माता-पिता की ये 5 गलतियां बच्चे की रीढ़ को कर सकती हैं खराब, डॉक्टर ने कहा आगे चलकर बिगड़ सकता है पोश्चर
छोटे बच्चे को ठीक तरह से बैठाया या लेटाया ना जाए तो उसकी रीढ़ खराब हो सकती है और हमेशा के लिए पोश्चर पर असर पड़ता है. ऐसे में यहां जानिए कहीं डॉक्टर की बताई गलतियां आप तो नहीं करते.
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Adhik Maas Purnima 2026: ज्येष्ठ अधिकमास की पूर्णिमा का व्रत आज, नोट कर लें स्नान-दान का शुभ मुहूर्त, विधि और महत्व
Jyeshtha Adhik Purnima 2026: आज यानी 30 मई, शनिवार को व्रत की पूर्णिमा है. ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा इस साल दो दिन होगी. आज 30 मई को सत्यनारायण व्रत और चंद्रमा की पूजा होगी. जबकि कल 31 मई को स्नान और दान की पूर्णिमा का पर्व होगा. हिंदू धर्म में प्रत्येक महीने की पूर्णिमा बेहद खास मानी जाती है. हर एक पूर्णिमा की अपनी विशेषता और महत्व है. पूर्णिमा के दिन पावन नदियों में स्नान किया जाता है. फिर दान किया जाता है. इस दिन स्नान-दान और पूजा-पाठ आदि करने से विशेष लाभ मिलता है. अधिकमास की पूर्णिमा तील साल में एक बार आती है इसलिए इसका महत्व धर्म शास्त्रों में वर्णित है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अधिकमास की पूर्णिमा पर स्नान-दान, पूजा-पाठ, जप आदि कामों से दोगुना पुण्य फल प्राप्त होता है. आइए जानते हैं आज पूजा का मुहूर्त और विधि के बारे में.
ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त (Adhik Maas Purnima Shubh Muhurat)
ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा के दिन व्रत और स्नान-दान शुभ मुहूर्त में करने से पूजा का कई गुना फल प्राप्त होता है.
ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04 बजकर 08 मिनट से 04 बजकर 56 मिनट तक.
अमृत काल- सुबह 04 बजकर 33 मिनट से सुबह 06 बजकर 20 मिनट तक.
अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11बजकर 57 मिनट से दोपहर 12 बजकर 50 बजे तक.
ज्येष्ठ पूर्णिमा स्नान-दान कब?
ज्येष्ठ पूर्णिमा का स्नान-दान कल यानी 31 मई 2026 रविवार को है. जिसका मुहूर्त सुबह 04 बजकर 03 मिनट से लेकर सुबह 04 बजकर 43 मिनट तक रहेगा.
ज्येष्ठ पूर्णिमा पूजा विधि (Adhik Maas Purnima 2026 Puja Vidhi)
ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन घर के मंदिर या पूजा स्थान को साफ करें. फिर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें. दीपक जलाएं. धूप अर्पित करें. फिर भगवान को तुलसी दल, फूल, अक्षत अर्पित करें. चंदन का तिलक लगाएं. भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें जैसे ऊं नमो भगवते वासुदेवाय. फिर चंद्रदेव को शाम के समय अर्घ्य दें. अंत में आरती करें और प्रसाद वितरित करें.
ज्येष्ठ पूर्णिमा पर इन चीजों का करें दान
ज्येष्ठ पूर्णिमा पर आप चावल, दाल, आटा, गुड़, घी, दूध और मौसमी फल जैसे आम या केला दान कर सकते हैं. इसके अलावा वस्त्र, छाता और जल से भरा मिट्टी का मटका दान करना भी बहुत शुभ माना गया है. खासकर गर्मी के मौसम में यह जरूरतमंदों के लिए बहुत उपयोगी होता है.
ज्येष्ठ पूर्णिमा का महत्व
हिंदू धर्म में अधिकमास की मान्यता बहुत अधिक होती है. इस महीने की पूर्णिमा भी खास होती है क्योंकि ये प्रति ढाई साल के अंतराल के बाद आती है. अधिक मास को मलमास या पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं. इसलिए, अधिक मास में आने के इस तिथि को अधिक पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. यह तिथि भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित होती है. स्कन्दपुराण, पद्मपुराण, नारदपुराण और भविष्यपुराण में भी इस पूर्णिमा का वर्णन मिलता है.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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