह त्याग किया, जिसकी कल्पना करना भी आसान नहीं है।

आज 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी भारतीय क्रिकेट का नया चमकता सितारा बन चुके हैं। लेकिन इस सफलता के पीछे वर्षों की मेहनत, संघर्ष और परिवार के बलिदान की लंबी कहानी छिपी हुई है। मौजूद जानकारी के अनुसार वैभव के क्रिकेट करियर को आगे बढ़ाने के लिए उनके पिता ने अपनी पैतृक जमीन तक बेच दी थी, ताकि बेटे को बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाएं मिल सकें।

गौरतलब है कि ग्रामीण भारत में पैतृक जमीन केवल संपत्ति नहीं होती, बल्कि परिवार की पहचान और विरासत का प्रतीक मानी जाती है। ऐसे में जमीन बेचना किसी परिवार के लिए बेहद भावनात्मक फैसला होता है। लेकिन संजीव सूर्यवंशी ने बेटे के सपनों को जमीन और पैसों से अधिक महत्व दिया।

संजीव सूर्यवंशी का कहना है कि अब जब उनका सपना पूरा हो रहा है, तब जमीन और धन की कोई अहमियत नहीं रह गई है। उनके अनुसार वैभव को जो सम्मान और पहचान देश-विदेश में मिल रही है, वही उनके लिए सबसे बड़ी खुशी है।

बता दें कि वैभव सूर्यवंशी का नाम हाल ही में आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ होने वाली छोटी अवधि की श्रृंखला के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया है। इसके साथ ही वह भारतीय क्रिकेट टीम में चुने जाने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन गए हैं। यह उपलब्धि उन्हें शानदार घरेलू प्रतियोगिता और जूनियर विश्व कप में दमदार प्रदर्शन के बाद मिली है।

मौजूद जानकारी के अनुसार वैभव ने वर्ष 2026 की बड़ी घरेलू प्रतियोगिता में 776 रन बनाकर सबसे अधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज का गौरव हासिल किया था। उन्होंने पूरे सत्र में एक शतक और पांच अर्धशतक लगाए। इसके अलावा उन्हें सर्वश्रेष्ठ उभरते खिलाड़ी, सबसे मूल्यवान खिलाड़ी, सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज, सर्वश्रेष्ठ प्रहार दर और सबसे अधिक छक्के लगाने जैसे कई पुरस्कार भी मिले थे।

वैभव की क्रिकेट यात्रा तब शुरू हुई थी, जब वह केवल चार साल के थे। उनके पिता ने पहली बार उनके खेल में असाधारण प्रतिभा देखी। इसके बाद प्लास्टिक और टेनिस गेंद से शुरू हुआ सफर धीरे-धीरे पेशेवर प्रशिक्षण तक पहुंचा। समस्तीपुर से पटना तक लगभग 90 किलोमीटर की दूरी तय कर प्रशिक्षण के लिए जाना परिवार के लिए आसान नहीं था, लेकिन संजीव सूर्यवंशी ने कभी हार नहीं मानी।

गौरतलब है कि बेटे को नियमित अभ्यास के लिए ले जाने के उद्देश्य से उन्होंने एक वाहन भी खरीदा था। इसके लिए भी जमीन बेचने से प्राप्त धन का उपयोग किया गया था। आज जब वैभव भारतीय टीम की दहलीज पर खड़े हैं, तब उनके पिता को अपने फैसले पर कोई पछतावा नहीं है।

संजीव सूर्यवंशी बताते हैं कि वैभव बचपन से ही देश के लिए खेलने का सपना देखते थे और उसी लक्ष्य के लिए लगातार मेहनत कर रहे थे। जब भारतीय टीम में चयन की खबर आई, तब पूरा परिवार भावुक हो गया। घर पर रिश्तेदारों, दोस्तों और गांव के लोगों का तांता लग गया। हर कोई इस उपलब्धि का जश्न मना रहा था।

मौजूद जानकारी के अनुसार चयन की खबर मिलने के समय वैभव श्रीलंका में अभ्यास कर रहे थे। उन्होंने अपने पिता को फोन कर चयन की जानकारी दी और बताया कि वहां मौजूद सभी लोग उन्हें बधाई दे रहे हैं।

अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि वैभव को आयरलैंड या इंग्लैंड दौरे पर पदार्पण का मौका मिलता है या नहीं। यदि वह अंतिम एकादश में जगह बनाने में सफल रहते हैं, तो वह भारत के लिए सबसे कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने वाले खिलाड़ी बन जाएंगे। फिलहाल यह रिकॉर्ड सचिन तेंदुलकर के नाम दर्ज है। ऐसे में वैभव सूर्यवंशी के सामने इतिहास रचने का सुनहरा अवसर है और पूरा देश उनके अगले कदम का इंतजार कर रहा है।

