Kalawa Benefits: पीला, लाल या काला- कौन सा कलावा बांधना माना जाता है सबसे शुभ? कलाई का धागा भी खोल देगा किस्मत
Kalawa Benefits: सनातन धर्म में किसी भी धार्मिक अनुष्ठान में कलावा बांधना सबसे शुभ माना जाता है. कोई भी मांगलिक कार्य हो जैसे की पूजा-हवन या विवाह समारोह. हर कार्य में कलावा धारण करवाया जाता है. कलाई पर धागा या फिर मौली पहनना सिर्फ आस्था का सकारात्मकता का प्रतीक नहीं होता. इसे रक्षासूत्र भी माना जाता है. कलावा, मौली या पवित्र धागा. इसका हिंदू धर्म में खास महत्व होता है. शास्त्रों में भी कलावे को विभिन्न ग्रहों से जोड़कर देखा जाता है.
मौली भले ही एक पवित्र धागा हो लेकिन कुछ लोगों में हमेशा कंफ्यूजन रहती है कि हमें किस रंग का कलावा बांधना चाहिए? कलावा मुख्य रूप से 3 रंगों-लाल, पिला और काले रंग का होता है. लाल रंग की मौली आमतौर पर लोग ज्यादा पहनते हैं. चलिए इस बारे में विस्तार से जानते हैं.
कलावा क्या होता है?
हाथ में बांधा जाने वाला यह कलावा मौली या रक्षा सूत्र मानी जाती है. यह धागा सूत के धागों से बनाया जाता है. इसका संबंध त्रिदेवों से होता है. इससे पहने के पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग नियम होते हैं.
कलावा बांधने की परंपरा कब से शुरू हुई थी?
कलावा या मौली, हिंदू धर्म में खास माना जाने वाला धागा है. इसे सदियों और युगों से पहना जा रहा है. कुछ पौराणिक मान्यताओं में उल्लेख है कि वैदिक काल यानी ऋगवेद और अर्थर्ववेद के समय में कलावा बांधने की परंपरा शुरू हुई. धार्मिक मान्यता है कि कलावा बांधने की परंपरा वामन अवतार से शुरू हुई थी. कथानुसार, बताया जाता है कि राजा बलि की अमरता और रक्षा के लिए उनकी कलाई पर रक्षासूत्र बांधा गया था, जो स्वंय विष्णु जी ने बांधा था.
कलावे का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलावा सिर्फ कोई धागा नहीं होता है. यह मनुष्य को ऊर्जा, सुरक्षा और ईश्वर के आशीर्वाद का प्रतीक कहलाती है. इससे पहनने से नकारात्मक शक्तियों से बचाव होता है. किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत में इसे कलाई पर बांधा जाता है. कलावे को त्रिदेवों से संबंधित माना जाता है. इसके अलावा, कलावे को पूजा, यज्ञ और अनुष्ठान का संकल्प सूत्र भी माना जाता है.
कलावा कितने रंगों का होता है?
कलावा ज्यादातर तीन रंगो का होता है. लाल, पीला और काला. इन तीनों रंगों के कलावे का संबंध अलग-अलग ग्रहों और देवी-देवताओं से होता है. इस बारे में विस्तार से समझते हैं.
पीला रंग का कलावा किन लोगों के लिए शुभ?
पीले रंग का कलावा भगवान विष्णु और गुरु ग्रह से संबंधित होता है. इसका धार्मिक महत्व बहुत अधिक होता है. भगवान विष्णु को समर्पित मौली को धारण करने से कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होता है. देवगुरु बृहस्पति का आशीर्वाद मिलता है. विष्णु जी प्रसन्न रहते हैं. इस रंग के कलावे को विद्यार्थियों, शिक्षकों और व्यापारियों के लिए शुभ माना जाता है. इसे धारण करने के बाद ज्ञान, बुद्धि और एकाग्रता में विकास होता है. आध्यात्मिक उन्नति और मानसिक शांति पाने हेतु भी पीला कलावा बांधा जाता है. पीला कलावा मेष, सिंह, और धनु राशि के लोगों को पहनना चाहिए.
लाल रंग का कलावा किसे बांधना चाहिए?
लाल रंग का कलावा पहनने से मंगल ग्रह शांत होता है. मंगलदेव का प्रतीक होता है. अधिकांश लोग हाथ में लाल रंग का कलावा ही धारण करते हैं. इसे पहनने से मंगल स्थिर रहता है, शक्ति में वृद्धि होती है और साहस मिलता है. लाल रंग के कलावे को दुर्गा माता और हनुमान जी से भी जोड़ा जाता है. इस कलावे को सुरक्षा और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक होता है. इसे बुराई से बचने, भलाई और देवी-देवता के आशीर्वाद पाने के लिए बांधा जाता है. अगर राशिनुसार देखे तो लाल रंग का कलावा मकर और कुंभ राशि के जातकों को बिल्कुल नहीं पहनना चाहिए.
काला रंग का कलावा किनके लिए शुभ?
