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अपाचे पर हमले का अमेरिका ने लिया बदला, Iran के एयर डिफेंस को किया तबाह!

9 जून की रात जब पूरी दुनिया सो रही थी, तभी खाड़ी के देशों में आसमान आग उगल रहा था। अमेरिकी राष्ट्रपति के एक आदेश ने मिडिल ईस्ट की पूरी तस्वीर बदल कर रख दी। अमेरिका ने सीधे ईरान के सैन्य ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक की है और यह हमला इतना सटीक और इतना घातक था कि ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम ताश की पत्तों की तरह ढह गए। लेकिन आखिर अमेरिका ने यह कदम क्यों उठाया? दरअसल अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की कि उनकी सेनाओं ने ईरान के खिलाफ सेल्फ डिफेंस स्ट्राइक पूरी कर ली है। यह कोई मामूली झड़प नहीं थी। 

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अमेरिकी वायुसेना और नौसेना के सबसे आधुनिक फाइटर जेट्स ने ईरान के उन ठिकानों को निशाना बनाया जो सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण थे। अब निशाने पर क्या था यह जान लीजिए। दरअसल सबसे पहला था एयर डिफेंस साइट्स ताकि ईरानी जवाबी हमला ना कर सके। इसके अलावा ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन जहां से ड्रोन और मिसाइलें ऑपरेट की जाती है। इसके अलावा सर्िलांस रडार स्टेट ऑफ हॉर्मोज के पास स्थित वो रडार जो हर समुद्री हलचल पर नजर रखते थे। अब इस भीषण हमले के पीछे की कहानी शुरू होती है 8 जून से। उस दिन अमेरिकी सेना का एक अपाचे हेलीकॉप्टर मार गिराया गया था। 

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अमेरिका का दावा था कि इसके पीछे ईरान समर्थित ताकतों या खुद ईरान का हाथ था। अमेरिका में एक नियम बहुत साफ है। अगर आप किसी अमेरिकी सैनिक या संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हैं तो उसका अंजाम बुरा होगा और राष्ट्रपति ट्रंप ने तुरंत जवाबी कार्रवाई के आदेश दिए और अगले ही दिन ईरान को इसकी कीमत चुकानी पड़ी। ईरान पर यह हमले स्टेट ऑफ हॉर्मुज के पास किए गए हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि यह जगह क्यों? देखिए दुनिया का करीब 20 से 30% कच्चा तेल इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है।

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ईरान अक्सर इस रास्ते को बंद करने की धमकी देता रहता है। अमेरिका का कहना है कि ईरान अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों पर हमले कर रहा है और वैश्विक अर्थव्यवस्था को खतरे में डाल रहा है। और यह हमला ईरान को एक कड़ा संदेश है कि समुद्र पर उसकी दादागिरी नहीं चलेगी। पेंटागन ने इसे एक प्रपोशनल रिस्पांस यानी आुपातिक प्रतिक्रिया कहा है। इसका मतलब है जितना नुकसान अमेरिका का हुआ उतना ही सटीक जवाब उन्होंने दिया। पिछले कुछ महीनों में मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन हमले बढ़ रहे हैं। लाल सागर से लेकर ओमान की खाड़ी तनाव चरम पर है। अमेरिका का कहना है कि वह युद्ध नहीं चाहते हैं। लेकिन अगर उनकी सुरक्षा पर आंच आई तो वह चुप नहीं बैठेंगे। 

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नेतन्याहू से हर कोई काट रहा कन्नी, ट्रंप के बाद अब इन देशों ने छोड़ा साथ?

ईरान को पूरी तरह से कुचलने या फिर वहां सत्ता परिवर्तन करने की बेंजामिन नेतन्याहू की जो ज़िद है, वह अब खुद इजराइल की सुरक्षा और उसकी कूटनीतिक साख के लिए सबसे बड़ा जोखिम बन गई है। खाड़ी देशों से लेकर उसके सबसे बड़े मददगार अमेरिका तक हर कोई अब इजराइल के इस आक्रामक रवैया से तंग आकर दूरी बनाता दिख रहा है। हालिया घटनाक्रमों ने यह साफ कर दिया है कि मध्यपूर्व की राजनीति में इज़राइल इस समय अपने इतिहास के सबसे गंभीर राजनीतिक संकट से गुजर रहा है। इस कूटनीतिक संकट की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने नेतन्याहू से फोन पर तीखी बहस के दौरान कहा कि आप मेरी वजह से अब तक जेल में नहीं गए। आप मेरी शांति योजना में दखल देकर उसे बिगाड़ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक ट्रंप ने फोन पर नेतन्या को साफ लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि संभल जाओ नहीं तो बहुत जल्दी तुम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिल्कुल अकेले पड़ जाओगे। 