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2027 वनडे वर्ल्ड कप 4 अक्टूबर से 21 नवंबर तक:54 में से 41 मैच साउथ अफ्रीका में होंगे; अगले महीने ICC ऐलान करेगी

मेंस वनडे वर्ल्ड कप 2027 की संभावित तारीखें तय हो गई हैं। टूर्नामेंट 4 अक्टूबर से 21 नवंबर तक खेला जाएगा। क्रिकेट वेबसाइट ईएसपीएन क्रिकइंफों की रिपोर्ट के मुताबिक, मई में हुई अहमदाबाद ICC बोर्ड की बैठक में तारीखों पर सहमति बनी है। 2027 का वर्ल्ड कप साउथ अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया में खेला जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक बैठक में किन देशों में कितने मैच होंगे और कौने-से वेन्यू इसमें शामिल होंगे, इसपर भी चर्चा की गई है। इसका ऑफिशियल ऐलान जुलाई में एडिनबर्ग में होने वाली ICC की सालाना आम बैठक (AGM) में होगी। साउथ अफ्रीका में कम से कम 41 मैच होंगे वर्ल्ड कप के ज्यादातर मैच साउथ अफ्रीका के 8 वेन्यू पर खेले जाएंगे। टूर्नामेंट के कुल 54 मुकाबलों में से कम से कम 41 मैच साउथ अफ्रीका होस्ट कर सकता है। जिम्बाब्वे 8 से 10 मैच होस्ट करेगा, जबकि नामीबिया 3 मैच। जिम्बाब्वे के पास अब 3 वेन्यू ‘विक्टोरिया फॉल्स, हरारे स्पोर्ट्स क्लब और क्वींस, बुलावायो’ है। 24 साल बाद अफ्रीका वनडे वर्ल्ड कप होस्ट करेगा यह 2003 के बाद अफ्रीका में पहला वनडे वर्ल्ड कप होगा। साउथ अफ्रीका ने 2007 टी20 वर्ल्ड कप, 2009 चैंपियंस ट्रॉफी और 2023 महिला टी20 वर्ल्ड कप होस्ट किए हैं। जिम्बाब्वे और नामीबिया ने हाल में अंडर-19 वर्ल्ड कप को-होस्ट किया था। टूर्नामेंट में 14 टीमें हिस्सा लेंगी 2027 का टूर्नामेंट 14 टीमों के बीच खेला जाएगा। इसमें 7-7 टीमों को दो ग्रुप मेें बांटा जाएगा। हर ग्रुप से टॉप-3 टीमें सुपर सिक्स में जाएंगी। फुल मेंबर टीम होने की वजह से साउथ अफ्रीका और जिम्बाब्वे सीधे क्वालीफाई कर चुके हैं। वहीं नामीबिया को क्वालिफिकेशन प्रोसेस से गुजरना होगा। ICC एफटीपी का पहला इवेंट होगा यह वर्ल्ड कप 2027-31 फ्यूचर टूर्स प्रोग्राम (FTP) का पहला ICC इवेंट होगा। एफटीपी की डिटेल्स इस साल हांगकांग में ICC मीटिंग में फाइनल होंगी। विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के स्ट्रक्चर और इसके विस्तार को लेकर चर्चा चल रही है। इसके अलावा ICC जल्द ही फैसला करेगा कि क्या 12 फुल मेंबर नेशन जिम्बाब्वे, आयरलैंड और अफगानिस्तान, वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) में शामिल होंगे या नहीं। इनके लिए एक-एक टेस्ट WTC शेड्यूल में रखे जा सकते हैं। यह फैसला जुलाई में एडिनबर्ग AGM में हो सकता है। ------------------------------------ स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… पहली बार तीन देश होस्ट करेंगे FIFA वर्ल्ड कप:अमेरिका-कनाडा-मेक्सिको में 48 टीमों के बीच 104 मैच, नॉकआउट में 32 टीमें जाएंगी; जानिए सबकुछ 23वां FIFA मेंस वर्ल्ड कप 11 जून से 20 जुलाई तक अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको में खेला जाएगा। 96 साल के इतिहास में पहली बार तीन देश वर्ल्ड कप की मेजबानी कर रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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  Sports

Mohammed Siraj को क्यों दिया गया आराम, आंकड़ों ने बताई भारतीय टीम की बड़ी रणनीति

भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज को हाल ही में आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ शार्ट फार्मेट वाले मुकाबलों की सीरीज के लिए टीम में चुना गया था। हालांकि टीम घोषणा के कुछ ही दिनों बाद उन्हें आराम देने का फैसला किया गया और उनकी जगह प्रसिद्ध कृष्णा को शामिल कर लिया गया। पहली नजर में यह फैसला कई लोगों के लिए हैरान करने वाला था, क्योंकि पिछले कुछ समय से सिराज सीमित ओवरों के प्रारूप में नियमित रूप से नहीं खेल रहे थे।

