‘कॉकटेल 2’ का धमाकेदार ट्रेलर रिलीज, शाहिद कपूर-कृति सेनन और रश्मिका मंदाना की तिकड़ी ने मचाया धमाल
Cocktail 2 Official Trailer: रोमांस, दोस्ती, दिल टूटने का दर्द और जिंदगी की उलझनों को खूबसूरत अंदाज में पर्दे पर उतारने वाली फिल्म ‘कॉकटेल’ आज भी दर्शकों की पसंदीदा फिल्मों में गिनी जाती है. वहीं अब करीब एक दशक बाद दर्शकों को उसी दुनिया में वापस ले जाने के लिए ‘कॉकटेल 2’ तैयार है. फिल्म का मच अवेटेड ट्रेलर रिलीज कर दिया गया है और रिलीज के साथ ही ये सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है.
मैडॉक फिल्म्स द्वारा जारी किए गए ट्रेलर में शानदार लोकेशंस, दिल छू लेने वाले इमोशंस, रिश्तों की जटिलताएं और युवा पीढ़ी की बदलती सोच को बेहद आकर्षक अंदाज में दिखाया गया है. ट्रेलर देखकर साफ है कि ये सिर्फ एक रोमांटिक फिल्म नहीं बल्कि दोस्ती, प्यार, उम्मीदों और रिश्तों के उतार-चढ़ाव की कहानी है, जो आज की पीढ़ी से सीधे जुड़ती नजर आती है.
रोमांस, दोस्ती और इमोशंस का शानदार मिश्रण
फिल्म में शाहिद कपूर, कृति सेनन और रश्मिका मंदाना पहली बार एक साथ स्क्रीन शेयर करते नजर आएंगे. ट्रेलर में तीनों कलाकारों के बीच की केमिस्ट्री दर्शकों का ध्यान खींच रही है. कहानी में प्यार और दोस्ती के बीच फंसे रिश्तों को दिखाया गया है, जहां हर किरदार अपनी भावनाओं और फैसलों से जूझता नजर आता है. ट्रेलर में जहां एक तरफ हल्के-फुल्के कॉमिक मोमेंट्स और दोस्ती की गर्माहट दिखाई देती है, वहीं दूसरी तरफ भावनात्मक संघर्ष और दिल टूटने का दर्द भी नजर आता है. यही संतुलन फिल्म को एक मॉडर्न रोमांटिक ड्रामा का रूप देता है.
प्रीतम का म्यूजिक बना फिल्म की सबसे बड़ी ताकत
फिल्म के ट्रेलर के साथ-साथ इसके गानों की भी काफी चर्चा हो रही है. मशहूर सिंगर प्रीतम का म्यूजिक पहले ही दर्शकों के बीच लोकप्रिय हो चुका है. ट्रेलर में सुनाई देने वाले गाने फिल्म के मूड को और भी खास बना देते हैं. रोमांटिक धुनों से लेकर पार्टी ट्रैक्स तक, फिल्म का म्यूजिक एल्बम युवाओं को खास तौर पर आकर्षित करता दिखाई दे रहा है. कई सोशल मीडिया यूजर्स का मानना है कि फिल्म के गाने रिलीज से पहले ही हिट होने की राह पर हैं.
'यह फिल्म समर की फीलिंग जैसी है'
फिल्म के ट्रेलर लॉन्च के दौरान शाहिद कपूर ने कहा कि ‘कॉकटेल 2’ सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि एक एहसास है. उन्होंने कहा, “कॉकटेल 2 बिल्कुल वैसी है जैसी गर्मियों की छुट्टियां महसूस होती हैं. इसमें थोड़ा पागलपन है, बहुत सारे इमोशंस हैं, रोमांस है, ह्यूमर है और एक ऐसी कहानी है जो दिल को छू जाती है. यह दोस्तों के साथ देखने और एन्जॉय करने वाली फिल्म है. हमने शूटिंग के दौरान खूब मस्ती की और वही एनर्जी ट्रेलर में भी दिखाई देती है.” शाहिद का मानना है कि दर्शक फिल्म के किरदारों और उनकी जर्नी से खुद को जोड़ पाएंगे.