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ट्रंप ने साफ कर दिया कि वाशिंगटन और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक शांति समझौता होने जा रहा है और वे इजराइल की ज़िद के कारण इस पूरी प्रक्रिया को पटरी से उतरने नहीं देंगे। ट्रंप ने कड़े लहजे में कहा कि वैश्विक नीतियां अमेरिका तय करता है इजराइल नहीं। नेतन्याहू सरकार की ईरान नीति का सबसे बड़ा नुकसान इजराइल को खाड़ी देशों के मोर्चे पर हुआ है। साल 2020 में जिस अब्राहम अकॉर्ड के जरिए यूएई और बहरीन ने इजराइल के साथ ऐतिहासिक दोस्ती की शुरुआत की थी, वह अब टूट की कगार पर है। लगातार बढ़ते तनाव और क्षेत्रीय युद्ध के खतरे को देखते हुए यूएई और बहरीन ने खुद को इजराइल के सैन्य आक्रामक रुख से पूरी तरह से दूर कर लिया है। हाल ही में इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय ने दावा किया था कि युद्ध के बीच पीएम नित नेतन्याहू ने यूएई का सीक्रेट दौरा किया और वहां के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहान से मुलाकात की है। लेकिन यूएई के विदेश मंत्रालय ने चंद घंटों के भीतर इस दावे का बेहद कड़े लहजे में आधिकारिक खंडन कर दिया। यूएई ने स्पष्ट किया कि वह इजराइल के साथ किसी भी तरह के गुप्त सैन्य या फिर सुरक्षा समझौते का हिस्सा नहीं है। जानकारों के मुताबिक ईरान की सीधी सैन्य धमकियों और मुस्लिम जगत में अपनी छवि खराब होने के डर से खाड़ी देश अब इजराइल से कड़ा पल्ला झाड़ रहे हैं। दूसरी ओर बहरीन भी गजा और लेबनान में चल रही इजराइली सैन्य कारवाइयों के कारण असहज महसूस कर रहा है और उसने भी आपत्तियां दर्ज करवाई हैं। 

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साल 2023 में गजा में सैनिक कार्रवाई शुरू करने के बाद से ही बहरीन ने अपने राजनिक को इजराइल से वापस बुला लिया था। क्यों उल्टा पड़ा नेतन्याहू का राजनीतिक दांव? बेंजामिन नेतन्याहू का पूरा राजनीतिक करियर और उनकी घरेलू साख इस बात पर टिकी थी कि वे इजराइल को अभैद्य सुरक्षा देंगे और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को हमेशा के लिए नेस्तनाबूद कर देंगे। लेकिन उनकी ज़िद अब उन्हीं पर भारी पड़ रही है। ट्रंप जहां जल्द से जल्द इस युद्ध को खत्म कर वैश्विक तेल की कीमतों को स्थिर करना चाहते हैं, वहीं नेतनया अपने ऊपर चल रहे भ्रष्टाचार के मामलों और घरेलू राजनीतिक दबाव के कारण युद्ध को खींचना चाहते हैं। गाजा, लेबनान और अब ईरान के साथ त्रिकोणीय मोर्चे पर लड़ते-लड़ते इजराइली सेना और वहां की अर्थव्यवस्था बुरी तरह से चरमरा गई है। इजराइल के अपने रक्षा विशेषज्ञ मान रहे हैं कि नेतन्याहू की ज़िद ने देश को दुनिया की नजरों में एक परिया स्टेट यानी कि अलग-थलग देश बनाकर खड़ा कर दिया है। डॉनल्ड ट्रंप के बाहरी आर्थिक और कूटनीतिक दबाव के बाद फिलहाल इजराइल और ईरान दोनों ने ही अपने हमलों को रोकने के संकेत दिए हैं। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक दौर में युद्ध केवल सैन्य ताकत से नहीं बल्कि कूटनीति से जीते जाते हैं। अमेरिका जैसी महाशक्ति के पीछे हटने और अरब देशों की बेरुखी के बाद इजराइल को अब यह समझ आ गया है कि ईरान को पूरी तरह से मिटाने की उसकी ज़िद खुद उसके अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुकी है। 

