Responsive Scrollable Menu

Somvati Amavasya 2026: कब है सोमवती अमावस्या? जानें पूजा का महत्व और पीपल की 108 बार परिक्रमा करने की मान्यता

Somvati Amavasya 2026: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना जाता है. लेकिन जब यह अमावस्या सोमवार के दिन पड़ती है तो इसे सोमवती अमावस्या के नाम से जाना जाता है. सुहागिन महिलाओं के लिए यह दिन किसी महापर्व से कम नहीं माना जाता. इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छी सेहत और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए व्रत रखती हैं और पीपल के पेड़ की विशेष पूजा-अर्चना करती हैं. द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल सोमवती अमावस्या को लेकर लोगों में कंफ्यूजन की स्थिति बनी हुई है. आइए जानते हैं 14 या 15 जून कब है सोमवती अमावस्या और पति की लंबी उम्र की कामना करने के लिए इस दिन पीपल की 108 परिक्रमा करने के पीछे के रहस्य के बारे में. 

कब है सोमवती अमावस्या? 

द्रिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अधिकमास की अमावस्या तिथि 14 जून 2026 दोपहर 12 बजकर 19 मिनट पर शुरु होगी. वहीं इसका समापन 15 जून 2026 को सुबह 08 बजकर 23 मिनट पर होगा. हिंदू धर्म में अधिकांश व्रत और त्योहार उदया तिथि के समय मौजूद तिथि के आधार पर मनाए जाते हैं, क्योंकि 15 जून को सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि रहेगी और इस दिन सोमवार भी है इसलिए सोमवती अमावस्या का व्रत और पूजा 15 जून 2026, सोमवार को किया जाएगा. 

क्या है पीपल की 108 परिक्रमा करने की मान्यता? 

सोमवती अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ की पूजा और उसकी 108 परिक्रमा करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. हिंदू धर्म में पीपल को बहुत ही शुभ और पवित्र माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि पीपल के पेड़ की जड़ों में भगवान ब्रह्मा, तने में श्री हरि भगवान विष्णु और उसके ऊपरी भाग में भगवान शिव का वास होता है. इसलिए पीपल की पूजा और परिक्रमा करने से त्रिदेवों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है. 108 परिक्रमा करते समय महिलाएं कच्चा सूत या धागा पीपल के पेड़ पर लपेटती हैं और अपने अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली के लिए कामना करती हैं. माना जाता है कि इस पूजा को करने से वैवाहिक जीवन में आने वाली परेशानियां दूर होती हैं और सौभाग्य में वृद्धि होती है. 

108 परिक्रमा की पौराणिक कथा 

सोमवती अमावस्या पर पीपल की 108 परिक्रमा करने के पीछे एक पौराणिक कथा छिपी हुई है. कथा के अनुसार सोना नाम की एक पतिव्रता स्त्री के पति की मृत्यु हो गई थी. पति को फिर से जिंदा करने के लिए उसने बहुत श्रद्धा के साथ पीपल के पेड़ की 108 बार परिक्रमा की और ईश्वर से प्रार्थना की. उसकी अट्टू भक्ति से प्रसन्न होकर देवताओं ने उसके पति को फिर से नया जीवन दिया. तभी से मान्यता है कि सोमवती अमावस्या के दिन पीपल की 108 बार परिक्रमा कपने से अखंड सौभाग्य और परिवार की रक्षा का आशीर्वाद प्राप्त होता है. 

सोमवती अमावस्या का महत्व 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सोमवती अमावस्या के दिन स्नान, जप, दान और पूजा-पाठ करने से शुभ फल प्राप्त होता है. यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा पाने के लिए भी बहुत शुभ माना जाता है. विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए इस दिन व्रत रखती हैं. वहीं अविवाहित महिलाएं भी मनचाहे वर के लिए सोमवती अमावस्या का व्रत रखती है. 