कृति सेनन ने बताया क्यों है फिल्म खास
कृति सेनन का कहना है कि फिल्म की सबसे बड़ी खूबी इसकी आधुनिक और रिलेटेबल कहानी है. उन्होंने कहा, “मुझे कॉकटेल 2 की सबसे अच्छी बात ये लगती है कि यह बेहद स्टाइलिश और फ्रेश होने के साथ-साथ बहुत रियल भी है. इसमें दिखाए गए रिश्ते परफेक्ट नहीं हैं, बल्कि बिल्कुल वैसे हैं जैसे वास्तविक जिंदगी में होते हैं. वो कभी खूबसूरत होते हैं, कभी उलझे हुए और कभी भावनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण. यही बात इसे खास बनाती है.” कृति ने फिल्म के म्यूजिक की भी जमकर तारीफ की और कहा कि म्यूजिक पूरी फिल्म को एक अलग ही स्तर पर ले जाता है.
रश्मिका मंदाना ने फिल्म को बताया इमोशंस का खूबसूरत सफर
रश्मिका मंदाना ने कहा कि ये फिल्म प्यार, दोस्ती और जिंदगी के विभिन्न रंगों का उत्सव है. उन्होंने कहा, “मेरे लिए कॉकटेल 2 भावनाओं का एक खूबसूरत मिश्रण है. ट्रेलर में दिया, एली और कुणाल के बीच की दोस्ती, प्यार और फन को बहुत अच्छे तरीके से दिखाया गया है. यह ऐसी फिल्म है जिसे दोस्तों, पार्टनर या परिवार के साथ बैठकर बड़े पर्दे पर एन्जॉय किया जा सकता है.” रश्मिका ने उम्मीद जताई कि दर्शक फिल्म से भावनात्मक रूप से जुड़ेंगे.
'आज की पीढ़ी सच्चे रिश्तों की तलाश में है'
फिल्म के निर्माता दिनेश विजान ने कहा कि मैडॉक फिल्म्स हमेशा से ऐसी कहानियां लेकर आता रहा है जो दर्शकों से भावनात्मक जुड़ाव स्थापित कर सकें. उन्होंने कहा, “लव रंजन के साथ काम करना हमारे लिए बेहद रोमांचक अनुभव रहा. उन्होंने एक ऐसी रोमांटिक कहानी लिखी है जो आज के दौर में बहुत प्रासंगिक है. आज की पीढ़ी सिर्फ आकर्षण नहीं बल्कि गहरे और सच्चे रिश्तों की तलाश में है. यह फिल्म उसी भावना को सेलिब्रेट करती है.”
'रिश्ते कभी आसान नहीं होते'
फिल्म के लेखक और निर्माता लव रंजन ने कहा कि रिश्तों की खूबसूरती उनकी जटिलताओं में छिपी होती है. उन्होंने कहा, “दोस्ती, प्यार, उम्मीदें और भावनात्मक संघर्ष इन सबके बीच लोग लगातार संतुलन बनाने की कोशिश करते हैं. कॉकटेल 2 इसी सफर को एक युवा, मजेदार और भावनात्मक दुनिया में एक्सप्लोर करती है.”
19 जून को सिनेमाघरों में दस्तक देगी फिल्म
मैडॉक फिल्म्स और लव फिल्म्स के बैनर तले बनी ‘कॉकटेल 2’ को दिनेश विजान, लव रंजन और अंकुर गर्ग ने प्रोड्यूस किया है. फिल्म की कहानी तरुण जैन और लव रंजन ने लिखी है, जबकि निर्देशन की कमान होमी अदजानिया ने संभाली है. रोमांस, दोस्ती, म्यूजिक और इमोशंस से भरपूर यह फिल्म 19 जून को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है. वहीं ट्रेलर को मिले शानदार रिस्पॉन्स के बाद अब दर्शकों की नजरें फिल्म की रिलीज पर टिकी हुई हैं.
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Kalawa Benefits: पीला, लाल या काला- कौन सा कलावा बांधना माना जाता है सबसे शुभ? कलाई का धागा भी खोल देगा किस्मत
Kalawa Benefits: सनातन धर्म में किसी भी धार्मिक अनुष्ठान में कलावा बांधना सबसे शुभ माना जाता है. कोई भी मांगलिक कार्य हो जैसे की पूजा-हवन या विवाह समारोह. हर कार्य में कलावा धारण करवाया जाता है. कलाई पर धागा या फिर मौली पहनना सिर्फ आस्था का सकारात्मकता का प्रतीक नहीं होता. इसे रक्षासूत्र भी माना जाता है. कलावा, मौली या पवित्र धागा. इसका हिंदू धर्म में खास महत्व होता है. शास्त्रों में भी कलावे को विभिन्न ग्रहों से जोड़कर देखा जाता है.
