Emergency Fund: अचानक आने वाले खर्चों से बचाने वाला आपका वित्तीय सुरक्षा कवच
अचानक आए बड़े खर्चों की वजह से आर्थिक स्थिति खराब हो गई है, जिससे आपको अब लगता है कि अगर आपने Emergency Fund जमा किया होता, तो यह समस्या नहीं आती. ऐसे में, अगर आप अब बचत करने के बारे में सोच रहे हैं, तो आप अभी से अपने लिए इमरजेंसी फंड तैयार कर सकते हैं. इमरजेंसी फंड अचानक आने वाले खर्चों के लिए अलग रखा जाता है.
इमरजेंसी फंड क्या होता है?
इस फंड का इस्तेमाल परिवार में अचानक बीमारी या नौकरी छूटने जैसी स्थितियों में किया जाता है. इसका मकसद अचानक आए संकटों से निपटना है. इमरजेंसी फंड का इस्तेमाल गैर-जरूरी खर्चों के लिए नहीं किया जाना चाहिए. एक बार फंड का इस्तेमाल हो जाने के बाद, इसे आपकी आर्थिक स्थिति और लक्ष्यों के आधार पर फिर से भर लेना चाहिए.
Emergency Fund कैसे काम करते हैं
इमरजेंसी फंड से अचानक नौकरी छूटने, मेडिकल इमरजेंसी के खर्च, घर की मरम्मत या दूसरे आर्थिक संकट जैसी स्थितियों को संभालने में मददगार हो सकते हैं. ऐसे अचानक होने वाले खर्च आपकी आर्थिक स्थिति पर भारी पड़ सकते हैं इसलिए इमरजेंसी फंड बनाना जरूरी है. अचानक आने वाली मुश्किलों से तनाव हो सकता है और आपकी बचत पर असर पड़ सकता है. साथ ही ऐसी स्थितियों में कर्ज भी बढ़ सकता है. एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि तीन से छह महीने के खर्च के बराबर एक इमरजेंसी फंड बनाकर रखना चाहिए.
अपना इमरजेंसी फंड कैसे बनाएँ
किसी भी तरह का फंड बनाने के लिए समय और अनुशासन की जरूरत होती है जैसे अगर आप कार खरीदना चाहते हैं, तो आपको अपनी सैलरी, बिज़नेस आदि से पैसे बचाने शुरू करने होंगे. अगर बचत में बहुत ज्यादा समय लग रहा है तो आपको फालतू खर्चों जैसे बाहर खाना-पीना, मनोरंजन और सब्सक्रिप्शन सर्विस में कटौती करनी चाहिए. वहीं, अगर आप अपने इमरजेंसी फंड से पैसे निकालते हैं तो आपको यह पक्का करना चाहिए कि आप उसे दोबारा भर लें.
अपना Emergency Fund कैसे रखें
- आपको अपना इमरजेंसी फंड ऐसे अकाउंट में रखना चाहिए जिसमें आसानी से पैसे जमा किए जा सकें और निकाले जा सकें जैसे कि लिक्विड अकाउंट! इससे यह पक्का होता है कि आप बिना किसी परेशानी, फीस या पेनल्टी के अपने पैसे का इस्तेमाल कर सकें.
- हाई-यील्ड सेविंग्स अकाउंट में प्रोवाइडर से मिलने वाले ब्याज की वजह से समय के साथ आपका बैलेंस बढ़ता रहता है.
- मनी मार्केट अकाउंट में चेकिंग और सेविंग्स अकाउंट दोनों के फायदे मिलते हैं.
Wipro के शेयर में 2 दिन में 11% की गिरावट, बायबैक रिकॉर्ड डेट के बाद टूटा स्टॉक
Wipro Shares: विप्रो के शेयर पिछले 2 ट्रेडिंग सेशन में 11% से ज्यादा टूट गए हैं. कंपनी के ₹15,000 करोड़ के शेयर बायबैक प्रोग्राम की रिकॉर्ड डेट गुजरने के बाद स्टॉक पर जबरदस्त दबाव देखने को मिला है. कंपनी ने बायबैक के लिए 5 जून को रिकॉर्ड डेट तय की थी. शुक्रवार को विप्रो का शेयर 2.91% गिरकर बंद हुआ और सोमवार को गिरावट की ओर बढ़ते हुए NSE पर 8.45 फीसदी की बड़ी गिरावट के साथ ₹181.60 प्रति शेयर पर बंद हुआ.