यह भी पढ़ें: Parama Ekadashi 2026: 10 या 11 जून, कब है ज्येष्ठ माह की परमा एकादशी? जानें इस दिन क्या करें क्या न करें

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

Continue reading on the app

Hindu Panchang Tithi: शुभ-अशुभ तिथियों का गणित क्या है? किस दिन करें मांगलिक कार्य और कब बरतें सावधानी, समझें पूरी बात

Hindu Panchang Tithi: हिंदू पंचांग में तिथि या शुभ मुहूर्त को सिर्फ धार्मिक आस्था से नहीं जोड़ा जाता है. यह सूर्य-चंद्रमा की खगोलिय स्थिति की एक गणना है. इसे आप वैज्ञानिक गणना भी कह सकते हैं. जैसे कि हमारे हिंदू धर्म में कोई भी काम बिना पंडित को मुहूर्त दिखाएं शुरू नहीं किया जाता है. अब मुहूर्त या शादी की तारीख आखिर तय कैसे होती है? तारीख तय करने के लिए तिथि का चुनाव होता है. तिथियां पंचांग में होती है. आइए इस रिपोर्ट में समझते हैं हिंदू पंचांग की तिथियों का पूरा गणित और उनसे कैसे मुहूर्त निकाले जाते हैं. कौन से दिन सबसे शुभ होते हैं और कौन सा दिन अशुभ.

पंचांग क्या होता है?

पंचांग हिंदू वैदिक ज्योतिषों का एक पारंपरिक कैलेंडर होता है. इसका उपयोग समय की गणना, शुभ-अशुभम समय देखने के लिए किया जाता है. पंचांग के पाच अंग होते हैं पहला- तिथि, दूसरा-वार, तीसरा- नक्षत्र, चौथा-योग और पांचवा- करण. इन्हीं के आधारों पर पंचांग तैयार होता है. इन सभी अंगों की सहायता से शुभ तिथियों और मुहूर्तों का चुनाव होता है.

ये भी पढ़ें- Shukra Grah: शुक्र ग्रह का रहस्य... देवताओं से जुड़कर भी असुरों के गुरु क्यों बने शुक्राचार्य? जानिए प्रभाव और इनकी प्रिय राशियां

तिथि क्या होती है?

तिथियां पंचांग का सबसे जरूरी अंग होता है. इसका स्थान सबसे महत्वपूर्ण होता है. जब सूर्य और चंद्रमा के बीच कोणीय दूरी होती है यानी की 12 डिग्री की दूरी तब एक तिथि का निर्माण होता है. इस प्रकार 360 डिग्री का चक्र बनता है, जिसमें कुल 30 तिथियां आती हैं. इसे चंद्रमास कहा जाता है. एक चंद्रमास में 30 तिथियों के दो पक्ष होते हैं. 

शुक्ल पक्ष- अमावस्या से पूर्णिमा तक (चंद्रमा का बढ़ना)

कृष्ण पक्ष- पूर्णिमा से अमावस्या तक (चंद्रमा का घटना)

हिंदू पंचांग में 24 घंटे की तिथि होती है?

जी नहीं, इसमें तिथि का समय 24 घंटों के आधार पर निश्चित नहीं होता है. कभी यह 19 घंटों की तिथि भी बन जाती है. कई बार यह तिथि 26 घंटे की भी हो जाती है. इसी वजह से हर साल पर्व और त्योहारों की तारीखें अलग-अलग होती है.

30 तिथियों का 5 वर्गों में विभाजन

चंद्रमास की 30 तिथियों में शुक्ल और कृष्ण पक्ष को भी पांच अलग-अलग वर्णों में विभाजित किया गया है. यानी की तिथि 5 प्रकार की होती है. सभी तिथियों का अलग महत्व होता है.

1.नंदा तिथि- इस तिथि में प्रतिपदा, षष्ठी और एकादशी पड़ती है. नंदा का अर्थ होता है सुख, आनंद और प्रसन्नता. इस तिथि के स्वामी शुक्र देव होते हैं. इसलिए, इसे खुशहाली, समृद्धि और शुभ माना जाता है. इस दिन नए काम की शुरुआत के साथ घर में शुभ कार्यों को करना चाहिए. नंदा तिथि में एकादशी पड़ती है, जो भगवान विष्णु को समर्पित होती है.

2.भद्रा तिथि- भद्रा तिथि में द्वितीया, सप्तमी और द्वादशी तिथि आती हैं. भद्रा का अर्थ है कल्याणकारी और मंगलमय. इस तिथि की खासियत है स्थिरता और विकास. शिक्षा, ज्ञान और करियर से जुड़े कार्यों के लिए यह सर्वश्रेष्ठ तिथि मानी जाती है. भद्रा तिथि के स्वामी बुध देव होते हैं. इस तिथि पर आप नई नौकरी जॉइन कर सकते हैं या वाहन खरीद सकते हैं. इस तिथि में सप्तमी पड़ती है, जिसमें सूर्यदेव की पूजा करने का खास महत्व होता है.