मौली भले ही एक पवित्र धागा हो लेकिन कुछ लोगों में हमेशा कंफ्यूजन रहती है कि हमें किस रंग का कलावा बांधना चाहिए? कलावा मुख्य रूप से 3 रंगों-लाल, पिला और काले रंग का होता है. लाल रंग की मौली आमतौर पर लोग ज्यादा पहनते हैं. चलिए इस बारे में विस्तार से जानते हैं.
कलावा क्या होता है?
हाथ में बांधा जाने वाला यह कलावा मौली या रक्षा सूत्र मानी जाती है. यह धागा सूत के धागों से बनाया जाता है. इसका संबंध त्रिदेवों से होता है. इससे पहने के पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग नियम होते हैं.
कलावा बांधने की परंपरा कब से शुरू हुई थी?
कलावा या मौली, हिंदू धर्म में खास माना जाने वाला धागा है. इसे सदियों और युगों से पहना जा रहा है. कुछ पौराणिक मान्यताओं में उल्लेख है कि वैदिक काल यानी ऋगवेद और अर्थर्ववेद के समय में कलावा बांधने की परंपरा शुरू हुई. धार्मिक मान्यता है कि कलावा बांधने की परंपरा वामन अवतार से शुरू हुई थी. कथानुसार, बताया जाता है कि राजा बलि की अमरता और रक्षा के लिए उनकी कलाई पर रक्षासूत्र बांधा गया था, जो स्वंय विष्णु जी ने बांधा था.
कलावे का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलावा सिर्फ कोई धागा नहीं होता है. यह मनुष्य को ऊर्जा, सुरक्षा और ईश्वर के आशीर्वाद का प्रतीक कहलाती है. इससे पहनने से नकारात्मक शक्तियों से बचाव होता है. किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत में इसे कलाई पर बांधा जाता है. कलावे को त्रिदेवों से संबंधित माना जाता है. इसके अलावा, कलावे को पूजा, यज्ञ और अनुष्ठान का संकल्प सूत्र भी माना जाता है.
कलावा कितने रंगों का होता है?
कलावा ज्यादातर तीन रंगो का होता है. लाल, पीला और काला. इन तीनों रंगों के कलावे का संबंध अलग-अलग ग्रहों और देवी-देवताओं से होता है. इस बारे में विस्तार से समझते हैं.
पीला रंग का कलावा किन लोगों के लिए शुभ?
पीले रंग का कलावा भगवान विष्णु और गुरु ग्रह से संबंधित होता है. इसका धार्मिक महत्व बहुत अधिक होता है. भगवान विष्णु को समर्पित मौली को धारण करने से कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होता है. देवगुरु बृहस्पति का आशीर्वाद मिलता है. विष्णु जी प्रसन्न रहते हैं. इस रंग के कलावे को विद्यार्थियों, शिक्षकों और व्यापारियों के लिए शुभ माना जाता है. इसे धारण करने के बाद ज्ञान, बुद्धि और एकाग्रता में विकास होता है. आध्यात्मिक उन्नति और मानसिक शांति पाने हेतु भी पीला कलावा बांधा जाता है. पीला कलावा मेष, सिंह, और धनु राशि के लोगों को पहनना चाहिए.
लाल रंग का कलावा किसे बांधना चाहिए?
लाल रंग का कलावा पहनने से मंगल ग्रह शांत होता है. मंगलदेव का प्रतीक होता है. अधिकांश लोग हाथ में लाल रंग का कलावा ही धारण करते हैं. इसे पहनने से मंगल स्थिर रहता है, शक्ति में वृद्धि होती है और साहस मिलता है. लाल रंग के कलावे को दुर्गा माता और हनुमान जी से भी जोड़ा जाता है. इस कलावे को सुरक्षा और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक होता है. इसे बुराई से बचने, भलाई और देवी-देवता के आशीर्वाद पाने के लिए बांधा जाता है. अगर राशिनुसार देखे तो लाल रंग का कलावा मकर और कुंभ राशि के जातकों को बिल्कुल नहीं पहनना चाहिए.