गिरावट की असली वजह क्या है?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह तेज गिरावट कंपनी के बिजनेस फंडामेंटल्स में किसी कमजोरी की वजह से नहीं, बल्कि बायबैक रिकॉर्ड डेट के बाद होने वाले प्राइस एडजस्टमेंट का नतीजा है. Share.Market by PhonePe के क्वांट रिसर्चर निश्र्चल जैन ने मनीकंट्रोल को बताया कि यह गिरावट मुख्य रूप से उन शॉर्ट टर्म इंवेस्टर्स के पोजिशन से बाहर निकलने की वजह से आई जो कंपनी के ₹250 प्रति शेयर के बायबैक ऑफर के लिए एलिजिबल हो चुके थे. जैन ने कहा कि 2 लगातार ट्रेडिंग सेशन में विप्रो में आई 11% की गिरावट एक स्ट्रक्चरल प्राइस एडजस्टमेंट है, न कि किसी बड़े फंडामेंटल ब्रेकडाउन का संकेत. 5 जून की रिकॉर्ड डेट के बाद शेयर ने अपना कॉर्पोरेट एक्शन प्रीमियम गंवा दिया और करीब ₹204 से फिसलकर ₹183-184 के जोन में आ गया.
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कहां है सपोर्ट और रेजिस्टेंस?
निश्र्चल जैन के मुताबिक, अब शेयर ₹180 से ₹184 के एक अहम सपोर्ट जोन में आ गया है, जहां रिकॉर्ड इंस्टीट्यूशनल खरीदारी देखी गई है. उन्होंने बताया कि किसी भी रिकवरी को शुरुआत में ₹195 पर और उसके बाद ₹200-205 के रेंज में मजबूत रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ सकता है. जैन ने यह भी कहा कि ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव और निफ्टी IT इंडेक्स में प्रॉफिट बुकिंग ने भी हालिया वोलैटिलिटी में योगदान दिया होगा. हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि सर्विस नाउ के साथ विप्रो की एक्सपेंडेड एंटरप्राइज AI पार्टनरशिप और Aggne Global में 80 फीसदी हिस्सेदारी का अधिग्रहण कंपनी के लॉन्ग टर्म ग्रोथ आउटलुक को मजबूती देते हैं. लंबी अवधि के निवेशकों के लिए जैन का कहना है कि हालिया करेक्शन ने रिस्क लेवल को कम किया है, बशर्ते शेयर वीकली क्लोजिंग बेसिस पर ₹180 के ऊपर टिका रहे.
टेक्निकल एनालिसिस क्या कह रही है?
बोनांजा के सीनियर टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट विराट जगद का कहना है कि विप्रो फिलहाल ₹176-180 के एक अहम लॉन्ग टर्म सपोर्ट जोन के करीब ट्रेड कर रहा है, जो ऐतिहासिक रूप से एक मजबूत डिमांड एरिया रहा है. उन्होंने बताया कि शेयर अपने 20 और 50 महीने के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) से नीचे है, जो मीडियम टर्म ट्रेंड की कमजोरी को दर्शाता है. साथ ही RSI भी लोअर रेंज में है, जो सुस्त मोमेंटम का संकेत देता है.
शॉर्ट टर्म इंवेस्टर्स क्या करें?
जगद ने आगाह किया कि अगर शेयर ₹176 के नीचे टूटा तो यह नई बिकवाली को ट्रिगर कर सकता है और स्टॉक ₹160 और फिर ₹145 के स्तर तक खिंच सकता है. ऊपर की तरफ किसी भी रिबाउंड को ₹205-210 के रेंज में रेजिस्टेंस मिल सकता है, उसके बाद ₹230 पर अगली बाधा है. उन्होंने ट्रेडर्स को ₹176 के सपोर्ट लेवल पर करीबी नजर रखने की सलाह दी और कहा कि इसका टूटना आने वाले महीनों में और दबाव ला सकता है. शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स के लिए ₹176 का लेवल बेहद महत्वपूर्ण है, जबकि लॉन्ग टर्म निवेशक ₹180 के ऊपर वीकली क्लोजिंग को एंट्री के लिए एक पॉजिटिव संकेत मान सकते हैं.
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डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में निवेश विशेषज्ञों के विचार उनके अपने हैं. शेयर बाजार में निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन है. किसी भी शेयर में पैसा लगाने से पहले अपने सर्टिफाइड फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह जरूर लें.
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