3.जया तिथि- तीसरी तिथि है जया तिथि. इसमें तृतीया, अष्टमी और त्रयोदशी तिथि पड़ती है.  जया का मतलब होता है जीत प्राप्त करना. जया तिथि के स्वामी मंगल ग्रह होते हैं. इस तिथि को संघर्ष में सफलता और शत्रुओं को परास्त करने वाली माना जाता है. जया तिथि पर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी शुरू कर सकते हैं. कानूनी मामलों की शुरुआत कर सकते हैं और लक्ष्य प्राप्त करने के लिए शुरुआत कर सकते हैं. इस तिथि का धार्मिक महत्व यह है कि इसमें अक्षय तृतीया आती है, त्रयोदशी तिथि पर शिवरात्रि और प्रदोष व्रत पड़ते हैं. अष्टमी पर दुर्गा अष्टमी आती है.

hindu panchang tithi Photograph: (gemini)

4.रिक्ता तिथि- रिक्ता तिथि में चतुर्थी, नवमी और चतुर्दशी आती हैं. रिक्ता यानी खाली या शून्य. इस तिथि को आमतौर परर शुभ कार्यों के लिए सही नहीं माना जाता है. वैसे तो इसे पूरी तरह अशुभ भी नहीं कहा जा सकता है क्योंकि कुछ काम इस तिथि में शुरू किए जाए तो अच्छे परिणाम देते हैं. इस तिथि पर शनिदेव का राज चलता है. रिक्ता तिथि में शादी, गृह प्रवेश, सगाई, नामकरण या नए काम की शुरुआत नहीं करते हैं. मगर कर्ज से मुक्ति, रोग निवारण, शत्रु नाश और साधना व तपस्या के लिए रिक्ता तिथ अच्छी होती है. इस तिथि में गणेश चतुर्थी, नरक चतुर्थी और राम नवमी पड़ती है.

5.पूर्णा तिथि- पूर्मा तिथि में पंचमी, दशमी, अमावस्या और पूर्णिमा आती हैं. पूर्णा का अर्थ होता है पूर्णता. इस तिथि को सफलता, संतोषजनक और शुभ परिणाम देने वाला माना जाता है. इस तिथि में पूजा-पाठ, गृह प्रवेश और नए कार्य की शुरुआत के लिए खास माना जाता है. इस तिथि में दान-पुण्य, ग्रह प्रवेश और आध्यात्मिक कार्य करना चाहिए. पूर्णा तिथि के स्वामी गुरु ग्रह होते हैं. नाग पंचमी, विजयादशमी, गुरु पूर्णिमा, शरद पूर्णिमा और कार्तिक पूर्णिमा इस तिथि में आती हैं.

कौन सी तिथियों को सबसे शुभ माना जाता है?

ज्योतिष शास्त्र में कुछ तिथियों को सबसे ज्यादा शुभ माना जाता है. जैसे की सर्वसिद्धि और अबूझ मुहूर्त. इन तिथियों पर पूरे दिन शुभ मुहूर्त रहता है.

  • अक्षय तृतीया- इस दिन शुरू किया गया कार्य आपको अक्षय फल प्रदान करता है.
  • वसंत पंचमी- शिक्षा, विद्या और कला से जुड़े कार्यों का प्रारंभ इस दिन करना अत्यंत शुभ होता है.
  • विजयदशमी- इस तिथि पर नए कार्यों की शुरुआत के साथ-साथ ऐसे कानूनी मामलों की शुरुआत कर सकते हैं, जिसमे विजय प्राप्त करनी हो.
  • देवउठनी एकादशी- चातुर्मास के बाद भगवान विष्णु निद्रा अवस्था से जागृत होते हैं और उसके बाद से विवाह जैसे मंगल कार्यों की शुरुआत होती है.

परंपरागत मान्यता है कि इन सभी तिथियों में कोई विशेष मुहूर्त नहीं देखा जाता है. हां, मगर व्यक्तिगत कुंडली से शुभ समय का आंकलन हो सकता है.

किन तिथियों में मांगलिक कार्य नहीं किए जाते?

हिंदू पंचांग में कुछ तिथियों पर मांगलिक कार्य बिल्कुल नहीं होते हैं जैसे चतुर्थी, नवमी और चतुर्दशी तिथि. इसके अलावा, अमावस्या पर भी मांगलिक कार्य नहीं होते हैं. भद्र काल के प्रभाव वाली तिथियों में शुभ काम नहीं होते हैं. इसके अलावा, ग्रहण काल की अवधि में भी शुभ कार्यों से बचने की परंपरा है.

विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन के लिए कौन-सी तिथियां शुभ होती हैं?

