पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने देश के इतिहास लेखन और अपनी पहचान को लेकर एक ऐसा चौंकाने वाला बयान दिया है, जिसने पूरे पाकिस्तान के भीतर पहचान और संस्कृति की एक नई बहस छेड़ दी है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने बेहद बेबाकी और खुलकर इस बात को स्वीकार किया कि पाकिस्तान के लोगों को अपनी असली जड़ों से दूर रखने की कोशिशें की जा रही हैं।
उन्होंने देश की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था और इतिहास की किताबों पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि पाकिस्तानी बच्चों को दशकों से 'गलत इतिहास' पढ़ाया जा रहा है, जिससे नई पीढ़ी अपनी वास्तविक सभ्यता और ऐतिहासिक सच्चाई से पूरी तरह कटती जा रही है।
'हमारे पूर्वज हिंदू थे, सऊदी अरब या ईरान से नहीं आए थे' रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पाकिस्तानी समाज की उस मानसिकता पर कड़ा प्रहार किया जो अपनी जड़ों को छिपाने की कोशिश करती है। उन्होंने कहा कि हम पाकिस्तानी मुसलमान अपने हिंदू पूर्वजों से केवल इसलिए नफरत करते हैं क्योंकि हमें एक खास तरह का नैरेटिव समझाया गया है। आसिफ ने दावा किया कि पाकिस्तान के आधे लोग आज भी यह झूठा दावा करते घूमते हैं कि उनके पूर्वज सऊदी अरब या ईरान से भारत आए थे, जो कि पूरी तरह काल्पनिक है।
उन्होंने डंके की चोट पर कहा कि 'मेरे खुद के पूर्वज हिंदू थे, और क्या इस सच्चाई को स्वीकार करने से मैं किसी भी मायने में कम पाकिस्तानी हो जाता हूं?' उनके इस कुबूलनामे के बाद पाकिस्तान के कट्टरपंथियों के बीच खलबली मची हुई है।
इतिहास की किताबों से चंद्रगुप्त मौर्य और अशोक को मिटाने का आरोप ख्वाजा आसिफ ने पाकिस्तान के शिक्षा विभाग को कटघरे में खड़ा करते हुए आरोप लगाया कि किताबों को जानबूझकर ऐसे लोगों ने लिखा है जिन्होंने आने वाली पीढ़ियों को एक खास संकीर्ण मानसिकता में ढालने की कोशिश की है। इसी का नतीजा है कि आज पाकिस्तान के इतिहास से हिंदू और प्राचीन बौद्ध शासकों के गौरवशाली इतिहास को लगभग पूरी तरह मिटा दिया गया है।
रक्षा मंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि आज पाकिस्तान के बहुसंख्यक बच्चों को यह तक नहीं पता कि चंद्रगुप्त मौर्य और चक्रवर्ती सम्राट अशोक कौन थे, जबकि यह इसी भूमि का मूल इतिहास है। उन्होंने साफ किया कि अतीत में अमेरिका की लड़ाइयों में पाकिस्तान का मोहरे की तरह इस्तेमाल करने के लिए समाज की सोच को कृत्रिम रूप से बदला गया और इतिहास को विकृत रूप में पेश किया गया।
ख्वाजा आसिफ के इस बयान के बाद पाकिस्तान में इतिहास, पहचान और सांस्कृतिक विरासत को लेकर बहस तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर भी लोग उनके बयान पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कई लोग इसे सच्चाई स्वीकार करने की पहल बता रहे हैं, जबकि कट्टरपंथी समूह इस बयान का विरोध कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा पाकिस्तान की राजनीति और शिक्षा व्यवस्था में बड़ा विवाद बन सकता है।
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