गौरतलब है कि वर्ष 2024 में विश्व कप जीतने के बाद से मोहम्मद सिराज का छोटी अवधि वाले अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में योगदान काफी सीमित रहा है। उन्होंने इस दौरान केवल एक द्विपक्षीय श्रृंखला खेली थी। वहीं वर्ष 2026 के विश्व कप में भी उन्हें केवल एक मुकाबले में मौका मिला था, जब जसप्रीत बुमराह को आराम दिया गया था। इतना ही नहीं, उस प्रतियोगिता की टीम में उनकी जगह भी हर्षित राणा के चोटिल होने के बाद बनी थी।

मौजूद जानकारी के अनुसार एकदिवसीय प्रारूप में भी सिराज की स्थिति पहले जैसी मजबूत नहीं रही है। वर्ष 2023 के विश्व कप के बाद भारत ने 23 एकदिवसीय मुकाबले खेले, जिनमें सिराज केवल नौ मैचों में दिखाई दिए। उन्हें चैंपियंस ट्रॉफी की टीम में भी जगह नहीं मिली थी। 

हालांकि तस्वीर का दूसरा पहलू कहीं अधिक दिलचस्प है। जहां सीमित ओवरों के क्रिकेट में सिराज के अवसर कम हुए हैं, वहीं लंबे प्रारूप में वह भारतीय टीम के सबसे भरोसेमंद गेंदबाज बनकर उभरे हैं। पिछले तीन वर्षों में उन्होंने जितना क्रिकेट खेला है, वह दुनिया के किसी भी अन्य तेज गेंदबाज से अधिक माना जा रहा है।

बता दें कि जनवरी 2023 से अब तक मोहम्मद सिराज ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और घरेलू पेशेवर प्रतियोगिताओं को मिलाकर कुल 1231 ओवर गेंदबाजी की है। इस दौरान केवल रविंद्र जडेजा ने उनसे अधिक ओवर डाले हैं। तेज गेंदबाजों की सूची में सिराज सबसे ऊपर हैं।

गौरतलब है कि उनके कुल कार्यभार का बड़ा हिस्सा लंबे प्रारूप से आया है। उन्होंने इस अवधि में 30 टेस्ट मुकाबलों में 744 ओवर फेंके हैं। औसतन हर मुकाबले में करीब 25 ओवर गेंदबाजी करना किसी भी तेज गेंदबाज के लिए बड़ी चुनौती माना जाता है। यही वजह है कि उनके कुल कार्यभार का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा लंबे प्रारूप से जुड़ा हुआ है।

मौजूद जानकारी के अनुसार भारत ने वर्ष 2023 के बाद 33 लंबे मुकाबले खेले हैं, जिनमें सिराज 30 मैचों में मैदान पर उतरे। यह लगभग 91 प्रतिशत मुकाबलों में उनकी मौजूदगी को दर्शाता है। दूसरी ओर जसप्रीत बुमराह के कार्यभार को लगातार नियंत्रित किया गया और उन्हें कई श्रृंखलाओं में आराम दिया गया।

इंग्लैंड दौरे पर भी सिराज ने सभी पांच मुकाबले खेले थे और 185 ओवर गेंदबाजी करते हुए टीम के सबसे सफल गेंदबाज बने थे। ऐसे में क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि उन्हें आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ छोटी अवधि वाले मुकाबलों से बाहर रखने का फैसला केवल मौजूदा श्रृंखला को ध्यान में रखकर नहीं लिया गया है।

बता दें कि भारतीय टीम के सामने आने वाले महीनों में व्यस्त कार्यक्रम है। टीम को 17 एकदिवसीय और 10 लंबे मुकाबले खेलने हैं। इसके अलावा वर्ष 2027 के विश्व कप की तैयारियां भी जारी हैं। ऐसे में टीम प्रबंधन नहीं चाहता कि सिराज पर जरूरत से ज्यादा दबाव पड़े।

दरअसल पिछले कुछ समय से चर्चा होती रही कि मोहम्मद सिराज केवल एक प्रारूप के खिलाड़ी बनकर रह गए हैं। लेकिन आंकड़े बताते हैं कि उनकी अहमियत कम नहीं हुई, बल्कि बढ़ी है। भारतीय टीम के लिए वह अब ऐसे गेंदबाज बन चुके हैं जिन पर लगातार भरोसा किया जाता है। यही कारण है कि अब कार्यभार प्रबंधन की नीति केवल जसप्रीत बुमराह तक सीमित नहीं रही, बल्कि मोहम्मद सिराज भी उसका अहम हिस्सा बन चुके हैं।
Thu, 11 Jun 2026 22:28:15 +0530

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