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  Sports

Ben Stokes controversy: बेन स्टोक्स के खिलाफ कार्रवाई तय, कप्तानी जाएगी या लेंगे संन्यास? इंग्लैंड क्रिकेट में भूचाल

Ben Stokes controversy: इंग्लैंड क्रिकेट टीम के टेस्ट कप्तान बेन स्टोक्स को लेकर बड़ी खबर सामने आई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्टोक्स बुधवार को अपने करीबी सलाहकार से मुलाकात कर अपने क्रिकेट भविष्य पर कोई फैसला ले सकते। इस बीच उनके संभावित संन्यास की अटकलों ने इंग्लैंड क्रिकेट में हलचल मचा दी।

रिपोर्ट के अनुसार इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड ने स्टोक्स को सोचने और फैसला लेने के लिए पूरा समय दिया है। बोर्ड नहीं चाहता कि इंग्लैंड का सबसे बड़ा मैच विनर जल्दबाजी में इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कह दे।

बेन स्टोक्स क्या लेंगे संन्यास?
दरअसल, न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले टेस्ट के बाद स्टोक्स और तेज गेंदबाज गस एटकिंसन एक विवाद में फंस गए थे। ईएसपीएन की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों खिलाड़ियों पर टीम प्रोटोकॉल तोड़ने और एक नाइट क्लब में रग्बी खिलाड़ी टोतोआ औवा के साथ कथित विवाद में शामिल होने के आरोप हैं। बताया जा रहा है कि इस घटना के दौरान इंग्लैंड टीम के एक सुरक्षा अधिकारी को भी चोट लगी थी और उन्हें टांके लगवाने पड़े थे। मामले की जांच ईसीबी और क्रिकेट रेगुलेटर दोनों कर रहे।

रग्बी खिलाड़ी से हुआ था विवाद
इस विवाद के बाद इंग्लैंड टीम के अनुशासन और टीम प्रबंधन पर भी सवाल उठने लगे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्टोक्स और एटकिंसन के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकता। इसमें जुर्माना या निलंबन जैसी सजा भी शामिल हो सकती।

ईसीबी ने बुलाई इमरजेंसी बैठक
इसी बीच खबर है कि ईसीबी ने मंगलवार को एक आपातकालीन बैठक भी बुलाई थी। बोर्ड के भीतर इस बात को लेकर चिंता जताई गई थी कि स्टोक्स नाराज होकर अचानक अपने भविष्य का ऐलान कर सकते हैं। कुछ रिपोर्ट्स में तो यह भी दावा किया गया है कि वह सोशल मीडिया के जरिए अपना फैसला सार्वजनिक कर सकते हैं।

स्टोक्स का 2027 तक है अनुबंध
हालांकि फिलहाल संन्यास को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, 35 साल के स्टोक्स अपने पुराने सलाहकार और पूर्व इंग्लैंड बल्लेबाज नील फेयरब्रदर से मुलाकात करेंगे। इस बैठक में वह तय करेंगे कि कप्तानी जारी रखनी है, छोड़नी है या फिर क्रिकेट से कुछ समय का ब्रेक लेना है। स्टोक्स के पास 2027 तक का केंद्रीय अनुबंध है, जो अगले एशेज सीरीज तक चलता है। ऐसे में वह यह भी सोच रहे हैं कि क्या वह इस अनुबंध की अवधि तक खेलना जारी रखेंगे।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि स्टोक्स इस पूरे विवाद को लेकर पछता रहे। लेकिन साथ ही वह इस बात से भी खुश नहीं हैं कि ईसीबी ने इस मामले को कैसे संभाला। हालांकि उन्होंने अपनी भूमिका को लेकर जिम्मेदारी स्वीकार की है।

उधर, इंग्लैंड को 17 जून से द ओवल में न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरा टेस्ट खेलना है। ईसीबी सप्ताह के अंत तक टीम की घोषणा कर सकता है, चाहे स्टोक्स अपने भविष्य पर कोई भी फैसला लें। फिलहाल इंग्लैंड क्रिकेट की नजरें स्टोक्स की अगली बैठक और उनके फैसले पर टिकी हुई हैं, क्योंकि उनका निर्णय टीम के भविष्य पर बड़ा असर डाल सकता है।

Wed, 10 Jun 2026 12:18:33 +0530

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