काले रंग का कलावा मुख्य रूप से बुरी नजर, बुरी शक्तियों और नकारात्मक ऊर्जा से बचाता है. काले जादू या टोने-टोटके से बचाव के लिए भी काला धागा बांधा जाता है. ज्योतिषीय दृष्टि से देखे तो काले रंग का कलावा शनि ग्रह के दोषों से मुक्ति हेतू भी पहना जाता है. यदि किसी की कुंडली में शनि कमजोर हो, वक्री या साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही हो तो उन्हें भी काले रंग का कलावा बांधना चाहिए. छोटे बच्चों और बुजुर्गों को भी नजर से बचाने के लिए काला धागा बांधा जाता है. मकर और कुंभ राशि वाले लोगों के लिए काले रंग का धागा शुभ माना जाता है.
कलावा किस हाथ में बांधना चाहिए?
कलावा बांधने के अपने कुछ नियम होते हैं जैसे कि पुरुषों और अविवाहित कन्याओं को अपने दाहिने हाथ यानी की राइट हैंड में कलावा बांधना चाहिए. जबकि विवाहित स्त्रियों को कलावा हमेशा बाएं यानी लेफ्ड हैंड में बंधवाना चाहिए. कलावा बांधते समय हमेशा मुट्ठी को बंद रखना चाहिए और सिर को ढकना चाहिए.
किस दिन कौन से रंग का कलावा बांधना चाहिए?
लाल कलावा बांधने के शुभ दिन- रविवार, मंगलवार और शुक्रवार
पीला कलावा बांधने के शुभ दिन- मंगलवार, बृहस्पतिवार या बुधवार
काला कलावा बांधने का दिन- शनिवार के दिन काले रंग का कलावा बांध सकते हैं.
हालांकि, किस व्यक्ति को कौन से रंग का कलावा बांधना चाहिए, इसका सही विशलेषण कुंडली से होता है. इसलिए, हमेशा किसी पंडित की सलाह से मौली पहनें.
कलावा बांधते समय कौन सा मंत्र बोलते हैं?
हालांकि, कलावा आमतौर पर ब्राह्मण ही बांधते हैं. उस समय मौली बांधते हुए वे इस मंत्र का जाप करते हैं- "येन बद्धो बलि राजा दानवेन्द्रो महाबलः।तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।". इस मंत्र का मतलब होता है कि दानवों के महापराक्रमी राजा बलि जिस रक्षा सूत्र से बांधे गए थे, उसी पवित्र धागे से मैं तुम्हें बांधता हूं. हे रक्षा सूत्र! तुम अपने स्थान से कभी विचलित न हो और सदैव इनकी रक्षा करो.
कलावा कितने दिनों तक पहनना चाहिए?
ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हाथ में कलावा सिर्फ 21 दिनों तक ही पहनना चाहिए. इसके बाद कलावा बदल देना चाहिए. दरअसल, 21 दिनों तक ही कलावे की सकारात्मकता बनी रहती है. इसलिए, पुराना कलावा उतारकर नया धारण करना चाहिए.
क्या कलावा बांधने के पीछे कोई वैज्ञानिक कारण भी है?
कलावा बांधना एक धार्मिक अनुष्ठान हो सकता है. मगर सेहत के लिए भी यह फायदेमंद होता है. शरीर विज्ञान के अनुसार, कलाई पर कलावा बांधने से शरीर की नसों में खून का प्रवाह सही से हो पाता है. इससे त्रिदोषों यानी की वात, पित्त और कफ की समस्याओं से छुटकारा मिलता है. कलावा बांधने से बीपी, हार्ट हेल्थ और शुगर की बीमारी से भी राहत मिलता है.
FAQs
क्या महिलाएं लाल कलावा पहन सकती हैं?
हां, महिलाएं लाल रंग का कलावा पहन सकती हैं.
कलावा टूट जाए तो क्या करना चाहिए?
कलावा टूटना कोई अशुभ घटना नहीं होती है. इसलिए, जब भी ऐसा हो तो टूटे हुए धागे को पवित्र नदी या पेड़ के नीचे रख दें.
बिना पूजा के कलावा पहन सकते हैं?
जी हां, बिना पूजा या पंडित की मदद के भी कलावा पहन सकते हैं.
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दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में बुधवार सुबह लेमन ग्रीन रेस्टोरेंट में आग लग गई, जिस वजह से 20 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई. न्यूज एजेंसी एएनआई ने मृतकों की संख्या की पुष्टि की है. रेस्टोरेंट के बेसमेंट से तीन लोगों को रेस्क्यू किया गया है. तीनों लोगों की हालत गंभीर है, जिस बिल्डिंग में आग लगी है, वह 5 मंजिला है. खास बात है कि इसमें प्लोरिस स्टे होटल भी संचालित हो रहा था. मृतकों और घायलों की सूची में कई विदेशी नागरिक भी शामिल हैं.
दिल्ली के फायर सर्विस के अनुसार, सुबह 9.45 बजे आग लगने की जानकारी मिली थी. बेसमेंट से 3 लोगों को बचाया गया है. अब तक कुल 37 लोगों को बिल्डिंग से बचाया गया है. कई घायलों की हालत गंभीर है, जिस वजह से मृतकों के आंकड़े में इजाफा होने की आशंका है. फायर ब्रिगेड की 10 गाड़ियों को आग बुझानी पड़ी है.
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