Delhi Fire Tragedy: इन 5 बड़ी लापरवाहियों ने ली 20 लोगों की जान, हर जांच में सामने आती हैं यही वजहें
Hauz Rani Fire Incident: दिल्ली में आज सुबह हौजरानी के 'लेमन ग्रीन' रेस्टोरेंट में अचानक आग लग गई. आग सुबह करीब 8 बजे लगी और देखते ही देखते उसने पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया. फिलहाल मौके पर अफरा-तफरी का माहौल है, बचाव कार्य जारी है. प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से इस हादसे में दुख जताया गया है और सरकार ने मरने वालों और घायलों के लिए मुआवजे का ऐलान किया है.
यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि ये पहली बार नहीं है जब राजधानी में पहले ऐसा हादसा हुआ हो. दिल्ली के अनाज मंडी में दिसंबर 2019 में एक फैक्ट्री-कम-रिहाइशी इमारत में आग लगने से 43 से ज्यादा मजदूरों की मौत हुई थी. वे सब सोते हुए जल गए थे. यह दिल्ली के आधुनिक इतिहास की सबसे बड़ी अग्नि त्रासदियों में से एक थी. इसी तरह मुंडका में मई 2022 में पश्चिमी दिल्ली के मुंडका मेट्रो स्टेशन के पास एक इमारत में आग लगी जिसमें 27 लोगों की मौत हो गई. इमारत में फायर एग्जिट तक नहीं था. आंकड़ों पर जाएंगें तो ये लिस्ट लंबी है.
Malviya Nagar fire | We received 13 patients, including 3 patients who fell from a height and are in a critical condition, and 10 persons who were rescued by Delhi Police: AIIMS officials
— ANI (@ANI) June 3, 2026
फायर सेफ्टी नॉर्म्स की अनदेखी बनी हादसे का बड़ा कारण
पूर्व पुलिस अधिकारी बताते हैं कि हर बार आग लगती है और हर बार जांच होती है और हर बार एक ही नतीजा निकलता है लापरवाही और फायर सेफ्टी नॉर्म्स की अनदेखी. मालवीय नगर के ताजा मामले में भी प्रारंभिक जांच में पांच बड़ी वजहें सामने आई हैं. आइए आपको एक-एक इन कारणों के बारे में बताते हैं.
1. फायर एनओसी का चक्कर: दिल्ली में सैकड़ों रेस्टोरेंट और कमर्शियल बिल्डिंग बिना वैध फायर NOC के चल रहे हैं. इन रेस्टोरें में कागजों में तो सब ठीक होता है लेकिन मीन पर कोई नियम फॉलो नहीं किए जाते हैं.
2. बेसमेंट का गलत इस्तेमाल: बेसमेंट को स्टोर, किचन या रेस्टोरेंट के तौर पर इस्तेमाल करना खतरनाक है. आग लगने पर धुआं बाहर नहीं निकल पाता और लोग दम घुटकर मरते हैं.
3. एग्जिट नहीं, खिड़कियां बंद: ज्यादातर मामलों में इमारतों में या तो एक ही एग्जिट होता है या वह भी बंद होता है. आग लगने पर भागने का रास्ता नहीं मिलता.
4. ओवरलोडिंग और पुरानी वायरिंग: पुरानी इमारतों में बिजली की तारें बदली नहीं जातीं. जिससे शॉर्ट सर्किट होने के चांस बढ़ जाते हैं.
5. भ्रष्टाचार: फायर ऑडिट और इंस्पेक्शन टीमें अधिकांश मामलों में "सेटलमेंट" पर रुक जाती हैं. पुलिस, नगर निगम कर्मचारियों के भ्रष्टाचार से ऐसे मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं.
#WATCH | Delhi | On the death of 21 people in the Malviya Nagar fire, JCP-South Vijay Kumar says, "We are probing about the building owner." pic.twitter.com/hJyMkGLqCb
— ANI (@ANI) June 3, 2026
खबर अपडेट की जा रही है
12 अरब डॉलर का सोना बेचने की अफवाहों पर आया RBI का जवाब, जानें क्या है पूरी सच्चाई
RBI Gold Reserves: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार को उन खबरों का खंड किया जिनमें दावा किया गया था कि आरबीआई ने अपना सोना बेचा है. इन मीडिया रिपोर्ट्स पर रिजर्व बैंक ने साफ किया कि उसके पास मौजूद सोने के भंडार में कोई कमी नहीं आई है. साथ ही ये पूरी तरह से सुरक्षित भी है. इसके साथ ही रिजर्व बैंक ने लोगों से ऐसी सूचनाओं पर भरोसा न करने की सलाह दी है.
चलिए जानते हैं क्या है पूरा मामला?
दरअसल, आरबीआई द्वारा सोने बेचने की अफवाहें आने के बाद रिजर्व बैंक ने इसे लेकर सफाई दी. ये अफवाह ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के आने के बाद पैदा हुई. ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स के अनुमानों के हवाले से इस रिपोर्ट में दावा किया गया कि 22 मई को खत्म हुए दो हफ्तों के दौरान, भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) में गिरावट आई है. रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया कि इस गिरावट के बीच आरबीआई ने करीब 12 अरब डॉलर का सोना बेच है. इसके बाद ये खबर तेजी से सोशल मीडिया में फैल गई. जिससे लोगों के अंदर भ्रम की स्थिति पैदा हो गई.
स्वर्ण धारिता संबंधी स्पष्टीकरण
— ReserveBankOfIndia (@RBI) June 3, 2026
Clarification on gold holdingshttps://t.co/JrCUhWWEHo
RBI के पास कितना है सोना का भंडार?
इन अफवाहों के बाद रिजर्व बैंक और इंडिया ने एक प्रेस रिलीज जारी की. जिसमें साफ कहा गया कि आरबीआई द्वारा सोना बेचने की खबरें पुरी तरह से गलत और बेबुनियाद हैं. आरबीआई ने कहा कि केंद्रीय बैंक के पास कुल 880.52 मीट्रिक टन फिजिकल सोने का भंडार मौजूद है इसमें इसमें एक ग्राम की भी कमी नहीं आई है.
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 3 अप्रैल 2026 को खत्म हुए सप्ताह से लेकर अब तक भारत का स्वर्ण भंडार इसी स्तर यानी 880.52 टन पर बना हुआ है. जो मार्च के आखिरी दिनों में 880.34 टन था. अप्रैल की शुरुआत में इसमें थोड़ी सी बढ़ोतरी हुई और ये बढ़कर 880.52 टन हो गया. उसके बाद से इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है ये बिल्कुल स्थिर बना हुआ है.
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आम लोगों को आरबीआई की सलाह
इसके साथ ही रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने लोगों से अपील की है कि वे ऐसी भ्रामक और अनऑफिशियल खबरों पर बिल्कुल भरोसा न करें. बता दें कि आईबीआई ने हर महीने आने वाले अपने मंथली बुलेटिन में अपने सोने के भंडार से जुड़ी सभी प्रकार की जानकारी साझा करता है. इसके साथ ही ये जानकारी आरबीआई की आधिकारिक वेबसाइट पर भी जारी की जाती है.
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