काला रंग का कलावा किनके लिए शुभ?
काले रंग का कलावा मुख्य रूप से बुरी नजर, बुरी शक्तियों और नकारात्मक ऊर्जा से बचाता है. काले जादू या टोने-टोटके से बचाव के लिए भी काला धागा बांधा जाता है. ज्योतिषीय दृष्टि से देखे तो काले रंग का कलावा शनि ग्रह के दोषों से मुक्ति हेतू भी पहना जाता है. यदि किसी की कुंडली में शनि कमजोर हो, वक्री या साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही हो तो उन्हें भी काले रंग का कलावा बांधना चाहिए. छोटे बच्चों और बुजुर्गों को भी नजर से बचाने के लिए काला धागा बांधा जाता है. मकर और कुंभ राशि वाले लोगों के लिए काले रंग का धागा शुभ माना जाता है.
कलावा किस हाथ में बांधना चाहिए?
कलावा बांधने के अपने कुछ नियम होते हैं जैसे कि पुरुषों और अविवाहित कन्याओं को अपने दाहिने हाथ यानी की राइट हैंड में कलावा बांधना चाहिए. जबकि विवाहित स्त्रियों को कलावा हमेशा बाएं यानी लेफ्ड हैंड में बंधवाना चाहिए. कलावा बांधते समय हमेशा मुट्ठी को बंद रखना चाहिए और सिर को ढकना चाहिए.
किस दिन कौन से रंग का कलावा बांधना चाहिए?
लाल कलावा बांधने के शुभ दिन- रविवार, मंगलवार और शुक्रवार
पीला कलावा बांधने के शुभ दिन- मंगलवार, बृहस्पतिवार या बुधवार
काला कलावा बांधने का दिन- शनिवार के दिन काले रंग का कलावा बांध सकते हैं.
हालांकि, किस व्यक्ति को कौन से रंग का कलावा बांधना चाहिए, इसका सही विशलेषण कुंडली से होता है. इसलिए, हमेशा किसी पंडित की सलाह से मौली पहनें.
कलावा बांधते समय कौन सा मंत्र बोलते हैं?
हालांकि, कलावा आमतौर पर ब्राह्मण ही बांधते हैं. उस समय मौली बांधते हुए वे इस मंत्र का जाप करते हैं- "येन बद्धो बलि राजा दानवेन्द्रो महाबलः।तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।". इस मंत्र का मतलब होता है कि दानवों के महापराक्रमी राजा बलि जिस रक्षा सूत्र से बांधे गए थे, उसी पवित्र धागे से मैं तुम्हें बांधता हूं. हे रक्षा सूत्र! तुम अपने स्थान से कभी विचलित न हो और सदैव इनकी रक्षा करो.
कलावा कितने दिनों तक पहनना चाहिए?
ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हाथ में कलावा सिर्फ 21 दिनों तक ही पहनना चाहिए. इसके बाद कलावा बदल देना चाहिए. दरअसल, 21 दिनों तक ही कलावे की सकारात्मकता बनी रहती है. इसलिए, पुराना कलावा उतारकर नया धारण करना चाहिए.
क्या कलावा बांधने के पीछे कोई वैज्ञानिक कारण भी है?
कलावा बांधना एक धार्मिक अनुष्ठान हो सकता है. मगर सेहत के लिए भी यह फायदेमंद होता है. शरीर विज्ञान के अनुसार, कलाई पर कलावा बांधने से शरीर की नसों में खून का प्रवाह सही से हो पाता है. इससे त्रिदोषों यानी की वात, पित्त और कफ की समस्याओं से छुटकारा मिलता है. कलावा बांधने से बीपी, हार्ट हेल्थ और शुगर की बीमारी से भी राहत मिलता है.
FAQs
क्या महिलाएं लाल कलावा पहन सकती हैं?
हां, महिलाएं लाल रंग का कलावा पहन सकती हैं.
कलावा टूट जाए तो क्या करना चाहिए?
कलावा टूटना कोई अशुभ घटना नहीं होती है. इसलिए, जब भी ऐसा हो तो टूटे हुए धागे को पवित्र नदी या पेड़ के नीचे रख दें.
बिना पूजा के कलावा पहन सकते हैं?
जी हां, बिना पूजा या पंडित की मदद के भी कलावा पहन सकते हैं.
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