  • द्वितीया
  • तृतीया
  • पंचमी
  • सप्तमी
  • दशमी
  • एकादशी
  • त्रयोदशी

नक्षत्र क्या होता है?

ज्योतिष में नक्षत्र को पूरे आकाश मंडल से जोड़ा जाता है. आकाश में स्थित तारों के उस समूह या तारामंडल को नक्षत्र कहते हैं, जिनके बीच से होकर चंद्रमा गुजरता है. ज्योतिष में मुख्यत: 27 नक्षत्र होते हैं. मगर इसमें एक अतिरिक्त 28वां अभिजीत नक्षत्र भी शामिल होता है. यह नक्षत्र छिपा हुआ माना जाता है इसलिए, इसे मानक नक्षत्रों में नहीं गिना जाता है.

hindu panchang tithi Photograph: (Gemini)

विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन संस्कार के लिए शुभ नक्षत्र कौन से हैं?

रोहिणी, मृगशिरा, महा, उत्तराफालगुनी, हस्त, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा,  उत्तराभाद्रपद और रेवती. इन नक्षत्रों में सभी कार्य किए जा सकते हैं.

अमावस्या और पूर्णिमा तिथि का क्या महत्व होता है?

अमावस्या का महत्व- अमावस्या के दिन चंद्रमा दिखाई नहीं देते हैं. इस दिन पितरों का तर्पण, दान, ध्यान-साधना के साथ तीर्थ स्नान कर सकते हैं. अमावस्या को आध्यात्मिक ऊर्जा और आत्मचिंतन का दिन कहा जाता है. 

पूर्णिमा का महत्व- पूर्णिमा तिथि पर चंद्रमा पूर्ण रूप से दिखाई देता है. इस दिन सत्यनारायण की पूजा, व्रत, दान-पुण्य और कथा करवा सकते हैं. मान्यता है कि इस तिथि को सकरात्मकता के साथ मानसिक शांति का प्रतीक भी माना जाता है.

क्या कोई तिथि पूरी तरह शुभ या अशुभ होती है?

ज्योतिष शास्त्र की मानें तो पंचांग में कोई भी एक तिथि पूरी तरह अशुभ नहीं होती है. किसी तिथि का विशलेषण सिर्फ तिथि के आधार पर नहीं होता है. इसके साथ-साथ नक्षत्र, करण, वार और योग भी देखा जाता है. उदाहरण के लिए, पंचमी, दशमी या एकादशी जैसी तिथियां सामान्यतः शुभ होती हैं लेकिन यदि उस दिन अशुभ नक्षत्र, भद्रा काल, राहुकाल या प्रतिकूल ग्रह स्थिति हो, तो मांगलिक कार्यों को टालने की सलाह दी जा सकती है.

ये भी पढ़ें- Aaj Ka Rashifal 10 June 2026: बुधवार को उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र का रहेगा प्रभाव, चंद्रमा मीन राशि में होंगे, पढ़ें मेष से मीन के लिए आज का राशिफल

Continue reading on the app

  Sports

24 घंटे के भीतर हार्दिक पंड्या टीम से बाहर, टेंशन में शुभमन गिल, अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज से पहले झटका

India vs Afghanistan ODI: अफगानिस्तान के खिलाफ तीन वनडे मैचों की सीरीज से पहले टीम इंडिया को बड़ा झटका लगा है. फिट होकर टीम में वापसी के लिए तैयार हार्दिक पंड्या को अचाकन पैर में मोच आ गया, जिसके कारण अब वह वनडे सीरीज में नहीं खेलेंगे. हार्दिक की लगभग एक साल बाद वनडे टीम में वापसी हो रही थी. Wed, 10 Jun 2026 11:03:01 +0530

  Videos
See all

News Ki Pathshala | Bengal Border LIVE | बंगाल बॉर्डर से आई बड़ी खबर | Bangladesh Border | Suvendu #tmktech #vivo #v29pro
2026-06-10T08:34:41+00:00

Breaking News: Giorgia Meloni ने PM Modi को दी बधाई | 12 Years of Modi Government | Jawaharlal Nehru #tmktech #vivo #v29pro
2026-06-10T08:32:33+00:00

Breaking News | UP Muzaffarnagar में कांवड़ रूट पर भारी बवाल! Hotel के नाम पर भिड़े हिंदू संगठन! #tmktech #vivo #v29pro
2026-06-10T08:34:54+00:00

Saayoni Ghosh LIVE: ममता को बड़ा झटका! | Mamata | TMC Crisis | Breaking News | Hindi News #tmktech #vivo #v29pro
2026-06-10T08:39:13+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers